Mera Desh, Tumhara Desh
(0)
Author:
Krishna KumarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अतीत की साझेदारी के बावजूद भारत और पाकिस्तान के स्कूलों में स्वाधीनता संघर्ष का इतिहास बिलकुल अलग ढंग से पढ़ाया जाता है। इतिहास की पढ़ाई दो परस्पर विरोधी राष्ट्रीय अस्मिताओं का निर्माण करती है। कुछ घटनाओं पर ज़ोर देकर और कुछ को छोड़कर स्कूली पाठ्य-पुस्तकें किस तरह दो अलग आख्यान रचती हैं, प्रोफ़ेसर कृष्ण कुमार की यह किताब इसी प्रश्न की गहराइयों में जाकर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करनेवाले सांस्कृतिक और विचारधारा-सम्बन्धी आग्रहों की पड़ताल करती है।</p> <p>विश्लेषण के दायरे में 1857 के विद्रोह से लेकर विभाजन और स्वतंत्रता तक की सभी घटनाओं का भारत और पाकिस्तान की समकालीन पाठ्य-पुस्तकों में चित्रण शामिल किया गया है। इसके अलावा गांधी और जिन्ना जैसे व्यक्तित्वों की प्रस्तुतियों की छानबीन और व्याख्या भी की गई है। किताब के अन्तिम हिस्से में लाहौर और दिल्ली के बच्चों द्वारा लिखे गए निबन्धों का विश्लेषण शामिल है। यह विश्लेषण बच्चों की प्रतिक्रियाओं में निहित ताज़गी और दोटूकपने को चिन्हित करता है।</p> <p>‘मेरा देश, तुम्हारा देश’ यह उम्मीद जगानेवाली किताब है कि भारत और पाकिस्तान अपनी आज़ादी के साठ वर्ष बाद विभाजन की पीड़ादायी स्मृति से उबरकर शान्ति का रास्ता खोज सकते हैं। प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार ने इस पुस्तक को अपनी तरह के पहले कदम की संज्ञा दी है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
अतीत की साझेदारी के बावजूद भारत और पाकिस्तान के स्कूलों में स्वाधीनता संघर्ष का इतिहास बिलकुल अलग ढंग से पढ़ाया जाता है। इतिहास की पढ़ाई दो परस्पर विरोधी राष्ट्रीय अस्मिताओं का निर्माण करती है। कुछ घटनाओं पर ज़ोर देकर और कुछ को छोड़कर स्कूली पाठ्य-पुस्तकें किस तरह दो अलग आख्यान रचती हैं, प्रोफ़ेसर कृष्ण कुमार की यह किताब इसी प्रश्न की गहराइयों में जाकर बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करनेवाले सांस्कृतिक और विचारधारा-सम्बन्धी आग्रहों की पड़ताल करती है।</p>
<p>विश्लेषण के दायरे में 1857 के विद्रोह से लेकर विभाजन और स्वतंत्रता तक की सभी घटनाओं का भारत और पाकिस्तान की समकालीन पाठ्य-पुस्तकों में चित्रण शामिल किया गया है। इसके अलावा गांधी और जिन्ना जैसे व्यक्तित्वों की प्रस्तुतियों की छानबीन और व्याख्या भी की गई है। किताब के अन्तिम हिस्से में लाहौर और दिल्ली के बच्चों द्वारा लिखे गए निबन्धों का विश्लेषण शामिल है। यह विश्लेषण बच्चों की प्रतिक्रियाओं में निहित ताज़गी और दोटूकपने को चिन्हित करता है।</p>
<p>‘मेरा देश, तुम्हारा देश’ यह उम्मीद जगानेवाली किताब है कि भारत और पाकिस्तान अपनी आज़ादी के साठ वर्ष बाद विभाजन की पीड़ादायी स्मृति से उबरकर शान्ति का रास्ता खोज सकते हैं। प्रख्यात इतिहासकार सुमित सरकार ने इस पुस्तक को अपनी तरह के पहले कदम की संज्ञा दी है।
Book Details
-
ISBN9788126714575
-
Pages237
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Raaj Samaaj Aur Shiksha
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
