Sahitya Aur Sanskriti
(0)
Author:
Mohan RakeshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
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मोहन राकेश की प्रतिभा बहुमुखी थी। कहानी, उपन्यास, नाटक-एकांकी, ध्वनि नाटक, बीज नाटक और रंगमंच—इन सभी क्षेत्रों में मोहन राकेश का नाम सर्वोपरि है। इस संकलन में इन विधाओं के विभिन्न पहलुओं पर मोहन राकेश के छिटपुट लेखों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिनसे उनकी दृष्टि को समझने में पर्याप्त सहायता मिलेगी। लेखों के अतिरिक्त इस संकलन में ‘नयी कहानी’ पर एक गोष्ठी, सोवियत नाटककार के साथ एक बातचीत, हेब्बार और रविशंकर के साथ भारतीयता और आधुनिकता के तत्त्व पर एक चर्चा तथा कार्लो कपोला के साथ उनका अन्तिम इंटरव्यू भी है, जो अपने में अति महत्त्वपूर्ण हैं और राकेश की साहित्यिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि को आलोकित और रेखांकित करते हैं। साथ ही बासु भट्टाचार्य द्वारा मोहन राकेश का एक अन्तरंग परिचय भी है जो अपने में अभूतपूर्व है।
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मोहन राकेश की प्रतिभा बहुमुखी थी। कहानी, उपन्यास, नाटक-एकांकी, ध्वनि नाटक, बीज नाटक और रंगमंच—इन सभी क्षेत्रों में मोहन राकेश का नाम सर्वोपरि है। इस संकलन में इन विधाओं के विभिन्न पहलुओं पर मोहन राकेश के छिटपुट लेखों को प्रस्तुत किया जा रहा है, जिनसे उनकी दृष्टि को समझने में पर्याप्त सहायता मिलेगी। लेखों के अतिरिक्त इस संकलन में ‘नयी कहानी’ पर एक गोष्ठी, सोवियत नाटककार के साथ एक बातचीत, हेब्बार और रविशंकर के साथ भारतीयता और आधुनिकता के तत्त्व पर एक चर्चा तथा कार्लो कपोला के साथ उनका अन्तिम इंटरव्यू भी है, जो अपने में अति महत्त्वपूर्ण हैं और राकेश की साहित्यिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि को आलोकित और रेखांकित करते हैं। साथ ही बासु भट्टाचार्य द्वारा मोहन राकेश का एक अन्तरंग परिचय भी है जो अपने में अभूतपूर्व है।
Book Details
-
ISBN9788171190096
-
Pages171
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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प्रकति में जब भूकंप या सूनामी इत्यादि आपदाओं के कारण उथल-पुथल मचती है तो दुनिया के नक्शे में बदलाव होता है और जब कतिपय कारणों से सामाजिक वर्णों में युद्ध छिड़ता है तो समाज के स्तर पर दुनिया में बड़ा बदलाव आता है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद अनेक यूरोपीय और अफ्रीकी देशों की भू- सीमाओं और मानविकी में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ, जिससे स्थानीय सभ्यता और संस्कृति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। दूसरे विश्वयुद्ध ने आग में घी का काम किया और पूरी दुनिया को प्रभावित किया। भारत के आजादी के संग्राम और उसके बाद भारत का विभाजन कर पाकिस्तान बनाया गया--उस दौरान हुए भीषण संघर्ष में न केवल दुनिया के नक्शे पर एक नए देश का आविर्भाव हुआ, वरन् भयंकर रक्तक्रांति भी हुईं। इसने आगामी अनेक वर्षों तक मानव सभ्यता को प्रभावित किया। दरअसल जब से दुनिया बनी है, युद्ध कहीं-न-कहीं होते रहे हैं। आज भी अनेक देश युद्ध की आग में झुलस रहे हैं--सीरिया संकट, उत्तर कोरिया संकट, अफगानिस्तान में तालिबान संकट, भारत- पाक तना-तनी, इजराइल-फिलिस्तीन संकट। दुनिया में अमन-शांति के लिए आवश्यक है कि मानवहित में इन युद्धों पर पूर्णविराम लगे।
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