Aurat Ki Duniya
Author:
Nasera SharmaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 476
₹
595
Available
औरतों, अल्पसंख्यकों और देश-दुनिया के दमित-उत्पीड़ितों के पक्ष में हमेशा अपनी आवाज़ बुलन्द रखनेवाली कथाकार नासिरा शर्मा ने अपने सरोकारों और चिन्ताओं को अपनी कहानियों, उपन्यासों, निबन्धों और साक्षात्कारों में लगातार स्वर दिया है।
यह उनके स्तम्भों का संकलन है जो उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर लिखे। स्त्री और उसकी सामाजिक-पारिवारिक स्थिति तो उनके चिन्तन में प्राथमिक रही ही है, पर्यावरण, साम्प्रदायिक सौहार्द, नए पुरुष और स्त्री के आपसी सम्बन्ध, पारिवारिक रिश्ते और हमारे आसपास का तेज़ी से बदलता हुआ परिवेश भी उनकी संवेदना के दायरे में रहा है।
इस पुस्तक में संकलित स्तम्भ-लेखन में उन्होंने सम-सामयिक घटनाओं के हवाले से अनेक उन समस्याओं पर अपनी क़लम चलाई है जो समाज और इनसान के वर्तमान और भविष्य से, उसकी नियति से गहरे जुड़े हैं।
उल्लेखनीय यह कि वे जो देखती हैं, जो लिखती हैं, उसमें अपनी स्त्री-दृष्टि को पहले रखती हैं। स्त्री, जिसका न सिर्फ़ दुनिया को देखने का तरीक़ा अलग है, बल्कि उसे बरतने और समझने का सलीका भी पुरुष के मुक़ाबले ज़्यादा मानवीय और करुणार्द्र है। इन आलेखों में उनकी यह विस्तृत और संवेदनशील दृष्टि साफ़ दिखाई देती है।
ISBN: 9788119133512
Pages: 208
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bhartiya Darshan Ki Rooprekha
- Author Name:
M. Hiriyanna
- Book Type:

-
Description:
सम्पूर्ण भारतीय विचारधारा में दो सामान्य बातें हैं—मोक्ष के सर्वोच्च आदर्श का अनुसरण और उसके लिए जो साधना बताई गई है उसमें व्याप्त वैराग्य की भावना। इन बातों से सिद्ध होता है कि भारतीयों के लिए दर्शन न तो मात्र बौद्धिक चिन्तन है और न मात्र नैतिकता, बल्कि वह चीज़ है जो इन दोनों को अपने अन्दर समाविष्ट भी करती है और इनसे ऊपर भी है। यहाँ दर्शन का लक्ष्य उससे भी अधिक प्राप्त करना है जो तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र से प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु यह नहीं भुला देना चाहिए कि तर्कशास्त्र और नीतिशास्त्र यद्यपि स्वयं साध्य नहीं हैं, तथापि दर्शन के लक्ष्य के ये ही एकमात्र साधन हैं। इन्हें ऐसे दो पंख माना गया है जो आध्यात्मिक उड़ान में आत्मा की सहायता करते हैं। इनकी सहायता से जो लक्ष्य प्राप्त होता है, उसका स्वरूप एक ओर तो ज्ञान का है—ऐसे ज्ञान का जिसमें बौद्धिक आस्था की अपरोक्षानुभव में परिणति हो गई हो, और दूसरी ओर वैराग्य का है—ऐसे वैराग्य का जो उसके तात्त्विक आधार की जानकारी से अविचल हो गया हो। वह प्रधानत: शान्ति की मानसिक स्थिति है जिसमें निष्क्रियता का होना अनिवार्य नहीं है।
भारतीय दर्शन का इतिहास इस बात का इतिहास है कि उक्त दो परम्पराओं ने किस प्रकार परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया करके विभिन्न दार्शनिक सम्प्रदायों को जन्म दिया है।
भारतीय विचारधारा के विकासक्रम में कभी एक सम्प्रदाय अभिभावी रहा और कभी दूसरा। एक समय बौद्धधर्म का स्पष्टत: ज़ोर रहा और ऐसा प्रतीत होता था कि वह स्थायी रूप से अन्यों पर हावी हो गया है, किन्तु अन्त में वेदान्त की विजय हुई।
