Sampurna Kahaniyan : Markandey
(0)
Author:
Durga Prasad Singh, Sasya Nagar, MarkandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
995
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प्रस्तुत संकलन में मार्कण्डेय के अब तक प्रकाशित सात कहानी-संग्रह शामिल हैं। कहना न होगा कि स्वतंत्रता के बाद लिखी गई इन कहानियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। देश-विदेश में भी इनके अनुवादों पर वहाँ के आलोचकों ने लेख एवं समीक्षाएँ लिखी हैं। अत्यन्त सहज वाचन और शिल्पगत नवीनता के कारण इन कहानियों में चिन्हित समकालीन सन्दर्भ भारतीय जीवन की वास्तविकताओं को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं। आदर्श और बाह्य मान्यताओं वाली दृष्टि से देखे जाने के कारण संघर्ष और बदलाव की जो बातें हवा में उठाई जा रही थीं, उनके सामने इन कहानियों ने एक नया दृश्य ला खड़ा किया। अन्धकार, अशिक्षा, ग़रीबी ही नहीं धार्मिक अन्धविश्वास, शोषण और अनाचार के परिवेश को उजागर करने के कारण इन कहानियों को लोगों ने एक उपलब्धि की तरह स्वीकार किया। इस संकलन में ‘पान-फूल’, ‘महुए का पेड़‘, ‘हंसा जाई अकेला’, ‘भूदान’, ‘माही’, ‘सहज और शुभ’ तथा ‘बीच के लोग’ नामक पुस्तकें शामिल हैं।
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प्रस्तुत संकलन में मार्कण्डेय के अब तक प्रकाशित सात कहानी-संग्रह शामिल हैं। कहना न होगा कि स्वतंत्रता के बाद लिखी गई इन कहानियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। देश-विदेश में भी इनके अनुवादों पर वहाँ के आलोचकों ने लेख एवं समीक्षाएँ लिखी हैं। अत्यन्त सहज वाचन और शिल्पगत नवीनता के कारण इन कहानियों में चिन्हित समकालीन सन्दर्भ भारतीय जीवन की वास्तविकताओं को लोगों के सामने ला खड़ा करते हैं। आदर्श और बाह्य मान्यताओं वाली दृष्टि से देखे जाने के कारण संघर्ष और बदलाव की जो बातें हवा में उठाई जा रही थीं, उनके सामने इन कहानियों ने एक नया दृश्य ला खड़ा किया। अन्धकार, अशिक्षा, ग़रीबी ही नहीं धार्मिक अन्धविश्वास, शोषण और अनाचार के परिवेश को उजागर करने के कारण इन कहानियों को लोगों ने एक उपलब्धि की तरह स्वीकार किया। इस संकलन में ‘पान-फूल’, ‘महुए का पेड़‘, ‘हंसा जाई अकेला’, ‘भूदान’, ‘माही’, ‘सहज और शुभ’ तथा ‘बीच के लोग’ नामक पुस्तकें शामिल हैं।
Book Details
-
ISBN9789386863621
-
Pages615
-
Avg Reading Time21 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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