Mulla Naseeruddin Ki Anokhi Duniya
(0)
₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मुल्ला नसीरुद्दीन की कहानियों का मतलब है—ऐसी कहानियाँ जिनमें उलझनों के बीच भी जीवन के आनन्द, आह्लाद और मनोरंजन की त्रिवेणी प्रवाहित हो। मुल्ला नसीरुद्दीन में वह सब कुछ है जो आज के जीवन में होता है। ज़िन्दगी जीने की जद्दोजहद, तिकड़म, जालसाजी, उलट-फेर, वर्चस्व का संघर्ष, मूर्खता, चतुराई और ऐसा बहुत-कुछ समेटे इन कहानियों की तासीर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है तथा उदासी के गहन पलों में भी मनुष्य में जिजीविषा उत्पन्न करती है। यही इन कहानियों की विशेषता है कि सदियों से ये कहानियाँ जीवन्त हैं। मुल्ला नसीरुद्दीन की इन कहानियों के प्रशंसक जिस तरह हमारे देश में हैं, उसी तरह विश्व के अनेक देशों में भी हैं। मुल्ला नसीरुद्दीन एक आला इनसान था जो इस दुनिया को बुद्धिमत्ता, वाक्चातुर्य, मनोरंजन और हास्य-विनोद की तरकीबें सिखाने के लिए आया था। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह गाँव-दर-गाँव, शहर-दर-शहर होता हुआ एक देश से दूसरे देश घूमता रहा और अपने उद्देश्य की सार्थकता के लिए अपने पीछे ढेरों क़िस्से छोड़ गया।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
मुल्ला नसीरुद्दीन की कहानियों का मतलब है—ऐसी कहानियाँ जिनमें उलझनों के बीच भी जीवन के आनन्द, आह्लाद और मनोरंजन की त्रिवेणी प्रवाहित हो।
मुल्ला नसीरुद्दीन में वह सब कुछ है जो आज के जीवन में होता है। ज़िन्दगी जीने की जद्दोजहद, तिकड़म, जालसाजी, उलट-फेर, वर्चस्व का संघर्ष, मूर्खता, चतुराई और ऐसा बहुत-कुछ समेटे इन कहानियों की तासीर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है तथा उदासी के गहन पलों में भी मनुष्य में जिजीविषा उत्पन्न करती है। यही इन कहानियों की विशेषता है कि सदियों से ये कहानियाँ जीवन्त हैं।
मुल्ला नसीरुद्दीन की इन कहानियों के प्रशंसक जिस तरह हमारे देश में हैं, उसी तरह विश्व के अनेक देशों में भी हैं।
मुल्ला नसीरुद्दीन एक आला इनसान था जो इस दुनिया को बुद्धिमत्ता, वाक्चातुर्य, मनोरंजन और हास्य-विनोद की तरकीबें सिखाने के लिए आया था।
अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वह गाँव-दर-गाँव, शहर-दर-शहर होता हुआ एक देश से दूसरे देश घूमता रहा और अपने उद्देश्य की सार्थकता के लिए अपने पीछे ढेरों क़िस्से छोड़ गया।
Book Details
-
ISBN9788183615785
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Tenaliram Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
दक्षिण भारत के गुंटूर ज़िले के गली पाडु नामक क़स्बे में एक सामान्य गृहस्थ के घर में तेनालीराम का जन्म हुआ था। उसके माता-पिता बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे जिसके कारण उन्होंने अपने पुत्र का नाम रामलिंगम रखा। तेनालीराम यानी रामलिंगम अभी बहुत छोटा था, तभी उसके पिता का निधन हो गया। रामलिंगम की माता पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वे अपनी ससुराल ‘गली पाडु’ से अपने भाई के पास लौट आईं। उनका भाई ‘तेनाली’ नामक क़स्बे में रहता था। तेनाली में रामलिंगम सामान्य बच्चों की तरह ही खेलता-पढ़ता हुआ बड़ा होने लगा। उसे गुरु के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया, उस समय किसी ने सोचा न था कि अपनी मेधा के बल पर तेनालीराम ऐसी ख्याति अर्जित करेगा कि सदियों, सहस्त्राब्दियों तक लोग उसकी बुद्धि, न्यायप्रियता और हाज़िर जवाबी की कहानियाँ कहते रहेंगे। अपनी कुशाग्रबुद्धि और मिलनसारिता के गुणों के कारण तेनालीराम बचपन में ही लोगों के आकर्षण का केन्द्र हो गए थे। मूल नाम रामलिंगम तो था ही, गुरुकुल में उसे तेनाली वाला रामलिंगम कहा जाने लगा और बाद में यही तेनालीराम बन गए। तेनालीराम के बुद्धि-बल को लेकर इतनी किंवदन्तियाँ हैं जिनसे लगता है कि तेनालीराम जैसा कुशाग्र व्यक्ति दक्षिण भारत में न उनके पहले जन्मा था और न बाद में।
