Janmshati Smaran
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Author:
Pranay KrishnaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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‘जन्मशती स्मरण’ प्रखर अध्येता प्रणय कृष्ण के उन आलेखों और निबन्धों का संकलन है जिन्हें उन्होंने निकट अतीत के पुरखे रचनाकारों की जन्मशती के उपलक्ष्य में उनकी रचनाशीलता को समझने के लिए लिखा है। संकलन में रामधारी सिंह ‘दिनकर’, मुक्तिबोध, फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’, शमशेर, नागार्जुन, अज्ञेय, रामविलास शर्मा और अमरकान्त के अलावा एक आलेख गांधी की कृति ‘हिन्द स्वराज’ पर भी केन्द्रित है जिसके सौ साल भी 2009 में पूरे हुए हैं। लेकिन ये आलेख केवल स्मरण नहीं हैं, ये उक्त रचनाकार की रचनाओं और उनके वैशिष्ट्य को समझने की कुंजी भी हमें देते हैं। मसलन फ़ैज़ के विषय में उनका यह कथन, ‘उनकी पूरी शायरी अवाम के साथ एक ऐसा संवाद है जो अवाम की चेतना के दबा दिए गए हिस्सों से रू-ब-रू है। कोई भी फ़ैज़ का पैसिव श्रोता नहीं हो सकता। उन्हें सुनने वाला अवाम उनकी शायरी में मानी भरता है।’ शमशेर की कविता के विषय में उनकी टिप्पणी है कि शमशेर की शायद ही कोई ऐसी प्रेम कविता हो जिसमें ऐतिहासिक काल की धड़कन न सुनाई पड़ती हो। ‘वह रहती है, कभी एक पंक्ति में, कभी किसी एक शब्द में, कभी किसी प्रतीक में, कभी किसी बिम्ब में।’ उनके अपने शब्दों में, ‘इन रचनाकारों की विरासत हमारे समय, समाज और इतिहास की गति की समझ और व्याख्या में काम आने वाली ऐसी धरोहर है जिसमें हिन्दी-उर्दू जाति के अतीत, वर्तमान और भविष्य के संकेत निहित हैं।’
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‘जन्मशती स्मरण’ प्रखर अध्येता प्रणय कृष्ण के उन आलेखों और निबन्धों का संकलन है जिन्हें उन्होंने निकट अतीत के पुरखे रचनाकारों की जन्मशती के उपलक्ष्य में उनकी रचनाशीलता को समझने के लिए लिखा है।
संकलन में रामधारी सिंह ‘दिनकर’, मुक्तिबोध, फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’, शमशेर, नागार्जुन, अज्ञेय, रामविलास शर्मा और अमरकान्त के अलावा एक आलेख गांधी की कृति ‘हिन्द स्वराज’ पर भी केन्द्रित है जिसके सौ साल भी 2009 में पूरे हुए हैं।
लेकिन ये आलेख केवल स्मरण नहीं हैं, ये उक्त रचनाकार की रचनाओं और उनके वैशिष्ट्य को समझने की कुंजी भी हमें देते हैं। मसलन फ़ैज़ के विषय में उनका यह कथन, ‘उनकी पूरी शायरी अवाम के साथ एक ऐसा संवाद है जो अवाम की चेतना के दबा दिए गए हिस्सों से रू-ब-रू है। कोई भी फ़ैज़ का पैसिव श्रोता नहीं हो सकता। उन्हें सुनने वाला अवाम उनकी शायरी में मानी भरता है।’
शमशेर की कविता के विषय में उनकी टिप्पणी है कि शमशेर की शायद ही कोई ऐसी प्रेम कविता हो जिसमें ऐतिहासिक काल की धड़कन न सुनाई पड़ती हो। ‘वह रहती है, कभी एक पंक्ति में, कभी किसी एक शब्द में, कभी किसी प्रतीक में, कभी किसी बिम्ब में।’
उनके अपने शब्दों में, ‘इन रचनाकारों की विरासत हमारे समय, समाज और इतिहास की गति की समझ और व्याख्या में काम आने वाली ऐसी धरोहर है जिसमें हिन्दी-उर्दू जाति के अतीत, वर्तमान और भविष्य के संकेत निहित हैं।’
Book Details
-
ISBN9789377470012
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह जीवनी आपको अपने चार खंडों में योगी आदित्यनाथ के जीवन के चार पहलुओं से होकर ले जाती है। पुस्तक का आरंभ योगी के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के वर्तमान रूप, 2017 की उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति, यू.पी. का सी.एम. चुने जाने के तथ्यों और पंचम तल (यू.पी. के सीएम का दफ्तर) से होता है। दूसरा खंड आपको योगी आदित्यनाथ के पाँच बार के सांसद के रूप में लंबे कार्यकाल, चुनावी जीत, संसद् में उनकी कुशल भागीदारी, उनके तथाकथित विवादित भाषणों की सच्चाई, लव-जिहाद की उनकी सोच के पीछे का तर्क, घर वापसी, हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के साथ उनके संबंध से परिचित कराता है। तीसरे खंड में लेखक अपने पाठकों को गोरखनाथ मठ के महंत अवेद्यनाथ, योगी आदित्यनाथ, उनकी कठोर यौगिक दिनचर्या, नाथ पंथ के गुरुओं और कई दशकों से मठ की सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता से होकर ले जाते हैं। आखिरी खंड में लेखक अपने पाठकों को उत्तराखंड के इलाके में पले अजय सिंह बिष्ट के बचपन से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प और उनके अपनों के मुँह से कही बातों के साथ छोड़ देते हैं, जो गायों, खेतों, पहाड़ों, नदियों के बीच पला-बढ़ा और आगे चलकर एक सांसद और मुख्यमंत्री बना।
