Alfa-Bita-Gama
(0)
Author:
Nasera SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
<span style="font-weight: 400;">‘अल्फ़ा-बीटा-गामा’ एक ऐसे विषय को लेकर सभ्य, महानगरीय समाज की निर्दयताओं और अक्षम्य अमानवीयताओं को उजागर करता है जिसकी तरफ़ लिखित शब्दों का ध्यान अकसर नहीं जाता, वह भी इतने बड़े पैमाने पर कि उपन्यास हो जाए।</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">यह उपन्यास मनुष्य की आत्मग्रस्तता को कभी कुत्तों की आँखों से दिखाता है, कभी उन कुछ जनों की आँखों से जो अपने सीमित साधनों के साथ, और अपने आस-पड़ोस का विरोध झेलकर उन असहाय जीवों के लिए कुछ करना चाहते हैं। आख़िर यह कैसे होता है कि संस्कृति और धर्म के धनी जिस भारतीय समाज में पत्थरों के साथ भी जीवित की तरह बर्ताव कर लिया जाता है, इन सजीवों के लिए सहानुभूति का संस्कार हम ख़ुद को और अपनी सन्तानों को नहीं दे पाते!</span></p> <p><span style="font-weight: 400;">भारतीय कुत्तों की अनेक प्रजातियों के गहरे अध्ययन, उनके व्यवहार की गहरी जानकारी के साथ नासिरा जी इस उपन्यास में नागर क्रूरताओं की दैनिक और शाश्वत कथा कहते हुए हमारे मौजूदा समय तक आती हैं जहाँ कोरोना है, और लॉकडाउन है। लॉकडाउन जिसके शिकार अनेक लोग हुए और उसी अनुपात में वे कुत्ते भी जो सार्वजनिक स्थलों, दुकानों, होटलों आदि के बन्द हो जाने के बाद न सिर्फ़ भूखे, बल्कि अकेले भी पड़ गए। लाखों मज़दूरों के पलायन और उससे पहले हुए दिल्ली दंगों की विभीषिका के मद्देनजर उपन्यास कुत्तों की पीड़ा को मानवीय भाषा में समझाने का प्रयास करता है, और चाहता है कि हमारी संवेदना की पहुँच हमारे बन्द दरवाज़ों के बाहर तक हो।</span>
Read moreAbout the Book
<span style="font-weight: 400;">‘अल्फ़ा-बीटा-गामा’ एक ऐसे विषय को लेकर सभ्य, महानगरीय समाज की निर्दयताओं और अक्षम्य अमानवीयताओं को उजागर करता है जिसकी तरफ़ लिखित शब्दों का ध्यान अकसर नहीं जाता, वह भी इतने बड़े पैमाने पर कि उपन्यास हो जाए।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">यह उपन्यास मनुष्य की आत्मग्रस्तता को कभी कुत्तों की आँखों से दिखाता है, कभी उन कुछ जनों की आँखों से जो अपने सीमित साधनों के साथ, और अपने आस-पड़ोस का विरोध झेलकर उन असहाय जीवों के लिए कुछ करना चाहते हैं। आख़िर यह कैसे होता है कि संस्कृति और धर्म के धनी जिस भारतीय समाज में पत्थरों के साथ भी जीवित की तरह बर्ताव कर लिया जाता है, इन सजीवों के लिए सहानुभूति का संस्कार हम ख़ुद को और अपनी सन्तानों को नहीं दे पाते!</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">भारतीय कुत्तों की अनेक प्रजातियों के गहरे अध्ययन, उनके व्यवहार की गहरी जानकारी के साथ नासिरा जी इस उपन्यास में नागर क्रूरताओं की दैनिक और शाश्वत कथा कहते हुए हमारे मौजूदा समय तक आती हैं जहाँ कोरोना है, और लॉकडाउन है। लॉकडाउन जिसके शिकार अनेक लोग हुए और उसी अनुपात में वे कुत्ते भी जो सार्वजनिक स्थलों, दुकानों, होटलों आदि के बन्द हो जाने के बाद न सिर्फ़ भूखे, बल्कि अकेले भी पड़ गए। लाखों मज़दूरों के पलायन और उससे पहले हुए दिल्ली दंगों की विभीषिका के मद्देनजर उपन्यास कुत्तों की पीड़ा को मानवीय भाषा में समझाने का प्रयास करता है, और चाहता है कि हमारी संवेदना की पहुँच हमारे बन्द दरवाज़ों के बाहर तक हो।</span>
Book Details
-
ISBN9789392186998
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Its My Love Story