Shekhchilli Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
शेखचिल्ली एक ऐसा कथा-नायक है जो आमलोक-जीवन के संघर्षों से बार-बार उबरता है और बार-बार उन्हीं संघर्षों में जुत जाता है। उसमें ईमानदारी है, निष्ठा है, मर्यादा है, परिस्थितिजन्य विवेक है, लगन और उत्साह है और इन सबसे बड़ी बात यह भी है कि वह अपने वर्तमान में जीता है। अतीत की स्मृतियों को उलीचता हुआ, वर्तमान की राह बनाता हुआ यह पात्र कभी भविष्य की चिन्ता में डूबता-उतराता नहीं है। जीवन के उतार-चढ़ाव में संयत रहते हुए मनमौजी जीवन जीता हुआ शेखचिल्ली कई बार हमें मूर्ख या बेवकूफ़ प्रतीत होता है, किन्तु उसकी अजीबो-ग़रीब हरकतों में समय की ऐसी समझ समाई रहती है कि पाठक उसकी सराहना किए बिना नहीं रह सकता। ये कहानियाँ शेखचिल्ली की कारस्तानियों का मनोरंजक विस्तार हैं। इस संग्रह में शेखचिल्ली की अलग-अलग कहानियाँ किसी माला में गूँथे गए मनकों की तरह पिरोई गई हैं। इस कथा-संग्रह की विशेषता है कि शेखचिल्ली के जीवन के कालखंडों को दर्शाती कथाओं को इसमें इस तरह रखा गया है कि उनका अलग अस्तित्व बना रहे और उसके जीवन की विकास-यात्रा की निरन्तरता का भी पता चलता रहे। आज भी उसकी कहानियाँ जहाँ हमें हँसाती हैं, वहीं जुल्म का सामना करने का साहस भी प्रदान करती हैं। रोचक और सरल भाषा में लिखी गई ये कहानियाँ पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने का वादा करती हैं और दावा भी कि कोई है जो इन्हें पढ़कर हँसे बिना रह सके!
Gopal Bhand Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
प्राचीन काल में बंगाल में एक राज्य था—कृष्णनगर। इस राज्य के लोग शान्ति-प्रिय थे। कला-संस्कृति के प्रति इस राज्य के लोगों का गहरा लगाव था। कृष्णनगर पर ऐसे तो अनेक शासकों ने राज्य किया किन्तु जो प्रसिद्धि राजा कृष्णचन्द्र राय ने पाई, उसकी अन्य किसी से तुलना नहीं की जा सकती। राजा कृष्णचन्द्र राय सहृदय प्रजापालक, हास-परिहास में रुचि लेनेवाले न्यायप्रिय शासक थे। उनके शासनकाल में कृष्णनगर की प्रजा हर तरह से सुखी थी क्योंकि राजा कृष्णचन्द्र राय प्रजा के दु:ख से दु:खी, प्रजा के सुख से सुखी होते थे। आमोदप्रिय होने के कारण महाराज कृष्णचन्द्र राय के दरबार में विभिन्न कलाओं के विद्वानों को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था, उनके दरबार में गोपाल नाम का एक युवक ‘विदूषक’ के रूप में शामिल किया गया। गोपाल की तीव्र मेधाशक्ति, वाक्पटुता और परिस्थितिजन्य विवेक से कार्य करने की विशिष्ट क्षमता ने जल्दी ही उसे राजा कृष्णचन्द्र राय के दरबार का ख़ास अंग बना दिया। विचित्रतापूर्ण सवालों को हल करने में गोपाल की चतुराई काम आती थी। इस कारण अपने जीवनकाल में ही गोपाल किंवदन्ती बन गया था। आज भी बंगाल के गाँवों में लोगों को गोपाल भाँड़ की चुटीली कहानियाँ कहते-सुनते देखा जा सकता है। इन कहानियों में व्यंग्य है, हास्य है, रोचकता है, चतुराई है, न्याय है और है सबको गुदगुदा देनेवाली शक्ति।