इस पुस्तक को प्रकाशित करने का उद्देश्य यह है कि यह उन कॉलेजों में, जहाँ भारतीय दर्शन पढ़ाया जाता है, एक पाठ्य-पुस्तक के रूप में प्रयुक्त हो सके। यद्यपि यह मुख्यत: विद्यार्थियों के लिए लिखी गई है, तथापि आशा की जाती है कि यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकेगी जो जानी-पहचानी दार्शनिक समस्याओं के भारतीय विचारकों द्वारा प्रस्तुत समाधानों में रुचि रखते हैं। लेखक का प्रधान उद्देश्य यथासम्भव एक ही जिल्द के अन्दर भारतीय दर्शन का सम्बन्ध और सांगोपांग विवरण देना रहा है; फिर भी पाठक देखेगा कि व्याख्या और आलोचना भी छूटी नहीं है।
Bin Pani Sab Soon
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description: अनुपम मिश्र हमारे समय के उन बिरले सोचने-समझनेवाले चौकन्ने लोगों में से थे जिन्होंने लगातार हमें पानी के संकट की याद दिलाई, चेतावनी दी, पानी के सामुदायिक संचयन की भारतीय प्रणालियों से हमारा परिचय कराया। उनका इसरार था कि हम लोकबुद्धि से भी सीखें। उनकी असमय मृत्यु के बाद जो सामग्री मिली है उसमें से यह संचयन किया गया है। वह हिन्दी में बची ज़मीनी सोच और लोकचिन्ताओं से एक बार फिर हमें अवगत कराता है। वह इसका साक्ष्य भी है कि साफ़-सुथरा गद्य साफ़-सुथरे माथे से ही लिखा जा सकता है।” —अशोक वाजपेयी
Rajya Sarkar Aur Jansampark
- Author Name:
Kalidutt Jha +2
- Book Type:

- Description: लोकतान्त्रिक मूल्यों की महत्ता को देखते हुए ‘लोक’ और ‘जन’ अभिव्यक्तियाँ किसी भी संगठन या गतिविधि को सम्मान दिलाने के लिए कारगर विशेषण या उपसर्ग बन जाती हैं। कई बार ये अभिव्यक्तियाँ सम्मान का स्थान प्राप्त करने का औजार मात्र बनकर रह जाती हैं। उसकी मूल भावना का नितान्त अभाव सम्बन्धित संगठन या गतिविधि में होता है। भारतीय संविधान में सरकार के लिए जो भूमिका निर्धारित की गई है उसके चलते, वैश्वीकरण की आँधी के बावजूद सरकार आनेवाले बहुत समय तक समाज की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित रहेगी। सच कहा जाए तो सरकार की भूमिका का दायरा बढ़ता ही जा रहा है, बहुत बार सही ढंग से तथा कई बार प्रश्नास्पद तरीके से यह प्रवृत्ति भारत की तरह अन्य लोकतान्त्रिक विकासशील देशों में भी जारी रहेगी, तेज भी हो सकती है, पर घटेगी नहीं। समाज पर बाजार के हावी होने की कोशिश के बावजूद राज्य की महत्ता के अक्षुण्ण रहने के परिप्रेक्ष्य में समाचार के क्षेत्र में सरकार के सम्पर्क में आनेवाले, सरकार से जूझनेवाले और सरकार में सेवा करनेवाले सभी प्रकार के लोगों के लिए निश्चय ही विशेषज्ञ लेखकों द्वारा तैयार यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Wo Mujhe Hamesha Yaad Rahenge
- Author Name:
Anandi Ben Patel
- Book Type:

- Description: ‘‘गैर-मार्ग पर गए लोगों को वापस लाना तो सरल है, परंतु गैर-समझ के शिकार हुए लोगों को लौटाने में तो नाक में दम आ जाता है।’’ ‘‘अच्छी वर्षा किसान की मेहनत को सार्थक बना देती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल कर देता है।’’ ‘‘सही हो तो भी किसी बात में या अच्छा समाचार हो, तो भी बिना शंका किए बुद्धि का काम नहीं चलता, जबकि कमजोर बात या कमजोर समाचार को सच मान लेने को मन फौरन तैयार नहीं होता।’’ ‘‘पानी भले ही गरम हो, आग को वह बुझा देता है। पेट्रोल भले ही ठंडा हो, आग को वह भड़का देता है।’’ ‘‘घटना भले हमारे हाथ में नहीं, परंतु घटना का अर्थ- घटन कैसे किया जाए, यह तो हमारे हाथ में है।’’ ‘‘इच्छाओं को शांत करने की बात बाद में करना, पहले इच्छाओं को निर्मल तो करें। इच्छाओं की निर्मलता मन को स्वस्थ करके ही रहेगी।’’ ‘‘दुर्व्यसन मात्र चरित्र का पतन ही नहीं करते, प्रसन्नता का भी हनन करते हैं।’’ ‘‘प्रभु, मुझसे यदि भूलें होती ही रहने वाली हों, तो भी पुरानी भूलें मैं एक बार भी न दोहराऊँ, ऐसी ताकत तो मुझे दे ही देना।’’ ‘‘हमेशा रोते इनसान किसी को पसंद नहीं, तो हमेशा हँसते इनसान किसी के आड़े नहीं।’’ ‘‘ज्यादा रस हमें किस में है? खुलने में, स्वयं को खुला करने में या सामनेवाले को खोलने में?’’ ‘‘उत्थान के शिखर की ऊँचाई का निर्णय न हो तो कोई बात नहीं, पतन के तल की गहराई तो निश्चित कर लो।’’ ‘‘अच्छी वर्षा कृषक की मेहनत को सार्थक करती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल बना देता है।’’ ‘‘जो बोए, वही देने की जवाबदारी धरती की है; परंतु क्या बोना है, उसका चयन करने का अधिकार हमारे हाथ में है।’’ ‘‘मंदिर भव्य बने, यह तो अच्छा ही है; परंतु मंदिर में जानेवालों का जीवन भी भव्य बने, यह भी उतना ही जरूरी है।’’ ‘‘गैर-मार्ग पर गए लोगों को वापस लाना तो सरल है, परंतु गैर-समझ के शिकार हुए लोगों को लौटाने में तो नाक में दम आ जाता है।’’ ‘‘अच्छी वर्षा किसान की मेहनत को सार्थक बना देती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल कर देता है।’’ ‘‘सही हो तो भी किसी बात में या अच्छा समाचार हो, तो भी बिना शंका किए बुद्धि का काम नहीं चलता, जबकि कमजोर बात या कमजोर समाचार को सच मान लेने को मन फौरन तैयार नहीं होता।’’ ‘‘पानी भले ही गरम हो, आग को वह बुझा देता है। पेट्रोल भले ही ठंडा हो, आग को वह भड़का देता है।’’ ‘‘घटना भले हमारे हाथ में नहीं, परंतु घटना का अर्थ- घटन कैसे किया जाए, यह तो हमारे हाथ में है।’’ ‘‘इच्छाओं को शांत करने की बात बाद में करना, पहले इच्छाओं को निर्मल तो करें। इच्छाओं की निर्मलता मन को स्वस्थ करके ही रहेगी।’’ ‘‘दुर्व्यसन मात्र चरित्र का पतन ही नहीं करते, प्रसन्नता का भी हनन करते हैं।’’ ‘‘प्रभु, मुझसे यदि भूलें होती ही रहने वाली हों, तो भी पुरानी भूलें मैं एक बार भी न दोहराऊँ, ऐसी ताकत तो मुझे दे ही देना।’’ ‘‘हमेशा रोते इनसान किसी को पसंद नहीं, तो हमेशा हँसते इनसान किसी के आड़े नहीं।’’ ‘‘ज्यादा रस हमें किस में है? खुलने में, स्वयं को खुला करने में या सामनेवाले को खोलने में?’’ ‘‘उत्थान के शिखर की ऊँचाई का निर्णय न हो तो कोई बात नहीं, पतन के तल की गहराई तो निश्चित कर लो।’’ ‘‘अच्छी वर्षा कृषक की मेहनत को सार्थक करती है। अच्छा वातावरण साधक के पुरुषार्थ को सफल बना देता है।’’ ‘‘जो बोए, वही देने की जवाबदारी धरती की है; परंतु क्या बोना है, उसका चयन करने का अधिकार हमारे हाथ में है।’’ ‘‘मंदिर भव्य बने, यह तो अच्छा ही है; परंतु मंदिर में जानेवालों का जीवन भी भव्य बने, यह भी उतना ही जरूरी है।’’
Ek Teacher Ki Diary