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: India's most popular pocket book writer brings to you his first novel. It's a story inspired from real life incidents. A story based on the college life of 6 friends. It's a love story of Aditya and janvi. Aditya is from Jamshedpur and moves to Delhi for his graduation. He aspires to become a successful filmmaker. Janvi is a delhiite and loves travelling. She dreams to settle in Italy someday. Life takes a different turn when love brought them together. What lies ahead? Where will destiny lead them? Bestselling author ajitabha Bose brings to you another heartwarming tale of love, friendship and dreams.
Mrityoramamritam Gamya
- Author Name:
Renu Rajvanshi Gupta
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Anubhav
- Author Name:
Hemangini A. Ranade
- Book Type:

- Description: अश्वत्थामा के माथे पर के सदा बहते घाव की तरह मनुष्य की पेशानी पर भी प्रकृति ने एकाकीपन का एक ज़ख़्म बड़ा है। इस ज़ख़्म को भरने के सफल-असफल प्रयासों का नाम जीवन है। सामाजिक क्षेत्र में, महत्त्वाकांक्षा का दामन थाम, कुछ कर गुज़रने की ललक इस घाव को किन्हीं अंशों में भरने में सहायक होती है। परन्तु मन के एकाकीपन का ज़ख़्म सदा रिसता रहता है। पारसी पृष्ठभूमि पर लिखे इस उपन्यास की नायिका खोर्शेद की छोटी-सी दुनिया कमज़ोर दिमाग़ माँ, प्यारे पेसी अंकल, आया मेरी तथा इब्राहीम पॉववाले तक सीमित है, जहाँ प्रेम एवं विश्वास से घिरी, वह अपने छोटे-छोटे सुखों को लेकर सन्तोष से जी रही है। जिस स्कूल में वह पढ़ी है, वहीं नौकरी पा जाना उसके सुख की पराकाष्ठा है। यहाँ उसका सम्पर्क होता है दो भाइयों से। केखुशरू यानी केकी, जो दफ़्तर में उसका बॉस है, और मीनोचेहेर या मीनू जो उसकी इच्छा, आकांक्षाओं का केन्द्र बिन्दु है। वक़्त आने पर उसे अपने जन्म की हक़ीक़त से अवगत कराया जाता है। यह जानकारी उसकी छोटी-सी दुनिया को क्षत-विक्षत कर देती है। जब वह कुछ सँभलती है तो पाती है कि अब न उसके पास कोई भूतकाल बचा है, न आगे कहीं भविष्य ही दिखाई देता है। पेसी अंकल, आया मेरी, इब्राहीम पॉववाला, सभी का साथ छूट जाता है। माँ को वह स्वयं अलग करती है। फिर एक दौर आता है जिसमें ज़िद और हिम्मत के बल पर वह नियति द्वारा, अपने हिस्से में बाँटी गई, इस असमानबाजी में, बाहरी पहलू पर तो विजय हासिल कर लेती है, पर आन्तरिक पहलू पर, प्राप्त अनुभव को ही लक्ष्य मानकर उसे अन्तत: समझौता करने के लिए विवश होना पड़ता है।
Voh Apana Chehra
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

-
Description:
क़रीब-क़रीब अमानवीय और जड़ होता जाता संसार गोविन्द मिश्र के लेखन की मुख्य चिन्ताओं में से है। जहाँ वे एक परिवेश का केवल भीतरी-बाहरी कच्चा चिट्ठा-भर प्रस्तुत करते हैं, वहाँ भी सर्जनात्मक व्यथा मानवीयता और मूल्यों के न होने की ही होती है। गोविन्द मिश्र के लेखन का मूल स्वर सकारात्मक है जो उनकी रचनाओं में उत्तरोत्तर साफ़ होता चला गया है।
'वह अपना चेहरा’ एक तलाश है जो चेहरों से शुरू होकर जीवन-पद्धति एवं मान्यताओं से होती हुई नैतिकता और मूल्यों तक जाती है। नौकरशाही का परिवेश, दफ़्तरी मानसिकता, फ़ाइलों-इमारतों की दुनिया यहाँ एक ऐसे तनाव के माध्यम से उभारे गए हैं जो जितना उग्र है, उतना ही फ़िज़ूल—लालफीताशाही के अपने स्वभाव की तरह। यहाँ चेहरे भी फ़ाइलों की तरह घूम रहे हैं, 'अपना’ चेहरा 'वह’ हो जाता है, वही जिसके ख़िलाफ़ उसकी लड़ाई थी। चरित्रों की गहरी पकड़, कलात्मकता और भाषा का एक अपने ढंग का खुरदुरापन इस उपन्यास को विशिष्ट बनाते हैं।