Gudiya Rang Bharegi : Gudiya Aur Dada
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
‘गुड़िया रंग भरेगी’ शृंखला एक दादा द्वारा अपनी प्यारी-दुलारी नन्ही पोती के लिए लिखी गई कविताओं की शृंखला है। इस शृंखला की पुस्तक ‘गुड़िया और दादा’ में दादा ने अपनी नन्ही पोती की मासूमियत और उसकी शरारतों को कविता के रूप में व्यक्त किया है। एक दादा के प्यार-दुलार और ममता को संप्रेषित करने वाली ये कविताएं पढ़ने वाले के मन को मोह लेती हैं। मासूमियत, निश्छलता और स्नेह से भरी ये कविताएं पढ़ने वालों को तमाम रंगों से भर देती हैं। यह सिर्फ़ कविताओं की ही नहीं बल्कि रंगों की भी किताब है। कविताओं वाली यह कलरिंग बुक बच्चों को कविताओं के साथ साथ कलर करने की खुशी भी देगी। पुस्तक के चित्र और चित्रों के बीच कविताएँ उसे आकर्षक और रोचक बनाती हैं। बच्चों के लिए सुन्दर उपहार।
Radhakrishna Nobel Puraskar Kosh : 1901-2016
- Author Name:
Ashok Maheshwari +1
- Book Type:

- Description:
मेरा डायनामाइट दुनिया में शान्ति के लिए होनेवाले हज़ारों सम्मेलनों से भी जल्दी शान्ति ला देगा।' —अल्फ़्रेड नोबेल डायनामाइट का आविष्कार करनेवाले 'पागल वैज्ञानिक' ने जब अपनी वसीयत में एक ऐसी संस्था स्थापित करने की बात कही, जिससे 'उन लोगों को पुरस्कार (राशि) बाँटे जाएँ, जिन्होंने मानव जाति के लिए अपनी सेवाएँ प्रदान की हों', तो यक़ीनन उनका सपना विश्व शान्ति ही था। लेकिन इसके बावजूद विवाद लगातार सामने आते रहे। सोवियत रूस की सरकार ने सखारोव को 'शान्ति पुरस्कार' दिए जाने का विरोध जताया, तो चीन ने दलाई लामा को पुरस्कार दिए जाने पर। फिर भी नोबेल पुरस्कारों की स्वीकार्यता या इनके महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता। सौ वर्षों से भी अधिक समय से इन पुरस्कारों की निरन्तरता अपने-आपमें एक अद्भुत करिश्मा है। 'नोबेल पुरस्कार कोश' का उद्देश्य है नोबेल पुरस्कारों के सम्बन्ध में पाठकों को पर्याप्त और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराना। इस कोश में नोबेल पुरस्कारों के संस्थापक अल्फ़्रेड नोबेल की वसीयत के साथ ही उससे जुड़े विवादों व अन्य तथ्यों पर भी प्रकाश डाला गया है। रसायन व भौतिकी, साहित्य, चिकित्सा, शान्ति और अर्थशास्त्र के लिए दिए जानेवाले ‘नोबेल पुरस्कार’ के 1901 से 2016 तक के विजेताओं के नाम, परिचय के साथ पुरस्कार के मद्देनज़र उनके कार्य का विस्तृत ब्यौरा इस कोश में संकलित हैं। पुरस्कार विजेताओं की सूची के साथ ही पुरस्कृत संस्थाएँ, ‘नोबेल पुरस्कार’ से सम्मानित महिलाएँ, दो बार पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों, एक ही परिवार के पुरस्कृत विजेताओं, मरणोपरान्त पुरस्कार प्राप्त करनेवालों, पुरस्कार लेने से मना करनेवालों इत्यादि की भी विस्तृत व प्रामाणिक जानकारी इस कोश में उपलब्ध कराई गई है। इससे पहले ‘नोबेल पुरस्कार’ के बारे में इतनी अधिक और परिपूर्ण जानकारी देनेवाला कोई कोश हिन्दी में उपलब्ध नहीं था। इस दिशा में यह अपने-आपमें बहुत बड़ा प्रयास है। 116 वर्षों के अनूठे इतिहास को सँजोए यह कोश पाठकों के लिए संग्रहणीय है।
Akbar Birbal Ki Nok Jhonk
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
