MA

Maithili Books

Barho Mas

  • Author Name:

    Bhalchandra Jha +1

  • Book Type:
  • Description:

    बारहो मास उपन्यास साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत मराठी उपन्यास बारोमास मैथिली अनुवाद अछी। एही उपन्यास भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था रीढ़ - हमरा सभक किसानक ओही सभ समस्या पर व्यापक दृष्टि देल गेल अछी जे ओ लोकनि खुजल व्यापार नीति आ भूमण्डलीकरण कारणे भोगी रहलाह अछी। बारह महीनामे समेटल किसानक वेदना-कथाके एहि उपन्यासमे महाराष्ट्रक किसान सुभाराव आ हुनक परिवार इर्द-गिर्द बुनल गेल अछी उपन्यास अन्तमे सुभाराव निपत्ता होयब प्रतीकात्मक रूपसै किसानक मुख्यधारासै “निपत्ता” होयबाक एकटा दुखद परिदृश्य प्रस्तुत करैत अछी।

Barho Mas

Barho Mas

Bhalchandra Jha

17% off

₹ 500

₹ 415

Available

Khattar Kakak Tarang

  • Author Name:

    Harimohan Jha

  • Book Type:
  • Description:

    खट्टर कका आई सँ पछस्तर साल पहिने ‘प्रकट’ भेलाह। केना? इ रहस्य बाद मे, मुदा भाङक भांगक तरंग मे एहन-एहन गूढ़ अर्थक फुलझड़ी छोड़ल जा सकैत अछि, इ प्रतिभा खट्टर कका कें छोड़ि कऽ ककरो लग नहि अछि। ओ कखनो सोमरस कें भाङ सिद्ध क दैत छैथ, तऽ आयुर्वेद कें महाकाव्य। कखनो अपन तर्क सँ भगवान कें मौसा बना लैत छैथ, तऽ कखनो समधि। ओ पातिव्रत्य कें व्यभिचार साबित कऽ सकैत छैथ, तऽ असती कें सती। हुनकर नजर मे कामदेव सृष्टि कें कर्ता छैथ। जेना कबीरदासक उनटे वाणी कहल जायत अछि, तहिना खट्टर कका उनटे गंङ्गा बहबैत छैथ। तरंग मे कहल हुनकर गप्पक जवाब प्रकांड पंडितो कें नहि फुरैत छहिन। हुनकर किछु तरंग देखू—ब्रह्मचारी कें वेद नहि पढ़बाक चाही, पुराण बहु-बेटी कें योग्य नहि अछि, दुर्गाक कथा स्त्रैण रचनै छैथ, गीता मे श्रीकृष्ण अर्जुन कें फुसला लेलथिन, दर्शनशास्त्रक रचना रस्सी देखि क भेल अछि, असली ब्राह्मण विदेश मे रहैत छैथ, मूर्खताक कारण पंडितगण छैथ, दही-चूड़ा-चीनी सांख्यक त्रिगुण अछि, स्वर्ग गेला पर धर्म भ्रष्ट भ जायत आदि। इ जनैत कि हुनकर तरंग कर्मकाडी कें लाल-पीअर करैत अछि, खट्टर कका मस्त रहैत छैथ, भांग घोंटैत रहैत छैथ, आ आनन्द-विनोदक वर्षा करैत रहैत छैथ। जेना शुरू मे कहल गेल कि खट्टर कका प्रकट भेलाह, तऽ ओ प्रकट होयते प्रसिद्ध भ गेलाह। मैथिलिए मे नहि, हिन्दी, गुजराती आदि भाषा मे सेहो पढ़ल गेलाह। ‘कहानी’, ‘धर्मयुग’ जकाँ पत्रिका खट्टर ककाक किछु तरंग छपलक। हुनकर लोकप्रियता एहन छलैन्हि कि हुनकर परिचय-पात, घर-द्वार जनैत लेल चिट्ठी आबऽ लागल। खट्टर कका हँसी-हँसी मे जरूर तरंग छोड़ैत छैथ, मुदा ओकरा ओ अपन तर्क सँ प्रमाणित सेहो क दैत छथिन। वेद, उपनिषद, पुराण सब पर हुनकर पकड़ छैन। तर्कक जाल एहन बुनताह कि पाठकगण सोच मे पड़ि जेताह। हुनकर चश्मा सँ देखब, त इ दुनिया मे सब उनिटा नजर आयत। मुदा, हुनकर बातक रस आ विनोद पाठकगण कें सब उलझन सुलझा दैतेन, इ भरोसा अछि।

