Us Raat Ke Baad
Author:
Keshav Prasad MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
<span style="font-weight: 400;">कोहबर की शर्त उपन्यास के विख्यात लेखक का यह उपन्यास पारिवारिक जीवन की पृष्ठभूमि से निकलकर मानवीय सम्बन्धों के एक बड़े विस्तार में जाता है जिसमें जंगलों, पहाड़ों में कार्यरत मज़दूरों, ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ दफ़्तरी जीवन का एक बहुत नज़दीक से देखा हुआ विवरण भी आता है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">श्रीकान्त बाबू एक मध्यवर्गीय परिवार से आते हैं जहाँ रिश्तों का एक व्यापक संजाल है, जीवन, स्नेह और ऊष्मा से लबालब। लेखक श्रीकान्त का भाव एक अनाथ लड़की जया पर भी आता है, और वे उसे गोद लेकर पालते-पोसते हैं। अन्त में एक भिन्न भूमिका में जगतसेवा में जाते हैं।</span>
ISBN: 9789388933629
Pages: 287
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: "‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियाँ झारखंड के औपनिवेशिक शोषण-दमन और उससे उपजी सामाजिक-सांस्कृतिक विसंगतियों-विकृतियों को बेहद बारीकी से रेखांकित करती हैं। झारखंड के जनजीवन को संदर्भित करनेवाली ऐसी रचनाएँ और रचनाकार बहुत विरले हैं—हिंदी में तो और भी कम। दरअसल बहुत से रचनाकार यहाँ की जमीनी हकीकत से जुड़ ही नहीं पाते। संभवतः औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेष उन्हें ऐसा करने नहीं देते। ‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियाँ अश्विनी कुमार पंकज को उन रचनाकारों से भिन्न पाँत में खड़ा करती हैं—एक शिखर की तरह, नैदिन गार्डीमर की तरह। ‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियों का फलक बहुत विस्तृत है। इसमें एक ओर गिरिडीह-धनबाद की परित्यक्त कोयला-खदान हैं तो दूसरी ओर जादूगोड़ा का विकलांग-बाँझ कर देनेवाला प्रदूषित परिवेश। एक तरफ सिमडेगा, जलडेगा, बानो, मनोहरपुर के घाट-पहाड़, बाजार-हाट हैं तो दूसरी तरफ राँची-टाटा के चमचमाते फाइव-स्टार होटल। गरीबी और अमीरी का असह्य कंट्रास्ट। भाषा का रेंज भी उतना ही विस्तृत है, जितना इसका फलक। ठेठ गाँव-घर की हिंदी-नागपुरी से लेकर लेटेस्ट अंग्रेजी तक—‘चेंज योर माइंड इन राइट डायरेक्शन।’ अतिरिक्त प्रयास के बिना कथ्य के साथ सादा-सा शिल्प सहज रूप से कहानियों में आया है। एक नैसर्गिक आदिवासी परिवेश का प्रस्तुतिकरण सादगी-मौलिकता- सहजता के साथ। —विसेश्वर प्रसाद केशरी "
Ek Chuhe Ki Maut
- Author Name:
Badiuzzaman
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Description:
एक लम्बा-चौड़ा चूहाख़ाना और अनगिनत चूहेमार। छोटे, बड़े और फिर और बड़े। ठौर-ठौर चूहेमार प्रस्ताव, चूहेमार योजनाएँ और चूहेमार कार्यक्रम। जगह-जगह ज़िन्दा-मुर्दा चूहों का अम्बार, हाहाकार। कटे-फटे अंगों और सड़ रही लाशों की असह्य दुर्गन्ध। फिर भी अबाध चूहेमारी— प्रतिभा, योग्यता और कार्यक्षमता का एकमात्र प्रमाण, जन-कल्याण का एकमात्र रास्ता। मजबूर हैं एक-दूसरे के मातहत चूहे मारते चूहेमार; अभिशप्त, भयभीत और नियतिबद्ध हैं चूहेमारी के लिए; अन्यथा उन्हें ख़ुद चूहों में बदल जाना होगा— मर जाना होगा एक चूहे की मौत!
वस्तुतः सुपरिचित हिन्दी कथाकार बदीउज़्ज़माँ का यह बहुचर्चित उपन्यास फ़ंतासी के माध्यम से एक ऐसी समाज-व्यवस्था का चित्रण करता है जो पूरी तरह मानव-विरोधी है और जिसमें मानवीय गरिमा तथा मानव-अस्तित्व दोनों मूल्यहीन हो चुके हैं। फ़ंतासी के बावजूद लेखक ने स्थितियों का जैसा वास्तविक चित्रण किया है उससे हम अपने समय, समाज और व्यवस्था-तंत्र को साफ़ तौर पर देख और महसूस कर सकते हैं।
Apni Gawahi
- Author Name:
Mrinal Pande
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Description:
जब कृष्णा पत्रकार बनने का फ़ैसला करती है तो अपना औरत होना और हिन्दी समाचार एजेंसी में काम करना, यही दो परेशानियाँ उसके सामने हैं। जैसाकि उसके मुन्नू चाचा कहते हैं उसका यह फ़ैसला भले ही उसे उसकी निराशा से क्षणिक मुक्ति दे, लेकिन आख़िरकार यह उसे बर्बाद कर देगा। मुन्नू ’चा के मन में इस बारे में कोई शक नहीं था।
सत्तर के दशक में अंग्रेज़ी मीडिया में आए उफान में अंग्रेज़ी और उसके पत्रकार सातवें आसमान पर पहुँच गए, जबकि भाषायी पत्र-पत्रिकाओं पर उनके मालिक कुंडली मारे बैठे रहे—ख़ासकर अब के दौर में मीडिया साम्राज्यों का संचालन करनेवाले मालिक-सम्पादकों की फ़ौज। पुरानी बिल्डिंग के अंधे और तंग दफ़्तर से शुरुआत करनेवाली कृष्णा नई बिल्डिंग के अंग्रेज़ी सम्पादकों और पत्रकारों के नाज़-नखरों को कुछ ईर्ष्या से, कुछ क्रोध से और कुछ मज़े लेकर देखती है। लगभग बेमतलब विषयों के रिपोर्टर से बढ़ते-बढ़ते एक राष्ट्रीय दैनिक की पहली महिला सम्पादक, देश के सबसे लोकप्रिय टीवी चैनलों में से एक की न्यूज़ एंकर बनने तक वह मीडिया के बदलते स्वरूप को बहुत पास से देखती है। वह देखती है कि राजनीतिक और आर्थिक फ़ायदों की लड़ाई मीडिया के सहारे कैसे लड़ी जाती है। और वह पाती है कि इन अधिकांश मामलों में सच्चाई ही बलि चढ़ती है।
समकालीन भारतीय परिदृश्य में सत्ता के पीछे भागनेवालों और दलालों की करतूतों के दिलचस्प और गुदगुदानेवाले विवरणों से भरा यह उपन्यास अपनी सचबयानी और समाचार रिपोर्टिंग की चकाचौंध-भरी दुनिया की वास्तविकताओं पर केन्द्रित है।
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