शिक्षा की बहसें प्रायः सरकारी नीतिपत्रों में दिए गए वायदों, घिसे-पिटे आदर्श वाक्यों या फिर प्राचीन व्यवस्था के मिथकों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। स्कूल और कॉलेजों की दैनिक चर्चा हो या शिक्षाशास्त्र की पाठ्य-पुस्तकें—दोनों ही बच्चे के जीवित संसार और समाज के व्यापक संघर्षों से बहुत दूर जा पड़ी हैं। इस पुस्तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्ता भी दी है। कोई आश्चर्य नहीं कि यह पुस्तक उमस के बीच ताज़ा हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है।
शिक्षा की सच्चाई को यह कृति राज्य-व्यवस्था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूँढ़ती है। इसे पढ़ते हुए हम बच्चों के प्रति अपनी स्वाभाविक चिन्ता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पाते हुए देखते हैं। शिक्षा को कृष्ण कुमार ने बहुत व्यापक अर्थ में लिया है, जिसमें बच्चों के लालन-पालन से लेकर उन्हें सामाजिक मूल्यबोध देनेवाली अनेक सूक्ष्म प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
ज़ाहिर है, इस पुस्तक का पाठक वर्ग शिक्षा के नीतिकारों, प्रशिक्षकों और छात्रों तक सीमित नहीं है। उसमें ऐसे सभी माता-पिता भी शामिल हैं जो अपनी सन्तान के भविष्य को समाज की संरचना और राजनीति के चरित्र से अलग नहीं मानते।
Padhna, Zara Sochna
- Author Name:
Krishna Kumar +1
- Book Type:

- Description:
क्यों और क्या पढ़ना है, इस जिज्ञासा का अंत कैसे हुआ ? जब आप स्कूल में थे और जब आप उसी स्कूल में शिक्षक हैं तो आप वही कर रहे हैं जो आपके साथ किया जा रहा था। पढ़े हुए लोगों में पढ़ने को लेकर इतनी विरक्ति क्यों है इसे कृष्ण कुमार ने कितनी सरलता से समझाया है। इस जटिल संसार में कृष्ण कुमार को पढ़ना ख़ुद को सरल बनाना है। हर बच्चा पढ़ना चाहता है लेकिन हर बच्चा पढ़ाई से दूर हो जाता है। इस पुस्तक को पढ़ने के लाभ नहीं हैं क्योंकि यह पुस्तक लाभ के लिए पढ़ने की मनोवृत्ति का प्रतिकार करती है। तय आपको करना है कि पढ़ना है या नहीं और क्यों पढ़ना है । आनंद आया। किसी ने पढ़ाया तो नहीं लेकिन पढ़ने का रास्ता बता दिया। शिक्षण में जो लोग हैं वो कैसे नहीं पढ़ाना चाहिए, उसके गुर सीखने के लिए इसे पढ़ सकते हैं। माँ बाप,जिन्होंने माँ और बाप बनने के बहुत पहले पढ़ना छोड़ दिया लेकिन चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ें वो अगर इसे पढेंगे तो मज़ा आएगा।
Aaj Nahi Padhunga
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
‘आज नहीं पढ़ूँगा’ कृष्ण कुमार की बाल कहानियों का संकलन है। घर, पड़ोस और स्कूल के आसपास घूमती बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से जुड़ी यह रोमांचक कथा-शृंखला दो दशकों से चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी दो कहानियाँ पहली बार अज्ञेय के ‘नया प्रतीक’ में छपी थीं। बच्चों को उनके अपने मनोलोक की गहराइयों में ले जाने वाली यह किताब मामूली बातों में कौतूहल जगाती है और बार-बार पढ़ने की इच्छा पैदा करती है।
Bhasha Ki Sanjeevani