Khattar Kakak Tarang

Khattar Kakak Tarang

Harimohan Jha

20% off

₹ 250

₹ 200

Available

O je Kahiyo Gaam Chhalai

  • Author Name:

    Shubhendu Shekhar

  • Book Type:
  • Description:

    धर्म आ दर्शनक स्तर पर बहुलता भारतीय सभ्यता आ संस्कृतिक प्रमुख विशेषता रहल अछि। भारतीय समाज मे परस्पर विरोधी विचारधारा आपस मे टकराइत-मिलैत, सहअस्तित्वक संग समानान्तर गति सँ आगाँ बढ़ैत रहल। मुदा सत्ता-पोषित आ प्रायोजित धर्मक टारगेट पर सदिखन लोकधर्म आ सहिष्णु-समावेशी विचारधारा रहल। शुभेन्दु शेखरक विमर्शपरक उपन्यास 'ओ जे कहियो गाम छलै’ एहि साम्प्रदायिक घृणा मे अमानुष आ नृशंस होइत मिथिलाक गाम केँ बचेबाक आकांक्षा थिक। शुभेन्दु शेखरक दृष्टि वैज्ञानिक आ मानवीय छनि। ओ साम्प्रदायिकता केँ शहरी मध्यवर्गक बीमारी बुझैत छथि जे आब गामो मे नीक जकाँ पसरि चुकल अछि। सब प्रकारक दाओ-पेंच, घृणा, हिंसाक बीच रामगुलाम सन पात्र ओहि समन्वय परंपराक अंतिम कड़ी अछि जे सैकड़ो वर्ष मे निर्मित भेल छल। शुभेन्दु 'धर्म, आस्था, रूढि़ आ अंधविश्वासक बीचक मेंही रेहा’ केँ बचा लेब’ चाहैत छथि। समाज मे धार्मिक वैमनस्य पसारि क’ जंगल बनाब’वला राजनीतिक खिलाड़ीक लेल लेखकक ई चेतावनी—'जंगल के एक टा खूबी होइत छै जे एहि मे केम्हरो सँ घूसल जा सकैत छै,’ भविष्यक प्रति आशा जगबैत अछि। सम्पूर्ण उपन्यास मानवीय विवेकक धुरी पर केन्द्रित अछि। लोकोक्ति आ मुहावरा सँ गूँथल, किस्सागोईपूर्ण एहि उपन्यासक इंद्रधनुषी भाषाक छटा पाठक केँ बान्हैत अछि, संगहि मनुक्ख बनल रहबाक लेल उद्वेलित सेहो करैत अछि। —श्रीधरम

O je Kahiyo Gaam Chhalai

O je Kahiyo Gaam Chhalai

Shubhendu Shekhar

18% off

₹ 250

₹ 205

Available

Aaranyak

  • Author Name:

    Keshkar Thakur +1

  • Book Type:
  • Description:

    आरण्यक भारतीय साहित्यमे अनेक एहन महान विभूति लोकनि छथी जे अपना कृतित्व साँ अपन युग आ समकालीन परिदृष्क समृद्ध कयलनि अछि आ ओकरा एक नव दृष्टि प्रदान कयलनि अछि। एहि उपन्यासमे उपन्यासकार 'प्रकृत प्रदत' वन-संपादमे प्रकृति चित्रण, मानवीय संवेदनाक घटित घटनाकाँ अनुभवक आधार पर मनुष्यक लेल एक एहन कथानकक निर्माण कयलनि अछि, जाहिसाँ जीवन-जगतक सत्यता बहुत लग साँ देखल गेल अछि। ई एक अनुपम, अनुभूतिपूर्ण स्मृति-कथा अछि जे मनुष्य जीवनक आख्यान आ ओकर यात्राकाँ सार्थक करैत अछि। ई एक प्रकरें मानव जीवक एकांत समानुभूतिशील साहचर्यक आख्यान थीक।

