Samidha
Author:
Madhu Soni MadhukunjPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction6 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
Madhya Pradesh Ki Prernastrot Mahilaen
ISBN: 9789348636010
Pages: 135
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: IN
Recommended For You
Agnivyuh
- Author Name:
Shriram Dube
- Book Type:

-
Description:
‘जंगल’ जब तक ‘जंगलों’ में थे, तब तक जंगल के नियम, उसका बाहुबल, कमज़ोरों पर बाहुबलियों के शोषण जंगलों तक ही सीमित थे। आज जंगलों का फैलाव शहरों-गाँवों तक आ पहुँचा है। जंगलों के साथ शहरों-गाँवों तक में जंगली जानवरों के पैरों के निशान दिखाई देने लगे। आदमी भी इनके संग-साथ में तन की ताक़त एवं मन के, विचार के स्तर पर धीरे-धीरे जानवर होने लगा। सोच-विचार एवं विवेक के स्तर पर जिसने जंगल को परास्त कर दिया, वह आदमी रह गया पर जो स्वयं परास्त होकर जंगल के सामने नतमस्तक हो गया, जिसने अपने भीतर जंगल को बसा लिया, वह जंगली जानवरों से भी ज़्यादा भयावह हो गया। उसके पंजे करामात दिखाने लगे। बाहुबल शोषण का स्रोत बन गया, माफ़िया-संस्कृति सर उठाकर चलने लगी और शीघ्रातिशीघ्र ‘कुबेर’ बनने की ललक ने बिना पूँजी-पगहा वाला ‘अपहरण-उद्योग’ खड़ा कर दिया। जंगली चक्की चलने लगी, लोग पिसने लगे।
शोषण बढ़ा तो इसकी प्रतिक्रिया पहले कुनमुनाई, फिर अँगड़ाई लेने लगी। पाँवों तले दबी दूब भी पाँव हटने के बाद सर तो उठाती ही है। उठने लगे विरोधी स्वर...धीरे-धीरे उग्र होने लगे ये स्वर। फैलने एवं पकने लगीं उग्रवाद की फ़सलें।
बाहुबल, माफ़िया-संस्कृति, अपहरण-उद्योग और उग्रवाद के खाद-पानी के लिए कोयलांचल और उसके चारों ओर दूर-दूर तक फैली जंगल-पहाड़ों वाली ज़मीन बड़ी मुफ़ीद बन गई।
कहते हैं कोयलांचल में नोट हवा में उड़ते हैं। जिसके हाथों में ताक़त हो वह आगे बढ़कर लूट ले। लूट की जंगली प्रतिस्पर्धा बढ़ी तो बाहुबल का प्रदर्शन बढ़ा। लोग दूसरों की लाशें गिराकर उन्हें रौंदते हुए ‘नोट’ तक बढ़ने लगे। ख़ूनी-खेल गुल्ली-डंडा बन गया, उग्रवाद एवं अपहरण भी साथ-साथ क़दमताल करने लगे, इन सबके बीच पिसने लगा आम आदमी और लाल होने लगी काली ज़मीन।
लाल पड़ती जा रही धरती की परत-दर-परत खोलकर इसे देखने, समझने और दिखाने का प्रयास है यह उपन्यास।
Bharatiya Rajneeti Aur Hamari Soch
- Author Name:
Rajnath Singh
- Book Type:

- Description: "वैचारिक दृष्टि से भाजपा एक सामान्य राजनैतिक दल नहीं है जो सत्ता प्राप्ति के स्वार्थ से जुड़कर और प्रेरित होकर अपना कार्य करते हैं। भाजपा एक ऐसा राजनैतिक दल है जो एक विशिष्ट विचारधारा और राजनीतिक शैली को भारत की राजनीति में स्थापित करने के लक्ष्य से प्रेरित होकर कार्य कर रही है। हम सब परिपक्व विचारधारा के प्रति समर्पित एक परिपक्व कार्यकर्ता है। हमारे अंदर लोग भारतीयता की झलक देखते हैं। और इसके माध्यम से राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान की अपेक्षा करते हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश की जनता ने किसी भी दल से इतनी अपेक्षाएँ नहीं कीं जितनी कि हमसे की हैं। --- भाजपा का वैचारिक अधिष्ठान सांस्कृतिक रावाद है। विगत दो दशकों में पश्चिमी मॉडल पर जिस तेजी से आर्थिक प्रगति हो रही है, वह उतनी ही तेजी से पश्चिमी जीवन मूल्य हमारे शाश्वत सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक आदर्शों और परिवार के स्वरूप पर भी आघात कर रहे हैं। अन्य राजनैतिक दल भले ही इसे गंभीरता से न लेते हों परंतु भारत और भारतीयता के प्रति समर्पित भारतीय जनता पार्टी की दृष्टि में यह एक गंभीर चुनौती है। --- अनेक राजनैतिक दलों ने जहाँ जाति, पंथ और मजहब का सहारा लेकर वोट की राजनीति करने में कोई संकोच नहीं किया वहीं हमने वोट से ज्यादा अहमियत ‘राष्ट्र’ को दिया। हमारे सामने वोट से बड़ा राष्ट्र है और हमें इस बात का सुकून है कि हमने जिन बातों का विरोध किया, वह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य था। हम अपराधबोध से ग्रस्त नहीं हैं। —इसी पुस्तक से --- ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ जिस राजनीतिक दल का प्राणतत्त्व है, जिसने कभी वोट-बैंक की राजनीति नहीं की, जिसने सदा राष्ट्रीय अस्मिता और सुरक्षा को सबसे अधिक प्रमुखता दी है, जो ‘भय-भूख-भ्रष्टाचार’ से आक्रांत कोटि-कोटि भारतीयों की आशा का केंद्र है—ऐसी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह के चिंतनपरक, प्रखर, ओजस्वी विचारों का पठनीय एवं प्रेरणाप्रद संकलन।
Tola
- Author Name:
Ramesh Dutt Dube
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी में पिकरेस्क उपन्यासों की परम्परा बहुत पुरानी नहीं है। 1928 में केदारनाथ अग्रवाल ने ‘पतिया’ लिखा, इसी के आसपास सूर्यकान्त त्रिापाठी ‘निराला’ के ‘बिल्लेसुर बकरिहा’ और ‘कुल्लीभाट’ भी लिखे गए। ये सभी उपन्यास, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, व्यक्ति- केन्द्रित हैं। पश्चिम में भी पिकरेस्क उपन्यासों का जन्म ‘डेविड कॉपरफील्ड’ जैसी व्यक्ति-केन्द्रित कथाओं से हुआ था।
सामन्ती व्यवस्था के अन्तिम दिनों में समाज में एक ऐसा वर्ग उभर रहा था जो औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य था। समाज के घूरे पर फेंक दिया गया यह वर्ग नाले के उस पार का है, रोज कुआँ खोदने को विवश जो केवल अपने जीवट के बल पर ही जीवित है। समाज के ये दईमारे, बेचारे, हारे हुए लोग रमेश दत्त दुबे के टोले के बाशिंदे हैं—इनके नाम भले अलग- अलग हों, पर इनके अभाव एक से हैं, इनके चेहरे एक से हैं, इनके जीवन की दुर्घटनाएँ एक सी हैं क्योंकि रूढ़ियों और अभावों की जिस चक्की में ये पिस रहे हैं, उसमें साबुत बचा न कोय।
