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Tanya

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‘तनया’ महाभारत के महाकाश पर बलाका-सी उन्मुक्त उड़ती हुई उस भोली कन्या की कहानी है जिसका समाज-अहेरी ने तीर से बींधकर आखेट कर डाला था। तीर भी कोई साधारण तीर न था, जिससे कोई नहीं बच सकता। वह धर्म का तीर था, धर्मास्त्र था। समाज ने सामूहिक उपभोग हेतु एक निर्दोष नारी का आखेट कर डाला। उसकी आकांक्षाओं व सुखद जीवन की कल्पनाओं को सामूहिक भोज हेतु भून डाला। उसे महाभारत के वृहद् पर्वताकार के नीचे कहीं गहरी समाधि भी दे दी ताकि उसके मुख से आर्तनाद भी न निकल पाए और भावी पीढ़ियाँ समाज पर अन्याय का आक्षेप न लगा सकें। माधवी, पुरुष-प्रधान समाज में एक पुत्री थी, महत्त्वहीन नारी। उसके साथ जो व्यवहार किया गया उसे किसी ने अनुचित या अधर्मपूर्ण नहीं ठहराया, क्योंकि वह दीन-हीन नारी थी। वह जीवनभर अरण्यबाला बनी तपस्या करती रही। युवराजों की माता, राजमाता होकर भी वह जीवन भर पीड़ा पीती रही और उसकी पीड़ा अनकही-अनसुनी रह गई। वह स्वाहा हो गई लेकिन अपनी एक अमिट छाप छोड़ गई। यदि माधवी को महाभारत की सर्वोत्तम नारी पात्र कहा जाए तो अत्युक्ति न होगी। यह उपन्यास उसी माधवी की कीर्ति और बलिकथा को साहित्य-संसार में स्थापित करता है। एक अपूर्व वेदनाकुल गाथा, एक अवश्य पठनीय कृति!

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‘तनया’ महाभारत के महाकाश पर बलाका-सी उन्मुक्त उड़ती हुई उस भोली कन्या की कहानी है जिसका समाज-अहेरी ने तीर से बींधकर आखेट कर डाला था। तीर भी कोई साधारण तीर न था, जिससे कोई नहीं बच सकता। वह धर्म का तीर था, धर्मास्त्र था। समाज ने सामूहिक उपभोग हेतु एक निर्दोष नारी का आखेट कर डाला। उसकी आकांक्षाओं व सुखद जीवन की कल्पनाओं को सामूहिक भोज हेतु भून डाला। उसे महाभारत के वृहद् पर्वताकार के नीचे कहीं गहरी समाधि भी दे दी ताकि उसके मुख से आर्तनाद भी न निकल पाए और भावी पीढ़ियाँ समाज पर अन्याय का आक्षेप न लगा सकें।
माधवी, पुरुष-प्रधान समाज में एक पुत्री थी, महत्त्वहीन नारी। उसके साथ जो व्यवहार किया गया उसे किसी ने अनुचित या अधर्मपूर्ण नहीं ठहराया, क्योंकि वह दीन-हीन नारी थी। वह जीवनभर अरण्यबाला बनी तपस्या करती रही। युवराजों की माता, राजमाता होकर भी वह जीवन भर पीड़ा पीती रही और उसकी पीड़ा अनकही-अनसुनी रह गई। वह स्वाहा हो गई लेकिन अपनी एक अमिट छाप छोड़ गई। यदि माधवी को महाभारत की सर्वोत्तम नारी पात्र कहा जाए तो अत्युक्ति न होगी। यह उपन्यास उसी माधवी की कीर्ति और बलिकथा को साहित्य-संसार में स्थापित करता है। एक अपूर्व वेदनाकुल गाथा, एक अवश्य पठनीय कृति!

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2026
Weight
220 grams
ISBN-13
9789377470241
Pages
216
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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