Aaranyak

Aaranyak

Keshkar Thakur

17% off

₹ 260

₹ 215.8

Available

Kanyadan • Dwiragaman

  • Author Name:

    Harimohan Jha

  • Book Type:
  • Description:

    ‘कन्यादान’ मिथिलाक एहन व्यथा-कथा अछि, जकरा सँ अजुका समाज सेहो मुक्त नहि भ सकल अछि। उपन्यासक पहिल संस्करण नौ दशक पहिने, यानी 1933 मे पुस्तकाकार छपल छल, मुदा आइ धरि मिथिलाक समाज मे ‘बुच्चिदाइ’ देखल जायत छैथ, आ हुनकर संघर्ष अनवरत चलि रहल छैन। कन्यादान नाम कें साकार करैत घरक मुखिया आइयो अपन कन्या कें जड़ पदार्थ जकाँ दान करबाक हेतु निमित्त रहैत छैथ आ ‘बुच्चिदाइ’ कें विवाहक हेतु सूत्रधार भाँति-भाँतिक तिकड़म लगबैत छैथ। बेस, आइ परिस्थिति बदलल अछि। आब गाम-घरक बुच्ची सेहो स्कूल जायत छैथ। मुदा लड़का-लड़किक भेद एखनो बनल अछि। आइयो कतेको घर मे लड़का कें दूध मिलैत अछि, त लड़की कें माँड़ सँ सन्तोष करऽ पड़ैत छैन। इ पोथी कें लोकप्रियता सिर्फ समाजक यथार्थ चित्रण सँ नहि मिलल। एकर भाषा आ शिल्प अप्रतिम अछि। इ उपन्यास मैथिली समाजक मनोवृत्ति आ विसंगति कें बिना लाग-लपेट अभिव्यक्त करैत अछि। हास्यक रस होयतो इ पुस्तक मर्मस्पर्शी अछि। अहि लेल एकरा पढ़बा लेल गैर-मैथिली भाषी सेहो मैथिली सिखलाह। आ जे पढ़बा मे समर्थ नहि छलाह, से वाचन सं एकर रसास्वादन कैलाह। हरिमोहन झा हास्य सम्राट जरूर कहल जायत छैथ, मुदा ओ एहन दक्ष गद्यकार सेहो छलाह, जे मनोरंजक ढंग सँ कथा कहैत पाठक कें यथार्थक भूमि पर विस्मित कऽ दैत छथिन। हुनकर लेखनी विमर्शक एतेक द्वारि खोलैत अछि कि पाठकगण सोचबा लेल विवश होयत छैथ। ‘कन्यादान’ सेहो इ कसौटी कें सार्थक करैत अछि। इ उपन्यास मे अपन बिटियाक विवाहक हेतु माय-बाप कें चिन्ता अछि, विवाह कें सम्भव बनैबाक हेतु सूत्रधारक दाँव-पेच, नव रंग-ढंग मे रंगल पतिक आकांक्षा, अनपढ़ आ गामक संस्कृति मे रमल पत्निक कायान्तरण, आ सबसँ उल्लेखनीय, पुरातन बनाम आधुनिक परम्पराक जंग अछि। हरिमोहन झा कें नजर से केओ बाँचल नहि छैथ, अहि लेल ‘कन्यादान’ अनवरत प्रासंगिक बनल अछि। इ पोथी मे ‘कन्यादान’ तथा ‘द्विरागमन’ (1943)— जे वस्तुत: एके उपन्यासक दू भाग अछि—एक संग प्रकाशित अछि। पाठक लोकनि हरिमोहन झा कऽ इ करिश्मा कें स्वयं अनुभव करू...