Love 2 : A Sweet Poison
- Author Name:
Rajeev Pundir
- Book Type:

- Description: What’s love? Since the dawn of life itself, this question has continuously baffled humanity. And this puzzle has not been solved yet. This cannot because the day This abracadabra is known, the very purpose of life and to live will cease to exist. Therefore, the mystery must go on… this is such a factor that where some find it quite encouraging, inspirational, soothing like a balm for the day-to-day problems, and prepare them to strive hard against all odds of life; the others feel it worse even than poisoning them down and ruining their lives. However—people will continue to fall in love! Sixteen excellent writers have tried to explore the world of this governing force of life—love, through their unique stories. Grab this anthology par excellence and indeed, you’ll not only feel and love but—live them!!
The Pocket Love Story
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: Love is one of the most beautiful expressions and emotions that humans are blessed with. Everyone has a love story. Some love stories have a happy ending and some doesn�t. Some love stories are known to the entire world and some are left unknown. Come, read some untold love stories.
My Dream Man
- Author Name:
Aditi Bose
- Book Type:

- Description: I don�t know if I can do a story like this once again or not. Ajopa Ganguly, a struggling writer, is reeling from the pains of her manuscript having been rejected by all publishers. She knows that making cupcakes and embroidering handkerchiefs is not her true calling. However, she is scared to write anymore and is losing focus. Aniket Verma, is the professor of economics who was also Ajopa�s tuition teacher once. Despite their twelve years age gap, with time, they forge a special bond of friendship. Then a misunderstanding! Now Aniket is back and it feel just like old times. With a challenge of finishing a new manuscript in record time and a promise that he will help her to get it published if she does, he asks her to meet him at the publisher�s office two days later. Does she write? Does she go to the publisher�s office? At what moment does their friendship change? Do they fall in love? My Dream Man, a let-me-tell-my-friends and I-need-to-finish-this-now story, is an insightful examination of how forces beyond our control help us make decisions. As Ajopa says, it is all about �deep choosing�.
Khambhon Per Tiki Khushabu
- Author Name:
Narendra Nagdev
- Book Type:

-
Description:
भवन-निर्माण के व्यवसाय में गहरी जड़ें जमा चुके, हर क़ीमत पर कांट्रैक्ट हासिल कर लेनेवाले कुख्यात टेंडर माफ़िया की आतंककारी कार्यप्रणाली तथा उन्हें रोकने को कटिबद्ध, एक समर्पित, सृजनशील वास्तुकार का उनके साथ जोखिम-भरे संघर्ष का दस्तावेज़...