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार अपने पाठकों को पहचानते हैं और उनसे आत्मीयता बढ़ाने के अन्दाज़ में लिखते हैं। पहली बार उनका गद्य पढ़ रहे नए पाठक इस आत्मीयता का स्पर्श पाकर चकित होते हैं। निबन्ध की विधा कृष्ण कुमार को विशेष प्रिय रही है यद्यपि वे कहानी और संस्मरण भी चाव से लिखते रहे हैं। ‘भाषा की संजीवनी’ की शुरुआत थोड़ा-बहुत भी बता पाने के संघर्ष और सुकून से होती है और अन्त भाषा के जीवनदायी चरित्र के अभिन्दन से। इन दो विचार-ध्रुवों के बीच इस संग्रह में अठ्ठारह निबन्ध, समीक्षा-लेख और संस्मरण शामिल हैं। विषयों की विविधता के बीच पाठकों को कृष्ण कुमार के स्थायी सरोकार मिलेंगे—प्रकृति, स्त्री, सरकार और पढ़ाई। इन सभी के भीतर और इर्द-गिर्द मची भगदड़ और हिंसा पर टिप्पणी भी मिलेगी। इस निबन्ध विविधा से गुज़रते हुए पाठक याद करेंगे कि कृष्ण कुमार के लिए अगर कोई चीज़ नागवार है तो वह ‘विचार का डर’ है जो उनके एक प्रसिद्ध संग्रह का शीर्षक भी है।
Choori Bazar Mein Ladki
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
यह पुस्तक लड़कियों के मानस पर डाली जानेवाली सामाजिक छाप की जाँच करती है। वैसे तो छोटी लड़की को बच्ची कहने का चलन है, पर उसके दैनंदिन जीवन की छानबीन ही यह बता सकती है कि लड़कियों के सन्दर्भ में 'बचपन' शब्द की व्यंजनाएँ क्या हैं। कृष्ण कुमार ने इन व्यंजनाओं की टोह लेने के लिए दो परिधियाँ चुनी हैं। पहली परिधि है घर के सन्दर्भ में परिवार और बिरादरी द्वारा किए जानेवाले समाजीकरण की। इस परिधि की जाँच संस्कृति के उन कठोर और पैने औज़ारों पर केन्द्रित है जिनके इस्तेमाल से लड़की को समाज द्वारा स्वीकृत औरत के साँचे में ढाला जाता है। दूसरी परिधि है शिक्षा की जहाँ स्कूल और राज्य अपने सीमित दृष्टिकोण और संकोची इरादे के भीतर रहकर लड़की को एक शिक्षित नागरिक बनाते हैं। लड़कियों का संघर्ष इन दो परिधियों के भीतर और इनके बीच बची जगहों पर बचपन भर जारी रहता है। यह पुस्तक इसी संघर्ष की वैचारिक चित्रमाला है।
Kathgodam
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार सिर्फ़ पेशे से नहीं, पैशन से भी शिक्षाशास्त्री हैं और अपने गहरे मानव-बोध के चलते समाजशास्त्री। उनके लेखन में कहीं भी, कभी भी यह नहीं लगता कि यह उन्होंने किसी व्यावसायिक तक़ाज़े पर लिखा है। उनकी चिन्ताओं की वास्तविकता को उनके गद्य की संरचना स्वयं बयान कर देती है।
इस पुस्तक में उनकी कहानियाँ हैं। कहने की आवश्यकता नहीं कि जिस तरह उनका वैचारिक लेखन अपने सरोकारों और चिन्ताओं को स्पष्ट ढंग से रेखांकित करते हुए हमें एक समर्थ गद्य भी उपलब्ध कराता है जिससे हिन्दी के लिक्खाड़ भी कुछ सीख सकते हैं, उसी तरह उनकी ये कहानियाँ कहानी के मौजूदा बाज़ार में एक अलग कोने से किया गया हस्तक्षेप हैं। ये एक समाजशास्त्री द्वारा लिखी हुई कहानियाँ हैं जिनमें वह कहानी विधा के प्रचलित पैमानों से ज़्यादा फ़िक्र इस बात की करता है कि उसके देखे-जाने सुख-दु:ख अपनी पूरी गहराई और फैलाव के साथ भाषा में अंकित हो सकें।
वे अपनी बात को पहुँचाना चाहते हैं, सिर्फ़ 'रच' देना भर उनका उद्देश्य नहीं है, और पहुँचाने की यह इच्छा भी उनकी भाषा की शिराओं में बिंधी मिलती है। वे भाषा को वह पूरा का पूरा दे देना चाहते हैं जो उनकी संवेदना ने अपने परिवेश से पाया, महसूस करने की अपनी क्षमता के चलते जो उन्होंने जाना, और जिसने उन्हें व्यथित किया। और इसके लिए वे भाषा को इतना समर्थ बनाने का प्रयास करते हैं जितनी वह अपने देश और काल की सीमाओं के भीतर हो सकती है। हर बड़ा लेखक यही करता है। वह अभिव्यक्ति के उपलब्ध और प्रचलित भाषिक उपकरणों में अपनी बात कहकर सन्तुष्ट नहीं होता। वह जान रहा होता है कि उसे अपने शब्दों को उस तरह प्रशिक्षित करके बाहर भेजना है कि वे अपनी पूरी बात कहकर ही रहें।