Kanyadan • Dwiragaman

Kanyadan • Dwiragaman

Harimohan Jha

20% off

₹ 250

₹ 200

Available

Doo Dhap Aagan

  • Author Name:

    Dilip Kumar Jha

  • Book Type:
  • Description:

    दिलीप कुमार झा विशुद्ध जिज्ञासु रचनाकार छथि। समकालीन समाज केँ नस-नस चिन्हैत छथि। ओ यात्रीजीक कथन पर उचिते पूर्णतया उतरै छथि। दिलीपजी मैथिलीक जमीनी अभियानी छथि। ई उपन्यास तकर बेस उदाहरण अछि। यथार्थ आ कामना केँ एक टा छोट सन उपन्यास मे सफल बना देलनि। मनलग्गू तँ एहन जे हम एक बैसकी मे समाप्त क’ गेलहुँ। सब टा खूब नीक, पात्रोचित सहज भाषा छनि। —उषा किरण खान 'दू धाप आगाँ’ उपन्यास एहि रूपें उल्लेखनीय अछि जे, आइ जे समाज मे नहि अछि आ अहाँ चाहि रहल छी, त’ अपन संघर्ष बलें जेना सुधा करैत अछि ओना क’ सकैत छी। उपन्यास एहि बातक दृष्टि दैत अछि आ तकर प्रेरणा सेहो। वर्तमान समय मे शिक्षा-प्रणाली ओ राजनीतिक क्षेत्र दुनू विकृतिक चरम पर पहुँच गेल अछि। आब प्रश्न उठैत अछि जे एकरा ठीक कयल जा सकैत अछि? हमरा जनैत समकालीन साहित्यक यैह पैघ विशेषता छै जे ओ समाज मे घटित होइत घटना ओ स्थिति केँ देख मात्र विचलित नहि होइत अछि अपितु ओ समाज केँ प्रेरित करबाक लेल एहन संरचना करैत अछि जे समाज मे नहि अछि किंतु रचनाकार अपन रचना द्वारा ओहि स्थिति सँ उबरबाक लेल एक टा सुखद स्थितिक आयोजन करैत अछि। ओहि स्थिति केँ अनबाक लेल उपन्यासकार जाहि पात्र केँ ठाढ़ करैत छथि ओ एहि उपन्यास मे मुख्यरूप सँ सुधा छथि। हमरा जनैत आइयो सामाजिक परिस्थितिक परिवर्तन लेल नारी केँ आगू आनब कठिन अछि। —डा.शिवशंकर श्रीनिवास

Doo Dhap Aagan

Doo Dhap Aagan

Dilip Kumar Jha

18% off

₹ 280

₹ 229.6

Available

Hamar Pasar Sansar Sar

  • Author Name:

    Raman Kumar Singh

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Essay

Hamar Pasar Sansar Sar

Hamar Pasar Sansar Sar

Raman Kumar Singh

18% off

₹ 230

₹ 188.6

Available

Madar

  • Author Name:

    Subhash Chandra Yadav

  • Book Type:
  • Description:

    A Maithili Novel

Madar

Madar

Subhash Chandra Yadav

18% off

₹ 100

₹ 82

Available

Bahuaayami Kisunji

  • Author Name:

    Kedar Kanan +1

  • Book Type:
  • Description:

    प्रतिगामी सोच आ पतनशील परम्पराक दलदल मे फँसल मैथिल समाज आ ओकर प्राचीन मूल्य-मान्यता वला तथाकथित शाश्वत साहित्य केँ नव दिशा देबाक संगहि एक टा नव जमीन तलाशक जे काज साठि-सत्तरक दशक मे किसुनजी कयलनि, से साइत पछिला सत्तर साल मे केओ नइँ क सकलाह। एक्कैसम शताब्दी मे आइ किसुनजीक नव कविताक सोच भने नव नइँ लागय, मुदा ई वैह जमीन थिक जकरा तोडि़ क एक समय अग्निजीवी पीढ़ी अपना ढंगे लेखनक दिशा तय करक यथासंभव प्रयास कयलक आ आगाँ चलि क 'अंतिकाक दौर मे हमरा सभ व्यापक अर्थ मे प्रगतिशीलताक संग बहुत साहस सँ अस्मितावादी विमर्श—दलित-विमर्श, स्त्री-विमर्श, यौनिकता-विमर्श—केर सेहो बात करैत छी। आइ जखन कि फेर सँ यथास्थितिवादी, वैदिक कर्मकांडी मूल्य-मान्यतावला सोचक आग्रही प्रबल भ उठल अछि; बहुत रास कवि-कथाकार अपना लेखन मे लोक-परम्परा आ 'खाँटी मैथिलपनक नाम पर पुनरुत्थानवादी मूल्य-मान्यता, बिम्ब आ प्रतीक लादने जा रहल अछि। सायास स्त्री केँ अनुगामिनी आ पारंपरिक, कर्मकांड केँ उपयोगी, मुस्लिम केँ सन्देहास्पद, दलित केँ निठल्ला आ कृषि-विरोधी देखेबाक प्रचलन मैथिली मे एम्हर खूबे बढ़ल अछि। एकर प्रतिकार लेल किसुनजीक प्रयास हमरा सभक सोझाँ प्रेरक जकाँ अछि—हम सब नव तरहें, मुदा सामूहिक प्रयास करी। भविष्यक बाट पर सँ काँट-कूस हटेबा लेल जखन फेर सँ संघर्षक बेगरता भ गेल अछि; किसुनजी पर लिखित अनेक लेखकक संस्मरण आ मूल्यांकनपरक लेख सँ भरल ई संपादित किताब पढ़ब साइत बहुत उपयोगी सिद्ध हैत। —गौरीनाथ

Bahuaayami Kisunji

Bahuaayami Kisunji

Kedar Kanan

18% off

₹ 790

₹ 647.8

Available

Nit Naval Rajkamal

  • Author Name:

    Subhash Chandra Yadav

  • Book Type:
  • Description:

    Biography

Nit Naval Rajkamal

Nit Naval Rajkamal

Subhash Chandra Yadav

18% off

₹ 250

₹ 205

Available

Pratham Purush

  • Author Name:

    Virendra Mullick

  • Book Type:
  • Description:

    अग्नि पीढ़ीक स्तम्भ कवि वीरेन्द्र मल्लिक अपन काव्यालोचना पोथी 'प्रथम पुरुष' मे गंभीर अध्येताक रूप मे सोझाँ अबैत छथि। बहुधंधी मल्लिकजी कवि, आलोचक, संपादक आ रंगकर्मी रहलाह अछि। ई पोथी हुनकर आलोचकक रूप केँ आर बेसी देखार करैत अछि। पोथी अद्भुत अछि। ओकर कालखंड प्राय: आठ सय बर्खक। मिथिला मे एहि अवधि मे रचल अनेकानेक प्रकारक काव्यक चर्च ओ एहि पोथी मे करैत छथि। मिथिलाक वैष्णव काव्य धारा केँ एक टा पुरातत्वशास्त्री जकाँ उत्खनित करैत ओ मैथिली साहित्यक इतिहास मे एक टा सार्थक हस्तक्षेप करैत छथि। मैथिलीक रामकाव्य, खास क' दुनू रामायणक विषय मे दू टा उपयोगी लेख छै जे मैथिली रामायण सभ केँ व्यापक रामकथाक परम्परा मे अवस्थित करैत ओकर विश्लेषण करैत अछि। सुभद्रा हरणक बिम्बविधानक चर्चा करैत एक टा आलेख एहि हेरायल जाइत पोथीक सौष्ठवक वर्णन करैत ओकरा समकालीन चेतना मे अनैत अछि। मैथिलीक महत्त्वपूर्ण कवि जीवकांतक कविता पर लिखल लेख हुनक काव्य केँ बुझबा मे, ओकर तह मे पहुँचÓ मे मदति करत। पोथीक पहिल आलेख एक टा सैद्धांतिक लेख अछि जकरा पढ़ला सँ कविता बूझ' मे तँ मदति भेटबे करतै, संगहि पछिला एक सय पचीस बरखक मैथिली कविताक आलोचनात्मक इतिहास सेहो। समकालीन कविता पर लिखल लेख एहि प्रकल्प केँ आर गँहीर करैत अछि। पोथी पढ़निहार लोकनि मल्लिकजीक अध्ययनक विस्तृत फलक-वेद सँ ल'क' लेनिन आ साहित्य आलोचनाक मनीषी सब धरि, हुनकर फडि़च्छ आलोचकीय दृष्टि आ हुनकर जनपक्षधरता सँ जनमल स्निग्धता सँ ओतबे प्रभावित हेताह जतेक हम भेलहुँ अछि, से आशा अछि। मैथिली कविताक मादे एक टा तथ्यगत, इतिहास सम्मत आ फडि़च्छ पोथी जँ पढ़' चाही, तँ ई पोथी पढ़ी। —विद्यानंद झा

