Safal Jeevan
About the book
क्या दूसरों के लिए अपने जीवन को मिटा देना या दूसरों की खुशी, दूसरों के दुख में सम्मिलित होना ही जीना है, या यही सफल जीवन है। लेखक ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है। लेखक कहते हैं कि जिस जीवन में संपूर्णता नहीं तो उसका कोई औचित्य भी नहीं। एक उद्देश्यहीन या औचित्यहीन जीवन को हम सफल जीवन कदापि नहीं कह सकते। क्षमाशीलता के बारे में लेखक लिखते हैं की यह गुण मनुष्य को नई उपलाधियों तक पहुंचाने के लिए सीढ़ी का काम करता हैं। इसी प्रकार स्पर्धा किसी एक व्यक्ति से नहीं वरन स्वयं से होनी चाहिए। लेखक लिखते हैं कि सफल जीवन वह नहीं है जो आप जी रहे हैं। सफल जीवन का अर्थ हैं आप अंतर आत्मा से, अपने जीवन से संतुष्ट हो भले ही आपके जीवन में बड़ी-बड़ी कार, बंगलो में नहीं अपितु झोपड़ी में व्यतीत किया जा रहा हैं। लेखक भय को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं जो उसके किसी भी क्षेत्र में उन्नति करने से रोकता हैं। ईर्ष्या पर लेखक के द्वारा लिखी पंक्ति ईर्ष्या तू न गई मन से की याद दिलाती हैं। इस पुस्तक में लिखी ईर्ष्या का मतलब पढ़ने से गहराई से समझ आता हैं। लेखक बताते है हमारी वाणी संभवत हमारे संस्कारों पर निर्भर करती है। मीठी वाणी तथा प्रेम पूर्वक व्यवहार जग में सभी का दिल जीत लेता है। जबकि कटु वाणी से हम सबका दिल दुखाते है और अपने लिए दूसरों के मन में घृणा पैदा करते हैं। पुस्तक व्यक्ति को एक नये सिरे से जीना सिखाती है। व्यक्ति के अन्दर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। जो व्यक्ति को एक नई सोच के साथ जीवन व्यतीत करने के लिए उत्साहित करता है। लेखक अंत में हमारे जीवन की बात करते हुये कहते है की जीवन का अर्थ है कि आप अपनी अंतरात्मा से संतुष्ट हो प्रसन्न हो चाहे वह संसार की बेशुमार सुख, सुविधा से परे हो कर एक सरल जीवन ही क्यों न हो। लेखक ने विभिन्न विचारधाराओं के बुद्धिजीवियों का वक्तव्य रखकर सफल जीवन के बारे में समझाने का प्रयास किया है। यह पुस्तक आपको जीवन में सफल होने के लिए प्रेरित करती है। हर पृष्ठ आपको नई चेतना, नई स्फूर्ति देने वाला है।
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About the Book
क्या दूसरों के लिए अपने जीवन को मिटा देना या दूसरों की खुशी, दूसरों के दुख में सम्मिलित होना ही जीना है, या यही सफल जीवन है। लेखक ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया है। लेखक कहते हैं कि जिस जीवन में संपूर्णता नहीं तो उसका कोई औचित्य भी नहीं। एक उद्देश्यहीन या औचित्यहीन जीवन को हम सफल जीवन कदापि नहीं कह सकते।
क्षमाशीलता के बारे में लेखक लिखते हैं की यह गुण मनुष्य को नई उपलाधियों तक पहुंचाने के लिए सीढ़ी का काम करता हैं। इसी प्रकार स्पर्धा किसी एक व्यक्ति से नहीं वरन स्वयं से होनी चाहिए।
लेखक लिखते हैं कि सफल जीवन वह नहीं है जो आप जी रहे हैं। सफल जीवन का अर्थ हैं आप अंतर आत्मा से, अपने जीवन से संतुष्ट हो भले ही आपके जीवन में बड़ी-बड़ी कार, बंगलो में नहीं अपितु झोपड़ी में व्यतीत किया जा रहा हैं। लेखक भय को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु मानते हैं जो उसके किसी भी क्षेत्र में उन्नति करने से रोकता हैं।
ईर्ष्या पर लेखक के द्वारा लिखी पंक्ति ईर्ष्या तू न गई मन से की याद दिलाती हैं। इस पुस्तक में लिखी ईर्ष्या का मतलब पढ़ने से गहराई से समझ आता हैं। लेखक बताते है हमारी वाणी संभवत हमारे संस्कारों पर निर्भर करती है। मीठी वाणी तथा प्रेम पूर्वक व्यवहार जग में सभी का दिल जीत लेता है। जबकि कटु वाणी से हम सबका दिल दुखाते है और अपने लिए दूसरों के मन में घृणा पैदा करते हैं।
पुस्तक व्यक्ति को एक नये सिरे से जीना सिखाती है। व्यक्ति के अन्दर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। जो व्यक्ति को एक नई सोच के साथ जीवन व्यतीत करने के लिए उत्साहित करता है। लेखक अंत में हमारे जीवन की बात करते हुये कहते है की जीवन का अर्थ है कि आप अपनी अंतरात्मा से संतुष्ट हो प्रसन्न हो चाहे वह संसार की बेशुमार सुख, सुविधा से परे हो कर एक सरल जीवन ही क्यों न हो।
लेखक ने विभिन्न विचारधाराओं के बुद्धिजीवियों का वक्तव्य रखकर सफल जीवन के बारे में समझाने का प्रयास किया है। यह पुस्तक आपको जीवन में सफल होने के लिए प्रेरित करती है। हर पृष्ठ आपको नई चेतना, नई स्फूर्ति देने वाला है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rachnaye Fulfilled
- Weight
- 350 grams
- ISBN-13
- 9798890022486
- Pages
- 134
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- IN
- Dimensions
- 15 × 20 cm
- Language
- Hindi
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