इन कहानियों के विषय विविध हैं। हिन्दी में और भी कहानियाँ इन्हीं विषयों पर या इन जैसे विषयों पर लिखी गई हैं, लिखी जाएँगी, लेकिन जिस तरह कृष्ण कुमार उन्हें लिखते हैं, वह अपनी एक अलग श्रेणी बनाता है।
Vichar Ka Dar
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
हिन्दी गद्य का स्वरूप साठ के दशक में बदलना शुरू हो चुका था। सत्तर के दशक में यह बदलाव कई विधाओं में प्रकट हुआ। लोकतांत्रिक चेतना के फैलाव से पैदा हुए तनावों के अलावा शिक्षा और संचार के आधुनिक माध्यमों का विस्तार गद्य को जिज्ञासा और समझ की नई ज़मीनें तोड़ने के लिए तैयार कर रहा था। इस विकास को कुंठित करनेवाली ताक़तें—अंग्रेज़ी की चौधराई, राज्याश्रित हिन्दी की राजनीति और उत्तर के समाज में फैली सामन्ती प्रवृत्तियाँ भी—पोषण पा रही थीं; विचार का डर हमें इन ताक़तों को समझने में मदद दे सकता है।
इस पुस्तक में संकलित पद्य पिछले दो दशकों में प्रकाशित कृष्ण कुमार की वैचारिक रचनाशीलता की बानगी तो देता ही है, इस समूचे दौर की गतिशील प्रवृत्तियों का बिम्ब भी प्रस्तुत करता है। विषयों की दृष्टि से ये लेख, निबन्ध और संस्मरण हिन्दी समाज के सरोकारों का पैमाना कहे जा सकते हैं। अर्थ और राजनीति से लेकर साहित्य, संचार और मनोरंजन के तेज़ी से बदलते हुए ढाँचों के बीच तकनीक, भाषा, फ़िल्म-संगीत, स्त्री, साम्प्रदायिक हिंसा और पत्रकारिता जैसे सन्दर्भों की जाँच इस कृति को एक नई तरह का, बहुत फैला हुआ पाठक समुदाय देती है।
School Ki Hindi
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार का यह नया निबन्ध-चयन उनके शैक्षिक लेखन को एक वृहत्तर सांस्कृतिक सन्दर्भ देता है। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल यहाँ बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षों में बदलती-बनती नागरिक संस्कृति की परिधि में की गई है। खिलौनों और पाठ्य-पुस्तकों की भाषा से लेकर धार्मिक अलगाववाद की राजनीति और सामाजिक विषमता तक एक लम्बी प्रश्न-शृंखला है, जिसमें कृष्ण कुमार अपनी सुपरिचित चिन्ताएँ पिरोते हैं। इन चिन्ताओं में साहित्य की परख, स्त्री की असुरक्षा और भाषा के भविष्य जैसे विविध प्रसंग शामिल हैं। अपनी व्यंजनापरक शैली और चीज़ों को रुककर देखने की ज़िद से कृष्ण कुमार ने एक बड़ा पाठक-वृत्त बनाया है। अध्यापन और लेखन के बीच कृष्ण कुमार एक व्यक्तिगत पुल बनाने में सफल हुए हैं। यह पुल उनके शैक्षिक सरोकारों को खोजी यात्राओं पर ले जाता है और उनके पाठकों को स्कूल की चारदीवारी और बच्चों के मनोजगत में प्रवेश कराता है।
Safed Boriyon Wali Puliya
- Author Name:
Krishna Kumar +1
- Book Type:

- Description:
कृष्ण कुमार की कहानियों का गुच्छा
Sapnon ka Ped
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description:
कई बार कुछ चीज़ें, हमारे जीवन में बिना कोई प्रश्न खड़ा किए, पूरी मासूमियत और स्वाभाविकता से आकर शामिल हो जाती हैं, हम देख भी नहीं पाते कि उन्होंने हमारे साथ क्या किया, कृष्ण कुमार अक्सर इन्हीं चीज़ों की आवाजाही को पकड़ते हैं, और एक ऐसी सुथरी, संयत, पारदर्शी और अभिव्यक्तिशील भाषा में उन्हें अंकित करते हैं कि फ़ौरन ही उनसे सहमत न हो पाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
