Mera Kaha Hua

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Author:

Shariq Kaifi

Language:

Hindi

Category:

Poetry

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"मेरा कहा हुआ’ शारिक़ कैफ़ी की ग़ज़लों और नज़्मों का संपूर्ण संग्रह है, जिसमें 1978 से 2025 तक की उनकी रचनाएँ शामिल हैं। उनका शेर कहने का अपना अलग अंदाज़ है। वो जानी-पहचानी बातों को भी इस तरह शेरी पेराए में ढालते हैं कि उनका एक नया अर्थ खुलने लगता है। उनके यहाँ प्रेम, दोस्ती, बेवफ़ाई, नाराज़गी, रिश्तों का दिखावा और उनके बिखरने का दुख, सब कुछ सहज भाषा में सामने आता है। उनके शेर अक्सर अपने दूसरे मिसरे में ऐसा मोड़ लेते हैं कि पाठक ठहरकर उस बात पर फिर से सोचने लगता है। शारिक़ कैफ़ी की ख़ासियत ये है कि वे बड़े-बड़े दावों के बजाय छोटी छोटी घटनाओं और आम इंसानी अनुभवों से अपनी शाइरी की दुनिया बनाते हैं। किसी बीमार बुज़ुर्ग की शिकायत, किसी को विदा करने के बाद लौटता हुआ मुसाफ़िर, घर से अजनबी हो चुका इंसान या बदलते समय में खोती हुई पुरानी तहज़ीब—उनकी शाइरी में ये सब जीवन की गहरी सच्चाइयों के रूप में सामने आते हैं। उनके कलाम में ज़िन्दगी के रिश्तों, सामाजिक तौर-तरीक़ों और बदलते माहौल की झलक भी मिलती है। ‘मेरा कहा हुआ’ सिर्फ़ एक शाइर के लंबे रचनात्मक सफ़र का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनुभवों और भावनाओं की दुनिया है जिन्हें अक्सर बयान नहीं किया जाता। ये किताब पाठक को अपनी ज़िन्दगी, अपने रिश्तों और अपने समय को एक नई नज़र से देखने का मौक़ा देती है।"

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ISBN
9788118001287
Pages
450
Avg Reading Time
15 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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"मेरा कहा हुआ’ शारिक़ कैफ़ी की ग़ज़लों और नज़्मों का संपूर्ण संग्रह है, जिसमें 1978 से 2025 तक की उनकी रचनाएँ शामिल हैं। उनका शेर कहने का अपना अलग अंदाज़ है। वो जानी-पहचानी बातों को भी इस तरह शेरी पेराए में ढालते हैं कि उनका एक नया अर्थ खुलने लगता है। उनके यहाँ प्रेम, दोस्ती, बेवफ़ाई, नाराज़गी, रिश्तों का दिखावा और उनके बिखरने का दुख, सब कुछ सहज भाषा में सामने आता है। उनके शेर अक्सर अपने दूसरे मिसरे में ऐसा मोड़ लेते हैं कि पाठक ठहरकर उस बात पर फिर से सोचने लगता है।

शारिक़ कैफ़ी की ख़ासियत ये है कि वे बड़े-बड़े दावों के बजाय छोटी छोटी घटनाओं और आम इंसानी अनुभवों से अपनी शाइरी की दुनिया बनाते हैं। किसी बीमार बुज़ुर्ग की शिकायत, किसी को विदा करने के बाद लौटता हुआ मुसाफ़िर, घर से अजनबी हो चुका इंसान या बदलते समय में खोती हुई पुरानी तहज़ीब—उनकी शाइरी में ये सब जीवन की गहरी सच्चाइयों के रूप में सामने आते हैं। उनके कलाम में ज़िन्दगी के रिश्तों, सामाजिक तौर-तरीक़ों और बदलते माहौल की झलक भी मिलती है।

‘मेरा कहा हुआ’ सिर्फ़ एक शाइर के लंबे रचनात्मक सफ़र का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनुभवों और भावनाओं की दुनिया है जिन्हें अक्सर बयान नहीं किया जाता। ये किताब पाठक को अपनी ज़िन्दगी, अपने रिश्तों और अपने समय को एक नई नज़र से देखने का मौक़ा देती है।"

Book Details

  • ISBN
    9788118001287
  • Pages
    450
  • Avg Reading Time
    15 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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