Kahani Ki Baat
(0)
Author:
MarkandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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स्वतन्त्रता - प्राप्ति के बाद के वर्षों में कहानी चर्चा के केन्द्र में थी। लेकिन कथा-आलोचना की किसी परम्परा के अभाव में कुछ आलोचक नितान्त वैयक्तिक अथवा सैद्धान्तिक स्तरों पर कहानियों की समीक्षाएँ किया करते थे। इस समय कहानियों की रचनात्मक गहराइयों को विश्लेषित करने के लिए जिस विकसित समीक्षा-पद्धति की आवश्यकता थी उसे लेकर लेखकों और आलोचकों में बहस की शुरुआत भी हुई, लेकिन बात बनी नहीं। नतीजा यह हुआ कि खुद लेखकों ने अपनी कहानियों के बारे में अपनी रचनात्मक समझ स्पष्ट करते हुए लम्बी-लम्बी भूमिकाएँ लिखीं और अपने समय के यथार्थ के सम्बन्ध में अपनी अवधारणाएँ स्पष्ट कीं। वैचारिक विवेचन द्वारा स्थापित यथार्थ के भीतर रचना के लिए अनेक यथार्थ हैं जो भौगोलिक सीमाओं के द्वारा ही नहीं, असम जन-जागरण के कारण एक-दूसरे के पूरक होते हुए भी परस्पर प्रतिरोध का भ्रम पैदा करते हैं। यथार्थवादी समीक्षा सन्दर्भों की व्याख्या द्वारा ही कहानियों के सही विश्लेषण का दायित्व पूरा कर सकती है। प्रस्तुत पुस्तक नयी कहानी की वैचारिकी और सैद्धान्तिकी को लेकर लिखे गये लेख और कुछ समीक्षाएँ भी दी जा रही हैं।
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स्वतन्त्रता - प्राप्ति के बाद के वर्षों में कहानी चर्चा के केन्द्र में थी। लेकिन कथा-आलोचना की किसी परम्परा के अभाव में कुछ आलोचक नितान्त वैयक्तिक अथवा सैद्धान्तिक स्तरों पर कहानियों की समीक्षाएँ किया करते थे।
इस समय कहानियों की रचनात्मक गहराइयों को विश्लेषित करने के लिए जिस विकसित समीक्षा-पद्धति की आवश्यकता थी उसे लेकर लेखकों और आलोचकों में बहस की शुरुआत भी हुई, लेकिन बात बनी नहीं। नतीजा यह हुआ कि खुद लेखकों ने अपनी कहानियों के बारे में अपनी रचनात्मक समझ स्पष्ट करते हुए लम्बी-लम्बी भूमिकाएँ लिखीं और अपने समय के यथार्थ के सम्बन्ध में अपनी अवधारणाएँ स्पष्ट कीं।
वैचारिक विवेचन द्वारा स्थापित यथार्थ के भीतर रचना के लिए अनेक यथार्थ हैं जो भौगोलिक सीमाओं के द्वारा ही नहीं, असम जन-जागरण के कारण एक-दूसरे के पूरक होते हुए भी परस्पर प्रतिरोध का भ्रम पैदा करते हैं। यथार्थवादी समीक्षा सन्दर्भों की व्याख्या द्वारा ही कहानियों के सही विश्लेषण का दायित्व पूरा कर सकती है।
प्रस्तुत पुस्तक नयी कहानी की वैचारिकी और सैद्धान्तिकी को लेकर लिखे गये लेख और कुछ समीक्षाएँ भी दी जा रही हैं।
Book Details
-
ISBN9788180319792
-
PagesN/A
-
Avg Reading TimeN/A
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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