Janane ki Batein (Vol. 5)
(0)
Author:
Deviprasad ChattopadhyayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
495
396 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत, किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है। इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं। साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित इस पाँचवें भाग में लेखक ने भाषा, संस्कृति और कलाओं के विकास पर प्रकाश डाला है। इसमें लिपियों के विकास की कथा भी बहुत ही रोचक ढंग से बताई गई है।
Read moreAbout the Book
राजा राममोहन राय से लेकर उत्पलेन्दु चक्रवर्ती तक बंगाल में निरन्तर नये विचारों के प्रसार के माध्यम से जिन महापुरुषों ने नवजागरण की धारा को मजबूत, किया है, उनमें एक देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय भी हैं। भारतीय दर्शन की भौतिकवादी धारा को रेखांकित करने के लिए इन्हें पूरी दुनिया में आदर के साथ याद किया जाता है।
देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने एक तरफ भौतिकवाद को मज़बूत करने के लिए लोकायत जैसी पुस्तक लिखी तो दूसरी तरफ अन्धविश्वासों और रूढ़ियों में फँसे भारतीय समाज के बच्चों में समय, समाज और प्रकृति को देखने-परखने की वैज्ञानिकी समझ तथा ज्ञान के विकास के लिए ग्यारह खंडों में इस महत्त्वपूर्ण पुस्तकमाला का सम्पादन किया, जो किसी बाल विश्वकोश से कम नहीं है।
इस श्रृंखला की पुस्तकें केवल बच्चों के ज्ञान का ही विस्तार नहीं करती हैं, बल्कि उन्हें बिल्कुल नई समझ और संसार को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करती हैं।
साहित्य और संस्कृति पर केन्द्रित इस पाँचवें भाग में लेखक ने भाषा, संस्कृति और कलाओं के विकास पर प्रकाश डाला है। इसमें लिपियों के विकास की कथा भी बहुत ही रोचक ढंग से बताई गई है।
Book Details
-
ISBN9788126711536
-
Pages98
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bharat Vibhajan Ka Dansh
- Author Name:
Neerja Madhav
- Book Type:

- Description: 14 अगस्त, 1947 को विभाजन का दंश एक कभी न भरनेवाला घाव दे गया। भारतभूमि का ही एक टुकड़ा लेकर 'पाकिस्तान' नामक इसलामिक राष्ट्र घोषित करनेवाले कट्ïटरपंथी नेताओं ने उस भूखंड पर बहुत समय पहले से ही रहते चले आए भारतीयों को, विशेषकर हिंदुओं और सिखों को जबरदस्ती भारत भेजने का फरमान सुना दिया। उनके सामान लूट लिये गए, जमीनें वहीं छूट गईं, स्त्रियों-बच्चियों के साथ पापाचार हुए; पुरुषों, स्त्रियों की हत्या करके उनके शव ट्रेनों में भरकर भारत की ओर रवाना कर दिए गए। भारत के विभाजन ने मानवता की ही हत्या नहीं की थी, विचारों की भी हत्या की थी। यदि 15 अगस्त को मिली आजादी एक ऐतिहासिक घटना है तो 14 अगस्त को विभाजन की त्रासदी एक ऐतिहासिक दुर्घटना है। 'भारत-विभाजन का दंश' रोंगटे खड़े कर देनेवाली, भीतर तक उद्वेलित और आंदोलित कर देनेवाली मार्मिक औपन्यासिक कृति है, जिसके लेखन का एक उद्देश्य यह भी है कि आगे आनेवाली पीढिय़ाँ समझें कि किस तरह से आदमी से आदमी के रिश्ते को उन्माद और आतंक रौंदता आ रहा है। जब नई पीढिय़ाँ उस आतंक और उन्माद को समझेंगी, तभी उनके उन्मूलन का स्थायी मार्ग भी मिलेगा; विभाजन का सच भी पता चलेगा और विभाजन की व्यर्थता भी। तभी पता चलेगा आक्रांताओं के साथ संबंध का ऐतिहासिक झूठ भी और तभी बढ़ उठेंगे पग घर वापसी की ओर भी।
Divine Child
- Author Name:
Ashok Choudhary +1
- Book Type:

- Description: • हम अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों से बहुत प्रेम करते हैं, लेकिन क्या प्रेम के असली मायने हमें पता हैं? और अगर पता हैं तो हमारा प्रेम उनको जीवन में पंख दे रहा है या जड़? • माता-पिता जिस विचारधारा और विश्वास के साथ जी रहे हैं, जब उससे खुद ही खुश नहीं हैं तो वे क्या बच्चों को सही दिशा दे पाएँगे? • आपकी नजर में सफलता के मापदंड क्या हैं? • विज्ञान, धर्म, पश्चिम संस्कृति के बीच भ्रमित होकर बच्चे कहीं अंदर-ही-अंदर घुट तो नहीं रहे हैं? • जीवन क्या है? जीवन का असली मकसद या उद्देश्य क्या है? • एक ही माँ के बच्चों में पैदा होते ही इतनी विभिन्नताएँ क्यों होती हैं? बालमन का सूक्ष्म अध्ययन कर उनके चहुँमुखी विकास के लिए एक आवश्यक हैंडबुक है यह पुस्तक, जो बच्चों के संपूर्ण विकास का पथ प्रशस्त करने और माता-पिता के साथ उनकी भावनात्मकता को बल देने का काम करेगी।
School Ki Hindi
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: कृष्ण कुमार का यह नया निबन्ध-चयन उनके शैक्षिक लेखन को एक वृहत्तर सांस्कृतिक सन्दर्भ देता है। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल यहाँ बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षों में बदलती-बनती नागरिक संस्कृति की परिधि में की गई है। खिलौनों और पाठ्य-पुस्तकों की भाषा से लेकर धार्मिक अलगाववाद की राजनीति और सामाजिक विषमता तक एक लम्बी प्रश्न-शृंखला है, जिसमें कृष्ण कुमार अपनी सुपरिचित चिन्ताएँ पिरोते हैं। इन चिन्ताओं में साहित्य की परख, स्त्री की असुरक्षा और भाषा के भविष्य जैसे विविध प्रसंग शामिल हैं। अपनी व्यंजनापरक शैली और चीज़ों को रुककर देखने की ज़िद से कृष्ण कुमार ने एक बड़ा पाठक-वृत्त बनाया है। अध्यापन और लेखन के बीच कृष्ण कुमार एक व्यक्तिगत पुल बनाने में सफल हुए हैं। यह पुल उनके शैक्षिक सरोकारों को खोजी यात्राओं पर ले जाता है और उनके पाठकों को स्कूल की चारदीवारी और बच्चों के मनोजगत में प्रवेश कराता है।
Bundelkhand Ki Sanskrtik Nidhi
- Author Name:
Mahendra Kumar Navaiya
- Book Type:

- Description: वैसे तो देश में हजारों बोलियाँ बोली जाती हैं और इन सब बोलियों का अपना-अपना महत्त्व अपनी-अपनी जगह है | मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बुंदेलखंडी बोली बोली जाती है, जिसका अपना एक अंदाज है | किसी भी बोली को अलंकृत करने, मोहक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए उस बोली में पहेलियों, कहावतों, मुहावरों, कहानियों और अहानों का विशेष महत्त्व होता है। बुंदेलखंडी बोली में लोक-स्मृति में आज भी ऐसी पहेलियाँ, कहावतें, कहानी, अहाने और मुहावरे सुरक्षित एवं संरक्षित हैं | यह सब पुरानी पीढ़ी के पास ही है, ऐसी लोक-स्मृतियों को एक जगह समेटने में आज तक कोई प्रयास नहीं हुआ है, संभवत 'बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि' एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसे लेखक ने लोक स्मृतियों से निकालकर साहित्य के रुप में संरक्षित किया है। इतना ही नहीं, बुंदेलखंड की सांस्कृतिक निधि पुस्तक बच्चों, युवाओं और सभी आयु वर्ण के लोगों को बुंदेलखंड के रीति-रिवाज, बुंदेली बोली के गूढ़ रहस्यों, पहेलियों, कहावतों, कहानियों, मुहावरों और अहान से परिचित कराने में मील का पत्थर है। निश्चित रूप से आज की चकाचौंध भरी दुनिया में ऐसे ज्ञानमयी साहित्य की आवश्यकता है, जिसे लेखक ने इस पुस्तक में बखूबी सजाया है|
Aisa Kyon Hota Hai
- Author Name:
Turshan Pal Pathak
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Bhartiya Sanskriti Aur Hindutva
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

