Neelam Jasoos Karyalay
नीलम जासूस कार्यालय का परिचय नीलम जासूस कार्यालय (NJK) भारत के सबसे प्रतिष्ठित हिन्दी पल्प फिक्शन प्रकाशनों में से एक है, जिसकी स्थापना वर्ष 1959 में दिल्ली में स्वर्गीय श्री सत्यपाल वार्ष्णेय द्वारा की गई थी। पिछले छह दशकों से अधिक समय से यह संस्थान हिन्दी जासूसी, अपराध, रहस्य, थ्रिलर, जासूसी (स्पाई) तथा सामाजिक उपन्यासों के प्रकाशन में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है और देशभर के लाखों पाठकों के बीच एक विश्वसनीय एवं लोकप्रिय नाम के रूप में स्थापित है। हिन्दी पल्प साहित्य के स्वर्णिम दौर, अर्थात् 1960 और 1970 के दशक में, नीलम जासूस कार्यालय ने ‘नीलम जासूस’ तथा ‘राजेश’ जैसी अत्यंत लोकप्रिय जासूसी पत्रिकाओं का प्रकाशन किया, जिन्होंने रहस्य, रोमांच, न्याय और साहसिक कथाओं के माध्यम से पाठकों की अनेक पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। इस प्रकाशन से जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा, वेद प्रकाश कम्बोज, सुरेन्द्र मोहन पाठक, कुमार कश्यप सहित हिन्दी लोकप्रिय साहित्य के अनेक प्रतिष्ठित और कालजयी रचनाकार जुड़े रहे हैं। वर्ष 2020 में संस्थापक के सबसे छोटे पुत्र सुबोध भारतीय ने हिन्दी पल्प साहित्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से नीलम जासूस कार्यालय का पुनरुद्धार किया। तब से प्रकाशन ने अनेक कालजयी कृतियों को उत्कृष्ट गुणवत्ता में पुनः प्रकाशित किया है तथा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा अपनी पहुँच का व्यापक विस्तार किया है। जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा एवं वेद प्रकाश कम्बोज की अमर कृतियों के साथ-साथ चंदर, कर्नल रंजीत, परशुराम शर्मा, गुरुदत्त तथा अन्य सुप्रसिद्ध लेखकों के उपन्यासों का भी पुनर्प्रकाशन प्रारम्भ किया गया है। आज तक नीलम जासूस कार्यालय द्वारा 550 से अधिक उपन्यास प्रकाशित किए जा चुके हैं। आज नीलम जासूस कार्यालय, दिल्ली हिन्दी पल्प साहित्य के पुनर्जागरण का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है। जासूसी, रहस्य, अपराध, थ्रिलर, एक्शन और रोमांचक साहित्य की समृद्ध श्रृंखला के माध्यम से यह प्रकाशन न केवल भारत की लोकप्रिय साहित्यिक विरासत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि उसे नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुँचाने और वैश्विक स्तर पर हिन्दी पल्प साहित्य की पहचान स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
Neelam Jasoos Karyalay
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About Neelam Jasoos Karyalay
नीलम जासूस कार्यालय (NJK) भारत के सबसे प्रतिष्ठित हिन्दी पल्प फिक्शन प्रकाशनों में से एक है, जिसकी स्थापना वर्ष 1959 में दिल्ली में स्वर्गीय श्री सत्यपाल वार्ष्णेय द्वारा की गई थी। पिछले छह दशकों से अधिक समय से यह संस्थान हिन्दी जासूसी, अपराध, रहस्य, थ्रिलर, जासूसी (स्पाई) तथा सामाजिक उपन्यासों के प्रकाशन में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है और देशभर के लाखों पाठकों के बीच एक विश्वसनीय एवं लोकप्रिय नाम के रूप में स्थापित है।
हिन्दी पल्प साहित्य के स्वर्णिम दौर, अर्थात् 1960 और 1970 के दशक में, नीलम जासूस कार्यालय ने ‘नीलम जासूस’ तथा ‘राजेश’ जैसी अत्यंत लोकप्रिय जासूसी पत्रिकाओं का प्रकाशन किया, जिन्होंने रहस्य, रोमांच, न्याय और साहसिक कथाओं के माध्यम से पाठकों की अनेक पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया। इस प्रकाशन से जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा, वेद प्रकाश कम्बोज, सुरेन्द्र मोहन पाठक, कुमार कश्यप सहित हिन्दी लोकप्रिय साहित्य के अनेक प्रतिष्ठित और कालजयी रचनाकार जुड़े रहे हैं।
वर्ष 2020 में संस्थापक के सबसे छोटे पुत्र सुबोध भारतीय ने हिन्दी पल्प साहित्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से नीलम जासूस कार्यालय का पुनरुद्धार किया। तब से प्रकाशन ने अनेक कालजयी कृतियों को उत्कृष्ट गुणवत्ता में पुनः प्रकाशित किया है तथा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा अपनी पहुँच का व्यापक विस्तार किया है। जनप्रिय लेखक ओम प्रकाश शर्मा एवं वेद प्रकाश कम्बोज की अमर कृतियों के साथ-साथ चंदर, कर्नल रंजीत, परशुराम शर्मा, गुरुदत्त तथा अन्य सुप्रसिद्ध लेखकों के उपन्यासों का भी पुनर्प्रकाशन प्रारम्भ किया गया है। आज तक नीलम जासूस कार्यालय द्वारा 550 से अधिक उपन्यास प्रकाशित किए जा चुके हैं।
आज नीलम जासूस कार्यालय, दिल्ली हिन्दी पल्प साहित्य के पुनर्जागरण का एक सशक्त प्रतीक बन चुका है। जासूसी, रहस्य, अपराध, थ्रिलर, एक्शन और रोमांचक साहित्य की समृद्ध श्रृंखला के माध्यम से यह प्रकाशन न केवल भारत की लोकप्रिय साहित्यिक विरासत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि उसे नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुँचाने और वैश्विक स्तर पर हिन्दी पल्प साहित्य की पहचान स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।