About Gurdayal Singh
गुरदयाल सिंह
जन्म: 10 जनवरी, 1933; जैतो, ज़िला—फरीदकोट (पंजाब)।
शिक्षा : स्नातकोत्तर।
ब्रजेन्द्र कॉलेज, फरीदकोट में पंजाबी भाषा साहित्य के व्याख्याता गुरदयाल सिंह बाह्य घटनाओं के आन्तरिक अनुभव और आन्तरिक भावजगत के बाह्य अभिव्यक्तिकरण द्वारा पाठक को गहन मानवीय अनुभवों तथा भारतीय जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को उकेरनेवाले सुविख्यात पंजाबी उपन्यासकार हैं।
प्रमुख कृतियाँ : ‘मढ़ी दा दीवा’, ‘अणहोये’, ‘कुवेला’, ‘रेते दी इक्क मुट्ठी’, ‘अध चाँदनी रात’, ‘आथण’, ‘उग्गण’, ‘अन्हें घोड़े दा दान’, ‘पहुफटाले तों पहलाँ’ (उपन्यास); ‘सग्गी फुल्ल’, ‘ओपरा घर’, ‘चन्न दा बूटा’, ‘कुत्ता ते आदमी’, ‘मस्ती बोता’, ‘बेगाना पिंड’, ‘रुखे मिस्से बन्दे’, ‘पक्का ठिकाना’, ‘करोर दी ढिगरी’ (कहानी-संग्रह); ‘बकलम ख़ुद’, ‘टुक खोह लये काँवाँ’, ‘बाबा खेमा’।
हिन्दी में अनूदित : ‘अध चाँदनी रात’, ‘मढ़ी दा दीवा’, ‘घर और रास्ता’, ‘पाँचवाँ पहर’, ‘परमा’ तथा ‘सब देस पराया’ (उपन्यास)।
पुरस्कार : ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार’, ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘नानकसिंह नावलिस्ट पुरस्कार’, ‘शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार’। इसके अलावा चार उत्तम गल्प-साहित्य की रचनाओं के लिए भाषा विभाग, पंजाब की ओर से 1966, 1967, 1968, 1972 में पुरस्कृत।
निधन : 16 अगस्त, 2016