-
Description:
गीतेश शर्मा जिन्हें हम उनकी अत्यन्त लोकप्रिय पुस्तक ‘धर्म के नाम पर’ के लिए जानते हैं, देश के उन कुछेक चिन्तकों में थे जिन्हें धर्म और ईश्वर की समाज तथा मनुष्य-विरोधी अवधारणाओं पर ख़ामोश रहना कभी स्वीकार नहीं हुआ। आज जब मुख्यधारा के प्रगतिशील चिन्तन ने सर्वधर्म समभाव के नाम पर हर तरह के धार्मिक अनाचार से आँखें फेर ली हैं, और यही प्रगतिशील का प्रमुख लक्षण हो गया है। गीतेश जी का लेखन हमारे लिए मार्गदर्शन की तरह है।
उन्हें यह देखकर अफ़सोस होता था कि हिन्दू कट्टरपन्थ का खुला विरोध करनेवाले लोग भी इस्लाम तथा अन्य धर्मों की धार्मिक-सामाजिक जड़ता पर एकदम चुप हो जाते हैं, और इस घातक तुष्टीकरण को धर्मनिरपेक्षता कहते हैं; लेकिन वह हिन्दुत्ववादियों के इस प्रचार से भी सहमत नहीं कि भारत के मुसलमानों ने अपने देश और समाज के लिए कुछ नहीं किया, कि वे भारतीयता को स्वीकार नहीं करते। तमाम तरह के सुधारवादी आन्दोलनों से गुज़रते हुए हिन्दू धर्म ने एक उदार स्थिति हासिल की है, यह वे मानते थे; लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों के चलते हिन्दू धर्म जिस कट्टरता की ओर बढ़ रहा है, वह ख़तरा भी उनकी निगाह में था। भारतीय संस्कृति की विराट धारा की आन्तरिक जिजीविषा की पहचान उन्हें थी; लेकिन बाज़ार, धर्म, अन्धविश्वास और आर्थिक पिछड़ेपन के घालमेल से बनी गन्दी नाली की मौज़ूदगी भी उन्हें साफ़ दिखाई देती थी।
वे दरअसल तर्क की प्रतिष्ठा चाहते थे, वे चाहते थे कि कोई भी धर्म, कोई भी ईश्वर, कोई भी सम्प्रदाय सवाल करने की उस मूल मानवीय शक्ति ऊपर न हो जिसके बल पर मनुष्य जाति वहाँ पहुँची है जहाँ आज वह है।
इस पुस्तक में उनके समय-समय पर लिखे आलेख संकलित हैं। गीतेश जी बहुत ज़्यादा और लगातार लिखनेवाले लेखकों में नहीं थे। जो भी उन्होंने लिखा वह भीतर के गहरे दबाव पर लिखा। इसलिए भी ये आलेख और ज़्यादा पठनीय हो जाते हैं और इसलिए भी कि इनमें जो चिन्ताएँ ज़ाहिर हुई हैं, वे आज की राजनैतिक-सामाजिक स्थितियों में निर्णायक अहमियत रखती हैं।
The Prince
- Author Name:
Niccolo Machiavelle
- Book Type:

- Description: वेत्तोरी को लिखे पत्र में मैकियावेली यह निष्कर्ष निकालते हैं कि ‘इस छोटी-सी किताब को जब पढ़ा गया तो यह देखा गया होगा कि मैंने इन 15 सालों के दौरान शासन कला का कितना अध्ययन किया है। मैं न कभी सोया, न कभी निष्क्रिय रहा। हर आदमी इच्छा रखता है कि दूसरों की सेवा करके अनुभव प्राप्त किये व्यक्ति को अपनी सेवा में रखे। मेरी विश्वसनीयता पर किसी को कोई शक़ नहीं होना चाहिये, क्योंकि मैंने जो विश्वास एक बार जीता, उसको हमेशा बनाए रखा, तोड़ना नहीं सीखा। मैं अपने मालिक का भरोसेमंद और ईमानदार हूँ लेकिन उसकी फ़ितरत मैं नहीं बदल सकता। मेरी ग़रीबी मेरी ईमानदारी की गवाह है।’ यद्यपि लगभग चार शताब्दियों का ध्यान ‘द प्रिंस’ पर केंद्रित रहा है परंतु इसकी कुछ समस्याएँ अभी भी बहस के योग्य और दिलचस्प हैं क्योंकि शासकों और शासितों के बीच अनंत समस्याएँ हैं। यही आचार-विचार मैक्योवली के समकालीनों के भी हैं लेकिन नहीं कहा जा सकता कि यह सब नैतिकता यूरोप की पुरानी सरकारों में भी रही होगी। हमें आदर्श बल की बजाए उपलब्ध सामग्री पर भरोसा करना चाहिए। मैक्योवली जिस तरह से सरकार और आचरण के सिद्धांतों का वर्णन करते हैं, उससे घटनाएँ और व्यक्ति दिलचस्प हो जाते हैं।
Sahajta Ki Bhavyata
- Author Name:
Baldev Bhai Sharma
- Book Type:

- Description: सुप्रसिद्ध साहित्यकार और गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हाजी अपनी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक जीवन-यात्रा के 75 वसंत पूर्ण करने जा रही हैं। उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन में भारतीय चिंतनधर्मिता, लोकधर्मिता एवं लेखकीय प्रतिबद्धता से भारतीय स्त्री-विमर्श और परिवार-सशक्तीकरण का शंखनाद किया है। जीवन में अनेक रचनात्मक एवं अभिनव विचार-कार्यों के द्वारा विकास का पथ प्रशस्त किया है। अपने राजनीतिक जीवन में कई संगठनात्मक दायित्वों का बड़ी निष्ठा से निर्वहण करते हुए गाँव की पगडंडी से गोवा के राजभवन तक पहुँची हैं। इतने उच्च संवैधानिक पद पर होकर भी वे बड़ी सहजता व सादगी से सभी लोगों से मिलती, बातें करती, उनके कार्यक्रमों में उपस्थित हो जाती हैं, उनके दुःख-सुख की परवाह करती हैं। मृदुला सिन्हा के आचार-विचार, हाव-भाव, जीवन के क्षण-क्षण में लोक विद्यमान है। लोक ही उनके जीवन की प्रेरणा-शक्ति है। वे अपने संभाषणों में बार-बार कहती हैं— ‘‘साहित्यकार को मधुमक्खी की भूमिका में होना चाहिए, मकड़ा के नहीं। जो साहित्यकार समाज के विभिन्न क्यारियों से पराग इकट्ठा करते हैं, उनका साहित्य (मधु) उसी समाज-जीवन के लिए स्वास्थ्यवर्धक होता है।’’ एक प्रख्यात लेखक, संवदेनशील पत्रकार, सर्वभूतहितेरता, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रखर चिंतक, कुशल गृहिणी और शिखर राजनेता जैसे कितने पदों और गुणों को समेटे श्रीमती सिन्हा के 75वें जन्मदिवस के असवर पर सात खंडों में उनके जीवन की विविध रंगी झाँकी समेटे हुए ग्रंथ सहजता की भव्यता का प्रकाशन किया गया है, जिसमें उनके निकटतम रहनेवाले ही नहीं, दूर से देखने वालों ने भी अपनी सद्भावनाएँ व्यक्त की हैं। श्रीमती सिन्हा के बहुआयामी व्यक्तित्व को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का यह ग्रंथ एक छोटा सा प्रयास है।
Bakasht Sangharsh
- Author Name:
Avinash Jha
- Book Type:

- Description: उन अनजाने किसानों के नाम, जिनके संघर्ष की कहानी बड़े बड़े संघर्षों की दास्तान के बीच अनकही रह गई। समय के रेत पर जो अपने जीवन के निशान छोड़कर चले गए, शायद वो उसे हमारे लिए ही बना गये हों, जिनको ढूंढने , सहेजने और किताबों के पन्नों पर स्याही से उकेरने के नाम, यह दास्तान।
AAJ KI BAAT KAREN
- Author Name:
Helle Helle
- Book Type:

- Description: हेल्ले हेल्ले का जन्म 1965 में डेनमार्क के चौथे सबसे बड़े द्वीप लोलैंड के नगर नाकस्कॉव में हुआ था। उनका पालन-पोषण द्वीप लोलैंड के ही फेरी शहर रॉड्बी (Rødby) में हुआ था, जहाँ से नौकाएँ पुटगार्डन (जर्मनी) जाती हैं। साहित्य के प्रभाव में हेल्ले हेल्ले बचपन से थीं और अधिकांश समय पुस्तकालय में बिताती थीं। यह आभास उन्हें बहुत जल्दी ही हो गया था कि वह खुद भी एक लेखिका बनेंगी। रॉड्बी में करने के लिए बहुत कुछ नहीं था, इसलिए वे वयस्क होने पर कोपनहेगन शिफ्ट हो गईं। 1985 में उन्होंने कोपनहेगन विश्वविद्यालय में साहित्य अध्ययन में दाखिला लिया और एक लेखिका के रूप में उभरने लगीं। साहित्य में स्नातक करने के पश्चात् उन्होंने 1991 में राइटर्स स्कूल, कोपनहेगन से स्नातक किया। उनकी पहली पुस्तक वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई और तब से ही उनका लोकप्रिय लेखन प्रशंसा और आलोचना दोनों का एक चर्चित विषय रहा है। उन्होंने अभी तक कई कहानियों के अलावा वयस्क साहित्य पर 10 उपन्यास और बाल साहित्य पर एक पुस्तक लिखी है। हेल्ले हेल्ले अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हुई हैं डेनिश क्रिटिक्स पुरस्कार, डेनिश अकादमी का बीट्राइस पुरस्कार, पी.ओ. एनक्विस्ट अवार्ड और डेनिश कला परिषद् का प्रतिष्ठित लाइफटाइम अवार्ड। उनकी कहानियों और उपन्यासों का 22 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उपन्यास Dette Burde Skrives I Nutid (...आज की बात करें) के लिए उनको प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार गोल्डन लौरेल से नवाजा गया है।
Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti
- Author Name:
Swaminathan Annamalai +1
- Book Type:

- Description: शेअर बाजारात नवोदित आणि अनुभवी असलेल्यांसाठीही हे पुस्तक आहे. भारतीय शेअर बाजाराबद्दल फारशा माहीत नसलेल्या गोष्टी लेखकाने अत्यंत सोप्या, तरीही रोचक पद्धतीने सांगितलेल्या आहेत.’ - फिरोज व्ही. आर. वैश्विक सेवाप्रमुख, उपाध्यक्ष ‘एस.ए.पी.’ आणि इंडिया इन्क्ल्यूजन फाउंडेशनचे संस्थापक हे पुस्तक तुम्ही का वाचायला हवे? हे पुस्तक वाचून झाल्यानंतर तुम्हाला खालील गोष्टींबद्दल समजेल : 1. शेअर बाजार जितका वेळ चालू असतो तितका वेळ संगणकासमोर बसला नाहीत, तरीही पैसे कमावता येतात. 2. भरपूर नफा मिळवून देणारे शेअर्स पटकन ओळखून आपला फायदा करून घेता येतो. 3. शेअर बाजारात ज्या शेअर्सचे व्यवहार आता होत नाहीत अशा अ-सूचीबद्ध शेअर्सची हाताळणी. 4. भीडभाड न बाळगता ऑप्शन्स विकून टाकणे आणि नफ्याची टक्केवारी वाढवणे. 5. आयपीओबद्दल आणि आयपीओकरिता पैसे कसे उभे करावेत याबद्दल माहिती. 6. कागदी शेअर्सचे रूपांतरण इलेक्ट्रॉनिक शेअर्समध्ये (डिमटेरिअलायझेशन) कसे करावे. 7. बीईईएस (इशएड) म्हणजे काय, तो गुंतवणुकीचा जोखीममुक्त पर्याय आहे का? 8. स्टॉक स्क्रीनर्सशी ओळख. 9. शेअर बाजाराला कोणत्या प्रकारच्या घोटाळ्यांमुळे फटका बसू शकतो. 10. हिंदू अविभक्त कुटुंबाची (कणऋ) स्थापना करून आयकर वाचवता येऊ शकतो. Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti - Swaminathan Annamalai गुंतवणूकदाराला माहित असायलाच हव्या अश्या शेअरबाजारच्या युक्तीच्या गोष्टी - स्वामिनाथन अन्नामलाई
Tum Pahle Kyon Nahi Aaye
- Author Name:
Kailash Satyarthi
- Book Type:

-
Description:
तुम पहले क्यों नहीं आए में दर्ज हर कहानी अँधेरों पर रौशनी की, निराशा पर आशा की, अन्याय पर न्याय की, क्रूरता पर करुणा की और हैवानियत पर इंसानियत की जीत का भरोसा दिलाती है। लेकिन इस जीत का रास्ता बहुत लम्बा, टेढ़ा-मेढ़ा और ऊबड़-खाबड़ रहा है। उस पर मिली पीड़ा, आशंका, डर, अविश्वास, अनिश्चितता, ख़तरों और हमलों के बीच इन कहानियों के नायक और मैं, वर्षों तक साथ-साथ चले हैं। इसीलिए ये एक सहयात्री की बेचैनी, उत्तेजना, कसमसाहट, झुँझलाहट और क्रोध के अलावा आशा, सपनों और संकल्प की अभिव्यक्ति भी हैं।
पुस्तक में ऐसी बारह सच्ची कहानियाँ हैं जिनसे बच्चों की दासता और उत्पीड़न के अलग-अलग प्रकारों और विभिन्न इलाक़ों तथा काम-धंधों में होने वाले शोषण के तौर-तरीक़ों को समझा जा सकता है। जैसे; पत्थर व अभ्रक की खदानें, ईंट-भट्ठे, क़ालीन कारख़ाने, सर्कस, खेतिहर मज़दूरी, जबरिया भिखमंगी, बाल विवाह, दुर्व्यापार (ट्रैफ़िकिंग), यौन उत्पीड़न, घरेलू बाल मज़दूरी और नरबलि आदि। हमारे समाज के अँधेरे कोनों पर रोशनी डालती ये कहानियाँ एक तरफ हमें उन खतरों से आगाह करती है जिनसे भारत समेत दुनियाभर में लाखों बच्चे आज भी जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ धूल से उठे फूलों की ये कहानियाँ यह भी बतलाती हैं कि हमारी एक छोटी-सी सकारात्मक पहल भी बच्चों को गुमनामी से बाहर निकालने में कितना महत्त्वपूर्ण हो सकती है, नोबेल पुरस्कार विजेता की कलम से निकली ये कहानियाँ आपको और अधिक मानवीय बनाती हैं, और ज़्यादा ज़िम्मेदार बनाती है।
The Prophet
- Author Name:
Khalil Gibran
- Book Type:

- Description: मोहब्बत तुम्हारे सिर पर ताज रखती है और तुम्हें सूली पर भी चढ़ा देती है।’’ ‘‘मोहब्बत अपने अलावा तुम्हें कुछ नहीं देती और मोहब्बत अपने अलावा तुमसे कुछ नहीं लेती।’’ ‘‘तुम्हें क़ानून बनाने और उसे लागू करने में कितना मज़ा आता है; लेकिन इससे भी ज़्यादा ख़ुशी तुम्हें उस वक़्त होती है जब तुम उसे तोड़ते हो।’’ ‘‘और अगर कोई ख़ौफ़ है, जिसे तुम मिटाना चाहते हो तो उसकी जगह तुम्हारे अपने ही दिल में है, न कि उस शख़्स के वजूद में, जिससे तुम डर रहे हो।’’ ‘‘हमेशा यही होता आया है कि मोहब्बत अपनी गहराई से बेख़बर रहती है, यहाँ तक कि जुदाई की घड़ी आ जाये।’’
Ink, Saffron & Freedom
- Author Name:
Kedar Nath Gupta
- Book Type:

- Description: How does one capture a lifetime of memories, a city's soul, and the tides of history in mere words? In Ink, Saffron & Freedom, veteran journalist Kedar Nath Gupta takes readers on a spellbinding journey through his life and times, offering a deeply personal yet panoramic view of Bharat's transformation in the last hundred years. From the vibrant fairs of Garhmukteshwar to the hallowed halls of journalism, from the communal riots of 1946 to the corridors of power, the 94-year old author has lived through some of Bharat's most defining moments. As a young boy, he witnessed the upheavals of Partition. As a journalist, he reported on the country's changing political landscape, rubbing shoulders with leaders and ideologues who shaped modern Bharat. And, as a devoted Swayamsevak, he remained steadfast in his vision of 'Akhand Bharat. Rich with nostalgia, wit, and historical insight, this memoir of a Dilliwala is not just an autobiography-it is a love letter to the city where he was born, to journalism which is his passion, and to a life lived with conviction. Gupta's storytelling is both evocative and unflinching, blending personal anecdotes with incisive commentary on Bharat's socio-political evolution. For those who long to understand our country beyond its monuments, who cherish the ideals of fearless journalism, or who seek an intimate account of a life intertwined with history, this book is an unmissable read. As Gupta himself writes, This is as much my story as it is the story of my city, my country, and my times. Turn the pages and step into the world of resilience, nostalgia, and undying passion for the truth
DGP Gupteshwar Pandey: Sangharsh Se Utkarsh Tak
- Author Name:
Savita Pandey
- Book Type:

- Description: रियल ‘सिंघम’, ‘रॉबिनहुड’, ‘दबंग’, ‘चुलबुल पांडेय’ जैसे नामों से नवाजे जाते रहे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी हैं। बिहार में कम्युनिटी पुलिसिंग के अगुआ, डीजीपी पांडेय बहुत लोकप्रिय हैं। लोक जागरण के लिए सोशल मीडिया का बिंदास प्रयोग और अभिव्यक्ति का उनका अंदाज जनता, खासकर युवाओं को काफी पसंद है। वे बिहार में नशामुक्ति और शराबबंदी के ब्रांड अंबेसेडर भी हैं। उनकी जीवन-शैली इतनी साधारण, सादगीपूर्ण है कि लोग कहते हैं कि लगता ही नहीं कि वे डीजीपी हैं! इस पुस्तक में लेखिका ने श्री गुप्तेश्वर पांडेय के बतौर डीजीपी और डीजीपी बनने के क्रम में किए गए उनके प्रयासों को साझा किया है। युवाओं को समर्पित यह पुस्तक गुप्तेश्वर पांडेय की मित्र पुलिसिंग के साथ सख्त कार्य-शैली का वर्णन करती ही है, साथ-ही-साथ छात्रों व युवाओं को संदेश भी देती चलती है कि विषम और विकट परिस्थितियों में भी कैसे सफलता की मंजिल पाई जा सकती है और डीजीपी जैसे पद पर पहुँचकर भी कैसे अहंकार से पार पाया जा सकता है। आमजन में पुलिस के भय और अविश्वास को कम करने के लिए सतत क्रियाशील रहे एक समर्पित जनसेवक की प्रेरक जीवनगाथा।
The Riligion Of The Forest
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Rating:
- Book Type:

- Description: We stand before this great world. The truth of the life depends upon our attitude of mind toward it - an attitude which is formed by our habit of dealing with is according to the special circumstance of our surroundings and our temperaments. It guides our attempts to establish relations with the universe either by conquest or by union, either through the cultivation of power or through that of sympathy. And thus, in our realization of the truth of existence, we put our emphasis either upon the principle of unity.
General Knowledge Encyclopedia
- Author Name:
Dr. Sheo Gopal Mishra
- Book Type:

- Description: "यह कोश सामाजिक विज्ञानों—मानव विज्ञान, समाज विज्ञान, मनोविज्ञान, धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास एवं कला को अपने में समेटे हुए है। (विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी को अलग खंड के रूप में प्रस्तुत किया गया है।) इसमें हमने उन कतिपय महापुरुषों का संक्षिप्त जीवन-परिचय भी सम्मिलित किया है, जिन्होंने इतिहास तथा समाज को गति प्रदान की है। धार्मिक संप्रदायों, उनके मान्य ग्रंथों एवं उनके प्रवर्तकों के विषय में भी संक्षिप्त विवरण दिए गए हैं। इसमें आदि से अंत तक भारतीय योगदान को दृष्टि से ओझल नहीं होने दिया गया है। यह ‘सचित्र सामाजिक विज्ञान विश्वकोश’ कोशों की शैली और विषय-वस्तु से कुछ हटकर लगे तो कोई आश्चर्य की बात न होगी। हम उन अनेक पुस्तकों एवं संदर्भ ग्रंथों के लेखकों और संपादकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहेंगे जिनसे प्रेरणा प्राप्त करके सामग्री का चयन, संकलन एवं लेखन पूरा किया गया है। आशा है, यह ‘सचित्र सामाजिक विज्ञान विश्वकोश’ इक्कीसवीं सदी के आबालवृद्ध-वनिताओं को ज्ञानवर्धक लगेगा। यदि इसमें यत्र-तत्र त्रुटियाँ मिलें तो पाठक जन उन्हें सुधारने की सदाशयता बरतेंगे। "
Metamorphosis
- Author Name:
Franz Kafta
- Book Type:

- Description: This Books doesn’t have a description
Socrates
- Author Name:
Arun Tiwari
- Book Type:

- Description: दुनिया भर के दार्शनिकों में सुकरात का विशिष्ट स्थान है। उनमें सोचने-समझने की क्षमता थी और वह सत्य एवं न्याय की खोज के प्रति दृढ़-संकल्प थे। वह मानते थे कि एक बेहतर विश्व की कल्पना तभी साकार हो सकती है, जब लोग समझदार एवं बुद्धिमान हों। हमें किसी दूसरे के विचारों को यूँ ही स्वीकार नहीं कर लेना चाहिए, बल्कि उनको आलोचनात्मक तर्क की कसौटी पर परखना चाहिए। सुकरात के विचारों का अध्ययन आज अधिक उपयोगी एवं प्रासंगिक हो गया है। सुकरात की कही हुई बहुत सी बातों को बड़ी प्रसिद्धि मिली। उन्हीं में से एक है—‘बिना जाँचा-परखा जीवन जीने योग्य नहीं होता है।’ उनके प्रिय शिष्य प्लेटो ने कहा था, “उनके समय के जितने भी लोगों को हम जानते हैं, उनमें से वे सर्वश्रेष्ठ और सबसे बुद्धिमान तथा अत्यंत न्यायसंगत व्यक्ति थे।” विश्वास है कि यह पुस्तक पाठकों को सदाचारी बनने में सहायक होगी और वे सुकरात के विचारों से सीख लेकर अपने जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना कुशलता से कर सकेंगे।
Adab Se Muthbhed
- Author Name:
Oma Sharma
- Book Type:

- Description: अदब से मुठभेड़ में हमारे वक्त के पाँच महत्त्वपूर्ण रचनाकारों—राजेन्द्र यादव, मन्नू भंडारी, प्रियंवद, शिवमूर्ति और मक़बूल फ़िदा हुसेन—से ओमा शर्मा के अलग-अलग लिए गए साक्षात्कार संकलित हैं। यह किताब सिर्फ इसलिए महत्त्वपूर्ण नहीं है कि ये व्यक्तित्व महत्त्वपूर्ण हैं, दरअसल यह किताब, साक्षात्कारकर्ता के अनचाहे, अनजाने ही साक्षात्कारों की एक सैद्धान्तिकी जैसी बन गई है। जैसे राजेन्द्र यादव से बातचीत में एक बिन्दु वह भी आता है जब यह राजेन्द्र यादव का राजेन्द्र यादव से साक्षात्कार बन जाता है। इसी तरह हुसेन से बातचीत के दौरान उनकी जानी-पहचानी छवि के बरक्स, हमारी मुलाकात एक कमजोर, वेध्य, गुस्सैल हुसेन से होती है—उस जलावतनी के एहसास के चलते भी, जो पार्श्व में एक उदास धुन सरीखा बजता रहता है। मन्नू भंडारी से साक्षात्कार जैसे मन्नू जी की ही कोई लम्बी कहानी हो—एक घरेलू दिखने वाली, बौद्धिक तड़क-भड़क से दूर, सीधी-सादी संकोचशील लेखिका, उस वक्त के नामचीन लेखकों के बहुत करीब रहते हुए भी उनसे बेपरवाह, सिर्फ अन्तःप्रेरणा से मार्गदर्शन लेती, एक तनाव भरे दाम्पत्य के बीच खामोशी से अपना काम करते हुए, किस प्रकार ‘महाभोज’ और ‘आपका बंटी’ जैसे उपन्यासों और बेशुमार कहानियों में अपने समय का एक विश्वसनीय साक्ष्य रच पाती है, यह जानना एक मार्मिक अनुभव है। जिस प्रकार कलाकार या लेखक की दुनिया अलग होती है, उसी तरह यहाँ तक जाने के रास्ते भी समान नहीं होते। अगर प्रियंवद की दुनिया तक जाने का रास्ता सुरंग सरीखी व्यूहात्मक और उलझी हुई गलियों से गुजरता है तो शिवमूर्ति के सन्दर्भ में यह एक तपती हुई पगडंडी है, बीच-बीच में गुम हो जाती हुई। शिवमूर्ति इस बातचीत में अपने अन्तर्मन को जिस तरह अनावृत्त करते हैं, वह अन्यत्र दुर्लभ है। यहाँ भी बीच-बीच में विस्फोट की तरह आनेवाले ऐसे लम्हे बेशुमार हैं जब इस महादेश का विकराल और लोमहर्षक यथार्थ, सर्वदा घात लगाए—जैसे अचानक सामने आता और आपके कन्धे बेरहमी से झिंझोड़ देता है। —योगेन्द्र आहूजा
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book