कृष्ण कुमार विख्यात शिक्षाशास्त्री और समकालीन भारतीय समाज के ‘कैलाइडोस्कोप’ को गहरी और विश्वसनीय संलग्नता, और उतनी ही वस्तुनिष्ठता के साथ देखनेवाले गद्यकार हैं। इस पुस्तक में सम्मिलित हर आलेख उनकी चिन्ता और सरोकार की इन विशेषताओं का साक्षी है। प्रकृति, नगर, राज्यसत्ता और व्यापार जगत से लेकर उनकी दृष्टि तितलियों, खिलौनों, साइकिलों, कारों और तरह–तरह के काम करते लोगों तक जाती है। और हर जगह जहाँ वे देखते हैं, चीज़ें अपनी सम्पृक्ति और अलगाव, दोनों के साथ हमें पूरी–पूरी दिखाई देती हैं। उनका बहुपरतीय सत्य, उनके होने के सीधे और टेढ़े अभिप्राय, सब हमारे सामने खुल जाते हैं।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनिवार्य है जो अपने सामाजिक होने को एक दिशा देना चाहते हैं, और उनके लिए भी जिन्होंने काफ़ी समय से किसी उम्दा गद्य को नहीं पढ़ा।
Aalim Sir Ki English Class
- Author Name:
Aalim
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Manikarnika : Drishti Aur Vimarsh
- Author Name:
Anand Das
- Book Type:

- Description:
समकालीन हिन्दी दलित साहित्य और आत्मकथा विधा के वैचारिक आधार को गहराई से समझने के लिए “मणिकर्णिका : दृष्टि और विमर्श” एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक आनंद दास ने इस पुस्तक के माध्यम से समाज में व्याप्त असमानता, शोषण और संघर्ष की वास्तविकताओं का सटीक एवं गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध है, बल्कि सामाजिक चेतना जगाने का भी कार्य करती है। शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी एवं पठनीय पुस्तक!
District Saharanpur (Environmental Challenges and Population Scenario)
- Author Name:
Dr. Narendar Kumar +1
- Book Type:

- Description:
जनपद सहारनपुर अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, भौगोलिक स्थिति, विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परम्पराओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के कारण प्रदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। उत्तर प्रदेश राज्य के इस प्रसिद्ध जनपद की जनसंख्या, संस्कृति एवं पर्यावरण जैसे ज्वलन्त विषयों पर आधारित यह पुस्तक लेखकों द्वारा अत्यन्त सराहनीय एवं समयानुकूल प्रयास है। वर्तमान समय में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या, नगरीयकरण तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण जनपद में अनेक पर्यावणीय चुनौतियाँ सामने आ रही है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार का सार्थक प्रयास न केवल शैक्षणिक समाज की दृष्टि से अर्पित नीति निर्धारकों और सामाजिक विकास के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। लेखकों का यह प्रयास सहारनपुर जनपद की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण सन्तुलन के प्रति जागरूकता लाने के दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करेगा। मैं लेखकों को इस अत्यन्त ही सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य के लिए हृदय की गहराइयों से अपनी ढेरों शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। - प्रो. बीरेन्द्र सिंह : पूर्व प्राचार्य, आर.एस.एम. (पी.जी.) कालेज धामपुर, बिजनौर (उ.प्र.)