अकबर और बीरबल के व्यंग्य-विनोद से सजी कहानियों का यह संग्रह जीवन की कठिनतम परिस्थितियों में भी सूझ का दामन थामे रहने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा देने का माद्दा रखता है। अकबर-बीरबल की चुहल-भरी इन कहानियों में जीवन की अठखेलियाँ हैं तो समय का विद्रूप भी। लोभ, ईर्ष्या और स्वार्थ की अचम्भित कर देनेवाली अनेक घटनाओं से अप्रभावित रह सकने के सूझ-भरे दृष्टिकोणों का हैरतअंगेज चित्रण भी इस संग्रह की कहानियाँ करती हैं। सच कहा जाए तो अकबर और बीरबल के बीच चलनेवाली नोक-झोंक में जीवन के गूढ़ रहस्य पैवस्त हैं जो पाठक को हौसला भी देते हैं, और गुदगुदाते भी हैं। ये कहानियाँ हँसी का दामन थामे हुए चलना सिखाती हैं और बताती हैं कि उन्मुक्त परिहास का असर किस तरह स्थायित्व ग्रहण कर लेता है। संग्रह की कहानियों के विषय-वैविध्य लुभाते हैं। जीवन-व्यापार की समस्त विसंगतियों और विडम्बनाओं के साथ सहज हास्य को सहेजती-बटोरती चलती ये कहानियाँ जीवन के गूढ़ रहस्यों को खोलती हैं।
Gudiya Rang Bharegi : Gudiya Ke Khel
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
‘गुड़िया रंग भरेगी’ शृंखला एक दादा द्वारा अपनी प्यारी-दुलारी नन्ही पोती के लिए लिखी गई कविताओं की शृंखला है। इस शृंखला की पुस्तक ‘गुड़िया के खेल’ में एक दादा की नज़र से पोती की शरारतों, उसके खेल, उसकी तमाम अठखेलियों और उसकी सजधज को सुंदर कविता पंक्तियों के द्वारा व्यक्त किया गया है। एक प्यारी बच्ची की खिलखिलाहटें कैसे पूरे घर-परिवार को रौशन रखती हैं—इन कविताओं को पढ़ कर पता चलता है। एक दादा के प्यार-दुलार और ममत्व को संप्रेषित करने वाले ये कविताएं पढ़ने वाले के मन को मोह लेती हैं। मासूमियत, निश्छलता और स्नेह से भरी ये कविताएं पढ़ने वालों को तमाम रंगों से भर देती हैं। यह सिर्फ़ कविताओं की ही नहीं बल्कि रंगों की भी किताब है। कविताओं वाली यह कलरिंग बुक बच्चों को कविताओं के साथ साथ कलर करने की खुशी भी देगी। पुस्तक के चित्र और चित्रों के बीच कविताएं उसे आकर्षक और रोचक बनाती हैं। बच्चों के लिए एक सुंदर उपहार।
Gonu Jha Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
मिथिलांचल में गोनू झा के किस्से उसी तरह प्रचलित हैं जैसे मछली और मखाना! कहते हैं कि बिना मछली और मखाना के मिथिलांचल में कोई शुभ कार्य नहीं होता और बिना गोनू झा के किस्सों के कोई जलसा सम्पन्न नहीं होता। मिथिलांचल में पाँच सौ साल पहले अज्ञान भी था और अभाव भी। चोरी, ठगी आदि के किस्सों से इस बात का अन्दाज सहज ही लग जाता है। साधु-महात्माओं के किस्से भी गोनू झा के किस्सों के साथ-साथ चलते हैं। इन किस्सों से पता चलता है कि मिथिलांचल के तत्कालीन समाज में अन्धविश्वासों का व्यापक प्रभाव था। जादू, टोना-टोटका आदि के सहारे लोग अपनी शक्ति और सामर्थ्य बढ़ाने का प्रयास करते थे। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि गोनू झा के जीवनकाल की घटनाओं के साथ ही विभिन्न काल-खंडों में उनके किस्सों में नए किस्से भी जुड़ते गए हैं जिसके कारण पाँच शताब्दियों के बाद भी ये किस्से नयापन लिये हमारे सामने आ रहे हैं और आते ही जा रहे हैं। ये किस्से रोचक हैं, मनोरंजक हैं और ज्ञानवर्द्धक भी। लगन, मेहनत, धैर्य, वाक्पटुता, अवसर की समझ जैसे कई गुण इन किस्सों में पिरोए गए हैं, जो अनजाने ही पाठकों के मन में घर कर जाते हैं।
Akbar Birbal Ki Anokhi Duniya
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
