Darshanshastra Aur Bhavishya
(0)
Author:
Deviprasad ChattopadhyayPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
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Available
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Book Details
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ISBN9789394902992
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Pages159
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: अंदमान म्हटले की तिथला सेल्युलर जेल आणि तिथे काळ्या पाण्याची शिक्षा भोगायला पाठवलेले क्रांतिकारक आठवतात. अंदमान हे भारतीय स्वातंत्र्यसैनिकांचे क्रांतितीर्थ ! भगतसिंहांचे सहकारी विजयकुमार सिन्हा अंदमानला 'भारताचे बॅस्टील' म्हणतात. बॅस्टील हा फ्रेंच राज्यक्रांतीचे प्रतीक बनलेला तुरुंग. बॅस्टीलच्या तुरुंगात डांबण्यात आलेल्या फ्रेंच क्रांतिकारकांनी सरंजामशाहीची कबर खणत स्वातंत्र्य, समता आणि बंधुभाव ही मूल्ये उद्घोषित केली. फ्रान्ससाठी जसा बॅस्टीलचा तुरुंग तसा भारतासाठी अंदमानचा तुरुंग ! अंदमानच्या या तुरुंगात शेकडो क्रांतिकारकांना डांबण्यात आले होते. पण या तुरुंगातदेखील हे क्रांतिकारक लढत होते, जसे फ्रेंच क्रांतिकारक बॅस्टीलमध्ये लढत होते. फ्रेंच क्रांतिकारकांनी बॅस्टीलचा तुरुंग फोडला तर अंदमानात डांबण्यात आलेल्या क्रांतिकारकांनी चिवट अन्नसत्याग्रह करून ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला वाकायला भाग पाडले. त्यासाठी महावीर, मोहित आणि मोहन यांना बलिदान करावे लागले. अंदमानच्या तुरुंगातदेखील जराही न वाकता देदीप्यमान लढा देणाऱ्या क्रांतिकारकांची ही कथा म्हणजे विजयकुमार सिन्हा यांनी लिहिलेले, 'In Andamans, the Indian Bastille' हे पुस्तक. त्या पुस्तकातील गोष्ट मराठी वाचकांना सांगण्याचा हा प्रयत्न.
Na Teen Mein, Na Teraha Mein, Mradang Bajaye Dere Mein
- Author Name:
Dr. Anand Prakash Maheshwari +1
- Book Type:

- Description: एक साधारण व्यक्ति के जीवन से उभरा यह वृत्तांत अपरोक्ष रूप से हमें आईना ही नहीं दिखाता, अपितु जीवन में हमारी विभिन्न गतिविधियों की सार्थकता की ओर हमें सोचने को मजबूर करता है बाहर क्या है घट में देख। हर पथ का है पथिक एक॥ ‘घट’ में भी हम क्या लख पाएँगे; यह भी निर्भर करता है कि हम किस घाट पर हैं। नीचे के घाट पर शून्य होंगे तो ही ऊपर के घाट में समाएँगे। शून्य मृत्यु से आध्यात्मिक लखाव का यह सातत्य बोध इस पुस्तक के पात्र ने किस प्रकार प्राप्त किया, कदाचित् आप पढ़ना चाहें।
Aahat Desh
- Author Name:
Arundhati Roy
- Book Type:

-
Description:
‘‘वह जंगल जो दण्डकारण्य के नाम से जाना जाता था और जो पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ से लेकर आन्ध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों को समेटता हुआ महाराष्ट्र तक फैला है, लाखों आदिवासियों का घर है। मीडिया ने इसे ‘लाल गलियारा’ या ‘माओवादी गलियारा’ कहना शुरू कर दिया है। लेकिन इसे उतने ही सटीक ढंग से ‘अनुबन्ध गलियारा’ कहा जा सकता है। इससे रत्ती-भर फ़र्क़ नहीं पड़ता कि संविधान की पाँचवीं सूची में आदिवासी लोगों के संरक्षण का प्रावधान है और उनकी भूमि के अधिग्रहण पर पाबन्दी लगाई गई है। लगता यही है कि वह धारा वहाँ महज़ संविधान की शोभा बढ़ाने के लिए रखी गई है—थोड़ा-सा मिस्सी-ग़ाज़ा, लिपस्टिक-काजल। अनगिनत निगम, छोटे अनजाने व्यापारी ही नहीं, दुनिया के दैत्याकार-से-दैत्याकार इस्पात और खनन निगम—मित्तल, जिन्दल, टाटा, एस्सार, पॉस्को, रिओ टिंटो, बीएचपी बिलिटन और हाँ, वेदान्त भी—आदिवासियों के घर-बार को हड़पने की फ़िराक़ में हैं।
हर पहाड़ी, हर नदी और हर जंगल के लिए समझौता हो गया है। हम अकल्पनीय स्तर पर व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय कायाकल्प की बात कर रहे हैं। और इसमें से ज़्यादातर गुप्त है। मुझे क़तई नहीं लगता कि दुनिया के सबसे पुराने और दिव्य जंगल, परिवेश और आदिम समुदाय को नष्ट करने के लिए जो परियोजनाएँ शुरू हुई हैं, उनकी चर्चा भी कोपेनहेगेन में होनेवाले ‘जलवायु परिवर्तन सम्मेलन’ में होगी। माओवादी हिंसा की भयावह कहानियाँ खोजनेवाले (और न मिलने पर उन्हें गढ़ लेनेवाले) ख़बरिया चैनल लगता है, क़िस्से के इस पक्ष में बिलकुल दिलचस्पी नहीं रखते। मुझे अचरज है, ऐसा क्यों?’’
युद्ध, भारत की सीमाओं से चलकर देश के हृदय-स्थल में मौजूद जंगलों तक फैल चुका है। भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठासम्पन्न लेखिका द्वारा लिखित यह पुस्तक ‘आहत देश’ कुशाग्र विश्लेषण और रिपोर्टों के संयोजन द्वारा उभरती हुई वैश्विक महाशक्तियों के समय में प्रगति और विकास का परीक्षण करती है और आधुनिक सभ्यता को लेकर कुछ मूलभूत सवाल उठाती है।
Bhartiya Darshan
- Author Name:
Vachaspati Gairola
- Book Type:

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Description:
दर्शनशास्त्र समस्त शास्त्रों का सार, मूल, तत्त्व या संग्राहक है। उसमें ब्रह्मविद्या, आत्मविद्या या पराविद्या, अध्यात्मविद्या, चित्तविद्या या अन्त:करणशास्त्र, तर्क या न्याय आचारशास्त्र या धर्म-मीमांसा, सौन्दर्यशास्त्र या कलाशास्त्र आदि सभी विषयों का परिपूर्ण शिक्षण-परीक्षण प्रस्तुत किया गया है।
दर्शनशास्त्र आत्मविद्या, अध्यात्मविद्या, आन्वीक्षिकी, सब शास्त्रों का शास्त्र, सब विद्याओं का प्रदीप, सब व्यावहारिक सत्कर्मों का उपाय, दुष्कर्मों का उपाय और नैष्कर्म्य, अर्थात् अफलप्रेप्सु कर्म का साधक और इसी कारण से सब सद्-धर्मों का आश्रय और अन्तत: समूल दु:ख से मोक्ष देनेवाला है; क्योंकि सब पदार्थों के मूल हेतु को, आत्मा के स्वभाव को, पुरुष की प्रकृति को बताता है; और आत्मा, जीवात्मा तथा दोनों की एकता का, तौहीद का दर्शन कराता है।
दर्शनशास्त्र का जीवन से घनिष्ठ सम्बन्ध है। ‘जीवन’ और ‘दर्शन’ एक ही उद्देश्य के दो परिणाम हैं। दोनों का चरम लक्ष्य एक ही है; परम श्रेय (नि:श्रेयस) की खोज करना। उसी का सैद्धान्तिक रूप दर्शन है और व्यावहारिक रूप जीवन। जीवन की सर्वांगीणता के निर्माणक जो सूत्र, तन्तु या तत्त्व हैं, उन्हीं की व्याख्या करना दर्शन का अभिप्रेय है। दार्शनिक दृष्टि से जीवन पर विचार करने की एक निजी पद्धति है, अपने विशेष नियम हैं। इन नियमों और पद्धतियों के माध्यम से जीवन का वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत करना ही दर्शन का ध्येय है।
सम्प्रति मुख्यत: छह आस्तिक दर्शनों—न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदान्त तथा तीन नास्तिक दर्शनों—चार्वाक, बौद्ध और जैन को ही लिया जाता है। भारतीय दर्शन का जिन विभिन्न शाखाओं या सम्प्रदायों में विकास हुआ, यदि उनके आधार पर यह निश्चित किया जाए कि वे संख्या में कितने हैं तो इसका एक निश्चित उत्तर नहीं मिलेगा। प्राय: खंड दर्शन के आधार पर दर्शनों की संख्या छह मानी जाती है। भारतीय दर्शन की विभिन्न ज्ञान धाराओं का एक ही उद्गम और एक ही पर्यवसन है। उनकी अनेकता में एकता और उनकी विभिन्न दृष्टियाँ एक ही लक्ष्य का अनुसन्धान करती हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में वेद दर्शन, उपनिषद दर्शन, गीता दर्शन, चार्वाक दर्शन, जैन दर्शन, बौद्ध दर्शन, न्याय दर्शन, वैशेषिक दर्शन, सांख्य दर्शन, योग दर्शन, मीमांसा दर्शन, अद्वैत दर्शन तथा रामानुज दर्शन का विस्तृत विवेचन किया गया है।
आशा है, पुस्तक दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।
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