Daastan-E-Guru Dutt
(0)
Author:
Mahmood FarooquiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ उस गुरुदत्त के दुःख और सृजनात्मक उल्लास की कथा है जिसने अपने वक़्त से आगे बढ़कर ‘प्यासा’, ‘काग़ज़ के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा को दीं। उस गुरुदत्त की जिसने बहुत कम उम्र में अपनी उम्मीदों-आकांक्षाओं के बाग़ों को खिलते भी देखा, और बहुत कम ही उम्र में अपने तमाम हासिल को परे रखकर उदासी की ऐसी राह पकड़ी जो कभी पलट न सकी। गुरुदत्त की दास्तान समाज के पाखंड और इनसान के पैदा किए रिवाज़ों से असहमत हर उस बेचैन रूह की दास्तान है जो इस दुनिया को, बड़े होने के इसके तमाम दावों से इतर, वास्तविक अर्थों में इसे बड़ा देखना चाहती है। ऐसी दुनिया जहाँ कोई किसी का ग़ुलाम न हो, कोई किसी का शिकार न हो। इस दास्तान में गुरुदत्त नाम की उस विकट पहेली की ज़िन्दगी के दृश्य भी हैं, उसकी जो फ़िल्में आज क्लासिक कही जाती हैं, उनके बनने की कहानी भी है, उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव, इश्क़, उसके शौक़ और उसकी ख़ुदकुश रचनात्मकता के क़िस्से भी, साथ ही हिन्दी सिनेमा के उस निर्णायक दौर की दिलचस्प जानकारी भी। और यह दास्तान कही दास्तानगोई के उस्ताद महमूद फ़ारूक़ी ने!
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About the Book
‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ उस गुरुदत्त के दुःख और सृजनात्मक उल्लास की कथा है जिसने अपने वक़्त से आगे बढ़कर ‘प्यासा’, ‘काग़ज़ के फूल’ और ‘साहब बीबी और गुलाम’ जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा को दीं। उस गुरुदत्त की जिसने बहुत कम उम्र में अपनी उम्मीदों-आकांक्षाओं के बाग़ों को खिलते भी देखा, और बहुत कम ही उम्र में अपने तमाम हासिल को परे रखकर उदासी की ऐसी राह पकड़ी जो कभी पलट न सकी।
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इस दास्तान में गुरुदत्त नाम की उस विकट पहेली की ज़िन्दगी के दृश्य भी हैं, उसकी जो फ़िल्में आज क्लासिक कही जाती हैं, उनके बनने की कहानी भी है, उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी के उतार-चढ़ाव, इश्क़, उसके शौक़ और उसकी ख़ुदकुश रचनात्मकता के क़िस्से भी, साथ ही हिन्दी सिनेमा के उस निर्णायक दौर की दिलचस्प जानकारी भी।
और यह दास्तान कही दास्तानगोई के उस्ताद महमूद फ़ारूक़ी ने!
Book Details
-
ISBN9789377371678
-
Pages156
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Book Type:

- Description:
आधुनिक भारतीय कथा - साहित्य में कहानी कहना बंगाल की कला है । प्रस्तुत रचना इस मान्यता का एक अच्छा उदाहरण है । धीरोदात्त नायक यहाँ नहीं है । है तो ढोड़ाय , जैसा मामूली नाम तैसा चरित , ततमा लोगों के पूरे सामाजिक संदर्भ में , जहाँ ' पक्की ' ( यानी पक्की सड़क ) आधुनिक जीवन और बाहरी तत्त्व को प्रतिकित करती है । यह ' पक्की ' ही पूरे उपन्यास को आदि से अंत तक जोड़े हुए है । जिस समाज में महज पक्की सड़क नयी रोशनी का प्रतीक हो , उसे आधुनिक संदर्भों में जोड़ना रचनात्मक और वैचारिक दोनों स्तरों पर ' कितना कठिन है , यह आसानी से समझा जा सकता है । पर प्रख्यात बंगला कथा - शिल्पी सतीनाथ भादुड़ी ने कलात्मक धीरज के साथ इस जोड़ को साधा है । यों एक बड़े कालगत अंतराल को कथाकार ने अपनी संवेदना से पूरा किया है । प्रसिद्ध बंगला उपन्यास ' ढोड़ाय चरितमानस ' हिंन्दी में प्रकाशित होने के पूर्व ही यहाँ विस्तृत चर्चा का विषय बना रहा है । तब हिंदी पाठक के मन में उसको लेकर अतिरिक्त उत्सुकता का होना स्वाभाविक है । ' मैला आँचल ' हिंदी के समकालीन क्लैसिकों में है । उसका मूल नक्शा यहाँ देखा जा सकता है , जिसे हिंदी के उपन्यासकार ने अपने ढंग से समृद्धतर किया है । यों हिंदी की आंचलिक कथा - धारा का एक स्रोत है । ' ढोड़ाय चरितमानस ' । इस दृष्टि से सामान्य से सामान्य पाठक और विशिष्ट से विशिष्ट शोधकर्ता के लिए यह कथा - कृति रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी ।
Bhavbhuti Katha
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description:
भवभूति आठवीं सदी में हुए थे। नाटककार थे, कवि थे। संस्कृत में लिखे उनके नाटकों को कालिदास की रचनाओं के बराबर माना जाता है।
यह उपन्यास उनके जीवन पर आधारित है, जिसकी मुख्य कथाधारा ब्राह्मण होने के बावजूद नाट्य-कर्म में उनकी प्रवृत्ति और उसके चलते अपने समाज में उनके संघर्ष के साथ-साथ चलती है।
महेश कटारे इससे पूर्व भर्तृहरि पर केन्द्रित एक अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास की रचना कर चुके हैं। भारत के सांस्कृतिक इतिहास के उल्लेखनीय पड़ावों को औपन्यासिक कलेवर में प्रस्तुत करते हुए वे तत्कालीन तथ्यों और आज के प्रश्नों को बराबर ध्यान में रखते हैं। देश, काल और पात्रानुकूल भाषा तथा जीवन-व्यवहार के विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए वे एक तरफ जहाँ अतीत को मूर्तिमान कर देते हैं, वहीं मानव-समाज और व्यवस्था के लिए हमेशा प्रासंगिक रहने वाले मुद्दों को भी अनदेखा नहीं करते।
भवभूति के बहुवर्णी चरित्र पर केन्द्रित यह उपन्यास भी उसका अपवाद नहीं है।
Bhartrihari : Kaya Ke Van Mein
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

- Description:
राजा भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि और योगी भर्तृहरि। उनके आयाम, समय और देश का अपार विस्तार। भर्तृहरि के जीवन में एक ओर प्रेम और कामिनियों के आकर्षण हैं तो दूसरी ओर वैराग्य का शान्ति-संघर्ष। वह संसार से बार-बार भागते हैं, बार-बार लौटते हैं। इसी के साथ उनके समय की सामाजिक, धार्मिक उथल-पुथल भी जुड़ी है। भर्तृहरि का द्वन्द्व सीधे गृहस्थ व वैराग्य का न होकर तिर्यक है। विशेष है। वह इसलिए कि वे कवि हैं, वैयाकरण भी। सुकवि अनेक होते हैं तथा विद्वान भी लेकिन भर्तृहरि जैसे सुकवि और विद्वान एक साथ बिरले ही होते हैं। सुपरिचित कथाकार महेश कटारे का यह उपन्यास इन्हीं भर्तृहरि के जीवन पर केन्द्रित है। इस व्यक्तित्व को, जिसके साथ असंख्य किंवदन्तियाँ भी जुड़ी हैं, उपन्यास में समेटना आसान काम नहीं था, लेकिन लेखक ने अपनी सामर्थ्य-भर इस कथा को प्रामाणिक और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया है। भर्तृहरि के निज के अलावा उन्होंने इसमें तत्कालीन सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों का भी अन्वेषण किया है। उपन्यास के पाठ से गुज़रते हुए हम एक बार उसी समय में पहुँच जाते हैं। भर्तृहरि के साथ दो बातें और जुड़ी हुई हैं—जादू और तंत्र-साधना। लेखक के शब्दों में, ‘मेरा चित्त अस्थिर था, कथा के प्रति आकर्षण बढ़ता और भय भी, कि ये तंत्र-मंत्र, जादू-टोने कैसे समेटे जाएँगे? भाषा भी बहुत बड़ी समस्या थी कि वह ऐसी हो जिसमें उस समय की ध्वनि हो।’ इतनी सजगता के साथ रचा गया यह उपन्यास पाठकों को कथा के आनन्द के साथ इतिहास का सन्तोष भी देगा।
Ateet Ke Chalchitra
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

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‘अतीत के चलचित्र’ हिन्दी गद्य की एक अप्रतिम रचना है। इतने दिनों बाद आज भी संवेदना के वे धरातल अछूते और अपूर्व हैं जिनकी सृष्टि इन रेखाचित्रों द्वारा हुई थी। मानवीय सहानुभूति और संवेगों की गहनता के लिए इन्हें चिरकाल तक हिन्दी साहित्य का शीर्षस्थ पद प्राप्त रहेगा।
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