Brahman Ki Beti & Viraj Bahu
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
मुहल्ले भर घूमकर तीसरे पहर रासमणि घर लौट रही थीं। आगे-आगे उनकी पोती मु. रही थी, जिसकी उम्र कोई दस-बारह साल की थी। गाँव का सँकरा रास्ता, जिसकी बगल की खूँटी में बँधा हुआ बकरी का बच्चा एक किनारे पड़ा सो रहा था। उस पर नजर पड़ते ही पोती को लक्ष्यकर वे चिल्ला पड़ीं, '' अरी छोकरी, कहीं रस्सी मत लाँव जाना ! सामने रस्सी मत 'लाँघ गई क्या ? हरामजादी, आसमान में देखती हुई चलती है। आँख से दिखलाई नहीं पड़ा कि सामने बकरी बँथी है ?'' पोती ने सहज भाव से कहा, '“बकरी तो सो रही है दादी।'' “सो रही है तो क्या दोष नहीं लगा ? आज मंगलवार के दिन तू बेखटके रस्सी लाँघ गई ?!!
Mai urdu Hoon
- Author Name:
Dheerendra Singh Fayyaz
- Book Type:

- Description:
मैं उर्दू हूँ’ एक भाषा के सफ़र का संस्मरण है। ये किताब उर्दू के प्रारम्भिक युग से शुरू होती है और मीर-ओ-ग़लिब से लेकर आधुनिक युग के नामचीन साहित्यकारों की उँगली थामे उस जगह तक जा पहुँचती है, जहाँ प्राचीन भाषाओं और लिपियों का ज़िक्र स्वाभाविक हो जाता है। इस संस्मरण में धीरे-धीरे ये भेद भी खुलता है कि सभी भाषाओं में कुछ न कुछ साम्य है और प्रत्यक्ष रूप से असंबद्ध लगने वाली देवनागरी, फ़ारसी और अरबी लिपियाँ दर-अस्ल एक ही मूल से निकली हैं। ये किताब लेखक और उर्दू के बीच होने वाला एक रोचक वार्तालाप है जो भाषाओं की व्युत्पत्ति, विकास और प्रसार के विषयों पर रौशनी डालता है।
Sarjnatmak Shiksha
- Author Name:
Raghav Prakash +2
- Book Type:

- Description:
आज हर समझदार माता-पिता अपने बच्चे को सही शिक्षा दिलवाने के लिए बेचैन हैं, हर चैतन्य शिक्षक अपने विद्यार्थी को ऊँचाइयाँ देने के लिए आतुर है और हर प्रबुद्ध शिक्षा-प्रशासक अपने स्कूल-कॉलेज की शिक्षण-पद्धति को परवान चढ़ाकर उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए संकल्पित है। किन्तु, कुछ अपवादों को छोड़कर, दुनिया भर की शिक्षा सर के बल खड़ी है। असल में, व्यवस्था-केन्द्रित शिक्षा-पद्धति को विद्यार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षा की मूल्य-दृष्टि, उसका पाठ्यक्रम शिक्षण-पद्धति और मूल्यांकन-पद्धति सबकुछ विद्यार्थी की वृत्ति, रुचि, योग्यता और गति के अनुरूप होनी चाहिए; विद्यार्थी की चेतना में गहरे छिपी उसकी मूल्यवान सर्जनात्मक क्षमता का, अधिकतम विकास कैसे किया जा सकता है, उसकी तजबीज ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ में प्रस्तुत की गई है। इसमें जीवन-दृष्टि और शिक्षा-दृष्टि के ठहराव को उजागर कर कल्याणकारी जीवन-दृष्टि और उसी के अनुरूप सर्जनात्मक पाठ्यक्रम, सर्जनात्मक शिक्षण-पद्धति, सर्जनात्मक मूल्यांकन पद्धति एवं रचनात्मक शिक्षा-प्रशासन-व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है। पूर्व और पश्चिम के लगभग सौ शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, धर्मशास्त्रियों, शिक्षा-वैज्ञानिकों आदि द्वारा लिखित शोधपूर्ण पुस्तकों का गहन मंथन करने के उपरांत जो शिक्षा-दृष्टि और शिक्षा-व्यवहार विकसित हुआ है; ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ उसी का ऐसा ‘अमृत तत्त्व’ है जो उत्कृष्ट की तलाश में जुटे हुए प्रत्येक शिक्षाविद्, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षा-प्रबन्धक और चैतन्य विद्यार्थी के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय है।