अकबर विनोदप्रिय शासक था। मनोरंजन और ज़िन्दादिली का मुरीद। बीरबल का बुद्धिबल तीव्र था। वह समझ लेता था कि बादशाह अकबर की किस भंगिमा का क्या अर्थ है, और बीरबल अकबर की भंगिमा के अनुरूप अपने आपको ढाल लेता था। इसी विशेषता के कारण बीरबल अकबर का सखा बन गया था। अपनी तेज बुद्धि, मनोरंजक बातें, सूझ-पूर्ण ढंग से समस्याओं को सुलझाने और समयानुकूल निर्णय लेने की दक्षता के कारण बीरबल ने अकबर के दरबार में ही नहीं, बल्कि उसके जीवन और मन में भी स्थान बना लिया था। समय के साथ बीरबल और अकबर के क़िस्से मशहूर होने लगे। अपनी रोचकता, मनोरंजन की क्षमता और हाज़िरजवाबी की मिसाल होने के कारण इन क़िस्सों ने तब से लेकर अब तक की लम्बी यात्रा की है और आज भी रोचकता और आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। अकबर और बीरबल के विविध प्रसंगों को लेकर कही गई ये कहानियाँ जहाँ पाठकों का मनोरंजन करती हैं, वहीं उन्हें समयानुकूल आचरण करने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
Gudiya Rang Bharegi : Gudiya Aur Pariwar
- Author Name:
Ashok Maheshwari
- Book Type:

- Description:
‘गुड़िया रंग भरेगी’ शृंखला एक दादा द्वारा अपनी प्यारी-दुलारी पोती के लिए लिखी गई कविताओं की शृंखला है। इस शृंखला की पुस्तक ‘गुड़िया और परिवार’ में गुड़िया के परिवार के सभी सदस्यों के साथ गुड़िया की शरारतों, गुड़िया के लिए उनके प्यार को व्यक्त करती कविताएं संकलित हैं। एक प्यारी बच्ची की खिलखिलाहटें कैसे पूरे घर-परिवार को रौशन रखती हैं—इन कविताओं को पढ़ कर पता चलता है। एक दादा के प्यार-दुलार और ममत्व को संप्रेषित करने वाले ये कविताएं पढ़ने वाले के मन को मोह लेती हैं। मासूमियत, निश्छलता और स्नेह से भरी ये कविताएं पढ़ने वालों को तमाम रंगों से भर देती हैं। यह सिर्फ़ कविताओं की ही नहीं बल्कि रंगों की भी किताब है। कविताओं वाली यह कलरिंग बुक बच्चों को कविताओं के साथ साथ कलर करने की खुशी भी देगी। पुस्तक के चित्र और चित्रों के बीच कविताएं उसे आकर्षक और रोचक बनाती हैं। बच्चों के लिए एक सुंदर उपहार।
Aawo bachhon tumhe sunayen
- Author Name:
Alok Kumar
- Book Type:

- Description:
नेहा, आयशा, कबीर और राहुल भी बाकि बच्चों की तरह पार्क में बैठकर मोबाइल की दुनिया में व्यस्त थे। तभी उन्हें वहाँ एक रहस्यमयी बूढ़ा व्यक्ति मिलता है जो उन्हें कहानियाँ सुनाने की पेशकश करता है। इसके बाद तो बच्चों को कहानियों का ऐसा चस्का लगता है कि उनकी हर शाम पार्क में उस व्यक्ति के साथ कहानियाँ सुनते हुए गुजरने लगती है। दूसरी तरफ उनके माता-पिता के पास अपने बच्चों के लिए समय ही कहाँ था? वे तो अब भी मोबाइल के संसार में उलझे हुए थे। ऐसे में बच्चे एक बेहद खतरनाक निर्णय लेते हैं.. निर्णय था घर से भाग निकलने का।
Jadui Jungle aur Ashwamanavon ki wapsi
- Author Name:
Mithilesh Gupta
- Book Type:

- Description:
ये कहानी कई सौ बरस पुरानी है.. ये कहानी है उस जंगल की, जो न सिर्फ जादुई था, बल्कि कुछ अजीबोगरीब रहस्यों से भरा हुआ था। ये कहानी है उन अश्वमानवों की, जिन पर कभी इस जंगल का भविष्य निर्भर था। ये कहानी उन तिलिस्मी वृक्षों की भी है जिन्होंने जंगल के इतिहास को करीब से देखा और जिनकी हुकूमत उस जादुई जंगल के कोने-कोने तक फैली हुई थी! लेकिन वक्त बदला और एक दुष्ट सर्प 'सर्पांग' ने उस सुनहरे जंगल को अपनी विषैली शक्तियों के आगोश में ले लिया। और फिर वह जादुई जंगल व उसके विलक्षण प्राणी फिर कभी किसी को नजर नहीं आए। 1300 साल बाद, फिर समय बदला और अब 'अश्वमानवों' को देखा जाना इस बात का सुबूत है कि वाकई कुछ जादुई घटनाएं घटने वाली है। लेकिन क्या... कोई नहीं जानता...
Namo Bhagwate...