- Author Name:
Bhavna Shekhar
- Book Type:

- Description: "भारत में शिक्षा कभी पेशा नहीं थी, किंतु आज शिक्षा का बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती है। आज शिक्षक व्यवसायी है और छात्र उपभोक्ता। इनके बीच भावनात्मक संबंध नगण्य होता जा रहा है। ‘एक टीचर की डायरी’ आज के माहौल में शिक्षक और छात्र के बीच पनप रही दूरी को पाटने का एक प्रयास है। टीचर के प्रति छात्र की डूबती आस को थामने की ईमानदार कोशिश है। इसे पढ़कर तीन बातें जेहन में आएँगी : एक—प्रकृति टीचर बनाने की प्रक्रिया स्वतः करती है; दूसरी—टीचर को ‘वज्रादपि कठोराणि, मृदुनि कुसुमादपि’ होना होता है एवं तीसरी—शिक्षक सदा शिक्षक होता है, यानी अग जग में शिक्षक। नित नए रचनात्मक प्रयोग विद्यार्थियों को शिक्षक से गहरे जुड़ने का जरिया बनते हैं। आज बालकों के दिमाग में पैदायशी स्पीड का इंजन फिट है, उन्हें कक्षा की चारदीवारी में बाँधकर रखना कोई खेल नहीं, फिर घर का वातावरण प्रतिकूल हो, तब शिक्षक का दायित्व बढ़ जाता है। आज के छात्र तरह-तरह के मानसिक दबाव, फ्रस्ट्रेशन, डिप्रेशन के शिकार हैं। ऐसे में टीचर का ‘हीलिंग टच’ इन बच्चों का जीवन बदल सकता है। पुस्तक में किशोर मन की उलझन सुलझाने के कई प्रसंग हैं। छात्रों को मानव धर्म के साथ प्रकृति प्रेम तथा जीव-जंतु से लगाव का संदेश यह डायरी बखूबी देती है। इस विधा की सख्त जरूरत है। भावना शेखर की यह कथा डायरी नायाब कृति है, जो शिक्षाजगत् से जुड़े हर व्यक्ति के लिए पठनीय और अनुकरणीय है। —उषा किरण खान"
Meghdoot : Ek Antaryatra
- Author Name:
Prabhakar Shrotriya
- Book Type:

- Description: ‘मेघदूत’ एक कालजयी कृति ही नहीं प्रेम, प्रकृति और निसर्ग के प्रति कालिदास की अनन्य प्रपत्ति भी है। अपने विशिष्ट स्वर, स्वरूप और न्यास में यह काव्य एक अप्रतिम एवं इन्द्रधनुषी भाव-वितान है, जिसमें कृतिकार की अपूर्व परिकल्पना, मौलिक उद्भावना तथा बिम्बों और वर्णों की जीवन्त छवियाँ सहज ही देखी जा सकती हैं। कालिदास ने अपनी यशस्वी कृति ‘मेघदूत’ के द्वारा जिस रूपक-राज्य का निर्माण किया था—पिछली दो सहस्राब्दियों से उसका निरन्तर विकास और विस्तार होता रहा है। विरही यक्ष के मनोजगत में विद्यमान एक आर्तप्रेमी के प्रणयोत्सुक प्रार्थी भाव को अनुषंग बनाकर—अपनी प्राण-प्रियतमा को भेजे जानेवाले विरहातुर सन्देश को कई रचनाकारों, भाष्यकारों और रूपान्तरकारों और चित्रकारों ने अपने-अपने ढंग से, अलग-अलग शैलियों में निरूपित किया है। प्रसंगानुरूप और प्रसंगान्तर परिदृश्य को अपने विरहकातर निवेदन से मुखर करनेवाली इस कालातीत रचना का अनुगायन और अनुकीर्तन न केवल सदियों से होता रहा है, बल्कि आधुनिक और समकालीन पीढ़ियाँ भी इसमें अपनी रचनात्मक भावांजलि लिए खड़ी रही हैं। अपनी सर्जनात्मक समग्रता के नाते और ‘क्लासिकी’ के गुणों से समृद्ध एवं समादृत ‘मेघदूत’ ने काव्य और काव्येतर माध्मयों के द्वारा सहृदय पाठकों, प्रेक्षकों, गायकों और समीक्षकों की क्षमता और आकांक्षाओं के अनुरूप सुदीर्घ रचना-प्रकिया एवं परम्परा को जीवित रखा है। इसी अनुक्रम में हिन्दी के सुपरिचित विद्वान, आलोचक, कवि एवं रचनाकार प्रभाकर श्रोत्रिय ने ‘मेघदूत’ के मार्मिक प्रसंगों, अछूते अनुषंगों—और सबसे बढ़कर—रचनाकार की विराट मनोभूमि का स्पर्श एवं अनुभावन अपनी विदग्ध रचना मनीषा के द्वारा किया है। ‘मेघदूत : एक अन्तर्यात्रा’ पुस्तक प्रेमी और प्रकृति के शाश्वत एवं चिरन्तन आधान को सुललित और सर्जनात्मक आयाम प्रदान करेगी—इसमें सन्देह नहीं।