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME PRVASI JEEVAN
- Author Name:
Shahnaz
- Book Type:

- Description:
Book
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME NIHIT TATHA ABHIVYAKT SAMASYAEN
- Author Name:
Nidhiraj Bhadana +1
- Book Type:

- Description:
प्रवासी कहानीकार डाॅ सुधा ओम ढींगरा की कहानियों पर यह दो शोध कार्य हैं जो निधिराज भडाना तथा रेशू पाण्डेय ने किये हैं।
Keshav Mishr Ke Granthon Me Orchha Ka Itihas
- Author Name:
Dr. Ramswaroop Dengula
- Book Type:

- Description:
डॉ. रामस्वरूप ढेंगुला द्वारा लिखित इस विस्तृत हिंदी साहित्य पुस्तक के माध्यम से ओरछा के समृद्ध ऐतिहासिक ताने-बाने में गोता लगाएँ। यह विद्वत्तापूर्ण कार्य शानदार शहर ओरछा के बारे में महाकवि केशव मिश्र के लेखन में दर्शाई गई ऐतिहासिक चेतना की बारीकी से जाँच करता है। यह पुस्तक पाठकों को इस बात का गहन विश्लेषण प्रदान करती है कि कैसे इस मध्यकालीन कवि ने अपने विभिन्न साहित्यिक कार्यों में इस ऐतिहासिक शहर के सार, वास्तुकला, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को उकेरा। सावधानीपूर्वक शोध और अकादमिक कठोरता के माध्यम से, लेखक केशव मिश्र के लेखन में प्रलेखित ओरछा के राजसी मंदिरों, महलों और सांस्कृतिक विरासत के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करता है। यह अकादमिक पाठ शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक अमूल्य संसाधन के रूप में कार्य करता है, जो शास्त्रीय हिंदी साहित्य के लेंस के माध्यम से ओरछा की ऐतिहासिक कथा को समझने में रुचि रखते हैं।
Adyatan Hindi Vyakaran
- Author Name:
B.N. Pandey
- Book Type:

- Description:
"यह पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है : प्रथम अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी ध्वनियों एवं उनके लिखित रूप अक्षरों एवं संयुक्ताक्षरों की लेखन विधि, उच्चारण एवं उनसे शब्द-निर्माण की व्याख्या की गई है, ताकि हिंदीतरभाषी भारतीय एवं विदेशी परीक्षार्थी उनकी स्पष्ट समझ के साथ-साथ कम-से-कम समय में उनका अभ्यास कर उनपर अधिकार कर सकें। दूसरे अध्याय में सभी प्रकार के शब्दों की प्रकृति, निर्माण एवं पहचान की व्याख्या के साथ-साथ वाक्य गठन के दौरान लिंग, वचन विभक्ति, काल आदि के प्रभाव से उनमें होनेवाले रूप परिवर्तन को विवेचित-विश्लेषित किया गया है। तीसरे अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी प्रकार के वाक्यों के गठन के अंतर्निहित नियमों को विश्लेषित किया गया है। वाक्य किसी भाषा के दैनिक प्रयोग की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई हैं और सभी प्रकार के अधिक-से-अधिक वाक्यों के निरंतर अभ्यास से ही भाषा का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। चौथे अध्याय में उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास समाहित हैं : व्याकरण पुस्तकों की महत्ता विषय के चयन में नहीं उनकी सुबोध एवं सुग्राह्य प्रस्तुति में होती है। व्याकरण की सार्थकता इसमें है कि वह साध्य नहीं, अपितु भाषा की सम्यक् समझ एवं प्रयोग का साधन बने।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book