संघर्ष में एक सकारात्मक तथ्य को रेखांकित करता कि सृष्टि वह दानव नहीं चलाता जो अपने अहंकारवश बाढ़ ला देता है पूरे शहर में, वरन् उस चिड़िया के पंख चलाते हैं जो चोंच में तिनका दबाकर, तिनके में पानी की एक बूँद उठाकर, बार-बार फेंक आती है शहर के बाहर ताकि धीरे-धीरे बाढ़ से मुक्त हो सके शहर...
आर्किटेक्चर क्षेत्र के सघन व्यावसायिक घटनाक्रम के साथ-साथ एक लोककथात्मक फ़ैंटेसी की महीन बुनावट और विध्वंसक शक्तियों के गाल पर तमाचा-सा जड़ता एक अतियथार्थवादी चरम...
वर्तमान और अतीत के बीच, कल्पना और यथार्थ के बीच, सही और ग़लत के बीच झूलता हुआ सा, एक मोहक शिल्प तथा भाषा के सहज प्रवाह से युक्त नरेन्द्र नागदेव का आत्मीय, संवेदनशील प्रस्तुतीकरण—‘खम्भों पर टिकी ख़ुशबू...’
Udhar Ke Log
- Author Name:
Ajay Navriya
- Book Type:

-
Description:
अजय नावरिया का यह उपन्यास ‘उधर के लोग’ भारतीय संस्कृति की विशिष्टता और वैयक्तिक सत्ता के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय मुद्दों को रेखांकित करता है। बेशक, यह उनका पहला उपन्यास है, लेकिन अपनी शिल्प संरचना और वैचारिक परिपक्वता में, यह अहसास नहीं होने देता।
उपन्यास में हिन्दू कहे जानेवाले समाज के अन्तर्विरोधों, विडम्बनाओं और पारस्परिक द्वेष के अलावा, उसके रीति-रिवाज़ो का भी सूक्ष्म और यथार्थपरक अंकन किया गया है। यह द्वन्द्व भी उभरकर आता है कि क्या वर्णाश्रम धर्म ही हिन्दू धर्म है या कुछ और भी है?
उपन्यास, पाठकों में प्रश्नाकुलता पैदा करता है कि क्या ‘जाति’ की उपस्थिति के बावजूद ‘जातिवाद’ से बचा जा सकता है? क्यों विभिन्न समुदाय, एक-दूसरे के साथ, सह-अस्तित्व के सिद्धान्त के तहत नहीं रह सकते? क्यों भारतीय साहित्य का संघर्ष, डी-क्लास होने के पहले या साथ-साथ डी-कास्ट होने का संघर्ष नहीं बना? इसके अलावा उपन्यास में बाज़ार की भयावहता, वेश्यावृत्ति, यौन-विकार, विचारधाराओं की प्रासंगिकता, प्रेम, विवाह और तलाक़ पर भी खुलकर बात की गई है।
उपन्यासकार की सबसे बड़ी विशेषता यथार्थ को रोचक, प्रभावोत्पादक और समृद्ध भाषा में रूपान्तरित करने में है। यह सब उन्होंने नायक की जीवन-कथा के माध्यम से बड़े कुशल ढंग से किया है।
Shmshan Champa
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
‘चम्पा तुझ में तीन गुण, रूप, रंग अरु बास।
अवगुण तुझमें एक है, भ्रमर न आवत पास।।’
