Purvabhyas
(0)
Author:
Mohan Rakesh, Jaidev TanejaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays₹
695
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कथाकार-नाटककार मोहन राकेश के बारह आरम्भिक एकांकियों के प्रारूपों का संग्रह है ‘पूर्वाभ्यास’। इसमें संकलित एकांकी मोहन राकेश के सिद्ध नाटककार बनने के पूर्व की रचनाएँ हैं। इनमें हमें नाटककार की रचना एवं संशोधन-प्रक्रिया का पता लगने के साथ-साथ उसकी रंग एवं ध्वनि माध्यमों की गहरी समझ का प्रमाण भी मिलता है। ये एकांकी न केवल हमें एक ऐतिहासिक दौर का ही साक्षात्कार कराते हैं, अपितु स्वयं नाटककार मोहन राकेश के प्रारम्भ-बिन्दु से लेकर अन्तिम समय तक की उनकी रंग-दृष्टि, विकास-यात्रा और ‘ग्रोथ’ को जानने-समझने का प्रामाणिक आधार भी प्रस्तुत करते हैं। इस लिहाज़ से ये सब एकांकी दस्तावेज़ी महत्त्व के हैं और मोहन राकेश के नाट्य-प्रेमियों, प्रबुद्ध पाठकों, आलोचकों, इतिहासकारों तथा शोधार्थियों की सम्पत्ति हैं। इन सभी रचनाओं में विषय, चरित्र, परिवेश एवं शिल्पगत प्रयोगों का रोचक वैविध्य है। आशा है यह पुस्तक मोहन राकेश की रंगयात्रा के गम्भीर अध्येताओं, हिन्दी एकांकी के उद्भव एवं विकास के अनुसन्धाताओं, स्कूल-कॉलेज के छात्र-कलाकारों तथा शौकिया नाट्य-मंडलियों के उत्साही रंगकर्मियों के लिए रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी।
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कथाकार-नाटककार मोहन राकेश के बारह आरम्भिक एकांकियों के प्रारूपों का संग्रह है ‘पूर्वाभ्यास’। इसमें संकलित एकांकी मोहन राकेश के सिद्ध नाटककार बनने के पूर्व की रचनाएँ हैं। इनमें हमें नाटककार की रचना एवं संशोधन-प्रक्रिया का पता लगने के साथ-साथ उसकी रंग एवं ध्वनि माध्यमों की गहरी समझ का प्रमाण भी मिलता है।
ये एकांकी न केवल हमें एक ऐतिहासिक दौर का ही साक्षात्कार कराते हैं, अपितु स्वयं नाटककार मोहन राकेश के प्रारम्भ-बिन्दु से लेकर अन्तिम समय तक की उनकी रंग-दृष्टि, विकास-यात्रा और ‘ग्रोथ’ को जानने-समझने का प्रामाणिक आधार भी प्रस्तुत करते हैं। इस लिहाज़ से ये सब एकांकी दस्तावेज़ी महत्त्व के हैं और मोहन राकेश के नाट्य-प्रेमियों, प्रबुद्ध पाठकों, आलोचकों, इतिहासकारों तथा शोधार्थियों की सम्पत्ति हैं। इन सभी रचनाओं में विषय, चरित्र, परिवेश एवं शिल्पगत प्रयोगों का रोचक वैविध्य है।
आशा है यह पुस्तक मोहन राकेश की रंगयात्रा के गम्भीर अध्येताओं, हिन्दी एकांकी के उद्भव एवं विकास के अनुसन्धाताओं, स्कूल-कॉलेज के छात्र-कलाकारों तथा शौकिया नाट्य-मंडलियों के उत्साही रंगकर्मियों के लिए रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी।
Book Details
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ISBN9788126715824
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह पुस्तक मोहन राकेश की कुछ आरम्भिक-अज्ञात कुछ अल्प-ज्ञात, कुछ आधी-अधूरी और कुछ पूरी-परिपक्व एवं चर्चित, किन्तु पुस्तक रूप में अब तक अप्रकाशित, लगभग सम्पूर्ण रचनाओं का अनूठा संकलन है। इसमें छपे आत्म-कथ्य, साक्षात्कार, नाट्य-लेख, एकांकी, उपन्यास, कहानी, संस्मरण, डायरी, पत्र, फ़िल्मालेख, ध्वन्यावलोकन-प्रयोग, निबन्ध, समीक्षा, कविता और बाल-साहित्य के माध्यम से राकेश के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व के अनेक पहलू पहली बार एक साथ उद्घाटित हुए हैं। यह पुस्तक राकेश के रोमांचक जीवन-वृत्त के प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण के साथ-साथ 1941 में लिखे, उनके सर्वप्रथम एकांकी ‘समझ का फेर’ से लेकर 1970-72 में नेहरू फ़ेलोशिप के दौरान लिखे गए शोध-लेख ‘शब्द और ध्वनि’ तथा यात्रा-संस्मरण ‘मक़बरे और आज’ तक उनके लगभग सम्पूर्ण रचना-जीवन का व्यापक प्रतिनिधित्व करती है। कश्मीर की रोमानी पृष्ठभूमि पर आधारित राकेश का चर्चित किन्तु अप्रकाशित उपन्यास ‘काँपता हुआ दरिया’ झेलम के माँझियों के संघर्षपूर्ण जीवन का रोचक वास्तविक और मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है तो उनकी डायरियों एवं फ़ाइलों से प्राप्त अछूती सामग्री उनकी जटिल रचना-प्रक्रिया को समझने में सहायक सिद्ध हो सकती है। हमें विश्वास है कि ‘एकत्र' की बहुरंगी रचनाएँ प्रबुद्ध पाठकों, आलोचकों, शोधार्थियों एवं साहित्य के इतिहासकारों को आधुनिक हिन्दी साहित्य की ऐसी दुर्लभ, मनोरंजक और महत्त्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराएँगी, जिससे राकेश के कृति-व्यक्तित्व का सम्पूर्ण और सच्चा आकलन एवं पुनर्मूल्यांकन किया जा सकेगा।
Ek Aurat Ka Chehara
- Author Name:
Henry James +1
- Book Type:

- Description:
एक औरत का चेहरा यूरोपीय और अमेरिकी सभ्यता-संस्कृति और जीवन-शैली की भिन्नताओं को दर्शाने के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नैतिक उत्तरदायित्व और स्त्री-पुरुष सम्बन्ध जैसे विषयों का बारीक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इज़ाबेल इसकी मुख्य पात्र है जो अपनी क़िस्मत ख़ुद तय करने को दृढ़-संकल्प है लेकिन वास्तव में अपनी मंज़िल से अनजान है। इज़ाबेल और उसको चाहने वालों पर दुर्भाग्य की जो छाया इस उपन्यास में दिखलाई पड़ती है, वह वस्तुतः उस समय के एक वर्ग के यथार्थ का सच्चा अंकन है जो बेचैन कर देता है।
Kanpta Hua Dariya
- Author Name:
Mohan Rakesh +2
- Book Type:

- Description:
कश्मीर के सौन्दर्य और प्रेम की रूमानी कहानियों से अलग दरिया में घर बनाकर रहनेवाले एक ग़रीब हाँजी परिवार, उसके सुख-दुःख, संवेदनाओं के टकराव और कठोर जीवन-संघर्ष पर आधारित मोहन राकेश का यह उपन्यास इस अर्थ में भी अलग है कि यह उनके शहरी मध्यवर्गीय रचना-जगत से काफ़ी अलग है।
उपन्यास में मोहन राकेश ने स्वयं ‘पूर्वभूमि’ के तहत इसकी रचना-प्रक्रिया पर रौशनी डाली है, जिससे हमें पता चलता है कि वे स्वयं इस कहानी से भावनात्मक स्तर पर कितना जुड़े हुए थे। इसे पूरा करने के लिए वे महीनों-महीनों कश्मीर में रहे और हाँजी परिवार के साथ हाउसबोट में ही नहीं, बल्कि डूँगों में भी रहकर दरिया का सफ़र करते हुए दूर-दराज़ के इलाक़ों तक गए।
लेकिन फिर भी यह उपन्यास अधूरा ही रहा। राकेश-साहित्य के शोधकर्ता और उनकी साहित्य-चेतना के मर्मज्ञ जयदेव तनेजा की पहल पर एक प्रयोग के तौर पर इसे मीरा कांत ने पूरा किया है जो स्वयं भी कश्मीरी पृष्ठभूमि से अच्छी तरह परिचित हैं, और इस कथा की ज़मीन को पकड़ने के लिए हफ़्तों श्रीनगर में रहकर, हाँजियों, उनके परिवारों और नई-पुरानी पीढ़ियों से मिलती रही हैं।
इस अनूठे कथा-प्रयोग के तहत उपन्यास के पात्रों और कथा-सूत्र का अध्ययन करते हुए उन्हें आगे बढ़ाया गया है। जिस सूझ-बूझ, कल्पनाशीलता और कौशल के साथ उन्होंने इस उपन्यास को एक बहुअर्थगर्भी परिणति तक पहुँचाया है, वह दिलचस्प है। उम्मीद है कि इस प्रयोग के रूप में पाठक एक नया औपन्यासिक आस्वाद पाएँगे। निःसन्देह कश्मीर को, समझने में भी यह उपन्यास एक आधार उपलब्ध कराता है, जो आज एक नए मोड़ पर है।
Bina Had Mans Ka Aadami
- Author Name:
Mohan Rakesh
- Book Type:

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Awating description for this book
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