Anam Path Ka Pathik

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Author:

Vibhuti Jha

Language:

Hindi

Category:

Other

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यह साधारण होते हुए भी एक असाधारण दस्तावेज है। यह न तो कहानी है, न यात्रा वृत्तान्त। यह एक व्यक्ति के 'लौटने' की गाथा है। बोरिस पास्तरनाक के उपन्यास डॉ. जिवागो में युद्ध से लौटता हुआ सैनिक ट्रेन की खिड़की से बाहर देखता है। घर लौटते हुए उसे लग रहा था, मानो युद्ध, मृत्यु और विनाश के लम्बे मरुस्थल के बाद पहली बार वह किसी वास्तविक घटना का अनुभव कर रहा है। वह घटना थी, उसका धीरे-धीरे घर के पास पहुँचना। एक ऐसा घर जो अब भी सुरक्षित है, जिसकी हर ईंट-पत्थर से वह परिचित है। यह जीवन का असली, अर्थपूर्ण अनुभव था। उसकी भटकती यात्रा का एकमात्र लक्ष्य। विभूति दा घर 'लौटने' के लिए घर को 'छोड़ते' हैं। वे वह सबकुछ छोड़कर अनायास स्वयं से भी मुक्त होते हुए 'कहीं के' लिए निकल पड़ते हैं। यह कहीं, कहीं है भी या नहीं? इस पर उनका जोर भी नहीं है। सायास सिर्फ इतना है कि जीने का कोई भी भौतिक सहारा साथ नहीं होना चाहिए। न धन, न महत्वाकांक्षा और न यश। विभूति दा की यह डायरी अबूझ सी सच्ची कहानी है। यह सत्य की अभिव्यक्ति है। —चिन्मय मिश्र

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ISBN
9789348399182
Pages
352
Avg Reading Time
12 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

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यह साधारण होते हुए भी एक असाधारण दस्तावेज है। यह न तो कहानी है, न यात्रा वृत्तान्त। यह एक व्यक्ति के 'लौटने' की गाथा है। बोरिस पास्तरनाक के उपन्यास डॉ. जिवागो में युद्ध से लौटता हुआ सैनिक ट्रेन की खिड़की से बाहर देखता है। घर लौटते हुए उसे लग रहा था, मानो युद्ध, मृत्यु और विनाश के लम्बे मरुस्थल के बाद पहली बार वह किसी वास्तविक घटना का अनुभव कर रहा है। वह घटना थी, उसका धीरे-धीरे घर के पास पहुँचना। एक ऐसा घर जो अब भी सुरक्षित है, जिसकी हर ईंट-पत्थर से वह परिचित है। यह जीवन का असली, अर्थपूर्ण अनुभव था। उसकी भटकती यात्रा का एकमात्र लक्ष्य। विभूति दा घर 'लौटने' के लिए घर को 'छोड़ते' हैं। वे वह सबकुछ छोड़कर अनायास स्वयं से भी मुक्त होते हुए 'कहीं के' लिए निकल पड़ते हैं। यह कहीं, कहीं है भी या नहीं? इस पर उनका जोर भी नहीं है। सायास सिर्फ इतना है कि जीने का कोई भी भौतिक सहारा साथ नहीं होना चाहिए। न धन, न महत्वाकांक्षा और न यश। विभूति दा की यह डायरी अबूझ सी सच्ची कहानी है। यह सत्य की अभिव्यक्ति है। —चिन्मय मिश्र

Book Details

  • ISBN
    9789348399182
  • Pages
    352
  • Avg Reading Time
    12 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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