एक थी चम्पा। रूप, रंग और गुणों की मादक कस्तूरी गंध लिए चम्पा। लेकिन पिता की मृत्यु, बिगड़ैल छोटी बहन की कलंक-गाथा और स्वयं उसके दुर्भाग्य ने उसे बुरी तरह झकझोर डाला।
बाहर से आत्मतुष्ट, संयमी और आत्मविश्वासी दीखनेवाली डॉक्टर चम्पा के अभिशप्त जीवन की वेदना की मार्मिक कहानी है ‘श्मशान चम्पा’। एक परम्परा प्रेमी और आज्ञाकारी बेटी जो सबको इलाज और निर्बाध सेवा दे सकती थी, पर अपने अभिशप्त एकाकी जीवन का सन्नाटा भंग नहीं कर पाती है। सुख के शिखर पर पहुँचाकर स्वयं नियति ही निर्ममता से उसे बार-बार नीचे गिराती अनिश्चय की घाटियों में भटकने को भेजती रहती है।
Media Life : Drama Jhonk Ke, News Rok Ke
- Author Name:
Shashikant Mishra
- Book Type:

-
Description:
मीडिया लाइफ में जो कथा-सन्दर्भ है वो अपनी कल्पनाशीलता के बावजूद न्यूजरूम और कारोबारी मीडिया के उस चरित्र का खाका खींच पाने में पूरी तरह कामयाब है, जिनका समाज का बड़ा वर्ग आकलन तो करता है लेकिन अन्दरखाने की बातें इस तरह उनके सामने नहीं आ पातीं।
उपन्यास में मीडिया और न्यूजरूम की अश्लीलता, फूहड़ता, बेशर्मी और अमानवीय पक्ष मजबूती से उभर आते हैं। भाषा का आकर्षण ऐसा है कि किताब कहीं भी बोझिल नहीं लगती।
यह उपन्यास भविष्य के लिए अब एक सन्दर्भ की तरह है।
—विनीत कुमार
मीडिया लाइफ की शुरुआत काफी मजेदार है। पूरी कहानी मीडिया पर लिखे व्यंग्य को सार्थक करती है। किताब में चैनलों की प्रतिद्वंद्विता, खबरों की तोड़-मरोड़ आदि को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। कहानी विभिन्न परिस्थितियों में मीडिया द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति और खबरों के मैनिपुलेशन को दर्शाती है।
—नवीन चौधरी
Banarsibai
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dil
- Author Name:
Jaydeep Khot
- Book Type:

- Description: Hindi Poetry Book
Nishkasan
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
...'दाँये देखना ठीक नहीं। 'गुरू जी ने कहा।'
और अगर दाँये गड्ढा-गुड्ढी हो तो गुरू जी?'
तो ज़्यादा बाँयें झुक जाओ।' गुरू जी बोले।
'और अगर उधर भी हो तो?'
'तो आगे-पीछे हो जाओ।'
'और आगे-पीछे भी हो तो?'
'तो सवाल यह होगा कि तुम उस सुरक्षित, विचारहीन जगह पर पहुँचे ही कैसे?' गुरू जी ने कहा।
'यही तो मेरी भी समझ में नहीं आता गुरू जी!'