Miracles in Medicine
- Author Name:
Roopa Pai
- Rating:
- Book Type:

- Description: Can you imagine a world where surgeries and amputations were conducted without anaesthesia? OUCH! Or one in which disease was believed to be caused by 'stinky air'? WEIRD! Or a world where treating madness involved drilling a hole through the skull to release the supposed 'demons' inside your head? SAY WHAAAAA...?! Guess what? That was our world, just about 250 years ago! All of this began to change in the eighteenth century with the coming of modern medicine. This brave new science, full of brilliant breakthroughs, was built on the hard work, dedication and persistence of thousands of curious minds across the ages, from Arabia to China and India to Europe. Packed with fascinating stories, insights and illustrations, this book is a celebration of 2,500 years of human endeavour and innovation in the medical sciences. Read it, and raise a rousing cheer to the amazing people who gave their all to unravel the secrets of the natural world and the human body, so that we could live longer, healthier and happier lives.
Swami Ramanand
- Author Name:
Kanhaiya Singh
- Book Type:

-
Description:
स्वामी रामानन्द एक युगपुरुष थे। चौदहवीं शताब्दी में उन्होंने दक्षिण भारत से भगवान विष्णु की भक्ति को रामभक्ति के रूप में लाकर प्रतिष्ठित किया और विपरीत प्रतीत होने वाली दो धाराओं में समन्वय और सामंजस्य स्थापित किया।
उन्होंने निर्गुण और सगुण भक्ति के समन्वय का कार्य किया। उनके अनुसार ये दोनों ही भक्तिमार्ग विधेय हैं। इन दोनों को जोड़ने का सेतु उनका 'राम-नाम' का मंत्र बना। नाम का जप करना निर्गुण और सगुण दोनों ही मार्गों के कवियों ने स्वीकार किया।
स्वामी जी ने यह कहा कि ब्राह्मण शूद्र सहित चारों वर्ण के लोग भक्ति के अधिकारी हैं। उनके द्वारा समन्वय के सम्बन्ध में कहा गया -
'जाति पाँति पूछै नहिं कोई। हरि को भजै सो हरि का होई।'
उनके अनुसार पुरुष की भाँति स्त्री भी भक्ति की कारिणी है।
स्वामी जी ने इस प्रकार अपने समन्वय और सामंजस्य के द्वारा एक प्रबल-सबल राष्ट्र- निर्माण की वह भूमिका बनाई जो भारत को एक भव्य-दिव्य भारत बनाकर विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित कर सकती है।
DHARMADVANDVA
- Author Name:
Shabnam Gupta
- Book Type:

- Description: धर्मद्वद्वं एक रोचक काल्पनिक कथानक है। जिस समय में भारतवर्ष पांडवों और कौरवों के दो पालों में बँटता दिख रहा था, उस समय में एक ऐसा आचार्य था जो किसी राजवंश के नहीं, देश के सर्वोपरि होने की बात करता था। जब धर्म अपने नियत खूटे में बँधा हुआ था, तब वो उसकी सीमा रेखा के आगे जाकर, एक नई परिभाषा लिखता था जहाँ धर्म और विवेक का संगम होता है । जिस परिवेश में स्त्री को वस्तु की तरह पाँच भाइयों में बाँट दिया गया था, उसी परिवेश में वह स्त्री शिक्षा और सशक्तिकरण का पाठ पढ़ाता था। जब समाज, वर्ण और वर्ग में बँटा हुआ था, तब वो जन्म नहीं, कर्म से मनुष्य की पहचान बनाने में क्रियार्थ था। ये उस काल्पनिक आचार्य की कहानी है, जिसका नाम वासू था। भारतीय पौराणिक आख्यान पर केंद्रित मर्मस्पर्शी तथा पठनीय कृति, जो आपको जीवन के आदर्श और मानवमूल्यों से परिचय कराएगी
Operation Khatma
- Author Name:
R.C. Ganjoo +1
- Book Type:

- Description: सन् 1990 के दशक में जम्मू और कश्मीर में ‘आजादी’ और ‘जेहादी’ तत्वों के बीच प्रधानता की लड़ाई चल रही थी, जिसमें आम नागरिक झुलस रहा था। ‘आजादी’ समर्थक जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जे.के.एल.एफ.) को ‘जेहादी’ हिजबुल मुजाहिदीन (एच.एम.) से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। दोनों आतंकी संगठन पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली थे। जे.के.एल.एफ. और एच.एम. की प्रतिस्पर्धा में सनसनीखेज मोड़ तब आया जब जे.के.एल.एफ. ने 1996 में श्रीनगर स्थित पाक हजरत बल दरगाह पर कब्ज़ा कर लिया। राज्य सरकार आतंकवादियों से लगातार मुँह की खा रही थी, पर इस बार उसने उन्हें आड़े हाथों लेने का फैसला किया। जम्मू और कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने पहली बार आतंकियों को खत्म करने का बीड़ा उठाया। आतंकी पाक दरगाह में थे, इसलिए ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था। कैसे हुई यह सर्जिकल स्ट्राइक? कैसे आतंकवाद की कमर तोड़ी गई, जिससे कश्मीर में दस साल बाद संसद् और विधानसभा के चुनाव हो पाए। ‘ऑपरेशन खात्मा’ आतंकवाद पर लिखा ग्राफिक फर्स्ट हैंड थ्रिलर है, जो एक साहसिक कदम से परिचित कराता है।
Andamanatil Krantikarak
- Author Name:
Dr. Rupesh Patkar
- Book Type:

- Description: अंदमान म्हटले की तिथला सेल्युलर जेल आणि तिथे काळ्या पाण्याची शिक्षा भोगायला पाठवलेले क्रांतिकारक आठवतात. अंदमान हे भारतीय स्वातंत्र्यसैनिकांचे क्रांतितीर्थ ! भगतसिंहांचे सहकारी विजयकुमार सिन्हा अंदमानला 'भारताचे बॅस्टील' म्हणतात. बॅस्टील हा फ्रेंच राज्यक्रांतीचे प्रतीक बनलेला तुरुंग. बॅस्टीलच्या तुरुंगात डांबण्यात आलेल्या फ्रेंच क्रांतिकारकांनी सरंजामशाहीची कबर खणत स्वातंत्र्य, समता आणि बंधुभाव ही मूल्ये उद्घोषित केली. फ्रान्ससाठी जसा बॅस्टीलचा तुरुंग तसा भारतासाठी अंदमानचा तुरुंग ! अंदमानच्या या तुरुंगात शेकडो क्रांतिकारकांना डांबण्यात आले होते. पण या तुरुंगातदेखील हे क्रांतिकारक लढत होते, जसे फ्रेंच क्रांतिकारक बॅस्टीलमध्ये लढत होते. फ्रेंच क्रांतिकारकांनी बॅस्टीलचा तुरुंग फोडला तर अंदमानात डांबण्यात आलेल्या क्रांतिकारकांनी चिवट अन्नसत्याग्रह करून ब्रिटिश साम्राज्यशाहीला वाकायला भाग पाडले. त्यासाठी महावीर, मोहित आणि मोहन यांना बलिदान करावे लागले. अंदमानच्या तुरुंगातदेखील जराही न वाकता देदीप्यमान लढा देणाऱ्या क्रांतिकारकांची ही कथा म्हणजे विजयकुमार सिन्हा यांनी लिहिलेले, 'In Andamans, the Indian Bastille' हे पुस्तक. त्या पुस्तकातील गोष्ट मराठी वाचकांना सांगण्याचा हा प्रयत्न.
Aadivasi Kaun
- Author Name:
Ramanika Gupta
- Book Type:

- Description: आज अगर सबसे बड़ा ख़तरा आदिवासी जमात को है, तो वह है उसकी पहचान मिटने का। इक्कीसवीं सदी में उसकी पहचान मिटाने की साज़िश एक योजनाबद्ध तरीक़े से रची जा रही है। किसी भी जमात, जाति, नस्ल या कबीले अथवा देश को मिटाना हो तो उसकी पहचान मिटाने का काम सबसे पहले शुरू किया जाता है। ‘आदिवासी’ की पहचान और नाम छीनकर उसे ‘वनवासी’ घोषित किया जा रहा है ताकि वह यह बात भूल जाए कि वह इस देश का मूल निवासी यानी आदिवासी है—वह भूल जाए अपनी संस्कृति, भाषा और अपना मूल धर्म ‘सरना’। यह पुस्तक आदिवासियों के जीवन के कई ऐसे अनछुए पहलुओं को हमारे सामने लाती है जिनसे अभी तक हम अपरिचित थे। स्वयं आदिवासियों द्वारा क़लमबद्ध किए गए विचारों को यहाँ दिया गया है। आदिवासियों की दशा में परिवर्तन कैसे हो, उनकी शिक्षा कैसी हो व किस प्रकार उनके जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं का निदान किया जाए, जैसे सवालों को भी यहाँ उठाया गया है। आदिवासियों के अस्तित्व की बानगी प्रस्तुत करती यह पुस्तक सभी के लिए महत्त्वपूर्ण है।
My Joys & Sorrows
- Author Name:
Dr. Krishna Saksena
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Natkhat Bandar
- Author Name:
Ramesh Bedi
- Book Type:

- Description: रामेश बेदी के अनुसार इनसान के सम्पर्क में सबसे अधिक मदारी बन्दर आता है। मदारी की डुगडुगी पर नटखट बन्दर को तमाशबीनों का मनोरंजन करते देखा जाता है। उधर आज़ाद विचरने वाले बन्दर घरों, स्कूलों, दफ़्तरों में ऊधम मचाने के लिए मशहूर हैं। बन्दर की विभिन्न प्रजातियों को दिलचस्प और गहन जानकारी देनेवाली इस पुस्तक में श्री बेदी ने प्रतिपादित किया है कि लंगूर का मुँह काला होता है और इसके गाल में ताज़ा आहार जमा करने की थैली नहीं होती जैसा कि बन्दर के गाल में होती है। श्रीराम का अनन्य भक्त होने से हनुमान के प्रति लोकमानस में अगाध श्रद्धा है। छोटे गाँव से लेकर महानगर तक सभी जगह स्थापित इसकी लाखों प्रतिमाओं को करोड़ों श्रद्धालु पूजते हैं। हनुमान चालीसा के पाठ से स्तवन करते हैं। यह भी कहा जाता है कि प्राणिमात्र के दु:ख-दर्दों को दूर कर उन्हें सुख की राह बताने के लिए भगवान बुद्ध अपने तीस पूर्वजन्मों में बन्दर के रूप में पैदा हुए थे। पूँछ वाले और बिना पूँछ वाले बन्दरों की जातियों का इस पुस्तक में सचित्र परिचय दिया है। 130 सादे चित्रों के अलावा और 15 रंगीन फ़ोटो भी इसमें शामिल किए गए हैं। बिना पूँछ वाले बन्दर—हुल्लक, ओरङ्—उतान, चिम्पांजी, गोरिल्ला—का दिलचस्प जीवन परिचय पुस्तक में दिया गया है।
Vishwa Patal Par Hindi
- Author Name:
Dr. Surya Prasad Dixit
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी भारत की एक राष्ट्रीय भाषा है, संघ की राजभाषा है और एक विश्वभाषा भी है। समस्त संसार में वह आज करोड़ों लोगों द्वारा समझी जाती है। उसकी व्याप्ति लगभग डेढ़ सौ देशों में है। वह लगभग एक दर्जन देशों में जनभाषा के रूप में प्रचलित है। इन देशों को तीन कोटियों में विभाजित करना तर्कसंगत होगा—(1) भारत के पड़ोसी राष्ट्र, (2) भारतवंशी राष्ट्र, (3) आप्रवासी-बहुल राष्ट्र।
