Vigyan, Prakriti Aur Satya
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विज्ञान, प्रकृति को समझने का एक साधन है, जो सत्य की खोज में लगा रहता है, और यह ज्ञान को अवलोकन, प्रयोग और तर्क पर आधारित करता है, जो समय के साथ विकसित और बदल सकता है।
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About the Book
विज्ञान, प्रकृति को समझने का एक साधन है, जो सत्य की खोज में लगा रहता है, और यह ज्ञान को अवलोकन, प्रयोग और तर्क पर आधारित करता है, जो समय के साथ विकसित और बदल सकता है।
Book Details
-
ISBN9788190270958
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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श्री चट्टोपाध्याय इस पुस्तकमाला के प्रधान सम्पादक हैं और साथ ही ‘दर्शनशास्त्र के स्रोत’ शीर्षक प्रस्तुत पुस्तक के लेखक भी। अत: उनकी यह पुस्तक एक प्रकार से पूरी शृंखला की पूर्व-पीठिका है। इस पुस्तक में उन्होंने, जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है, दर्शन के स्रोतों की खोज की है, और शृंखला की अगली पुस्तकों को पढ़ने-समझने का संस्कार पैदा करने की आधारशिला का निर्माण भी किया है। ‘दर्शनशास्त्र की आवश्यकता क्यों है’ से प्रारम्भ करके वे आदि-मानव के क्रमिक विकास पर विचार करते हैं और फिर समाज में कर्म-विभाजन की शुरुआत, नगर क्रान्ति, जीवन में धर्म की भूमिका आदि को रेखांकित करते हुए इस प्रश्न पर विचार करते हैं कि दर्शन का जन्म और विकास कैसे हुआ। इस समस्त विवेचन के क्रम में विश्व की प्राचीन चिन्तन-पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय भी पाठकों को मिल जाता है।
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