...'मान लीजिये आपकी बेटी है तब? मुफ़्ती की बेटी थी तब? तब तो सारा प्रशासन सिर के बल खड़ा हो गया था! अपहरण और आपूर्ति में ज़्यादा फ़र्क नहीं है पंडित जी! दोनों में अनिच्छित शोषण है। दोनों में हिंसा है। जबर्दस्त शारीरिक और मानसिक अपमान है। दोनों में बल-प्रयोग है, सिर्फ़ उसके तरीके में अन्तर है। दोनों में फिरौती है–एक में प्रत्यक्ष, दूसरे में परोक्ष। आप क्या समझते हैं, जो देवी जी वहाँ प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं और इस कुकर्म में लिप्त हैं उनका कोई निहित स्वार्थ नहीं होगा? सिर्फ़ एक घिनौने मज़े के लिए वे ऐसा करती होंगी?...लेकिन नहीं, किसी खटिक की बेटी होने का क्या मतलब? उसे नरक में डालो और हँसो। या उसे आपकी तरह 'अन्य मामलों' के घूरे पर डालकर रफ़ा-दफ़ा कर दो। 'महामहिम खाँसने लगे।'
...कटुए, क्रिश्चियन और कम्यूनिस्ट, तीनों देशद्रोही हैं–अन्तत: यह उनका और उनकी पार्टी का खुला-छिपा राजनैतिक नारा है।
...'यह कम्यूनिस्टों की साजिश है सर! 'कुलपति ने कहा। महामहिम ने पीछे खड़े अपने प्रमुख सचिव को देखा, जैसे कह रहे हों, उस दिन लॉन में टहलते हुए मैंने आपको बेकार ही डाँटा था।
'ये फ़ाइल है सर।' कुलपति ने फ़ाइल प्रमुख सचिव की ओर बढ़ायी। 'नहीं, उसकी अब कोई ज़रूरत नहीं।' महामहिम ने हाथ के इशारे से मना किया।
Hostel Ke Panno Se
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

-
Description:
स्वतंत्र, स्वच्छन्द और उन्मुक्त जीवन जीने की लालसा रखनेवाले आज के युवाओं की संवेदनाओं का विश्लेषण करनेवाला एक विशिष्ट उपन्यास। इसमें बदलते समाज की उस तसवीर को चित्रित किया गया है जो वैश्वीकरण और उदारवादी संस्कृति से उत्पन्न वातावरण में दृष्टिगोचर होती है। समाज में इधर एक बड़ा परिवर्तन हुआ है। नई युवा पीढ़ी निरन्तर एक खुलेपन के माहौल में जीना चाहती है जहाँ लिंग-भेद से परे जाकर समाज में एक सहज समानता हो। इस सामाजिक क्रान्ति को लेखक ने एक हॉस्टल में रहनेवाले युवाओं को केन्द्र में रखकर अभिव्यक्त किया है जो नई सोच के साथ नए विचारों को सहज रूप से स्वीकृति प्रदान करते हैं और सभ्यता, संस्कृति पर किसी भी प्रकार का प्रहार किए बिना एक सामंजस्य भी बनाते हैं।
उपन्यास इस परिवर्तन के संक्रमणकाल पर भी दृष्टिपात करता है और यह प्रश्न भी छोड़ता है कि आज जब स्कूल, कॉलेज और तकनीकी संस्थाओं तक में ‘को-एड’ है तब यह कैसे सम्भव है कि लड़के-लड़की के बीच स्वाभाविक और प्राकृतिक आकर्षण न हो?
लेखक ने वर्जनाओं से रहित जीवन जीनेवाली युवा पीढ़ी के प्रति एक सार्थक समझ को जाग्रत् करने के साथ-साथ परम्परावादी सोच की कठोर नियमावली के बीच जीनेवाले रूढ़िवादी समाज के प्रति एक समन्वयवादी सोच को बनाने का प्रयास भी किया है।
आधुनिक युवाओं की मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्याओं पर एक रोचक उपन्यास जो अपनी सहज भाषा-शैली से पाठक के अन्तर्मन को स्पर्श करता है।
Jaya Ganga : Prem Ki Khoj Mein Ek Yatra
- Author Name:
Vijay Singh
- Book Type:

-
Description:
फ्रांस में जब यह औपन्यासिक यात्रा-वृत्तांत प्रकाशित हुआ तो इसकी बहुत सराहना हुई। यह कृति लेखक की आन्तरिक और बाहरी दुनिया के विलय का अभूतपूर्व चित्र प्रस्तुत करती है।
बाद में लेखक ने स्वयं ही इस पुस्तक को एक फ़िल्म में रूपान्तरित किया जो कि 40 देशों में दिखाई गई तथा फ्रांस और इंग्लैंड के सिनेमाघरों में 49 सप्ताह तक चली।
पेरिस में रहनेवाले एक युवा लेखक निशान्त की हिमालय में गंगा के उत्स से शुरू की गई इस गंगा-यात्रा में जया की स्मृतिकथा साथ-साथ चलती है। यात्रा के दौरान गंगा के किनारे उसकी भेंट ज़ेहरा से होती है जो एक तवायफ़ है।
मन के भीतर जया और ज़ेहरा की छवियाँ लिये लेखक अपने मार्ग में साधुओं, नाविकों, इंजीनियरों, स्थानीय पत्रकारों, तवायफ़ों और दलालों से रू-ब-रू होता चलता है। काव्यात्मक गद्य और श्रेष्ठ पत्रकारिता के सहज संयोग का प्रतिफल यह पाठ उपन्यास भी है, आत्मकथात्मक यात्रावृत्त भी और रिपोर्ताज भी।
Yadon Ke Panchhi
- Author Name:
P. E. Sonkamble
- Book Type:

-
Description:
आत्मकथापरक शैली में लिखा गया यह बेजोड़ उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति की कथा-यात्रा है जिसने भूख को सहने के साथ-साथ उसे नज़दीक से देखा है और भूख के विकराल जबड़ों से निकलकर भी वह अपनी इंसानियत, अपनी संवेदना नहीं खो पाया है। बढ़ती ज़िन्दगी के हर तरफ़ से रोके गए रास्तों के बावजूद जिजीविषा उसे आगे बढ़ाती है, टूटने नहीं देती। जिस जोहड़ में उच्च वर्ग के ढोर पानी पी सकते हैं, उसमें दलित वर्ग के इस नायक को अपना सूखा कंठ भिगोने की इजाज़त नहीं है। उसे मरुभूमि की अपनी यह यात्रा भूखे-प्यासे रहकर ही पूरी करनी है।
इस उपन्यास में दलित वर्ग के हर प्रकार के शोषण का आकलन इतनी तटस्थ और सहज शैली में किया गया है कि बरबस लेखक के आत्म-संयम की दाद देनी पड़ती है। कमाल यह है कि जिनके कारण दलित वर्ग को इंसान से भी बदतर ज़िन्दगी जीनी पड़ रही है, उन्हें भी उपन्यास में काले रंग से नहीं पोता गया है। लेखक उच्च वर्ग के उन लोगों को भी नहीं भूला है जिनके कारण उसे क्षण-भर के लिए भी सुख या सांत्वना या प्रोत्साहन मिला है। कटुता-रहित भूख के अन्तरंग चित्र इस उपन्यास को प्रामाणिक दस्तावेज़ बनाते हैं।
Krishnavtar : Vol. 4 : Mahabali Bheem
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
कोई द्रष्टा साहित्यकार जब इतिहास को देखता है तो उसे उसकी समग्रता में दिखाता भी है, और ऐतिहासिक-पौराणिक चरित्रों को आधार बनाकर गुजराती में अनेक श्रेष्ठ उपन्यासों की रचना करनेवाले सुविख्यात उपन्यासकार कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी भारतीय कथा-साहित्य में ऐसे ही द्रष्टा साहित्यकार के रूप में समादृत हैं।
‘कृष्णावतार’ मुंशी जी की कई खंडों में प्रकाशित और कई भाषाओं में अनूदित बृहत् औपन्यासिक कृति है। ‘महाबली भीम’ इसका चौथा खंड है।
महाभारतकालीन योद्धाओं में भीम का चरित्र सर्वाधिक रोमांचक है और इस खंड में उसके विभिन्न आयामों का अविस्मरणीय अंकन हुआ है। यों समूचे उपन्यास की तरह यह खंड भी कृष्ण-सरीखे नीतिज्ञ और महायोद्धा की उपस्थिति से अछूता नहीं है, पर द्रौपदी-स्वयंवर से महाभारत युद्ध-पर्व तक का राजनीतिक परिदृश्य भीम से जिस तरह अनुप्राणित है, उससे उसका रुक्ष और कोमल, विनोदी और गम्भीर तथा सर्वोपरि यौद्धेय स्वभाव मुग्धकारी रूप में सामने आता है। साथ ही तत्कालीन राजनीति को समाज की जिस विस्तृत पटभूमि पर चित्रित किया गया है, उससे पाठक के सामने अनेकानेक सुपरिचित चरित्रों का एक नया ही रूप उद्घाटित होता है और वे अपने साथ जुड़ी तमाम पौराणिकता के बावजूद अपनी ऐतिहासिकता में ज़्यादा वास्तविक और विश्वसनीय लगते हैं।
Gurukul : Ek Adhoori Kahani : Vol. 1
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

-
Description:
ऊपरी तौर पर एकरैखिक प्रतीत होनेवाला यह उपन्यास कथ्य और विषयवस्तु के लिहाज़ से हमें कई स्तरों पर सम्बोधित करता है। मूलतः यह ज्ञान के उद्भव और सम्प्रेषण के अभाव को महसूस करते हुए उसकी सर्जना का प्रयास करता है। दुनियादारी के प्रिज़्म से दुनिया की विविधता को जानने और पहचानने वाला कर्नल हर शाम पार्थ को सम्बोधित करता है। हर दिन एक नई सुर्ख़ी, हर दिन एक नया उद्घाटन और हर दिन वयस्कता का एक-एक क़दम चढ़ता हुआ पार्थ।
यहाँ पार्थ हमारे मध्यवर्गीय समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधि है जो अपनी दैनिक चर्या से बाहर अक्सर नहीं देख पाता और नतीजतन उस दुनिया और व्यवस्था के बारे में उसकी कोई निर्णायक राय नहीं बन पाती जो उसकी नियति को निर्धारित करती है। कर्नल एक-एक करके उसको न्याय व्यवस्था, आतंकवाद, कारपोरेट जगत, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध आदि पर इधर की स्थितियों से अवगत कराता है।
अन्त में वह आता है पुरुष समलैंगिकता के प्रश्न पर जिस पर आज भी भारतीय समाज और क़ानून दोहरा पैमाना लागू करता है। वह इस नज़रिए को ख़ारिज करते हुए समलैंगिकों, समलैंगिक पुरुषों की सामाजिक स्थिति, उनके भीतरी-बाहरी अकेलेपन और दूसरी पीड़ाओं को रेखांकित करता है और कहता है कि यह लोग न अपराधी हैं, न समस्या। इन्हें दंड की नहीं, समझे जाने की ज़रूरत है।
Chaar Kanya
- Author Name:
Taslima Nasrin
- Book Type:

-
Description:
‘चार कन्या’ में यमुना, शीला, झूमुर और हीरा की कथा है। यमुना एक मामूली लड़की है, उसके भीतर बूँद–बूँद कर जन्म लेती है—अपने अधिकारबोध के प्रति तीव्र जागरूकता। ऐसी सुलझी हुई जागरूक लड़कियों को काफ़ी कुछ भुगतना पड़ता है। समाज के उलटे–सीधे नियम उन्हें बहुत सताते हैं, यमुना को भी ख़ूब सताया। शीला ठगी जाती है अपने प्रेमी द्वारा। ऐसी सैकड़ों शीलाएँ राह में चल–फिर रही हैं पर सभी तो अपनी ज़ुबान पर वे बातें नहीं ला सकतीं, क्योंकि इससे ठगनेवालों पर प्रहार के बजाय शीलाओं पर ही उलटी मार
पड़ती है—समाज उन्हीं पर पत्थर फेंकता है, उनके ही मुँह पर थूकता है।
‘लज्जा’ जैसी चर्चित कृति की लेखिका तसलीमा नसरीन का यह उपन्यास स्त्री–विमर्श की कई खिड़कियाँ खोलता है, जिससे आती बयार से पाठक अछूता नहीं रह सकता।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book