1000 Hindi Vastunishtha Prashnottari
Author:
Braj Kishore Prasad SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
"कोई भी भाषा महज इसलिए बड़ी नहीं होती कि उसके बोलनेवालों की संख्या अधिक है, बल्कि वह इसलिए बड़ी होती है कि करोड़-करोड़ जनता के हृदय और मस्तिष्क की भूख मिटाने का वह प्रभावशाली साधन होती है। भारत में हिंदी भाषा की वही स्थिति है। हिंदी साहित्य का भंडार विस्तृत है। गद्य-पद्य, दोनों में विपुल साहित्य की रचना हुई है।
किसी भी साहित्य का उसके सम्यक् रूप में पारायण कर पाना बड़ा कठिन है। आज के व्यस्त समय में पाठक के पास न तो इतना समय है और न धैर्य। अतः हिंदी साहित्य के सार रूप को प्रश्नोत्तर शैली के एक हजार प्रश्नों के अंदर समोने की कोशिश की गई है। हालाँकि इतनी बड़ी विषय-वस्तु को मात्र हजार प्रश्नों में बाँध पाना अत्यंत दुष्कर कार्य रहा।
प्रस्तुत पुस्तक में हिंदी साहित्य के कलेवर को विभिन्न अध्यायों में बाँटकर विवेचित किया गया है, यथा—हिंदी साहित्य का इतिहास, काव्य शास्त्र, भाषा एवं व्याकरण, साहित्यिक विधाओं के साथ-साथ विविध अध्याय में मिश्रित प्रश्नों को समेटा गया है।
पुस्तक के अंत में पाठकोपयोगी हिंदी साहित्येतिहास प्रश्नोत्तर को शामिल किया गया है। विद्यार्थी, शिक्षार्थी, प्रतियोगी परीक्षार्थी, शोधार्थी, अध्यापक ही नहीं, सामान्य हिंदी-प्रेमी पाठकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी पुस्तक।
ISBN: 9788177211382
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Amirt
- Author Name:
Hare Krishna Jha
- Book Type:

- Description: समकालीन मैथिली कविताक एक टा महत्त्वपूर्ण स्तंभ हरे कृष्ण झाक गद्य-लेखन मात्रा मे कम अवश्य छनि, मुदा कविक गद्यक विशिष्टता सभ सँ भरल-पुरल आ विचारशील लेखनक लेल एक टा नीक बानगी जकाँ। एहि पुस्तक मे हिनक कुल सात गोट आलेख छनि जाहि मे सँ एक हुनक कविता-संग्रह 'एना त नहि जे'क भूमिका थिक आ से अपन कथ्य-शिल्प मे हुनक आत्मकथ्य सदृश्य लगैत अछि। एक टा आरो भूमिका अछि जे विटमनक कविताक अनूदित पोथी 'ई थिक जीवन' लेल लिखल गेल छल। एहि आलेख सँ विश्व कविताक परिप्रेक्ष्य मे कवि-अनुवादक हरे कृष्ण झाक दृष्टि केँ बढिय़ा जकाँ बुझल जा सकैछ। अंतिम आलेख हुनक एक टा भाषणक अविकल प्रस्तुति थिक शेष चारि टा लेख मैथिली आलोचनाक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थिक। चारि मे सँ एक लेख थिक राजकमल चौधरीक कविता 'महावन' पर केंद्रित जे कि 'अंतिका'क राजकमल विशेषांक मे छपल छल आ कैक टा नव अर्थक संधान करैत ई लेख स्वतंत्र रूप सँ एक कविता पर केंद्रित आलोचनाक उत्कृष्ट आ विरल उदाहरण अछि। दोसर लेख धूमकेतुक प्रसिद्ध कथा 'छठि परमेसरी' पर केंद्रित मैथिली मे अपना तरह विशिष्ट प्रयास थिक। मनुक्खक जीवन धर्मक चक्र मे फँसि क' कोना लहूलुहान होइत अछि आ बजार तकर कोना दोहन करैत अछि, हरे कृष्ण जी तकर व्याख्या खूब गहींर जाक' सविस्तार कयलनि अछि। तकरा बाद रामकृष्ण झा 'किसुन' आ मायानंद मिश्रक कथा पर केंद्रित हुनक दू गोट महत्त्वपूर्ण आलोचनात्मक लेख छनि। जहिना सूझ-बूझ संग ओ किसुन जीक कथाक मर्म केँ बुझबाक प्रयास करैत छथि, प्राय: ओही आत्मीयता संग मायानंद मिश्रक कथाक सूक्ष्म पड़ताल सेहो करैत छथि। हरे कृष्ण झाक ई पुस्तक जत' हुनक विचार आ साहित्य-सरोकार केँ बुझै-जानैक कुंजी दैत अछि, ओतहि हुनक आलोचना भविष्यक आलोचक केँ बेसी ऊहिक संग काज करबाक लेल प्रेरित सेहो करैत अछि। —गौरीनाथ
Thake Paon Se Barah Kos (Stories)
- Author Name:
Neeraj Neer
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Young India
- Author Name:
Lala Lajpat Rai
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Trading With Chart Pattern And Price Action Breakout | Price Action Trading | Candlestick Patterns Technical Analysis By Mahesh Chandra Kaushik
- Author Name:
Mahesh Chandra Kaushik
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
MAIN STEVE JOBS BOL RAHA HOON
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: "स्टीव जॉब्स को कंप्यूटर तकनीक का ‘माइकेल एंजेलो’ कहा गया है। जिन उपकरणों का आविष्कार एवं प्रसार उन्होंने किया, उनके पीछे सुविधा और साधन की सहजता के साथ कलात्मक प्रस्तुति अहम रहती थी। छोटे कंप्यूटर हों, संगीत सुनने के यंत्र हों, मोबाइल उपकरण हों या निपट संकुचित टैबलेट संयंत्र, सुरुचि और प्रतिभा के बल पर स्टीव जॉब्स ने अपने बनाए उपकरणों को दुनिया भर में पहचान दिलाई। ऐसी प्रतिभा कम ही लोगों में होती है। असीम कल्पनाशीलता के बल पर कंप्यूटरों के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर से लेकर बनावट तक में उन्होंने अलग छाप छोड़ी। स्टीव जॉब्स ने आईपॉड की खोज करके संगीत की दुनिया को लोगों की जेबों में समेट दिया। आईफोन बनाया तो फोन में कंप्यूटर का जादुई अहसास भर दिया। फिर आईपैड के आविष्कार ने सूचना तकनीक की तमाम सुविधाओं को एक उपकरण में इकट्ठा कर दिया। इस तरह उन्होंने कंप्यूटर जैसे उपकरण को रोजमर्रा की आवश्यकता बना दिया। इससे दुनिया भर में सूचना-क्रांति को काफी बल मिला। प्रस्तुत पुस्तक में स्टीव जॉब्स की प्रेरक सूक्तियों का संकलन किया गया है, जो नवाचार, कठोर परिश्रम, लगन और टीमवर्क की भावना को बल देती हैं।"
BPSC TRE 3.0 Bihar Teacher Recruitment Class 1-12 "Samanya Adhyayan" General Studies Part-2 | Complete Study Guide (Hindi)
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
A Syntactic Grammar of Hindi
- Author Name:
Prof Suraj Bhan Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Grahak Andolan
- Author Name:
Siddhartha Shankar Gautam
- Book Type:

- Description: आधुनिक काल के भारतीय ग्राहक आंदोलन के 50 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और इन 50 वर्षों की यात्रा में ग्राहक पंचायत ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्राहक को उसका कानूनी अधिकार प्राहृश्वत हो तथा जहाँ अभी अधिकार प्राहृश्वत नहीं है, वहाँ आंदोलन और समाज के साथ से कानूनी अधिकार की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो। व्यापारी और ग्राहक के मध्य यदि आर्थिक आचरण ठीक न हो तो यह सामाजिक व्यवस्था को छन्न-भिन्न कर देता है। ग्राहक पंचायत ने इसी आर्थिक आचरण के व्याप्तिकरण हेतु जागरण के इतर जहाँ संभव हो, वहाँ संघर्ष का मार्ग चुना है और उसके इस मार्ग से निस्संदेह ग्राहक-हितों को व्यापक संरक्षण प्राहृश्वत हुआ है। आधुनिक ग्राहक हितों के इन्हीं संघर्षों को लक्षित करती है भारतीय ग्राहक आंदोलन यात्रा की यह पुस्तक।
First Lady Spy Of INA: Neera Arya
- Author Name:
Madhu Dhama
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
AAO SEEKHEN JODNA
- Author Name:
MUKESH
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Showman : Raj Kapoor
- Author Name:
Ritu Nanda
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
CHUHA AUR USKI TOPI
- Author Name:
Bharti Mittal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sadak Se Sansad Tak
- Author Name:
Shivanand Tiwari
- Rating:
- Book Type:

- Description: लोहिया, जेपी, किशन पटनायक, रामानन्द तिवारी, कर्पूरी ठाकुर वाली परम्परा के ही नेता हैं शिवानंद तिवारी। जितना लम्बा उनका राजनीतिक जीवन है आज की राजनीति में कम लोगों का है। वे गैर-कांग्रेसी, गैर-भाजपाई राजनीति करते रहे हैं और सन् पैंसठ के पहले से सक्रिय हैं। बाबा के नाम से विख्यात शिवानन्द जी के पास अनुभव, किस्सों और प्रत्यक्ष देखी घटनाओं का सम्भवत: सबसे बड़ा खजाना है। वे साठ के दशक के आखिर में शुरू हुए अंग्रेजी हटाओ आन्दोलन वाले दौर से सक्रिय रहे हैं और चौहत्तर के जेपी आन्दोलन के अगुआ लोगों में हैं। उन्होंने किशन पटनायक के साथ लोहिया विचार मंच और समता संगठन की राजनीति की और उनसे अलग होकर भी उनकी वैचारिक और व्यावहारिक राजनीति के पाठ से अलग नहीं हुए। इन भाषणों और टिप्पणियों से उनके चिन्तन का दायरा और दिशा झलकती है। साफ लगता है कि भूमंडलीकरण और साम्प्रदायिक राजनीति उनकी चिन्ता के केन्द्र में है। शिवानंद जी के इन भाषणों में किसानों की आत्महत्या, बुनकरों की भुखमरी और आत्महत्या, पेटेंट रीजीम से होने वाली मुश्किलों और उसकी कानूनी लड़ाई, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा गरीबों का भोजन बढ़ाने से महँगाई आने के कुतर्क की आलोचना, किसानों के खेती छोड़ने पर टिप्पणी है। और इसमें से काफी चीजों के लिए नई आर्थिक नीतियों को दोषी बताया गया है। यह आलोचना सही थी और यह किताब का महत्त्व है क्योंकि भूमंडलीकरण के पूरे दौर में कहीं से संसद के अन्दर इन नीतियों की आलोचना नहीं हुई।
Parivrajak: Meri Bhraman Kahani
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। हिंदू धर्म में घोर आडंबर और अंधविश्वासों का बोलबाला हो गया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की। इसके पहले हिंदू धर्म विभिन्न छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलाई। प्रस्तुत पुस्तक 'परिव्राजक: मेरी भ्रमण कहानी' में स्वामीजी ने अपनी यूरोप यात्रा के माध्यम से सरल शब्दों में तत्कालीन इतिहास, कला, समाज, जीवन-दर्शन इत्यादि का अत्यंत रोचक वर्णन प्रस्तुत किया है। इनके माध्यम से व्यक्ति अपने तत्कालीन ज्ञान-दर्शन को सहज ही प्रशस्त कर सकता है। स्वामी विवेकानंद की यात्रा-वृत्तांत की यह पुस्तक हमें सांस्कृतिक-सामाजिक यात्रा का आनंद देगी।
Ek Aur Neemsaar
- Author Name:
Richa Nagar
- Book Type:

-
Description:
‘एक और नीमसार : संगतिन आत्ममन्थन और आन्दोलन’ उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में सक्रिय पाँच हज़ार दलित और ग़रीब महिलाओं, मज़दूरों और किसानों के संगठन—‘संगतिन किसान मज़दूर संगठन’ के जीवन्त आन्दोलन का दस्तावेज़ है। संगठनात्मक सफ़र के कड़वे-मीठे सचों से भरी इस किताब में संगतिन के तमाम साथियों का कथन और आत्ममन्थन तो है ही, साथ में उनके रोज़मर्रा के संघर्षों की कहानियाँ और उनके सपनों की कविता भी है।
मुल्कों की सरहदों और रात-दिन के फ़ासलों को मिटाकर ऋचा नागर और ऋचा सिंह की संयुक्त लेखनी ने 2004 से 2011 तक के इस सफ़रनामे को कुछ इस तरह पेश किया है कि इसमें डायरी और नाटक, शोध और उपन्यास, कविता और सामाजिक विश्लेषण के रस आपस में घुल-मिलकर पाठक को बाँध लेते हैं।
इस पुस्तक में जहाँ एक ओर हाशिये पर जी रहे लोगों का एक ऐतिहासिक आन्दोलन बनता हुआ दीखता है, वहीं उन्हीं साथियों के बीच मौजूद भावनात्मक और वैचारिक दीवारों और खाइयों को लेकर हो रही जद्दोजहद भी दीखती है। इसी तरह जहाँ एक ओर सरकारी नीतियों और रोज़-दर-रोज़ के मुद्दों को लेकर गाँवों में चलनेवाले सत्ता, वर्ग, जाति और लिंग के संघर्ष उजागर होते हैं, वहीं गाँवों और ज़िले की हदों के भीतर हो रही घटनाओं का राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर चल रही प्रक्रियाओं से गहरा रिश्ता और सरोकार भी दीखता है।
The Law of Success
- Author Name:
Napoleon Hill
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Pramanik Hindi-Angrezi-Urdu Shabdkosh
- Author Name:
Zubair Ahmad Bhagalpuri
- Book Type:

- Description: प्रख्यात कोशकार ज़ुबैर अहमद भागलपुरी द्वारा सम्पादित यह डिक्शनरी एक नई अवधारणा पर आधारित है। यह एक ही समय में हिन्दी-अंग्रेज़ी शब्दकोश भी है और हिन्दी-उर्दू शब्दकोश भी। इस प्रकार दो शब्दकोशों के कुशलतापूर्वक मेल से तैयार यह त्रैभाषिक डिक्शनरी न केवल अत्यधिक उपयोगी बन गई है बल्कि कोश-निर्माण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान है। इसमें संकलित शब्दों की दृष्टि से देखें तो जनसामान्य के उपयोग की शब्दावली की प्रविष्टि तो इसमें है ही, राजकीय और प्रशासनिक स्तर पर इस्तेमाल में आने वाले पारिभाषिक शब्दों को भी इसमें शामिल किया गया है। शब्द-संकलन करते समय रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले शब्दों को प्राथमिकता दी गई है। भाषा के स्वभाव और स्वरशास्त्र (फोनेटिक्स) को ध्यान में रखते हुए डिक्शनरी में शब्दों के उच्चारण में व्यावहारिकता पर बल दिया गया है। इसी कारण उर्दू के शब्द ‘ख्वाब’, ‘ख्वाजा’ और ‘ख्वाहिश’ जैसे शब्दों को इसमें ‘खाब’, ‘खाजा’ और ‘खाहिश’ लिखा गया है। उर्दू के किसी शब्द के अन्तिम अक्षर के अन्त में आने वाले ‘हा-ए-ख़फ़ी’ का देवनागरी लिप्यन्तरण करते समय अमूमन विसर्ग का उपयोग किया जाता है, लेकिन उच्चारण को ध्यान में रखते हुए यहाँ ऐसे शब्दों के लिप्यन्तरण में विसर्ग के बजाय ‘आ’ की मात्रा अर्थात ‘अलिफ़’ का उपयोग किया गया है। समान स्वर लेकिन भिन्न अर्थ रखने वाले शब्दों का अन्तर स्पष्ट करने के लिए उनके लिप्यन्तरण में नुक़्ते का प्रयोग किया गया है। इसमें अनेक बहुचर्चित तकनीकी शब्दों के उर्दू विकल्प भी दिये गए हैं। निश्चय ही यह सबके लिए अन्यन्त उपयोगी और संग्रहणीय है।
Hum Ujale Joidte Hain
- Author Name:
Dr. Ram Prakash
- Book Type:

- Description: Book
Raghuvir Sahay Sanchayita
- Author Name:
Raghuvir Sahay
- Book Type:

- Description: रघुवीर सहाय (1929–90) का एक रूप आधुनिक मिज़ाज के प्रतिनिधि का है, दूसरा आधुनिकता के समीक्षक का। उनके रचना-जगत को इन दोनों रूपों में देखना और इन रूपों के बीच एक अँधेरा–सा छोड़ देना आसान भी है, उचित भी। आसान इस कारण है कि आधुनिक मिज़ाज और उसकी अभिव्यक्ति के पर्याय समझे जानेवाले लक्षण रघुवीर सहाय के जीवनवृत्त में उतनी ही सुविधा से पहचाने जा सकते हैं, जितनी सुविधा से हम इन पर्यायों की कठोर नैतिक जाँच रघुवीर सहाय के लेखन कविता और गद्य, दोनों में ढूँढ़ सकते हैं। उचित इसलिए है क्योंकि निरे तार्किक विश्लेषण और उसके आधार पर फ़ैसला ले लेने या सुना देने की प्रवृत्ति से सचेत होकर बचने की चिन्ता रघुवीर सहाय की रचनाओं में गहरे बैठी दिखाई देती है। विश्वास के साथ दुविधा और भय रघुवीर सहाय का प्रतिनिधि स्वभाव है। इसीलिए उन्हें आधुनिकता का प्रतिनिधि और समीक्षक, दोनों कहना सही है। सम्प्रभु राज्य और लोकतंत्र आधुनिकता की इन दो सबसे विराट संरचनाओं को रघुवीर सहाय ने प्रसार माध्यमों के ज़रिए ही सबसे ज़्यादा जाना। इन संरचनाओं के चरित्र और बल से आकार लेते हुए सामाजिक इतिहास में रघुवीर सहाय की अपनी हिस्सेदारी मुख्यत: पत्रकारिता के माध्यम से सम्पन्न हुई। ‘दिनमान’ साप्ताहिक को एक प्रसार–माध्यम से ज़्यादा संवाद–माध्यम बनाना निश्चय ही उनके पेशेवर जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष था। रघुवीर सहाय के काव्य का एक बड़ा और महत्त्वपूर्ण हिस्सा इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में समझे जाने पर ही खुलता है।
Media ka Vartmaan Paridrishya
- Author Name:
Rakesh Praveer
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...