🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Ladakiyaan

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘लड़‌कियाँ’ को ममता कालिया की उन कथा-रचनाओं में रखा जा सकता है जहाँ उनकी गद्य-सामर्थ्य अपने चरम पर है। छल-छल बहते वाक्यों की चुस्ती, व्यंग्य की सूक्ष्मता, तीक्ष्ण आब्ज़र्वेशन और उसकी सटीक अभिव्यक्ति, हाथ से छुई जा सकने वाली चित्रात्मकता—शब्द की ताक़त जो आपको फ़ौरन पकड़ लेती है, और अपने साथ बहा ले जाती है। बम्बई का एक पुराना मैंशन इस कहानी की पृष्ठभूमि है। उसके एक फ़्लैट में नायिका अकेली रहती है। नौकरीपेशा है। जीवन ऑफ़िस और घर के बीच आने-जाने और विज्ञापन फ़िल्मों के लिए नए प्लॉट सोचने में गुज़र रहा है। तभी कुछ दिन के लिए उसके बॉस की एक रिश्तेदार अफ़शाँ पाकिस्तान से आती है और उसके पास ही रहने लगती है। जीवन की एकरसता भंग होती है। दीवाली पर उसका जो फ़्लैट वीरान पड़ा रहता था, अफ़शाँ के जलाए दीयों से रात-भर जगमगाता रहता है। कहानी का अन्त दोनों के बीच एक मामूली-से संदेह के उगने और फिर उसके ख़त्म होने पर होता है और इस सन्देश पर कि मुसीबत आए तो हथियार नहीं, इनसान ही काम आता है। लेकिन इसके बीच यह छोटा-सा उपन्यास बम्बई, वहाँ के जीवन, रोज़मर्रा के संघर्षों और लोगों के बारे में बहुत कुछ बता जाता है।

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Ladakiyaan This book ₹159
Mahila Lekhan Ke Sau Varsh Mamta Kaliya ₹499
Jeete Jee Allahabad Mamta Kaliya ₹299
3 books selected ₹997 ₹957

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘लड़‌कियाँ’ को ममता कालिया की उन कथा-रचनाओं में रखा जा सकता है जहाँ उनकी गद्य-सामर्थ्य अपने चरम पर है। छल-छल बहते वाक्यों की चुस्ती, व्यंग्य की सूक्ष्मता, तीक्ष्ण आब्ज़र्वेशन और उसकी सटीक अभिव्यक्ति, हाथ से छुई जा सकने वाली चित्रात्मकता—शब्द की ताक़त जो आपको फ़ौरन पकड़ लेती है, और अपने साथ बहा ले जाती है।

बम्बई का एक पुराना मैंशन इस कहानी की पृष्ठभूमि है। उसके एक फ़्लैट में नायिका अकेली रहती है। नौकरीपेशा है। जीवन ऑफ़िस और घर के बीच आने-जाने और विज्ञापन फ़िल्मों के लिए नए प्लॉट सोचने में गुज़र रहा है।

तभी कुछ दिन के लिए उसके बॉस की एक रिश्तेदार अफ़शाँ पाकिस्तान से आती है और उसके पास ही रहने लगती है। जीवन की एकरसता भंग होती है। दीवाली पर उसका जो फ़्लैट वीरान पड़ा रहता था, अफ़शाँ के जलाए दीयों से रात-भर जगमगाता रहता है।

कहानी का अन्त दोनों के बीच एक मामूली-से संदेह के उगने और फिर उसके ख़त्म होने पर होता है और इस सन्देश पर कि मुसीबत आए तो हथियार नहीं, इनसान ही काम आता है। लेकिन इसके बीच यह छोटा-सा उपन्यास बम्बई, वहाँ के जीवन, रोज़मर्रा के संघर्षों और लोगों के बारे में बहुत कुछ बता जाता है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2025
Weight
90 grams
ISBN-13
9788199170988
Pages
88
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp