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Dhatri Paat San Gaam

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धात्री पात सन कोमल एहि पोथी मे तत्कालीन शिक्षक, मारवाड़ी बोर्ड, चकला निर्मली आ विलियम्स स्कूल, पूर्वी आ पश्चिमी बान्हक श्रमदान सँ भेल निर्माण आ तकर उद्घाटन, सुपौलक गली-कूची, ओहि समयक वातावरण आ समरसता-सौहाद्र, शिरीष गाछक ऐतिहासिकता आ ओकर मानवीकरण, परसरमा आ गढ बरुआरी स्टेशनक रोचक आ जानकारी सँ भरल इतिहास, लाल साहेब, प्रसिद्ध जमीन्दारक कथाक संग-संग आखिरी विपन्न आदमी, जे सुपौलक चौराहा पर बैसि जुत्ता-चप्पलक मरम्मति करैत अछि दुखो काका, तकरो कथा एहि मे भेटैत अछि जे आन ठाम कतहु लिखित नहि अछि। ई लिखैत मान्यजन जनक काका मोन पड़ैत छथि, जे दलित छलाह मुदा से संबोधन आ दैनन्दिन क्रियाकलाप सँ कतहु तेना भ' क' बुझाइत नहि छथि। एहि पोथी मे एकर सभक दस्तावेजीकरण एक टा प्रतिमान गढ़ैत अछि। एहि पोथी मे महत्त्वपूर्ण थिक लेखकक राग-भास। प्रेम-अनुराग। सामाजिक सौहाद्र। ह' ह' बहैत प्रवाहमयी बसात। कल-कल छल-छल करैत गद्यक प्रवाह। मृदुता। आप्लापित करैत ओजस्विता। शब्द जखन महेन्द्र जीक आँगुरक स्पर्श करैत छनि तँ जेना ओहि मे अनायास गतिमयता आबि जाइत अछि। कलमक नोंक पर अबाधित नृत्य करैत गद्य आ तकर सौष्ठव। सुगंध आ सुवास भरल। एतेक प्रांजल, एतेक सुगठित, एतेक हँसैत आ आत्मा मे पैसैत गद्य किएक ने कोनो पाठक केँ आह्लादित आ मोहित करतैक। —केदार कानन

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धात्री पात सन कोमल एहि पोथी मे तत्कालीन शिक्षक, मारवाड़ी बोर्ड, चकला निर्मली आ विलियम्स स्कूल, पूर्वी आ पश्चिमी बान्हक श्रमदान सँ भेल निर्माण आ तकर उद्घाटन, सुपौलक गली-कूची, ओहि समयक वातावरण आ समरसता-सौहाद्र, शिरीष गाछक ऐतिहासिकता आ ओकर मानवीकरण, परसरमा आ गढ बरुआरी स्टेशनक रोचक आ जानकारी सँ भरल इतिहास, लाल साहेब, प्रसिद्ध जमीन्दारक कथाक संग-संग आखिरी विपन्न आदमी, जे सुपौलक चौराहा पर बैसि जुत्ता-चप्पलक मरम्मति करैत अछि दुखो काका, तकरो कथा एहि मे भेटैत अछि जे आन ठाम कतहु लिखित नहि अछि। ई लिखैत मान्यजन जनक काका मोन पड़ैत छथि, जे दलित छलाह मुदा से संबोधन आ दैनन्दिन क्रियाकलाप सँ कतहु तेना भ' क' बुझाइत नहि छथि। एहि पोथी मे एकर सभक दस्तावेजीकरण एक टा प्रतिमान गढ़ैत अछि। एहि पोथी मे महत्त्वपूर्ण थिक लेखकक राग-भास। प्रेम-अनुराग। सामाजिक सौहाद्र। ह' ह' बहैत प्रवाहमयी बसात। कल-कल छल-छल करैत गद्यक प्रवाह। मृदुता। आप्लापित करैत ओजस्विता। शब्द जखन महेन्द्र जीक आँगुरक स्पर्श करैत छनि तँ जेना ओहि मे अनायास गतिमयता आबि जाइत अछि। कलमक नोंक पर अबाधित नृत्य करैत गद्य आ तकर सौष्ठव। सुगंध आ सुवास भरल। एतेक प्रांजल, एतेक सुगठित, एतेक हँसैत आ आत्मा मे पैसैत गद्य किएक ने कोनो पाठक केँ आह्लादित आ मोहित करतैक। —केदार कानन

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Format
Hardbound
Publisher
Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Publication year
2021
Weight
300 grams
ISBN-13
9789388799805
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
23 × 23 cm
Language
Maithili

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