Kalpantak Yogi Brahmarishi Devraha Baba Jivan Parichay Book In Hindi
- Author Name:
Amit Kumar Pandey
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"कल्पांतक योगी ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा' एक प्रेरणादायक पुस्तक है, जो भारतीय संत-परंपरा के महान् योगी ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा के जीवन और शिक्षाओं का दिग्दर्शन करवाती है। यह उनकी अद्वितीय साधना, तप और आत्मज्ञान की यात्रा पर ले जाती है, जिसमें उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए अपने ज्ञान का प्रकाश फैलाया। बाबा का जीवन गूढ़ रहस्यों से भरा हुआ था। उन्होंने साधारण जनों को ध्यान, प्रेम और करुणा का महत्त्व समझाया। उनकी शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं, जो हमें जीवन में संतुलन और शांति की ओर अग्रसर करती हैं। इस पुस्तक में ब्रह्मर्षि के शिष्यों के संस्मरण संकलित हैं। लोककल्याण के लिए बाबा की प्रकृति संगत महत्त्वपूर्ण घटनाओं, उनकी अलौकिक लीलाओं और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों का विस्तृत वर्णन है। कुछ घटनाओं को लेखक ने गहन शोध और गुरुदेव के शिष्यों के अनुभव के माध्यम से बाबा की दिव्यता से जोड़ने का प्रयास किया है। पुस्तक पाठकों को आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करती है और यह संदेश देती है कि सच्ची साधना से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है। यह पुस्तक हर उस व्यक्ति के लिए अनिवार्य है, जो आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में है। भारतीय संत परंपरा की अप्रतिम विभूति ब्रह्मर्षि देवरहा बाबा के दिव्य जीवन का यशोगान करती प्रेरक पुस्तक ।"
Karpuri Thakur
- Author Name:
Dr. Ranjana Kumari +1
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जननायक कर्पूरी ठाकुर की ख्याति मुख्यमंत्री के रूप में कम और 'विपक्ष के प्राण' के रूप में ज्यादा थी। समाजवादी धारा के अग्रणी नेता के रूप में कर्पूरीजी भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित रहे हैं। संसदीय मर्यादा और विधाओं के भरपूर पालन तथा संसदीय व्यवस्था में कर्पूरीजी की अटूट आस्था थी। बिहार विधानसभा तथा लोकसभा में उनकी भागीदारी अत्यन्त उच्चकोटि की रही है। इस पुस्तक में विभिन्न संसदीय विधाओं, राज्यपाल के अभिभाषण, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट, वाद-विवाद, लोक महत्त्व के विषयों, प्रस्तावों तथा अविश्वास प्रस्ताव आदि में नेता विपक्षी दल के रूप में कर्पूरीजी की भागीदारी का निरूपण किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संसदीय विधाओं के सैद्धान्तिक पक्ष का अनुशीलन करते हुए उन सिद्धान्तों की कसौटी पर कर्पूरीजी की भूमिका का परीक्षण किया गया है। कर्पूरीजी की सदन के अन्दर नेता विपक्षी दल के रूप में निभाई गई भूमिका का विस्तृत विवरण देनेवाली यह पुस्तक भारतीय राजनीति के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं की सूचना भी देती है।
Yatrik
- Author Name:
Shivani
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कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीं बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।
कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।
इस पुस्तक में ‘चरैवेति’ और ‘यात्रिक’ शीर्षक रचनाएँ सम्मिलित हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।
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