Pratham Purush

Pratham Purush

Virendra Mullick

18% off

₹ 435

₹ 356.7

Available

Dekhal-Parekhal

  • Author Name:

    Kirtinath Jha

  • Book Type:
  • Description:

    अलग अलग समय पर विभिन्न विषय पर लिखल लेख सभ मे सँ बिछल-चुनल किछु महत्वपूर्ण आलेखक संग्रह

Dekhal-Parekhal

Dekhal-Parekhal

Kirtinath Jha

18% off

₹ 300

₹ 246

Available

Doo Dubha Me Din Gol

  • Author Name:

    Amar Nath Jha

  • Book Type:
  • Description:

    A Collection of Maithili Short Stories

Doo Dubha Me Din Gol

Doo Dubha Me Din Gol

Amar Nath Jha

18% off

₹ 250

₹ 205

Available

Athato Kavya Jigyasa

  • Author Name:

    Virendra Mullick

  • Book Type:
  • Description:

    पूजी द्वारा विकासक रूप मे प्रतिपादित बाजारवाद, सबकिछु केँ 'पसार' बना देलकए। प्रशासन, न्याय, वित्त, सूचना, स्वास्थ्य, शिक्षा... सबकिछु बाजार नियंत्रित होइत मनुखक विसंगति केँ ओहि स्तर तक ल' गेलए जे सांस्कृतिक परिचिति पर्यंत विलोपित भ' जाए। अही मर्मांतक पीड़ा सँ आप्लावित अछि ई कविता संग्रह 'अथातो काव्य जिज्ञासा'। कविता बिडंबनापूर्ण परिवेशक प्रतिपक्षी अछि, चिंतित अछि आ अस्तित्वक प्रश्न सँ पाठक केँ आविष्ट करै अछि, सोचबाक लेल, सक्रिय हेबाक लेल उत्प्रेरित करै अछि। पूजी, बाजार आ साम्राज्यवादक वर्चस्व हमर भाषा, हमर संस्कृति, हमर सर्वस्व विश्व मानवीय दृष्टिकोणक संग कविता, मनुष्यताक उत्कर्षक लेल प्रतिबद्ध अछि, बिना कोनो संशय-ओझरौनी के बेस स्पष्ट बिम्ब मे मुखर अछि, सत्यक साक्षात्कार लेल तत्पर अछि। ..... लोकक पेट पर मारैत लात नित नव-नव सिद्धांत आ विज्ञापनक भरमार। सामयिक, असत्य आ अन्यायक बलधकेल अधिनायकवादी सत्ताक पिशाची-नर्तनक काल मे, कविता अपन कर्तव्य सँ संपृक्त अछि, आशा आ विश्वासक संग अडिग अछि। मुदा नागरिक वीर देश केर एखनहु बरूदक ढेरी पर कविताक संग विहुँसि खेलाइछ। एक अग्निजीवी कविक लेल इएह ने काव्य-स्वभाव, कविता-प्रवृत्ति छी! —कुणाल (कवि-रंगकर्मी)

Athato Kavya Jigyasa

Athato Kavya Jigyasa

Virendra Mullick

18% off

₹ 350

₹ 287

Available

Chhiyanat

  • Author Name:

    Taranand Viyogi

  • Book Type:
  • Description:

    संख्या मे कम कथा लिखलाक बादो मैथिली कथा-साहित्य मे तारानंद वियोगीक पैघ आ जरूरी स्थान मानल गेल अछि। प्रतिष्ठित कथा-संकलन सब मे हुनकर कथा संकलित भेल छनि आ आन-आन भाषा मे अनूदित सेहो। समाजक हाशिया परक लोक के कथा, ओकर संपूर्ण मानवीय गरिमाक संग, मैथिली मे कम लिखल गेल अछि। वियोगी जीक प्राय: सब टा कथा एही निम्नवर्ग, जाति आ वर्णक विषय मे लिखल गेल अछि। सब दिन ओ निर्माणाधीन सामाजिक यथार्थ केँ अपन कथाक विषय बनौलनि। एहि गुणक कारण हुनकर कथाक बेस मान अछि, मुदा एही कारणें विवादो अक्सरहां होइत रहल अछि। हुनकर सदा मान्यता रहलनि जे केवल मैथिली भाषा मे लिखल रहबाक कारण कोनो कथा मैथिली कथा नहि भ' सकैत अछि। तेँ, हुनकर कथा सब मे मिथिलाक जनजीवन केँ धकधक करैत महसूस कयल जा सकैए। तहिना, हुनकर कथा सब मे कथादेश आ कथासमय केँ साफ-साफ चित्रित भेल देखल जा सकैत अछि। ओ अपना समयक हरेक हलचल केँ नोटिस करैत चलैत छथि। तहिना, हुनकर कथाभाषा सेहो बेछप आ विलक्षण छनि। अपन देस-समाज केँ देखबाक आलोचनात्मक विवेक सब दिन वियोगी जी मे जाग्रत रहलनि, तेँ हुनकर कथाकला अपन उत्कर्ष धरि पहुँचल, जाहि लेल हुनकर कथा सब केँ बेस महत्त्व देल जाइत रहल अछि। हुनक कथा-लेखनक मादे पं. गोविन्द झा लिखने छथि— 'ललित-राजकमलक समय आ तारानंद वियोगीक समय मे महान अंतर अछि। पहिल विद्रूपता आ विसंगतिक समय छल तँ दोसर विकट संकटक समय। एहि संकट-काल मे मुख्य प्रश्न भ' गेल अछि अस्तित्व-रक्षाक। ललितक कालक जे स्थिति-रेखा छल, वियोगी जीक कथा-यात्रा तकर अतिक्रमण क' गेल अछि। मैथिली कथाक एक जीवन्त परंपरा हिनका एहि कथा-यात्रा मे संग दए रहल छनि आ तकर बोध सँ उद्भासित छथि। परंपरा-बोध आ अपन जीवन-अनुभव दुनू मिलि हिनका आबि तुलाएल संकट सँ लड़बाक ऊर्जा दैत अछि।'

Chhiyanat

Chhiyanat

Taranand Viyogi

18% off

₹ 345

₹ 282.9

Available

Rangayan

  • Author Name:

    Kunal

  • Book Type:
  • Description:

    पिछला चारि दशक सँ निरंतरताक संग प्रखरतापूर्वक मैथिली रंगमंच मे प्राण फुकनिहार समर्थ नाट्य निर्देशक कुणालक नव पोथी 'रंगायन' मैथिली नाटक एवं रंगमंचक साफ-सुथरा दर्पण अछि। एहन दर्पण जाहि मे मैथिली नाटक एवं रंगमंच अपन चेहरा संपूर्ण सामथ्र्य आ सीमाक संग निहारि सकैत अछि। कोनो भाषा मे नाटक पर नीक पोथीक अकाल। एहि अकाल बेला मे कुणाल अपन पोथी 'रंगायन' सँ मैथिली रंगमंचक लगभग सब कपाट (आयाम) खोलैत छथि। नाट्यालोचन मे नाट्येतर व्यक्तिक प्रवेश आ सामान्य आलोचनाक टूल्स सँ रंग समीक्षा, एहि विधाक विडंबना। कुणाल अनुभविये टा नहि अपितु सधल आ दक्ष निर्देशक रहलाहए। ई अकारण नहि जे ओ रंगशास्त्रक औजार सँ मैथिली नाटक आ रंगमंचक गंभीर सुधि लेब' मे पूर्ण समर्थ भेलाहए। कुणाल अपन रंग-आलोचना मे रंगपरंपरा, रंगशिल्प, रंगपीठ आ रंगभाषा आदि केँ सघन रूपें सम्पूर्ण रंगकर्म सँ जोडि़ दैत छथि। मैथिली नाट्यालोचन मे बहुत रास बात विस्तृत रूपें पहिल बेर कुणालजीक माध्यम सँ आबि रहल अछि जे स्वागतेय। समकालीन मैथिली रंगमंच, नाटक आ लोकनाट्य, रंगायन आ वातायन शीर्षक सँ चारि खंड मे विभाजित ई पोथी लगभग सम्पूर्ण मैथिली रंगमंचक खाका खींचैत अछि, संगहि एकर दशा, दिशा आ संभावनाक टोह लैत बेलाग, बेबाक मंतव्य सेहो दैत अछि। मैथिली रंगमंचक संग अन्य भारतीय भाषाक रंगमंच आ किछु वैश्विक रंगमंच सँ संवाद सेहो। रंग-अध्येताक संगहि छात्र सभक लेल सेहो बहुत उपयोगी पुस्तक। कुणालक संपूर्ण व्यक्तित्व रंगमय रहल अछि। आपादमस्तक रंगकर्मी। जाहि निष्ठा, ईमानदारी आ तत्परता संग कुणाल अपन जीवन मैथिली रंगमंचक नाम कयलनि, तकर निचोड़-अभिव्यक्तिक नाम अछि— 'रंगायन'। —कमलानन्द झा

Rangayan

Rangayan

Kunal

18% off

₹ 725

₹ 594.5

Available

Kanojadi

  • Author Name:

    Susmita Pathak

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Short Stories

Kanojadi

Kanojadi

Susmita Pathak

18% off

₹ 275

₹ 225.5

Available

Kaniya ek ghunghruawali

  • Author Name:

    Vibha Rani

  • Book Type:
  • Description:

    मैथिली मे नवम दशक सँ लेखनरत विभा रानी (1959) हिन्दी मे सेहो सक्रिय छथि। कथा, नाटक आ अनुवाद मे हुनक बहुत रास काज छनि। हिनक मौलिक सैंतीस टा आ अनूदित दस टा किताब प्रकाशित। विभा रानीक नवीनतम उपन्यास 'कनियाँ एक घुँघरुआवाली’क मादे मंतव्य: उपन्यास, जटिल आ स्त्री-मोनक लेल दमनकारी परिस्थितिक बीच कामनाक प्रतिफलन हेतु मर्म मे बसल संघर्षक निरंतरताक कथा कहैए। ई मिथिला-केंद्रित, स्त्री-प्रतिभाक प्रतिमान बनबाक कथा सेहो छी जे विडंबनाग्रस्त पितृ-सत्ताक अनवरत अवरोध, विरोध, छल-छद्मक अविराम प्रतिरोध करैए आ डोमकछ कें विस्तार दैए। —कुणाल नृत्य-संगीतक प्रति मैथिल समाज मे घोर उपेक्षा भाव कें उपन्यास मे आलोचनात्मक दृष्टिएँ दर्शाओल गेल अछि। मैथिल लोकनि गीत-नृत्यक रसिया होइत छथि ओकरा ई खूब नीक लगैत छनि, मुदा दोसरक बेटी-पुतोहु द्वारा कयल गेल नृत्य आ गाओल गेल गीत। —कमलानंद झा उपन्यास मे सामाजिक वातावरण, परिवेश, स्त्री-पुरुष लोकनिक संवाद उपन्यास कें सजीव रूप प्रदान करैत अछि। —बिभा कुमारी

Kaniya ek ghunghruawali

Kaniya ek ghunghruawali

Vibha Rani

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Kisan Andolan Aa Mithila Samaj

  • Author Name:

    Gourinath

  • Book Type:
  • Description:

    A Collection of Maithili Articles Collected from Antika Magazine

Kisan Andolan Aa Mithila Samaj

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Gourinath

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Available

Apna Najari Me

  • Author Name:

    Ed. Kedar Kanan

  • Book Type:
  • Description:

    Collection of Maithili Autobiographies

Apna Najari Me

Apna Najari Me

Ed. Kedar Kanan

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Available

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