- Author Name:
Devesh Singhi
- Book Type:

- Description:
गणेश ने आकर शिकायत की, “पिताजी, निमन्त्रित करके भी कुबेर ने मुझे भरपेट भोजन नहीं करवाया, मुझे कितनी भूख लगी है।” शिव हँस पड़े, बोले, “पुत्र, माता के बिना तुम्हें संसार में कोई तृप्त नहीं कर सकता है। जाओ अन्दर जाकर भोजन करो, माता भोजन बनाकर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हैं।” तब तक देवी पार्वती स्वयं भोजन की थाली सजाकर बाहर आ गईं। पार्वती ने बड़े स्नेह से बालक गणेश के सिर पर हाथ फेरा। फिर अपने हाथ से दो ग्रास बालक गणेश को खिलाए। गणेश ने अघाकर डकार ली और तीसरा कौर खाने से इनकार कर दिया। पार्वती पुकारती रहीं, आग्रह करती रहीं, मनाती रहीं, परन्तु गणेश दौड़कर दूर भाग गए। शिव ने मुस्कराकर कुबेर को देखा, कुबेर ने सिर झुका लिया। बोला, “सचमुच ख्याति की कामना से परोसे गए मेरे भोजन में यह रस व स्वाद कहाँ था जो इन दो ग्रास में है। मैं ऐश्वर्य के मद में अन्धा कुबेर इतना भी नहीं समझ सका कि तृप्ति स्नेह व निष्काम भाव से मिलती है। मेरे अभिमान ने संसार में मुझे हँसी का पात्र बना दिया।”
Devi-Devtaon ki Kahaniyan
- Author Name:
Mukesh 'Nadan'
- Book Type:

- Description:
हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की बहुत मान्यता है। घर-घर में अनेक देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना अपूर्व श्रद्धा, आस्था, प्रेम और विधि-विधान से की जाती है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता भी है कि इन देवी-देवताओं की संख्या करोड़ों में है। इनके प्रति असीम भक्ति और मान्यताओं ने ही इनकी अनेक कथाओं को जन्म दिया। रामायण, गीता, उपनिषद आदि अनेक ग्रंथ और पुराणों में इन्हीं वंदनीय देवी-देवताओं की रोचक एवं मनोरंजक कथाएँ प्रचलित हैं। प्रस्तुत पुस्तक पुराणों तथा अन्य हिंदू वाङ्मय-गं्रथों से चुनी गई ऐसी श्रेष्ठ कथाओं का संग्रह है, जो अनेक देवी-देवताओं के रहस्यमयी जीवन की घटनाओं को उजागर करती हैं। अपने धर्म के प्रति आस्था जाग्रत् करने और इष्टदेवी-देवताओं के प्रति भक्ति में तल्लीन होने का संदेश देती पठनीय पुस्तक।
Bhojpuri Loksahitya
- Author Name:
Prakash Uday +2
- Book Type:

- Description:
लोक की व्याप्ति अत्यंत व्यापक है। इसमें मनुष्य ही नहीं सृष्टि के समस्त चर-अचर अर्थात पशु-पक्षी, वृक्ष-नदी, पर्वत-घाटियाँ, गाँव-शहर आदि सम्मिलित माने जाते हैं। इस लोक की धड़कनों एवं सुख-दुखात्मक अनुभवों की जितनी जीवंत और प्रामाणिक अभिव्यक्ति लोकसाहित्य में मिलती है उतनी अन्यत्र दुर्लभ है। इस लिहाज से भोजपुरी लोकसाहित्य के इस संकलन में भोजपुरी लोकसमाज के सुख-दुख, हास-रुदन, आशा-निराशा, राग-द्वेष के स्पंदनों को बड़ी सूक्ष्मता से सुना एवं अनुभव किया जा सकता है। इस संकलन की एक खासियत यह है कि इसमें भोजपुरी लोकसाहित्य की पाठ्य-सामग्री को मूल रूप में भोजपुरी में ही रखा गया है। सामान्यतः इस तरह के संकलनों में मूल लोकभाषा का रूप रख सकना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। इसलिए अक्सर सुविधा की दृष्टि से पाठ्य-सामग्री को खड़ीबोली में रख दिया जाता है। इससे पाठक सम्बन्धित लोकभाषा के मूल आस्वाद से वंचित रह जाता है। इस बात को दृष्टिगत करते हुए भोजपुरी लोकसाहित्य के लोकगीतों, गाथाओं, कथाओं, लोकोक्तियों आदि की जो सामग्री इस संकलन में रखी गई है वह मूल भोजपुरी में ही है। इस पुस्तक में लोकसाहित्य के विभिन्न पक्षों की जानकारी देने के साथ खासतौर से भोजपुरी लोकसाहित्य पर पर्याप्त सामग्री दी गई है। इससे विद्यार्थियों एवं अध्येताओं को लोकसाहित्य के सामान्य परिचय के साथ भोजपुरी लोकसाहित्य की एक व्यापक पृष्ठभूमि की जानकारी हो जाती है। यह संकलन हिन्दी क्षेत्र की विभिन्न लोक भाषाओं में मौजूद प्रचुर लोकसाहित्य को मूल भाषा में सामने लाने की दिशा में एक मानक संकलन बन सकता है, क्योंकि अभी तक पाठ्यपुस्तक के रूप में इस तरह का प्रयास लगभग नहीं दिखाई देता।
