Kala Jaadu
About the book
...शौकत स्कूल से आया और खाना खाकर उठा ही था कि गिर पड़ा। उसकी हालत वैसी हो गई जैसी दो दिन पहले हुई थी। यह देखने में वैसा ही मिर्गी का दौरा लगता था। उसके हाथ और पांव मुड़ गए। शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उसके मुंह से हल्के हल्के खर्राटे निकलने लगे। इसके साथ ही आंगन में एक पत्थर गिरा जो टेनिस की गेंद जितना बड़ा था। नसीमा इतनी डरी कि उसने बाहर जाकर न देखा और कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। दूसरा पत्थर धमाके से दरवाजे पर लगा। इतनी तेज़ आवाज़ आई कि नसीमा सर से पांव तक हिल गई और उस पर बेहोशी जैसी छा गई। उसमें इतनी-सी हिम्मत भी नहीं थी कि शौकत को उठाकर पलंग पर लिटा दे। आंगन में तीन-चार और पत्थर एक-दूसरे के बाद गिरे। नसीमा ने 'जल तू जलाल तू' -पढ़ना शुरू कर दिया। कमरे में कहीं से धुआं उठ रहा था। नसीमा ने इधर-उधर देखा। उसका पर्स तिपाई पर रखा था। धुआं उसमें से निकल रहा था। नसीमा ने दौड़कर पर्स उठाया। खोलकर देखा तो उसमें सारे नोट जल चुके थे। ये पाँच और दस के नोट थे। अजीब बात यह थी कि आग ने पर्स को जरा सा भी नहीं झुलसाया था। नसीमा पर्स को देख रही थी कि आंगन में फिर से पत्थर गिरने की आवाज सुनाई दी। नसीमा अब वहां अकेली नहीं ठहर सकती थी। शौकत का कांपता हुआ शरीर उसका अजीब तरह से मुड़ा हुआ चेहरा, खुली हुई आंखें, जो लाल हो गई थी और उसके मुड़े हुए हाथ नसीमा को डरा रहे थे। वह इस तरह अचानक बाहर को दौड़ पड़ी जैसे किसी ने उसे पीछे से धक्का दिया हो… एक रोमांचक कहानी जो कदम-कदम पर मोड़ लेती है।
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...शौकत स्कूल से आया और खाना खाकर उठा ही था कि गिर पड़ा। उसकी हालत वैसी हो गई जैसी दो दिन पहले हुई थी। यह देखने में वैसा ही मिर्गी का दौरा लगता था। उसके हाथ और पांव मुड़ गए। शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उसके मुंह से हल्के हल्के खर्राटे निकलने लगे। इसके साथ ही आंगन में एक पत्थर गिरा जो टेनिस की गेंद जितना बड़ा था।
नसीमा इतनी डरी कि उसने बाहर जाकर न देखा और कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। दूसरा पत्थर धमाके से दरवाजे पर लगा। इतनी तेज़ आवाज़ आई कि नसीमा सर से पांव तक हिल गई और उस पर बेहोशी जैसी छा गई। उसमें इतनी-सी हिम्मत भी नहीं थी कि शौकत को उठाकर पलंग पर लिटा दे। आंगन में तीन-चार और पत्थर एक-दूसरे के बाद गिरे। नसीमा ने 'जल तू जलाल तू' -पढ़ना शुरू कर दिया। कमरे में कहीं से धुआं उठ रहा था। नसीमा ने इधर-उधर देखा। उसका पर्स तिपाई पर रखा था। धुआं उसमें से निकल रहा था। नसीमा ने दौड़कर पर्स उठाया। खोलकर देखा तो उसमें सारे नोट जल चुके थे। ये पाँच और दस के नोट थे। अजीब बात यह थी कि आग ने पर्स को जरा सा भी नहीं झुलसाया था। नसीमा पर्स को देख रही थी कि आंगन में फिर से पत्थर गिरने की आवाज सुनाई दी।
नसीमा अब वहां अकेली नहीं ठहर सकती थी। शौकत का कांपता हुआ शरीर उसका अजीब तरह से मुड़ा हुआ चेहरा, खुली हुई आंखें, जो लाल हो गई थी और उसके मुड़े हुए हाथ नसीमा को डरा रहे थे। वह इस तरह अचानक बाहर को दौड़ पड़ी जैसे किसी ने उसे पीछे से धक्का दिया हो…
एक रोमांचक कहानी जो कदम-कदम पर मोड़ लेती है।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Neelam Jasoos Karyalay
- Publication year
- 2020
- Weight
- 250 grams
- ISBN-13
- 9789395289283
- Pages
- 147
- Reading time
- ~5 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 20.5 × 20.5 cm
- Language
- Hindi
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