रमेश के टोले में जो रहते हैं, कौन हैं वे लोग—बीड़ी और अवैध शराब बनानेवाले, गर्भपात करवानेवाले, मछली मारनेवाले, बैलगाड़ी हाँकने वाले। स्त्रियाँ हैं तो वे जंगल से लकड़ियाँ बीनने के लिए हैं, पति की मार खाने के लिए हैं, देह व्यापार के लिए हैं, लड़ने-झगड़ने के लिए हैं। इन्हें अपने जीवन से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि इन्हें अपने जीवन से कोई अपेक्षा ही नहीं है।
‘टोला’ की कहानी का न कहीं से प्रारम्भ होता है, न कहीं अन्त क्योंकि इस कथा के पात्रों का न कोई आदि है, न अन्त। बरसात में उफनते नाले में जैसे कचरा बहता है वैसे ही टोले के पात्र आते-जाते हैं—एक-दूसरे को ठेलते हुए, थोड़ी देर के लिए, एक हहराती हुई गन्दगी को बहाकर आगे बढ़ाने के लिए ताकि वह नयी गन्दगी के लिए जगह बना सकें। किसी बेहतर जीवन का न कोई वायदा, न कोई यकीं, न कोई उम्मीद। पर लेखक को इन्तजार है। शायद यही इन्तजार ‘टोला’ को सर्जनात्मक संवेदना से मंडित करता है और उसे आस्था-विहीन नहीं बनाता।
—कान्तिकुमार जैन
Mukhara Kya Dekhe
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ (1986) के प्रकाशन के ठीक दस वर्षों बाद आनेवाला अब्दुल बिस्मिल्लाह का यह उपन्यास अपनी महाकाव्यात्मक गरिमा के साथ एक ऐसे मुखड़े का रहस्योद्घाटन कर रहा है जो बाहर से बहुत भव्य है, पर भीतर से अत्यन्त कुरूप। ‘मुखड़ा क्या देखे’ की कथा भारतीय स्वाधीनता के कुछ बाद से लेकर इमरजेंसी तक फैली हुई है। इस पूरे दौर में देश के भीतर घटित सारी घटनाओं की छाप ग्रामीण जीवन पर किस रूप में पड़ी, उपन्यास की नींव इसी प्रश्न पर डाली गई है। लेखक यह स्पष्ट करता है कि देश-दुनिया में घटनेवाली बड़ी-बड़ी घटनाओं को बुद्धिजीवी और इतिहासकार जिस रूप में देखते हैं, गाँव के सामान्य लोग उसी रूप में नहीं देखते। उनके विचार और निष्कर्ष भले ही ग़लत होते हों, पर होते हैं ठोस। निस्सन्देह ‘मुखड़ा क्या देखे’ ऐतिहासिक उपन्यास नहीं है, लेकिन इसमें भारतीय इतिहास के अनेक बिन्दुओं की ऐसी व्याख्या है, जो इतिहास की पुस्तकों में नहीं मिलेगी।
‘मुखड़ा क्या देखे’ उपन्यास किसी विशेष गाँव या विशेष पात्रों की कथा न होकर सामान्य भारतीय जनमानस की कथा है। इस उपन्यास को बहुसंख्यक अथवा अल्पसंख्यक समाज की दृष्टि से भी नहीं देखा जा सकता। भारतवर्ष बहुजातीय, बहुधार्मिक और बहुभाषायी देश है। हिन्दी में ऐसे अनेक उपन्यास आए हैं, जो या तो बहुसंख्यक समाज की कहानी कहते हैं या फिर अल्पसंख्यक समाज की, लेकिन ‘मुखड़ा क्या देखे’ समग्र भारतीय समाज की कहानी कहता है, जिसमें सम्पन्न वर्ग के हिन्दू और मुसलमान दोनों मिलकर हिन्दू ‘परजा’ और मुसलमान ‘परजा’ का शोषण करते हैं।
अब्दुल बिस्मिल्लाह के लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे जिस विषय पर लिखते हैं, उसमें आकंठ डूब जाते हैं। यही कारण है कि इस उपन्यास में जिस प्रामाणिकता के साथ उन्होंने मुसलमान रीति-रिवाज़ों का चित्रण किया है, उसी प्रामाणिकता के साथ हिन्दू और ईसाई समुदाय के रीति-रिवाज़ों का भी। अर्थात् पिछले बीस वर्षों में आए हिन्दी उपन्यासों में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि हिन्दी में लिखा गया यह उपन्यास समूचे भारतीय समाज का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी अन्तर्वस्तु और शिल्प पर ठेठ देसी रंगों एवं संस्कारों की गहरी छाप है।
The Parallel Love
- Author Name:
Sid Crish
- Book Type:

- Description: This is the love story of two girls, Aditi and Zara. One is from Pakistan and other is from India. They meet and fall in love with each other in a foreign land, and they make a promise to fight every demon of society for the sake of their love.But destiny has other plans for their love story. When their love is at its peak, a tragedy befalls Aditi, which forces her to return to her home country and ghost herself. After months of no communication, Zara decides to visit India in search of her love. What happens when Zara lands in aditi’s country to seek her love? Will she be able to find her love in the country of billions of people? Will society ever accept their homosexual relationship? Or will they remain as two parallel lines, moving alongside each other But without a destination and never destined to meet?.
His Flawless Love
- Author Name:
Pragna Rao
- Book Type:

- Description: Marriage! Is it a tradition? A legal agreement? A biological need? Or something besides all these? Tragedy strikes Isha’s life when she loses her fiancée to destiny. But happiness comes back into her life in the form of a good man who becomes her husband. However, the struggles of her memories and present situation go on, taking a toll on her new married life. Unable to carry on, she separates from her husband. And yet, the distance between them reminds her of her husband's unconditional love. She understands the significance of the marital vows and returns to be his best companion. Though destiny unceasingly challenges her, it also makes her stronger. Who wins the battle ultimately? Destiny or love?
Mahapath
- Author Name:
Sudhakar Adeeb
- Book Type:

- Description: आदि शंकराचार्य अपने युग की महानतम विभूति थे। यह उपन्यास 'महापथ' उन्हीं के असाधारण, अद्वितीय चरित्र और कृतित्व पर आधारित है। शंकराचार्य के बारे में यह प्रसिद्ध है कि मात्र आठ वर्ष की आयु में उन्होंने चारों वेदों का अध्ययन कर लिया। बारह वर्ष तक सर्व शास्त्रवेत्ता बन गए। सोलह वर्ष में उन्होंने भाष्य रचना कर डाली और बत्तीस वर्ष की आयु में उनका महाप्रयाण हुआ। उनके अनेक अनुयायी उन्हें शिव का अवतार भी मानते हैं। यह उपन्यास तथ्यों के साथ रेखांकित करता है कि शंकराचार्य के सबसे प्रबल विरोधी प्रायः बौद्ध थे जो वैदिक धर्म के समस्त रूपों का विरोध करते थे। जबकि बौद्धधर्म का सार तत्त्वतः वेदान्त दर्शन से भिन्न नहीं है। ऐसे में आचार्य शंकर ने अपनी दिव्य वाग्मिता से बौद्धों और अन्य वेद-विरोधी सम्प्रदायों के लोगों को जिस तरह पराभूत किया, वह एक मिसाल है। अद्वैत वेदान्त की महिमा और श्रेष्ठता प्रतिष्ठापित कर देने के बाद आचार्य शंकर ने भारत की चारों दिशाओं में चार मठ स्थापित किए। उत्तर में हिमालय बदरिकाश्रम में ज्योतिर्मठ, दक्षिण में कर्नाटक राज्य के अन्तर्गत शृंगेरी मठ, पश्चिम में द्वारका में शारदा मठ और पूर्व में जगन्नाथपुरी में गोवर्धन मठ। आज भी उनके स्थापित ये मठ वैदिक विद्या के केन्द्र हैं जिनका मनोरम वर्णन इस उपन्यास में किया गया है। आचार्य शंकर के काल-निर्धारण में काफ़ी मतभेद है। अधिकांश इतिहासकार उन्हें सातवीं या आठवीं शताब्दी का व्यक्तित्व मानते हैं लेकिन लेखक ने अपने अन्वेषण के आधार पर प्रस्तावित किया है कि आद्य शंकराचार्य का जन्म आज से लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था। यह उपन्यास जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के जीवन के तमाम आयामों से गुज़रते उनकी धर्म-दिग्विजय यात्रा को जिस तरह विस्तार एवं रोचकता के साथ प्रस्तुत करता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
Taliban, Afghan Aur Mein
- Author Name:
Sushmita Bandyopadhyay
- Book Type:

-
Description:
अफ़ग़ानिस्तान का तालिबान शासन अब विश्व में रूढ़िवाद, कट्टरता और कठमुल्लावादी तानाशाही का पर्याय बन चुका है, ‘तालिबानी’ और ‘तालिबानीकरण’ जैसे शब्द इधर राजनीतिक विमर्श में आम हो गए हैं।
यह पुस्तक इसी तालिबान शासन से लेखिका की अपनी मुठभेड़ का लोमहर्षक विवरण है। लेखिका ने एक अफ़ग़ान-युवक से प्रेम-विवाह के बाद कई वर्ष अफ़ग़ानिस्तान में बिताए हैं। अफ़ग़ानिस्तान प्रवास के अपने काले दिनों का त्रास उन्होंने इसकी पंक्ति-पंक्ति में पिरोया है। साथ ही विकास की धारा से विच्छिन्न उस भूमि तथा वहाँ के निवासियों के विषय में कई दिलचस्प तथा चौंकानेवाली जानकारियाँ भी पाठक को इस पुस्तक में प्राप्त होंगी।
सुष्मिता बंद्योपाध्याय की इस पुस्तक से पहले ‘काबुलीवाले की बंगाली बीवी’ की पृष्ठभूमि से परिचित पाठक इस आत्मकथात्मक उपन्यास को एक निरन्तरता के साथ पढ़ सकेंगे। इसमें उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के अनुभवों के साथ-साथ अपनी मातृभूमि सम्बन्धी कुछ स्मृतियों तथा स्त्री-विमर्श के कुछ सार्वभौमिक सवालों को भी रेखांकित किया है।
Majboori
- Author Name:
Jaydeep Khot
- Book Type:

- Description: Hindi Book
Ek Bataa Do
- Author Name:
Sujata
- Book Type:

-
Description:
पद्मिनी नायिकाओं-सी अगाधमना लड़कियाँ जब महानगर के गली-कूचों में जन्मे और अपने मायकों की खटर-पटर से निजात पाने के लिए उस पहले रोमियो को ही ‘हाँ’ कर दें जिसने उन्हें देखकर पहली ‘आह’ भरी तो जीवन मिनी-त्रासदियों का मेगा-सिलसिला बन ही जाता है और उससे निबटने के दो ही तरीक़े बच जाते हैं—पहला, ख़ुद को दो हिस्सों में फाड़ना। जैसे सलवार-कुरते का कपड़ा अलग किया जाता है, वैसे शरीर से मन अलग करना। मन को बौद्ध भिक्षुणियों या भक्त कवयित्रियों की राह भेजकर शरीरेण घर-बाहर के सब दायित्व निभाए चले जाना! दूसरे उपाय में भी बाक़ी दोनों घटक यही रहते हैं पर भक्ति का स्थानापन्न प्रेम हो जाता है—प्रकृति से, जीव-मात्र से, संसार के सब परितप्त जनों से और एक हमदर्द पुरुष से भी जो उन्हें ‘आत्मा का सहचर’ होने का आभास देता है।
स्वयं से बाहर निकलकर ख़ुद को द्रष्टा-भाव में देखना और फिर अपने से या अपनों से मीठी चुटकियाँ लिए चलना भी स्त्री-लेखन की वह बड़ी विशेषता है जिसकी कई बानगियाँ गुच्छा-गुच्छा फूली हुई आपको हर क़दम पर इस उपन्यास में दिखाई देंगी! हर कवि के गद्य में एक विशेष चित्रात्मकता, एक विशेष यति-गति होती है, पर यह उपन्यास प्रमाण है इस बात का कि स्त्री-कवि के गद्य में रुक-रुककर मुहल्ले की हर टहनी के फूल लोढ़ते चली जानेवाली क़स्बाई औरतों की चाल का एक विशेष छंद होता है। अब हिन्दी में स्त्री उपन्यासकारों की एक लम्बी और पुष्ट परम्परा बन गई है। सुजाता का यह उपन्यास उसे एक सुखद समृद्धि देता है और ज़रूरी विस्तार भी।
—अनामिका
Farishte Nikale
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
- Book Type:

-
Description:
हाशिये का यथार्थ और संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे जानने-पहचानने और शब्द देने के लिए सरोकार-सम्पन्न रचनाशीलता की ज़रूरत होती है। कहना न होगा कि मैत्रेयी पुष्पा ऐसी रचनाशीलता का पर्याय बन चुकी हैं। अपने कथा-साहित्य और विमर्श आदि के द्वारा उन्होंने किसान, मज़दूर, स्त्री और दलित जीवन की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सच्चाइयों को मुखर किया है।
‘फ़रिश्ते निकले’ मैत्रेयी पुष्पा का नया उपन्यास है, जिसमें उन्होंने ‘बेला बहू’ का वृत्तान्त रचा है। यह वृत्तान्त जटिल किन्तु कई परतों में बदलते 'ग्रामीण भारत' का दस्तावेज़ बन गया है। बेला बहू के जीवन में जो घटनाएँ घटती हैं और जिन व्यक्तियों के साथ उसका वाद-विवाद-संवाद होता है उनका मन में उतर जानेवाला वर्णन मैत्रेयी ने किया है। ज़िन्दा रहने और आज़ाद रहने के अर्थ को व्यापक अर्थ में समझाती बेला बहू हिन्दी उपन्यास साहित्य के कुछ अविस्मरणीय चरित्रों में गिनी जाएगी, ऐसा विश्वास है। सरल और व्यंजक भाषा में रचा गया यह उपन्यास लेखिका की रचनाशीलता का आगे बढ़ा हुआ क़दम तो है ही, हिन्दी उपन्यास की नवीनतम उपलब्धि भी है।
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Rating:
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। बाणभट्ट की आत्मकथा अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। इसमें वह वाणी मुखरित है जो सामगान के समान पवित्रा और अर्थपूर्ण है-‘सत्य के लिए किसी से न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्रा से भी नहीं; लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।’ बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Divergence
- Author Name:
Nupur Luthra
- Book Type:

- Description: Hermann Hesse once said “every age, every culture and tradition has its own character, its own strengths, its own weakness and its beauties and cruelties” who would we be if it weren’t for our customs, cultures and traditions. Anu, a young girl of Mumbai, felt the same way. She was born and raised in Mumbai, did her schooling in Delhi and college in the U.S. She had never understood what the customs and traditions of every religion was all about? She failed to recognize why most religions had such strict customs and why most people were orthodox and most modern. She gets into a fight with her husband on Diwali as why they should have the Diwali Pooja. They have a major argument and Anu leaves the house and goes lives with her parents. Her parents had warned her Rajesh’s customary beliefs and customs. Anu refuses to go back to her house and decides she needs a holiday to get away from everyone. During her journey, she bumps into one of her old school friends, Rahul. They catch up on old times and have a lot of fun together. Anu asks him to go on this journey with her. Things take an interesting turn on this journey. This is a story about Anu who takes this journey to understand the customs and traditions of every religion. She travels to places like Jammu and Kashmir, the U.S.A, Africa and many more.
Chaturang
- Author Name:
Dilip Purushottam Chitre
- Book Type:

-
Description:
‘चतुरंग’ को बीसवीं शताब्दी के सातवें-आठवें दशक का मुम्बई कॉस्मोपॉलिटन परिवेश एक नया आयाम प्रदान करता है। इसके साथ है दिलीप चित्रे की बिम्बधर्मी अभिव्यक्ति की कई शैलियों को अपनाने वाली सर्जनशील भाषा।
‘चतुरंग’ संग्रह के चारों कथानक अपूर्व, आकर्षक और रहस्यमयी लगते हैं। महानगर की भीड़ में लगातार अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में भटकते पात्र कहानी में एक अद्भुत नाटकीयता पैदा करते हैं जो लेखक के अपने अनुभवों से निकले हुए प्रतीत होते हैं।
Forever - A Promise
- Author Name:
Jasbir Singh
- Rating:
- Book Type:

- Description: Goal is a rich and educated man who has everything in life. Tara is a simple and beautiful girl from a small village in Kathmandu. Gopal meets Tara for the first time in his house. It is love-at-first-sight, but he has no hope that his love will be fulfilled. She does not respond to him at first, and even runs away shyly upon seeing him. But that is maybe because she has feelings for him too. Then, Tara leaves the village and no one knows her whereabouts. Goal is depressed, but there is still a little hope left in his heart. Will Gopal be able to find Tara, and will he be able to tell his feelings for her? How will she respond? Will she accept him? Will their love story begin? Will the hypocrisy of the society allow their love to prosper? Is Gopal’s love for Tara true? Or is it just like many other “love stories” now a days — merely time-pass? This is the story of how goal and Tara made their love story successful even though the whole world was against them. See the different faces of society as they put obstacles in their path, but how true love succeeds in the end. So, would you like to know how they made their love story possible, even when the whole world was against them? All right! Let’s travel through the journey of their love by reading this novel, and see the different faces of society and find answers to them all. Welcome to an old tale of friendship, love, sacrifice, and inspiration. This book will make you believe that promises are not meant to be broken. It will make you once again in the existence of true love, and that true love never dies.
Thoda Sa Khula Asman
- Author Name:
Ram Kathin Singh
- Book Type:

-
Description:
उपन्यास की कहानी पूर्वी जर्मनी की पृष्ठभूमि पर रची गयी है, जिसकी आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित थी। साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना के प्रयास में दमनकारी नीतियों का पालन हुआ जिससे भय का एक ऐसा वातावरण पैदा हुआ कि लोग डरे-सहमें रहते। गुलामों की तरह जिन्दगी जीते। किन्तु एक दिन जब जन-जन के मन में व्याप्त असन्तोष की आग भभक उठी, तब पूरी व्यवस्था जलकर राख हो गयी। कम्युनिस्ट शासन का अन्त हो गया। लोग स्वतन्त्र हो गये...।
बर्लिन की दीवाल ढहने के बाद मची भगदड़ में हजारों परिवार बिखर गये। आल्फ्रेड की पत्नी का मनोरोग-चिकित्सा-संस्थान पहुँच जाना तथा आजादी की मशाल जलाने वाले जुर्गेन का जहर देकर मार दिया जाना, उस त्रासदी के बस उदाहरण मात्र थे...।
Akbar
- Author Name:
Shazi Zaman
- Book Type:

-
Description:
''हिन्दू गाय खाएँ, मुसलमान सूअर खाएँ...” 3 मई, 1578 की चाँदनी रात को कोई भी हिन्दुस्तान के बादशाह अबुल मुज़फ़्फ़र जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर की इस बात को समझ नहीं पाया। इसीलिए उस वक़्त उनकी इस कैफ़ियत को 'हालते अजीब’ कहा गया। सत्ता के शीर्ष पर खड़ा ये बादशाह अपनी ज़िन्दगी में कभी कोई जंग नहीं हारा। लेकिन अब एक बहुत बड़ी और ताक़तवर सत्ता उसके सब्र का इम्तिहान ले रही थी। बादशाह अकबर का संयम टूट रहा था और उनकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा संघर्ष शुरू होने को था।
कई रोज़ पहले लगभग पचास हज़ार शाही फ़ौजियों ने सल्तनत की सरहद के क़रीब एक बहुत बड़ा शिकारी घेरा बाँधा था। बादशाह अकबर के पूर्वज अमीर तैमूर और चंगेज़ ख़ान के तौर-तरीक़े के मुताबिक़ ये घेरा पल-पल कसता गया और अब वो वक़्त आ पहुँचा जब शिकार बादशाह सलामत के पहले वार के लिए तैयार था। लेकिन उस मुक़ाम पर आकर बादशाह अकबर ने एक हैरतअंगेज़ क़दम उठा लिया...
ये उपन्यास लेखक ने बाज़ार से दरबार तक के ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर रचा है। बादशाह अकबर और उनके समकालीन के दिल, दिमाग़ और दीन को समझने के लिए और उस दौर के दुनियावी और वैचारिक संघर्ष की तह तक जाने के लिए शाज़ी ज़माँ ने कोलकाता के इंडियन म्यूजि़यम से लेकर लन्दन के विक्टोरिया एंड ऐल्बर्ट तक बेशुमार संग्रहालयों में मौजूद अकबर की या अकबर द्वारा बनवाई गई तस्वीरों पर ग़ौर किया, बादशाह और उनके क़रीबी लोगों की इमारतों का मुआयना किया और 'अकबरनामा’ से लेकर 'मुन्तख़बुत्तवारीख़’, 'बाबरनामा’, 'हुमायूँनामा’ और 'तजि्करातुल वाक़यात’ जैसी किताबों का और जैन और वैष्णव सन्तों और ईसाई पादरियों की लेखनी का अध्ययन किया। इस खोज में 'दलपत विलास’ नाम का अहम दस्तावेज़ सामने आया जिसके गुमनाम लेखक ने 'हालते अजीब’ की रात बादशाह अकबर की बेचैनी को क़रीब से देखा। इस तरह बनी और बुनी दास्तान में एक विशाल सल्तनत और विराट व्यक्तित्व के मालिक की जद्दोजहद दर्ज है। ये वो शख़्सियत थी जिसमें हर धर्म को अक़्ल की कसौटी पर आँकने के साथ-साथ धर्म से लोहा लेने की हिम्मत भी थी। इसीलिए तो इस शक्तिशाली बादशाह की मौत पर आगरा के दरबार में मौजूद एक ईसाई पादरी ने कहा, ''ना जाने किस दीन में जिए, ना जाने किस दीन में मरे।”
Hindi Ki Manak Vartani
- Author Name:
Dr. K.C. Bhatia +1
- Book Type:

- Description: "हिंदी की मानक वर्तनी—कैलाशचंद्र भाटिया प्रस्तुत पुस्तक में हिंदी के तीन अत्यधिक व्यावहारिक पक्षों को रखा गया है—वर्तनी, विरामचिह्न तथा प्रूफ-संशोधन। उक्त तीनों पक्ष एक-दूसरे से इतने अधिक संबद्ध हैं कि पृथक् करने में कठिनाई है। प्रूफ-संशोधन में जहाँ वर्तनी का शुद्ध रूप रखना पड़ता है, वहीं विरामचिह्नों के ठीक प्रयोग का। ‘मानक हिंदी वर्तनी’ का कार्यक्षेत्र केंद्रीय हिंदी निदेशालय का है, जिनकी सिफारिशों को इसमें समुचित स्थान दिया गया है। वर्तनी का क्षेत्र मात्र शब्दों तक नहीं है, उसमें संक्षिप्त रूप, प्रतीक, व्यक्ति-स्थान नामों का अपार भंडार है। वर्तनी से ही विरामचिह्न जुड़े हुए हैं। यह सर्वविदित है कि पूर्ण विराम ‘।’ के अतिरिक्त सभी चिह्न अंग्रेजी के संसर्ग से प्राप्त हुए हैं। व्याकरण की विभिन्न पुस्तकों में यत्किंचित् सामग्री विरामचिह्नों पर भी है। इस पुस्तक में पहली बार इन्हें विस्तार से समझाया गया है; जिससे विद्यार्थी व सुधी पाठक लाभान्वित होंगे। प्रूफ-संशोधन कार्य उक्त दोनों से जुड़ा हुआ है। हिंदी पत्रकारिता में भी अब इसकी आवश्यकता का अनुभव किया जाने लगा है। साधारणत: हिंदी लेखक इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे ही, साथ ही विद्वानों को इस दिशा में अंतिम रूप से निर्णय लेने में चिंतन का अवसर मिलेगा। "
Tedhe Medhe Raste
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

-
Description:
‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ न केवल भगवतीचरण वर्मा के, बल्कि समग्र हिन्दी-कथा साहित्य के गिने-चुने श्रेष्ठतम उपन्यासों में एक है। इसमें सन् 1920 के बाद के वर्षों में भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में सक्रिय राजनीतिक विचारधाराओं और शक्तियों का बेहद सटीक और संश्लिष्ट चित्रांकन किया गया है। एक सामन्ती परिवार के भीतर प्रवेश करनेवाले तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभावों को और उनके फलस्वरूप पैदा होनेवाली स्थितियों को उनकी पूरी जटिलता में एक विशाल कैनवास पर उतारने में कथाकार सफल हुआ है।
उपन्यास में पंडित उमानाथ तिवारी और उनके तीन पुत्रों की कथा के माध्यम से पूरे देश की उथल-पुथल का खाका खींच दिया गया है। कथानक के तमाम मोड़ों पर मार्मिक प्रसंगों की अवतारणा करके तथा विभिन्न पात्रों के वैचारिक संघर्षों के माध्यम से गांधीवाद, साम्यवाद, समाजवाद और परम्परागत भारतीय मूल्यों की कशमकश को प्रभावी तरीके से चित्रित किया गया है। चरित्रों के निर्माण और कथारस में अद्वितीय यह उपन्यास हिन्दी कथा-यात्रा का एक मील-पत्थर है।
Chal Khusaro Ghar Aapne
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
...‘कैसी विचित्र पुतलियाँ लग रही थीं मालती की। जैसे दगदगाती हीरे की दो कनियाँ हों, बार-बार वह अपनी पतली जिह्वा को अपने रक्तवर्णी अधरों पर फेर रही थी, यह तो नित्य की सौम्य-शान्त स्वामिनी नहीं, जैसे भयंकर अग्निशिखा लपटें ले रही थी...।’ यह कहानी है कुमुद की, जिसे बिगड़ैल भाई-बहनों और आर्थिक, पारिवारिक परिस्थितियों ने सुदूर बंगाल जाकर एक राजासाहब की मानसिक रूप से बीमार पत्नी की परिचर्या का दुरूह भार थमा दिया है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का मनोसंसार, निम्न-मध्यवर्गीय परिवार की कमासुत अनब्याही बेटी और उसकी ग्लानि से दबी जाती माँ का मनोविज्ञान, शिवानी के पारस स्पर्श से समृद्ध होकर इस उपन्यास को एक अद्भुत नाटकीय कलेवर और पठनीयता देते हैं।
Customer Reviews
4.17 out of 5
Book
August 4, 2025, 3:06 pm
Guest_l0cR
Amazing book... based on famine strength... must read
5 Book