Kamkaji Mahila Hostel
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Author:
Kalpana Verma, Kalpna VarmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
250
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जरूरी नहीं कि तूफान से सब कुछ अस्त-व्यस्त ही हो जाए। तूफान से रास्ता साफ भी होता है। यह सकारात्मकता मेरे भीतर उठते तूफानों से दृश्यों को साफ करने का काम करती है, शब्दों की ताकत से परिचय कराती है। शब्द घाव भी करते हैं और घाव को भरते भी हैं, क्योंकि शब्दों का अपना तापमान होता है, उनमें कूलिंग और हीटिंग का सन्तुलन बनाना लेखकीय दायित्व होता है। इसलिए जब भी मैं कहने के लिए उतावली हुई हूँ शब्दों का चयन मैंने संभल कर किया है। भावनाओं, संवेदनाओं और अनुभवों ने जो तानाबाना बुना उससे कहानी को आकार दिया है। कहानियों में ठहरे हुए पलों की कहानी है, उम्र से परे वैचारिक मित्रता है, जिन्दगी के बदलते हुए दृश्य हैं, जानने-मानने-चाहने जैसे विरोधाभास हैं। गलत दिशा में भाग रही भीड़ का हिस्सा न बनकर मैंने सही दिशा मे अकेले चलने को बेहतर माना है।
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About the Book
जरूरी नहीं कि तूफान से सब कुछ अस्त-व्यस्त ही हो जाए। तूफान से रास्ता साफ भी होता है। यह सकारात्मकता मेरे भीतर उठते तूफानों से दृश्यों को साफ करने का काम करती है, शब्दों की ताकत से परिचय कराती है। शब्द घाव भी करते हैं और घाव को भरते भी हैं, क्योंकि शब्दों का अपना तापमान होता है, उनमें कूलिंग और हीटिंग का सन्तुलन बनाना लेखकीय दायित्व होता है। इसलिए जब भी मैं कहने के लिए उतावली हुई हूँ शब्दों का चयन मैंने संभल कर किया है। भावनाओं, संवेदनाओं और अनुभवों ने जो तानाबाना बुना उससे कहानी को आकार दिया है। कहानियों में ठहरे हुए पलों की कहानी है, उम्र से परे वैचारिक मित्रता है, जिन्दगी के बदलते हुए दृश्य हैं, जानने-मानने-चाहने जैसे विरोधाभास हैं। गलत दिशा में भाग रही भीड़ का हिस्सा न बनकर मैंने सही दिशा मे अकेले चलने को बेहतर माना है।
Book Details
-
ISBN9789347043727
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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