Rangmanch Ka Jantantra

(0)

Language:

Hindi

Category:

Plays

895

716 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


रंगमंच का जनतंत्र ऐसी रचनाओं का संकलन है, जो रंगमंच की जनतांत्रिकता को गहराई से रेखांकित करती हैं। यह अतीत और वर्तमान की यायावरी है। इस यात्रा में समय, समाज, जीवन और रंगमंच के कई पहलू उद्घाटित होते हैं। इन रचनाओं का भूगोल काफ़ी विस्तृत है। यहाँ संस्कृत रंगमंच की महान परम्परा से लेकर आज के रंगमंच तक की अर्थवान छवियाँ अंकित हैं। इनमें एक ओर विदूषक और सूत्रधार जैसे रूढ़ चरित्रों तथा पूर्वरंग जैसी रंगरूढ़ियों का विश्लेषण है, तो दूसरी ओर भाषा संगीतकों के उदय, पारसी रंगमंच के अवसान, आज़ादी के बाद की रंगचेतना आदि की विवेचनात्मक पड़ताल है। समय के अन्तरंग में उतरकर अपनी रंगसम्पदा को जानने-समझने की ज़िद करती ये रचनाएँ पाठकों से आत्मीय संवाद क़ायम करती हैं। शास्त्रीयता, पारम्परिकता, महाकाव्यात्मकता, कालविद्धता और जनपक्षधरता की खोज में हृषीकेश सुलभ कई अजाने रास्तों से भी गुज़रते हैं और नए अन्तर्विरोधों की तरफ़ संकेत करते हैं। समय और समाज को अभिव्यक्त करने के लिए नई रंगभाषा, रंगदृष्टि, रंगयुक्तियों आदि की खोज करते हुए वह समकालीन रंगमंच की समस्याओं-चिन्ताओं से टकराते हैं और हमारे समय का रंगविमर्श रचते हैं। अपनी बात कहने के लिए हृषीकेश सुलभ ने रंगसिद्धान्तों, रंगव्यक्तित्वों, पुस्तकों, शैलियों, रंगप्रदर्शनों आदि विविध माध्यमों का सहारा लिया है। यह विविधता ही सही अर्थों में ‘रंगमंच का जनतंत्र’ की विशिष्टता है।

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
8 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

रंगमंच का जनतंत्र ऐसी रचनाओं का संकलन है, जो रंगमंच की जनतांत्रिकता को गहराई से रेखांकित करती हैं। यह अतीत और वर्तमान की यायावरी है। इस यात्रा में समय, समाज, जीवन और रंगमंच के कई पहलू उद्घाटित होते हैं। इन रचनाओं का भूगोल काफ़ी विस्तृत है। यहाँ संस्कृत रंगमंच की महान परम्परा से लेकर आज के रंगमंच तक की अर्थवान छवियाँ अंकित हैं। इनमें एक ओर विदूषक और सूत्रधार जैसे रूढ़ चरित्रों तथा पूर्वरंग जैसी रंगरूढ़ियों का विश्लेषण है, तो दूसरी ओर भाषा संगीतकों के उदय, पारसी रंगमंच के अवसान, आज़ादी के बाद की रंगचेतना आदि की विवेचनात्मक पड़ताल है। समय के अन्तरंग में उतरकर अपनी रंगसम्पदा को जानने-समझने की ज़िद करती ये रचनाएँ पाठकों से आत्मीय संवाद क़ायम करती हैं। शास्त्रीयता, पारम्परिकता, महाकाव्यात्मकता, कालविद्धता और जनपक्षधरता की खोज में हृषीकेश सुलभ कई अजाने रास्तों से भी गुज़रते हैं और नए अन्तर्विरोधों की तरफ़ संकेत करते हैं।

समय और समाज को अभिव्यक्त करने के लिए नई रंगभाषा, रंगदृष्टि, रंगयुक्तियों आदि की खोज करते हुए वह समकालीन रंगमंच की समस्याओं-चिन्ताओं से टकराते हैं और हमारे समय का रंगविमर्श रचते हैं। अपनी बात कहने के लिए हृषीकेश सुलभ ने रंगसिद्धान्तों, रंगव्यक्तित्वों, पुस्तकों, शैलियों, रंगप्रदर्शनों आदि विविध माध्यमों का सहारा लिया है। यह विविधता ही सही अर्थों में ‘रंगमंच का जनतंत्र’ की विशिष्टता है।

Book Details

  • ISBN
    9788126717842
  • Pages
    248
  • Avg Reading Time
    8 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp