Maine Sapna Dekha : Samaj, Sahitya Aur Siyasat
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रूढ़ियों और परम्पराओं से मुक्त होते हुए आधुनिक स्त्री जहाँ पहुँची है, वहाँ आकर लगता है कि औरत का सुख सिर्फ़ आज़ादी में भी नहीं है। औरत रचना का नाम है, ख़ुदा के बाद सृजनात्मक शक्ति उसी के पास है, तोड़-फोड़ करके भी वह सन्तुष्ट नहीं रह पाती है। औरतों की जो समस्याएँ हैं वो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं बल्कि हर दिन नये-नये रूप धरकर हमारे सामने आ जाती हैं। लेकिन जिस तरह समस्याएँ नहीं ख़त्म हो रही हैं, उसी तरह उनसे जूझने वाले भी अपने हथियार फेंकने को तैयार नहीं हैं। ‘मैंने सपना देखा’ में कुछ ऐसे लेख शामिल हैं जो समाज, साहित्य और सियासत में औरत की उपस्थिति और स्थिति को तलाश करने की कोशिश में लिखे गए हैं। ये सारे लेख नासिरा जी के सूक्ष्म अवलोकन, व्यापक अनुभव और विचार के एक निर्बाध सिलसिले के रूप में शब्दबद्ध हुए हैं। दुनिया में औरत एक सच है। उस सच को बहुतों ने स्वीकार कर उसकी महिमा में बहुत कुछ लिखा और कहा है। इसी के साथ यह भी एक सच है कि वह औरत, जो इनसान को जन्म देती है, बार-बार उत्पीड़न की शिकार होती है। उस शोषण, ज़ुल्म और असमानता का बयान भी कुछ लेख करते हैं। दरअसल इन बातों को दोहराने की ज़रूरत अभी कुछ वर्षों तक और बनी रहेगी क्योंकि कुछ औरतों के स्वावलम्बी होने, सुखद पारिवारिक जीवन पाने और आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने से यह साबित नहीं होता कि आधी आबादी हर दुख-दर्द से मुक्त हो चुकी है। अस्सी प्रतिशत औरतें आज भी कई स्तरों पर परेशान हैं। उनका दुख शराबी पति ही नहीं बल्कि पति का सामाजिक और सियासत के स्तर पर शोषण भी है। अलग-अलग वक़्तों और अलग-अलग ज़मीनों पर औरत के सामने मौजूद चुनौतियों और संघर्षों का दस्तावेज़ीकरण भी ये लेख करते हैं।
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रूढ़ियों और परम्पराओं से मुक्त होते हुए आधुनिक स्त्री जहाँ पहुँची है, वहाँ आकर लगता है कि औरत का सुख सिर्फ़ आज़ादी में भी नहीं है। औरत रचना का नाम है, ख़ुदा के बाद सृजनात्मक शक्ति उसी के पास है, तोड़-फोड़ करके भी वह सन्तुष्ट नहीं रह पाती है। औरतों की जो समस्याएँ हैं वो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं बल्कि हर दिन नये-नये रूप धरकर हमारे सामने आ जाती हैं। लेकिन जिस तरह समस्याएँ नहीं ख़त्म हो रही हैं, उसी तरह उनसे जूझने वाले भी अपने हथियार फेंकने को तैयार नहीं हैं।
‘मैंने सपना देखा’ में कुछ ऐसे लेख शामिल हैं जो समाज, साहित्य और सियासत में औरत की उपस्थिति और स्थिति को तलाश करने की कोशिश में लिखे गए हैं। ये सारे लेख नासिरा जी के सूक्ष्म अवलोकन, व्यापक अनुभव और विचार के एक निर्बाध सिलसिले के रूप में शब्दबद्ध हुए हैं। दुनिया में औरत एक सच है। उस सच को बहुतों ने स्वीकार कर उसकी महिमा में बहुत कुछ लिखा और कहा है। इसी के साथ यह भी एक सच है कि वह औरत, जो इनसान को जन्म देती है, बार-बार उत्पीड़न की शिकार होती है। उस शोषण, ज़ुल्म और असमानता का बयान भी कुछ लेख करते हैं।
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अलग-अलग वक़्तों और अलग-अलग ज़मीनों पर औरत के सामने मौजूद चुनौतियों और संघर्षों का दस्तावेज़ीकरण भी ये लेख करते हैं।
Book Details
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ISBN9788119133369
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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हर तरह के शोषण के प्रति विद्रोह दरअसल लेखक के ख़मीर में उसकी ख़ुदादाद सलाहियतों के साथ गुँथा होता है। उसका विद्रोह हर उस बन्धन से होता है जो इंसान के दु:ख का कारण बने। वह बाहर की भौतिक दुनिया से ज़्यादा इंसान के अन्दर फैले भावना के संसार को समझने में डूबा होता है और उसी की वकालत करता है और अपने लेखन द्वारा उसका मुक़दमा लड़ता है। वर्तमान समय में सियासत भी इंसानी दु:ख का बहुत बड़ा कारण बन चुकी है। यह जानकर पाठकों को आश्चर्य होगा कि कुछ देशों में टाइपराइटर रखना, ज़िरॉक्स कॉपी बनाना, फ़ोटो कॉपी करवाना अपराध के दायरे में आता है। राजनीति लेखक पर कड़ी नज़र रखती है। इसके अलावा कुछ परिवार विशेषकर पति अकसर पत्नियों को लेखन की इजाज़त नहीं देते हैं। इस पुस्तक के पन्नों में विश्वस्तर के लेखकों की कहानियों के ज़रिए जो प्रश्न उठाए गए हैं, वे मानव समाज के बुनियादी प्रश्न हैं जो किसी भी देश और समाज के हो सकते हैं। प्रश्न के साथ इसमें साहित्य की मानी हुई रचनाओं की भी उपस्थिति दर्ज है जो कहानी की तराश, भाषा-शैली, शिल्प को भी दर्शाती है। कहानियों में एक-सी समस्या, एक-सी संवेदना, एक जैसी ही बेबसी और कशमकश है। कभी रोटी की परेशानी तो कभी राजनीतिक दबाव, तो कभी अंकुश की घुटन, तो कभी इंसानी रिश्तों का उलझाव। लेकिन उनसे निबटने के अपने तरीक़े हैं। इन सभी देशों में उन लेखकों की स्थिति अधिक शोचनीय है जो सत्ताविरोधी हैं।
Alfa-Bita-Gama
- Author Name:
Nasera Sharma
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‘अल्फ़ा-बीटा-गामा’ एक ऐसे विषय को लेकर सभ्य, महानगरीय समाज की निर्दयताओं और अक्षम्य अमानवीयताओं को उजागर करता है जिसकी तरफ़ लिखित शब्दों का ध्यान अकसर नहीं जाता, वह भी इतने बड़े पैमाने पर कि उपन्यास हो जाए।
यह उपन्यास मनुष्य की आत्मग्रस्तता को कभी कुत्तों की आँखों से दिखाता है, कभी उन कुछ जनों की आँखों से जो अपने सीमित साधनों के साथ, और अपने आस-पड़ोस का विरोध झेलकर उन असहाय जीवों के लिए कुछ करना चाहते हैं। आख़िर यह कैसे होता है कि संस्कृति और धर्म के धनी जिस भारतीय समाज में पत्थरों के साथ भी जीवित की तरह बर्ताव कर लिया जाता है, इन सजीवों के लिए सहानुभूति का संस्कार हम ख़ुद को और अपनी सन्तानों को नहीं दे पाते!
भारतीय कुत्तों की अनेक प्रजातियों के गहरे अध्ययन, उनके व्यवहार की गहरी जानकारी के साथ नासिरा जी इस उपन्यास में नागर क्रूरताओं की दैनिक और शाश्वत कथा कहते हुए हमारे मौजूदा समय तक आती हैं जहाँ कोरोना है, और लॉकडाउन है। लॉकडाउन जिसके शिकार अनेक लोग हुए और उसी अनुपात में वे कुत्ते भी जो सार्वजनिक स्थलों, दुकानों, होटलों आदि के बन्द हो जाने के बाद न सिर्फ़ भूखे, बल्कि अकेले भी पड़ गए। लाखों मज़दूरों के पलायन और उससे पहले हुए दिल्ली दंगों की विभीषिका के मद्देनजर उपन्यास कुत्तों की पीड़ा को मानवीय भाषा में समझाने का प्रयास करता है, और चाहता है कि हमारी संवेदना की पहुँच हमारे बन्द दरवाज़ों के बाहर तक हो।
Kise Salaam Karoon
- Author Name:
Nasera Sharma
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बीते दिनों ईरान की महिलाओं ने अपने मुल्क में अपनी अस्मिता, अपनी पहचान और आज़ादी के लिए आवाज़ उठाकर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उनके साहस के लिए उन्हें दुनिया के स्वाधीनचेता लोगों की प्रशंसा भी मिली। ‘किसे सलाम करूँ’ शीर्षक इस कहानी-संग्रह में ईरानी लेखिकाओं द्वारा लिखी गई फ़ारसी कहानियों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है। अनुवाद किया है हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार नासिरा शर्मा ने जो लम्बे समय से ईरानी समाज, साहित्य और राजनीति को नज़दीक से देखती और उनके बारे में लिखती रही हैं। इन कहानियों से गुज़रते हुए हमें न सिर्फ़ ये पता चलता है कि भारतीय और ईरानी समाज के मसले, वहाँ पर स्त्री की स्थिति और पुरुष का वर्चस्व काफ़ी मिलते-जुलते हैं, बल्कि ये कहानियाँ यह भी बताती हैं कि स्त्रियों की संवेदना, उनके विचार और उनके ख़्वाब भी दोनों जगह काफ़ी कुछ एक जैसे ही हैं। लेकिन यह भी सच है कि धर्म और राजनीति के चलते उन्होंने जो झेला है, वह हमारे हिस्से में उस तरह और उतना नहीं आया। यही वजह है कि उनकी रचनाओं में उनकी बेबसी, उनका प्रतिरोध और उनकी ख़ुशियाँ अपेक्षाकृत ज़्यादा सूक्ष्म और इसीलिए ज़्यादा तीक्ष्ण रूप में प्रकट होती हैं। जिन कथाकारों की रचनाएँ इस पुस्तक में शामिल हैं, वे सभी ईरान और फ़ारसी भाषा की स्थापित और लोकप्रिय रचनाकार हैं और साहित्य में उनके योगदान को व्यापक स्वीकृति मिली है। हिन्दी के पाठकों को ये कहानियाँ अपनी-सी भी लगेंगी और नई भी।
Apne Khawab Ki Tabir Chahti Hoon
- Author Name:
Nasera Sharma
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बकौल नासिरा शर्मा ‘बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के बाद एक नया हिन्दुस्तान उभरा है, जिसको अभी ठीक से समझा जाना बाक़ी है। पहले भारत ज़मीन के स्तर पर दो फाँक हुआ था, अब विचार और संवेदना के स्तर पर सियासत ने उसे चार फाँक कर दिया है।’ नासिरा शर्मा न सिर्फ़ भारत बल्कि ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और यूरोप की भी सामाजिक-सांस्कृतिक पेचीदगियों की जानकार हैं, और मनुष्यता की स्वाभाविक सकारात्मकता विशेषत: स्त्री सरोकार के प्रति अपनी पक्षधरता के लिए जानी जाती हैं। ‘अपने ख़्वाब की ताबीर चाहती हूँ’ उनके साक्षात्कारों का संकलन है। समकालीन पुरुष पत्रकारों-लेखकों-चिन्तकों, जिनमें देश से बाहर के भी कुछ नाम शामिल हैं, द्वारा लिए गए इन साक्षात्कारों को वे ‘आदम के सवाल हव्वा से’ कहती हैं। इन साक्षात्कारों में हम उनके लेखन से परिचित होते हैं, उनकी स्त्री से भी, और सबसे ज़्यादा उस सजग-चिन्तनशील व्यक्ति से जिसने भौगोलिक और राजनीतिक अर्थों में एक विराट और वैविध्यपूर्ण अनुभव को बहुत नज़दीक से देखा-जिया है। इसीलिए वे जिस विषय पर बात करती हैं, उसमें गहरा आत्मविश्वास और प्रामाणिकता स्पष्ट दिखाई देते हैं। मुस्लिम कठमुल्लावाद और हिन्दू कट्टरता से बराबर लोहा लेती आ रहीं नासिरा जी ने इन वार्ताओं में अनेक ऐसे सवाल उठाए हैं, और अनेक ऐसे सवालों के जवाब भी दिए हैं जिनका गहरा ताल्लुक़ हमारे आज के सामाजिक और राजनीतिक माहौल से भी है। मसलन हिन्दू-मुसलमान के बीच बढ़ाए जा रहे विद्वेष पर वे कहती हैं कि ‘इन सारे जालों को साफ़ करने का काम उतने प्रभावी ढंग से हमारी क़लम नहीं कर पाई जितना राजनेता समाज को काटने और दिलों को बाँटने में कामयाब हुए हैं।’ इस पुस्तक में कुछ सवालों के जवाब में उन्होंने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के राजनीतिक-सामाजिक घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की है, और अन्य सामयिक मुद्दों पर भी जिनमें हिन्दी कहानी, साहित्य, दुनियाभर की स्त्री का लेखन और जीवन, बँटवारा, दंगे, भारत में मुस्लिम जीवन आदि शामिल हैं। आज जब हम कई निर्णायक मोर्चों पर किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े हैं, एक बड़ी क़लम के ये विचार नि:सन्देह हमें कुछ रौशनी देंगे।
Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi NataK Vol. 4
- Author Name:
Nasera Sharma
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इस संग्रह में तीन महत्त्वपूर्ण नाटकों के अनुवाद दिए जा रहे हैं। जिनमें नाटककारों के अपने व्यक्तित्व एवं जीवन की गहरी छाप है। उस भाषा देश और समाज की परम्पराएँ तो झलकती हैं, साथ ही उनकी समस्याएँ, कठिनाइयाँ, दु:ख और सुख की भी सूचनाएँ मिलती हैं। रचनाकारों और पाठकों की अपनी निजी जीवन-दृष्टि, अनुभव, पसन्द-नापसन्द होती हैं मगर इन सब के बावजूद कुछ रचनाएँ इन सारी बातों के दबाव से निकल अपनी उपस्थिति विश्व स्तर के साहित्यकारों और पाठकों व आलोचकों में बना लेती हैं, जहाँ नापसन्दगी के बावजूद उसकी अहमियत से इंकार नहीं किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर इन तीनों नाटकों के विषय जिनके तारों से हर काल में नई आवाज़ें निकालने की कोशिशें की गई हैं जो आज भी जारी हैं। इसका कारण वे बुनियादी सवाल हैं, जिनसे लगातार आज का आधुनिक इंसान जूझ रहा है। अली ओकला ओरसान का नाटक पुराने ऐतिहासिक पर्दे पर नई समस्याओं की ओर इंगित करता है। दूसरा नाटक 'पशु-बाड़ा’, गौहर मुराद का बेहद लोकप्रिय नाटक रहा है। रिफ़अत सरोश का पूरा वजूद शायरी और अदब से प्रभावित रहा है। उनके विषय किसी विशेष वर्ग या वाद तक सीमित नहीं रहे हैं, उनके व्यापक दृष्टिकोण का नमूना उनका नाटक 'प्रवीण राय’ है।
Main J. Krishnamurti Bol Raha Hoon
- Author Name:
Ed. Rajasvi
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"जिद्दू कृष्णमूर्ति का नाम आध्यात्मिक जगत् में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जब वे मात्र तेरह वर्ष के थे, तभी उनमें एक आध्यात्मिक गुरु होने की विशिष्टताएँ दृष्टिगोचर होने लगी थीं। उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता का परचम लहराया। जे. कृष्णमूर्ति के विचार केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि भौतिक दृष्टि से अत्यंत महवपूर्ण हैं, जो जाति, धर्म और संप्रदाय में उलझे, असमंजस में फँसे और दिग्भ्रमित हुए लोगों का यथोचित मार्गदर्शन करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने मानव-जीवन के लगभग सभी पहलुओं को अपनी विचारशीलता के दायरे में लाने का सफल प्रयास किया है। किंचित् मात्र भी ऐसा नहीं लगता कि जीवन की कोई भी जटिल वीथि उनकी दृष्टि से ओझल हो गई हो। उनके जीवन का परम लक्ष्य विश्व को शांति, संतुष्टि और संपूर्णता प्रदान करना था, ताकि ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ का समूल नाश किया जा सके। वे अपने जीवन-लक्ष्य में काफी हद तक सफल रहे। जो भी उनके संपर्क में आया, मानो उनका ही होकर रह गया। उनकी प्रेरक वाणी के कुछ रत्न इस पुस्तक में संकलित हैं।
Ethics For Civil Services With 100 Case Studies
- Author Name:
Alok Ranjan
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Awating description for this book
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
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हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
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