Janane ki Batein : (Vol. 11)
(0)
Author:
Deviprasad ChattopadhyayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
495
396 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Janane ki Batein : Vol. 11
Read moreAbout the Book
Janane ki Batein : Vol. 11
Book Details
-
ISBN9788126711598
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Janane ki Batein (Vol. 7)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 7) about History
Janane ki Batein (Vol. 4)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Janane ki Batein (Vol. 6)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। पुस्तक श्रृंखला का यह छठा भाग प्राचीन सभ्यताओं के विकास पर आधारित है। इसमें सुमेर, मिस्र, सिन्धुघाटी आदि नदी केन्द्रित सभ्यताओं के साथ-साथ चीन, भारत, ग्रीस, रोम जैसे देशों के प्राचीन इतिहास की संक्षिप्त जानकारी भी दी गई है।
Janane ki Batein (Vol. 5)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत, किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित इस पाँचवें भाग में लेखक ने भाषा, संस्कृति और कलाओं के विकास पर प्रकाश डाला है। इसमें लिपियों के विकास की कथा भी बहुत ही रोचक ढंग से बताई गई है।
Vigyan, Prakriti Aur Satya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
विज्ञान, प्रकृति को समझने का एक साधन है, जो सत्य की खोज में लगा रहता है, और यह ज्ञान को अवलोकन, प्रयोग और तर्क पर आधारित करता है, जो समय के साथ विकसित और बदल सकता है।
Janane ki Batein (Vol. 3)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 2)
Janane ki Batein (Vol. 9)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein Vol. 9, about science
Janane ki Batein (Vol. 8)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein Vol. 8 about Fiction: Stories
Janane ki Batein (Vol. 1)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Darshanshastra Aur Bhavishya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Darshanshastra Ke Srot
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
विश्व-दर्शन की मुख्य धारा में विभिन्न कालों के विभिन्न लोगों ने सकारात्मक या नकारात्मक, अपने-अपने तरीक़े से योगदान किया है। इस मुख्य धारा में अनेक धाराएँ मिली हुई हैं, जिनसे सामान्य पाठकों का परिचय कराने के लिए आठ पुस्तकों की यह शृंखला तैयार की गई है। प्रो. देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय की प्रस्तुत पुस्तक इसी शृंखला की पहली कड़ी है।
श्री चट्टोपाध्याय इस पुस्तकमाला के प्रधान सम्पादक हैं और साथ ही ‘दर्शनशास्त्र के स्रोत’ शीर्षक प्रस्तुत पुस्तक के लेखक भी। अत: उनकी यह पुस्तक एक प्रकार से पूरी शृंखला की पूर्व-पीठिका है। इस पुस्तक में उन्होंने, जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, दर्शन के स्रोतों की खोज की है, और शृंखला की अगली पुस्तकों को पढ़ने-समझने का संस्कार पैदा करने की आधारशिला का निर्माण भी किया है। ‘दर्शनशास्त्र की आवश्यकता क्यों है’ से प्रारम्भ करके वे आदि-मानव के क्रमिक विकास पर विचार करते हैं और फिर समाज में कर्म-विभाजन की शुरुआत, नगर क्रान्ति, जीवन में धर्म की भूमिका आदि को रेखांकित करते हुए इस प्रश्न पर विचार करते हैं कि दर्शन का जन्म और विकास कैसे हुआ। इस समस्त विवेचन के क्रम में विश्व की प्राचीन चिन्तन-पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय भी पाठकों को मिल जाता है।
प्रो. चट्टोपाध्याय ने यहाँ थेल्स के बारे में किए गए इस दावे पर प्रश्न-चिह्न लगाया है कि वह पहला वैज्ञानिक था। ऐसा उन्होंने ‘छान्दोग्य उपनिषद’ के उद्दालक आरुणि से सम्बन्धित अंश का विवेचन करते हुए किया है। उनके अनुसार, उद्दालक आरुणि के विज्ञान के प्रति सुस्पष्ट रुझान को देखते हुए विश्व विज्ञान के इतिहास का गम्भीर पुनरीक्षण आवश्यक है।
कहना न होगा कि प्रो. चट्टोपाध्याय की सामाजिक दृष्टि और बौद्धिक तटस्थता से अनुप्राणित यह पुस्तक दर्शन के अध्येताओं के साथ-साथ उन पाठकों के लिए भी रुचिकर होगी, जो दर्शन के अध्ययन की शुरुआत ही कर रहे हैं।
Janane ki Batein (Vol. 2)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 2)
Janane ki Batein (Vol. 10)
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
Janane ki Batein (Vol. 10) about Social Studies
Lokayat
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
यह पुस्तक प्राचीन भारतीय भौतिकवाद की मार्क्सवादी व्याख्या प्रस्तुत करती है। पाश्चात्य व्याख्याताओं ने भारतीय दर्शन के इस सशक्त पक्ष की प्रायः उपेक्षा की है। उनकी उपनिवेशवादी इतिहास-दृष्टि इस बात को बराबर रेखांकित करती रही है कि भारतीय दर्शन की मूल चेतना पारलौकिक और आध्यात्मिक है। उसमें जीवन तथा जगत के यथार्थ को महत्त्वहीन माना गया है अथवा उसकी उपेक्षा की गई है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने प्राचीन ग्रन्थों, पुरातात्त्विक और नृतत्त्वशास्त्रीय प्रमाणों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारत में लौकिकवाद और अलौकिकवाद, दोनों ही मौजूद थे। राजसत्ता के उदय के बाद शासक वर्ग ने लौकिक चिन्तन को अपने स्वार्थ के लिए नेपथ्य में डाल दिया तथा पारलौकिक चिन्तन को बढ़ावा दिया और भारतीय चिन्तन की एकमात्र धारा के रूप में उसे प्रतिष्ठा दिलाई। इसलिए प्राचीन भारत के लौकिक चिन्तन को समझे बिना हमारी इतिहास-दृष्टि हमेशा धुँधली रहेगी। यह पुस्तक इतिहास, दर्शन, भारतीय साहित्य और संस्कृति में दिलचस्पी रखनेवाले जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। इस पुस्तक का विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
Bhartiya darshan : saral Parichaya
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description:
भारत जैसे बहुभाषी, सामासिक समाज में राष्ट्रीय मानस को समझने के लिए भारतीय दर्शन का अनुशीलन आवश्यक है। यह और भी जरूरी है क्योंकि भारतीय दर्शन की एक सुदीर्घ परंपरा रही है। इसमें आस्था, विश्वास, अंधविश्वास, धर्म जैसे अवयव भी घुले-मिले हैं। मोटे तौर पर दर्शन में दो परस्पर विरोधी धाराएँ तो सक्रिय रही ही हैं। विविधता इतनी विपुल है कि कुछ पंक्तियों में भारतीय दर्शन को परिभाषित करना कठिन है। इसीलिए तर्कसंगत, वैज्ञानिक, दार्शनिक दृष्टिकोण का विकास जरूरी हो जाता है। हम अक्सर अपने दार्शनिक सिद्धांतों, प्राचीन संस्कृति और सभ्यता के प्रति मोहवादी अतिवाद के शिकार हो जाते हैं। पुस्तक के लेखक विख्यात मनीषी देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने इस संदर्भ में न केवल संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है बल्कि जहाँ आवश्यक हुआ, वहाँ अवैज्ञानिक और अतार्किक मान्यताओं का खंडन भी किया है। दर्शन हवा में नहीं बल्कि यथार्थ के ठोस धरातल पर जन्म लेते हैं। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भारतीय आदर्शवाद तथा मायावाद के पीछे सक्रिय सामाजिक शक्तियों, कर्मवाद के बजाय परलोकवाद का पाठ पढ़ानेवाले निहित स्वार्थों और भारतीय विज्ञान के विकास में बाधा बननेवाले हितों पर विमर्श करते हैं तथा वहीं सकारात्मक शक्तियों को चिह्नित भी करते हैं। इस तरह पुस्तक में भारतीय दर्शन सही परिपे्रक्ष्य में उपस्थित होता है। 'भारतीय दर्शन : सरल परिचय न केवल सामान्य बल्कि सुविज्ञ पाठकों के लिए बहुविध उपयोगी पुस्तक है।
District Saharanpur (Environmental Challenges and Population Scenario)
- Author Name:
Dr. Pankaj Kumar & Dr. Narendra KUmar
- Book Type:

- Description:
जनपद सहारनपुर अपनी प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, भौगोलिक स्थिति, विविधतापूर्ण सांस्कृतिक परम्पराओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के कारण प्रदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। उत्तर प्रदेश राज्य के इस प्रसिद्ध जनपद की जनसंख्या, संस्कृति एवं पर्यावरण जैसे ज्वलन्त विषयों पर आधारित यह पुस्तक लेखकों द्वारा अत्यन्त सराहनीय एवं समयानुकूल प्रयास है। वर्तमान समय में तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या, नगरीयकरण तथा औद्योगिक गतिविधियों के कारण जनपद में अनेक पर्यावणीय चुनौतियाँ सामने आ रही है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार का सार्थक प्रयास न केवल शैक्षणिक समाज की दृष्टि से अर्पित नीति निर्धारकों और सामाजिक विकास के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। लेखकों का यह प्रयास सहारनपुर जनपद की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण सन्तुलन के प्रति जागरूकता लाने के दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तुत करेगा। मैं लेखकों को इस अत्यन्त ही सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई और उज्जवल भविष्य के लिए हृदय की गहराइयों से अपनी ढेरों शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ। - प्रो. बीरेन्द्र सिंह : पूर्व प्राचार्य, आर.एस.एम. (पी.जी.) कालेज धामपुर, बिजनौर (उ.प्र.)
Aalim Sir Ki English Class
- Author Name:
Aalim
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Mai urdu Hoon
- Author Name:
Dheerendra Singh Fayyaz
- Book Type:

- Description:
मैं उर्दू हूँ’ एक भाषा के सफ़र का संस्मरण है। ये किताब उर्दू के प्रारम्भिक युग से शुरू होती है और मीर-ओ-ग़लिब से लेकर आधुनिक युग के नामचीन साहित्यकारों की उँगली थामे उस जगह तक जा पहुँचती है, जहाँ प्राचीन भाषाओं और लिपियों का ज़िक्र स्वाभाविक हो जाता है। इस संस्मरण में धीरे-धीरे ये भेद भी खुलता है कि सभी भाषाओं में कुछ न कुछ साम्य है और प्रत्यक्ष रूप से असंबद्ध लगने वाली देवनागरी, फ़ारसी और अरबी लिपियाँ दर-अस्ल एक ही मूल से निकली हैं। ये किताब लेखक और उर्दू के बीच होने वाला एक रोचक वार्तालाप है जो भाषाओं की व्युत्पत्ति, विकास और प्रसार के विषयों पर रौशनी डालता है।
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME PRVASI JEEVAN
- Author Name:
Shahnaz
- Book Type:

- Description:
Book
SUDHA OM DHINGRA KI KAHANIYON ME NIHIT TATHA ABHIVYAKT SAMASYAEN
- Author Name:
Nidhiraj Bhadana +1
- Book Type:

- Description:
प्रवासी कहानीकार डाॅ सुधा ओम ढींगरा की कहानियों पर यह दो शोध कार्य हैं जो निधिराज भडाना तथा रेशू पाण्डेय ने किये हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book