Gondvana Ki Lokkathayen
- Author Name:
Vijay Chourasia
- Book Type:

- Description:
आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति रुचि जाग्रत करने हेतु रोचक साहित्य उपलब्ध कराया जाता रहा है। उसी शृंखला में बैगा एवं गोंड जनजातियों की बहुचर्चित लोककथाओं के संग्रह को यहाँ प्रकाशित किया जा रहा है। गोंड तथा बैगा जनजाति के अनेक पहलू अभी भी शेष समाज के लिए अविदित हैं। इनकी प्रथाएँ, परम्पराएँ, धार्मिक आस्थाएँ, कला, लोक-नृत्य एवं संगीत आदि हममें न केवल कौतूहल उत्पन्न करते हैं, बल्कि हमें आह्लादित भी करते हैं। इनके साथ-साथ इस जनजाति के पास विशिष्ट लोककथाओं, गाथाओं, किंवदन्तियों एवं मिथकों आदि का भी विपुल भंडार है जो एक धरोहर के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तान्तरित होते हुए सदियों से अक्षुण्ण चला आ रहा है। इनकी कथाओं में जहाँ समाज के स्वरूप, संगठन एवं सामाजिक आस्थाओं के दर्शन होते हैं, वहीं ये व्यक्ति व समाज को सृष्टि तथा सृष्टि के रचयिता के साथ भी जोड़ती हैं। गोंड एवं बैगा जनजाति की लोककथाओं के अकूत भंडार में से कुछ रोचक लोककथाएँ यहाँ प्रस्तुत की जा रही हैं। यह कार्य भरपूर परिश्रम, अनन्य आस्था और परिपूर्ण शोधवृत्ति से किया गया है। आशा है, जनजातीय संस्कृति में रुचि रखनेवालों और सुधी पाठकों को यह प्रयास अवश्य पसन्द आएगा।
Tani Kathayein : Arunachal Ke Taani Aadivasi Samaj Ki Vishvadrishti
- Author Name:
Joram Yalam Nabam
- Book Type:

- Description:
किसी समाज में प्रचलित लोककथाएँ उसकी सभ्यता-संस्कृति की जड़ों तक पहुँचने का सूत्र होती हैं। अतीत में प्रत्येक पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से सुनकर और परवर्ती पीढ़ी को सुनाकर समाज के अनुभव और ज्ञान की इस संचित निधि को सुरक्षित रखती आई। लेकिन आधुनिक तौर तरीकों के प्रसार के साथ-साथ आम जनजीवन जैसे-जैसे बदलता गया वैसे-वैसे सदियों पुरानी यह परम्परा कमजोर पड़ती गई। ऐसे में लोककथाओं को वाचिक के भरोसे छोड़ देने के बजाय लिखित रूप में संग्रहीत-प्रकाशित करना आवश्यक हो गया। इस संदर्भ म युवा लेखकजोराम यालाम नाबाम की किताब ‘तानी कथाएँ : अरुणाचल के तानी आदिवासी समाज की विश्वदृष्टि’ एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। जोराम ने न केवल अरुणाचल प्रदेश के तानी समाज की लोककथाओं को इकट्ठा किया है बल्कि उनको आधार बनाकर इस आदिवासी समाज के विश्वासों, परम्पराओं, आचार-विचार, खान-पान आदि पक्षों का युक्तिसंगत विश्लेषण कर तानी समाज के जीवन-दर्शन को प्रस्तुत किया है। जोराम बतलाती हैं कि प्रकृति के समस्त चराचर के साथ अभिन्नता का भाव तानियों की विश्वदृष्टि की विशेषता है जो उनके दैनंदिन जीवन में सहज दिखाई देती है। जिसे अधिकतर गैर आदिवासी समाजों में देख पाना मुश्किल है। इन कथाओं से तानी समाज के धार्मिक विश्वासों का संकेत भी मिलता है जिनमें प्रकृति को प्रमुखता दी गयी है। धर्म को सांगठनिक या सांस्थानिक स्वरूप देने से परहेज किया गया है। पूरी प्रकृति पूजनीय है इसलिए अलग से किसी के लिए मंदिर निर्माण या पूजा आदि का विधान नहीं बनाया गया। तानी समाज की ये बातें न सिर्फ जानने योग्य हैं बल्कि मानव सभ्यता के संकटग्रस्त वर्तमान के संदर्भ में एक विश्वसनीय विकल्प का आधार तैयार करने वाली हैं। एक अत्यंत पठनीय और विचारणीय किताब!
