(0)
₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है। यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं। मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्पर विरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं। विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है। इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है। हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं। पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन भी किया है। दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद तथा मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर विमर्श करते हैं तथा वहीं सकारात्मक शक्तियों को चिह्नित भी करते हैं। इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिपे्रक्ष्य में उपस्थित होता है। 'भारतीय दर्शन : सरल परिचय' न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी पुस्तक है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है। यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं। मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्पर विरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं। विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है। इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है।
हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं। पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन भी किया है।
दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद तथा मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर विमर्श करते हैं तथा वहीं सकारात्मक शक्तियों को चिह्नित भी करते हैं। इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिपे्रक्ष्य में उपस्थित होता है।
'भारतीय दर्शन : सरल परिचय' न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी पुस्तक है।
Book Details
-
ISBN9788126715268
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Lokayat
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +2
- Book Type:

- Description:
यह पुस्तक प्राचीन भारतीय भौतिकवाद की मार्क्सवादी व्याख्या प्रस्तुत करती है। पाश्चात्य व्याख्याताओं ने भारतीय दर्शन के इस सशक्त पक्ष की प्रायः उपेक्षा की है। उनकी उपनिवेशवादी इतिहास-दृष्टि इस बात को बराबर रेखांकित करती रही है कि भारतीय दर्शन की मूल चेतना पारलौकिक और आध्यात्मिक है। उसमें जीवन तथा जगत के यथार्थ को महत्त्वहीन माना गया है अथवा उसकी उपेक्षा की गई है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने प्राचीन ग्रन्थों, पुरातात्त्विक और नृतत्त्वशास्त्रीय प्रमाणों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारत में लौकिकवाद और अलौकिकवाद, दोनों ही मौजूद थे। राजसत्ता के उदय के बाद शासक वर्ग ने लौकिक चिन्तन को अपने स्वार्थ के लिए नेपथ्य में डाल दिया तथा पारलौकिक चिन्तन को बढ़ावा दिया और भारतीय चिन्तन की एकमात्र धारा के रूप में उसे प्रतिष्ठा दिलाई। इसलिए प्राचीन भारत के लौकिक चिन्तन को समझे बिना हमारी इतिहास-दृष्टि हमेशा धुँधली रहेगी। यह पुस्तक इतिहास, दर्शन, भारतीय साहित्य और संस्कृति में दिलचस्पी रखनेवाले जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। इस पुस्तक का विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
Janane ki Batein (Vol. 6)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। पुस्तक श्रृंखला का यह छठा भाग प्राचीन सभ्यताओं के विकास पर आधारित है। इसमें सुमेर, मिस्र, सिन्धुघाटी आदि नदी केन्द्रित सभ्यताओं के साथ-साथ चीन, भारत, ग्रीस, रोम जैसे देशों के प्राचीन इतिहास की संक्षिप्त जानकारी भी दी गई है।
Janane ki Batein : (Vol. 11)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein : Vol. 11
Janane ki Batein (Vol. 7)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 7) about History
Darshanshastra Aur Bhavishya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +2
- Book Type:

- Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ पुस्तकमाला की इस आठवीं और अंतिम कड़ी के लेखक प्रो. देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय हैं, जो इस पुस्तकमाला के संपादक भी हैं। संपादक होने के नाते जिस प्रकार उन्होंने पुस्तकमाला की पहली पुस्तक ‘दर्शनशास्त्र के स्रोत’ में पूरे संसार की प्रमुख दार्शनिक प्रवृत्तियों के अध्ययन के लिए एक भूमिका तैयार की थी, उसी प्रकार यहाँ उन्होंने संपूर्ण पुस्तकमाला का विहगावलोकन किया है और उन पर अपनी सारगर्भित टिप्पणियाँ प्रस्तुत की हैं। अंत में उन्होंने इस प्रश्न पर विस्तारपूर्वक विचार किया है कि मनुष्य का भविष्य दर्शनशास्त्र के भविष्य से किस प्रकार जुड़ा हुआ है। संक्षेप में कहें तो यह छोटी-सी पुस्तक दर्शनशास्त्र के गहन प्रश्नों की तह में उतरने की तैयारी के लिए ऐसी पाठ्य सामग्री प्रस्तुत करती है, जो न केवल रोचक बल्कि प्रामाणिक और सटीक भी है।
Janane ki Batein (Vol. 5)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत, किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित इस पाँचवें भाग में लेखक ने भाषा, संस्कृति और कलाओं के विकास पर प्रकाश डाला है। इसमें लिपियों के विकास की कथा भी बहुत ही रोचक ढंग से बताई गई है।
Janane ki Batein (Vol. 9)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein Vol. 9, about science
Janane ki Batein (Vol. 4)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Janane ki Batein (Vol. 1)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Janane ki Batein (Vol. 2)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 2)
Vigyan, Prakriti Aur Satya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +2
- Book Type:

- Description:
विज्ञान, प्रकृति को समझने का एक साधन है, जो सत्य की खोज में लगा रहता है, और यह ज्ञान को अवलोकन, प्रयोग और तर्क पर आधारित करता है, जो समय के साथ विकसित और बदल सकता है।
Darshanshastra Ke Srot
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +2
- Book Type:

- Description:
विश्व-दर्शन की मुख्य धारा में विभिन्न कालों के विभिन्न लोगों ने सकारात्मक या नकारात्मक, अपने-अपने तरीक़े से योगदान किया है। इस मुख्य धारा में अनेक धाराएँ मिली हुई हैं, जिनसे सामान्य पाठकों का परिचय कराने के लिए आठ पुस्तकों की यह शृंखला तैयार की गई है। प्रो. देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय की प्रस्तुत पुस्तक इसी शृंखला की पहली कड़ी है। श्री चट्टोपाध्याय इस पुस्तकमाला के प्रधान सम्पादक हैं और साथ ही ‘दर्शनशास्त्र के स्रोत’ शीर्षक प्रस्तुत पुस्तक के लेखक भी। अत: उनकी यह पुस्तक एक प्रकार से पूरी शृंखला की पूर्व-पीठिका है। इस पुस्तक में उन्होंने, जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, दर्शन के स्रोतों की खोज की है, और शृंखला की अगली पुस्तकों को पढ़ने-समझने का संस्कार पैदा करने की आधारशिला का निर्माण भी किया है। ‘दर्शनशास्त्र की आवश्यकता क्यों है’ से प्रारम्भ करके वे आदि-मानव के क्रमिक विकास पर विचार करते हैं और फिर समाज में कर्म-विभाजन की शुरुआत, नगर क्रान्ति, जीवन में धर्म की भूमिका आदि को रेखांकित करते हुए इस प्रश्न पर विचार करते हैं कि दर्शन का जन्म और विकास कैसे हुआ। इस समस्त विवेचन के क्रम में विश्व की प्राचीन चिन्तन-पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय भी पाठकों को मिल जाता है। प्रो. चट्टोपाध्याय ने यहाँ थेल्स के बारे में किए गए इस दावे पर प्रश्न-चिह्न लगाया है कि वह पहला वैज्ञानिक था। ऐसा उन्होंने ‘छान्दोग्य उपनिषद’ के उद्दालक आरुणि से सम्बन्धित अंश का विवेचन करते हुए किया है। उनके अनुसार, उद्दालक आरुणि के विज्ञान के प्रति सुस्पष्ट रुझान को देखते हुए विश्व विज्ञान के इतिहास का गम्भीर पुनरीक्षण आवश्यक है। कहना न होगा कि प्रो. चट्टोपाध्याय की सामाजिक दृष्टि और बौद्धिक तटस्थता से अनुप्राणित यह पुस्तक दर्शन के अध्येताओं के साथ-साथ उन पाठकों के लिए भी रुचिकर होगी, जो दर्शन के अध्ययन की शुरुआत ही कर रहे हैं।
Janane ki Batein (Vol. 8)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein Vol. 8 about Fiction: Stories
Janane ki Batein (Vol. 10)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 10) about Social Studies
Janane ki Batein (Vol. 3)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay +1
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 2)
Europe Mein Darshanshastra : Marx Ke Baad
- Author Name:
Shankari Prasad Bandyopadhyay +2
- Book Type:

- Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ शृंखला की इस छठी पुस्तक में यूरोपीय दर्शनशास्त्र के हेगेल और मार्क्स के बाद के इतिहास पर विचार किया गया है। एक प्रकार से यह विवेचन व्यवहार-केंद्रित होने की अपेक्षा विचार-केंद्रित अधिक है। दूसरे शब्दों में, मुख्य ध्यान इस सैद्धांतिक पक्ष पर है कि हेगेल के दर्शनशास्त्र का विकास आगे चलकर किस प्रकार हुआ और उस पर दर्शनशास्त्रियों की क्या प्रतिक्रियाएँ रहीं। मार्क्स के निरूपण के फलस्वरूप हेगेल के दर्शनशास्त्र का कायापलट हो गया था। कुछ और विचार भी सामने आए, जो अनिवार्यतया न तो हेगेल के दर्शनशास्त्र का विस्तार थे और न ही उस पर दर्शनशास्त्रियों की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुए थे। इस तरह के विचारों में परम विचारवाद, यथार्थवाद और इतालवी विचारवाद प्रमुख थे, जिनके प्रस्तोता ब्रैडले, रसल, मूर, क्रोचे, जांतील आदि दर्शनशास्त्री रहे हैं। विलियम जोंस, जॉन डेवी और अन्य दर्शनशास्त्रियों द्वारा प्रस्तुत व्यावहारिकतावाद और बर्गसाँ की विचारधारा इस काल के यूरोपीय दर्शनशास्त्र की अन्य विशेषताएँ हैं। ‘यूरोप में दर्शनशास्त्र : मार्क्स के बाद’ पुस्तक में इन सभी धाराओं और विचार-सरणियों का विस्तारपूर्वक विवेचन किया गया है।
Europe Mein Darshanshastra : Marx Ke Baad
Shankari Prasad Bandyopadhyay
20% off₹ 250
₹ 200
Available
Main Ram Bol Raha Hoon
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
राम का जीवन भारतीयों के लिए एक आदर्श जीवन है। जन्म से लेकर अंत तक राम का चरित्र एक दीप-स्तंभ है। ऐसे सार्वकालिक राष्ट्रीय नायक का कथानक किसी भी कृति को गौरवान्वित करता है। ‘रामचरितमानस’ के धीरोदात्त नायक राम कथनी से अधिक करनी में विश्वास रखते थे। अतः उनके जो भी कथन उपलब्ध हैं, वे भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण धरोहर हैं। राम के प्रस्तुत उद्घोष तुलसीकृत रामचरितमानस एवं लेखक की समांतर कृति ‘रामचरितमानस: नाट्य रूप’ से उद्धृत किए गए हैं। विश्वास है, सुधी पाठक प्रस्तुत कृति से प्रेरणा ग्रहण करके अपने जीवन को सफल बनाएँगे और भारतीय तथा विश्व-समाज को समुन्नत करने में योगदान देंगे।
Ramdoot : Hanuman Ka Aatmakhyan
- Author Name:
Trilok Nath Pandey
- Book Type:

- Description:
प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण सहित ऋष्यमूक पर्वत की एक दूसरी सुरम्य चोटी, जिसका नाम प्रस्रवण था, पर चले गए और वहाँ एक गुफा में निवास करने लगे। मैंने उनसे आग्रह किया कि मैं दास-रूप में उनके निकट रहकर उनकी सेवा करना चाहता हूँ। इस सम्बन्ध में मैंने सुग्रीव जी से भी अनुमति ले ली थी, किन्तु प्रभु श्रीराम ने मेरे आग्रह को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि, “मैं आपके अतिशय स्नेह एवं सत्कार की भावना से अनुगृहीत हूँ, हनुमान। किन्तु, आपका प्रस्ताव मैं स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि मैं और मेरे अनुज लक्ष्मण तपस्वी रूप में हैं और तपस्वियों को किसी दास से सेवा लेने का अधिकार नहीं है। आपकी सेवा नहीं, आपकी सहायता की मुझे आवश्यकता है। इसके अनेक अवसर आगे आएँगे। अभी वर्षा ऋतु प्रारम्भ हो गई है। इस काल में यात्रा एवं उद्योग सम्बन्धित सारे कार्य स्थगित हो जाते हैं। वर्षा ऋतु के इन चार महीनों आप किष्किन्धापुरी में विश्राम करें और मैं लक्ष्मण सहित प्रस्रवण पर्वत पर। वर्षा ऋतु समाप्त होते ही सीता की खोज शुरू कर दी जाएगी।”
Gorakh-Vijay
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal +1
- Book Type:

- Description:
‘गोरख विजय' नाथपंथ के महान योगी गुरु गोरखनाथ से सम्बन्धित पुरातन बाग्रा काव्य ग्रन्थ ‘गोर्ख विजय’ का हिन्दी अनुवाद और समीक्षात्मक पर्यालोचन प्रस्तुत करनेवाली कृति है। गोरखनाथ ने अपने साधनामय जीवन और कल्याणमय दर्शन से तत्कालीन जन-समाज को अत्यन्त प्रभावित-प्रेरित किया था। उन्होंने द्वैताद्वैत-विलक्षण अद्वैतवाद का समर्थन किया लेकिन संसार को मिथ्या मानने से इनकार किया। उन्होंने मोक्ष का साधन योग को माना और योग को अष्टांग न मानकर षडंग माना। वस्तुतः यम-नियम को उन्होंने, साधक हो या सामान्य-जन, मनुष्य मात्र का कर्तव्य और दायित्व बताया जिनमें परिपक्वता के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की सिद्धि सम्भव है। ऐसी अनेकानेक बातों को जानने-समझने के लिए ‘गोरख विजय’ एक अत्यन्य उपयोगी ग्रन्थ है। प्रस्तुत पुस्तक का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसमें बंगाल के लोक समाज में प्रचलित गोरखनाथ सम्बन्धी कई लोकगाथाएँ और कुछ अन्य प्रासंगिक सामग्री भी दी गई हैं जिनसे गोरखपंथी साधना के नये आयाम खुलते हैं। वस्तुतः साधक हो या साहित्यिक, विद्वान हो या सामान्य पाठक, गोरखनाथ में दिलचस्पी रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg
- Author Name:
Vishen Lakhiani
- Book Type:

- Description:
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg Hindi Translation of The Buddha and The Badass: The Secret Spiritual Art of Succeeding at Work. क्या आपने गौर किया है कि कैसे कुछ लोग नौकरी में कमाल के भाग्यशाली होते हैं! वे बड़ी आसानी से समाधान सुझा देते हैं। वे सही लोगों को आकर्षित करते हैं। लोग उनके अभियानों, कंपनियों, उनकी टीमों का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे बड़े-बड़े काम मुसकराते हुए पूरा कर लेते हैं और वेतन में अच्छी वृद्धि के साथ ही प्रमोशन भी पा लेते हैं। ये सुपरस्टार कमाल की एकाग्रता और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर खास दायरे का हिस्सा बन जाते हैं।यह पुस्तक बताती है कि उनके साथ कैसे जुड़ें। आप जहाँ भी हों, आप में अनोखी शक्तियाँ हैं। यह आधुनिक युग का भ्रम है कि कठिन परिश्रम और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। आपके भीतर एक आत्मा है और एक बार आपने काम के क्षेत्र में इसकी पूरी शक्ति का प्रयोग किया, तो बस कमाल हो जाता है। अपने भीतर के बुद्ध और निर्भीक योद्धा को जगाना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आपके काम करने के तरीके को बदलकर रख देगी। आप उन तरीकों को जान लेंगे, जो वास्तविकता के हर नियम को आपके पक्ष में ला देंगे।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book