Tani Kathayein : Arunachal Ke Taani Aadivasi Samaj Ki Vishvadrishti
Joram Yalam Nabam
20% off₹ 299
₹ 239.2
Available
Sone ka Nevla
- Author Name:
Smt. Sudha Murty
- Book Type:

- Description:
अर्जुन के कितने नाम थे? यम को शाप क्यों मिला? एक नन्हे नेवले ने युधिष्ठिर को क्या पाठ पढ़ाया? कुरुक्षेत्र का युद्ध, जिसने देवों को भी पक्ष लेने पर विवश कर दिया, भले ही आप सब जानते हों; परंतु इसके पहले, इसके बाद और इसके दौरान भी ऐसी असंख्य कथाएँ हैं, जो महाभारत को विविध रूप और छटा प्रदान करती हैं। इस संग्रह में प्रख्यात लेखिका सुधा मूर्ति इन अल्पज्ञात और असाधारण कथाओं के माध्यम से भारत के महानतम महाकाव्य के रोचक जगत् से नए सिरे से परिचय करवा रही हैं, जिनमें से प्रत्येक कथा आपको विस्मित और मंत्रमुग्ध करने की क्षमता रखती है। समृद्ध भारतीय वाङ्मय के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण ग्रंथ की लोकप्रिय पठनीय कथाओं का अद्भुत संकलन।
Ethiopia ki Lok Kathayen 1 Folk Tales of Ethiopia
- Author Name:
Sushama Gupta
- Book Type:

- Description:
लोककथाएँ किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। आज से करीब सौ साल पहले ये लोककथाएँ केवल जबानी ही कही जाती थीं और कह-सुनकर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौंप दी जाती थीं, इसलिए किसी भी लोककथा का मूल रूप क्या रहा होगा, यह कहना मुश्किल है। यह पुस्तक ऐसी ही कुछ अंग्रेजी की और कुछ दूसरी भाषा बोलनेवाले देशों की लोककथाएँ हिंदी भाषा बोलनेवाले समाज तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है। इनमें से बहुत सारी लोककथाएँ अंग्रेजी की पुस्तकों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दिए गए शोध-प्रबंधों से, कुछ पत्रिकाओं से संकलित की हैं एवं कुछ कहानियाँ लोगों से सुनकर भी लिखी हैं। अब तक एक हजार से अधिक लोककथाएँ संकलित की जा चुकी हैं। इनमें से चार सौ से भी अधिक लोककथाएँ तो अकेले अफ्रीका की ही हैं। ये सभी लोककथाएँ ‘देश-विदेश की लोककथाएँ’ शीर्षक शृंखला के अंतर्गत प्रकाशित हो रही हैं। आशा है, ये लोककथाएँ पाठकों का मनोरंजन तो करेंगी ही, साथ में दूसरे देशों के समाज-रीति-नीति-संस्कृति व परंपराओं के बारे में भी जानकारी देंगी।
Jharkhand Ki Lokkathayen
- Author Name:
Dr. Mayank Murari
- Book Type:

- Description:
भारतीय संस्कृति केवल लिखित शास्त्रों में ही नहीं, बल्कि यह मौखिक परंपराओं के कारण भी समृद्ध हुई है। मौखिक परंपरा में लोक-साहित्य एक बड़ा क्षेत्र है, जिसमें लोककथाएँ, कहावतें, लोरियाँ, लोक-खेल, लोक-गीत और लोक-नाट्य शामिल हैं। लोक-साहित्य भारतवर्ष नामक भवन का आधार है, जिस पर समस्त भारतीय साहित्य टिका हुआ है। लोककथाएँ किसी क्षेत्र विशेष की कथाएँ हैं, जो परंपरागत रूप से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती जाती हैं। इनका अस्तित्व जनश्रुतियों के माध्यम पर निर्भर करता है। लोककथा की प्राचीनता भारतीय संस्कृति के इतिहास के साथ जुड़ी है। लोक-जीवन में प्रचलित कथाओं की भावभूमि पर ही हितोपदेश, वेताल पंचविंशति, जातक कथा, बृहत्कथा मंजरी जैसे ग्रंथों में कथाओं की रचना की गई। लोककथा मंगलकामना की भावना को समावेशित किए होती है। सबके सुख, शुभ और मंगल की कामना एवं चाहत ही लोककथाओं का मूल संदेश होता है। युगों से लोककथाएँ मानव-मूल्यों का संवहन करती रही हैं। यह एक सच्चाई है कि जैसे-जैसे हमारे जीवन से लोक एवं लोककथाएँ गुम होती गईं, वैसे-वैसे मानव-मूल्यों का भी क्षरण होता गया। इस संकलन में झारखंड की पंचपरगनिया, कुडुख, संताली आदि की कुछ चुनिंदा लोककथाओं का संकलन किया है जिनसे वहाँ की समृद्ध लोक-संस्कृति, परिवेश और परंपराओं की जानकारी पाठकों को मिल सकेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book