‘विश्व पटल पर हिन्दी’ का दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष है, विश्वबोध। हिन्दी का सम्बन्ध संस्कृत, पालि और भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अरबी, फ़ारसी, पस्तो, तुर्की, अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, स्पेनिश, डच, पुर्तगाली, इटैलिक आदि कई भाषाओं से है। इस भाषा ने हज़ारों शब्दों का आदान-प्रदान किया है। हिन्दी-सेवियों ने सैकड़ों विश्वविख्यात ग्रन्थों के अनुवाद किए हैं। दर्जनों विश्व विभूतियों पर ग्रन्थ लिखे हैं। कई यात्रा-संस्मरण लिखे हैं तथा विश्व की घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। हिन्दी ने अनेक विश्वस्तरीय विचारधाराओं को आत्मसात् किया है तथा देश-देशान्तर तक अपनी ‘भारत विद्या’ का निर्यात भी किया है। हिन्दी की रूप-रचना अर्थात् व्याकरण, शब्दकोश, पाठ्यक्रम, शोध, समीक्षा एवं सर्जनात्मक लेखन में सैकड़ों विदेशी विद्वानों की सहभागिता रही है।
इधर हिन्दी फ़िल्मों, धारावाहिकों, पत्र-पत्रिकाओं और मीडिया कार्यक्रमों ने उसे विश्व के कोने-कोने में पहुँचाया है। कम्प्यूटर, इंटरनेट से उसका काफ़ी परिविस्तार हुआ है। लेखक ने दो दशक पूर्व इस ‘विश्व पटल पर हिन्दी’ की दिशा में पहल की थी। इसे अभी और व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। इस प्रयोजन पूर्ति में इस पुस्तक की अपनी एक विशिष्ट उपयोगिता है।
Anuvad Ka Naya Vimarsh
- Author Name:
Shrinarayan Sameer
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक अनुवाद को विशुद्ध भाषा संवाद मानने की प्रचलित मान्यता से प्रस्थान का विमर्श है। यह अनुवाद को दो भाषाभाषी समाजों और सभ्यताओं में भाषिक अपरिचय के बरअक्स परिचय एवं संवाद का सेतु मानने, विकास की दौड़ में पिछड़े समाजों की आवाज़ मानने और सभ्यता संवाद मानने का तार्किक घोषणापत्र है। इसमें अनुवाद को किसी भाषा रचना की दूसरी भाषा में पुनर्रचना मानने और इस तरह उसे रचना का अनश्वर उद्यम मानने की मुकम्मल तर्क-रचना भी है। इस विमर्श में अनुवाद को सृजन का अनुसृजन बनाने की संस्तुति और तर्क का ताप यत्र-तत्र-सर्वत्र है। इस पुस्तक को पढ़ना समय के संघात से रू-बरू होना और अनुवाद के वैभव को समग्रता में समझना है। साथ ही भूमंडलीकरण, सूचना विस्फोट और बाज़ारवाद के दौर में मानवीय आकांक्षा, भाषा एवं राजनीति के रिश्ते तथा सरोकार को समझना और अपनी पक्षधरता को बेबाक व तलस्पर्शी बनाना भी है।
प्रशासनिक तथा तकनीकी अनुवाद को सरल, सहज एवं सर्जनात्मक बनाने के लिए जिरह करती यह पुस्तक, अपने तर्क एवं विमर्श से अनुवादवेत्ताओं, विशेषज्ञों और सुधि अध्येताओं के बीच समान रूप से समादृत होगी।
General Knowledge Encyclopedia
- Author Name:
Dr. Sheo Gopal Mishra
- Book Type:

- Description: "यह कोश सामाजिक विज्ञानों—मानव विज्ञान, समाज विज्ञान, मनोविज्ञान, धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास एवं कला को अपने में समेटे हुए है। (विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी को अलग खंड के रूप में प्रस्तुत किया गया है।) इसमें हमने उन कतिपय महापुरुषों का संक्षिप्त जीवन-परिचय भी सम्मिलित किया है, जिन्होंने इतिहास तथा समाज को गति प्रदान की है। धार्मिक संप्रदायों, उनके मान्य ग्रंथों एवं उनके प्रवर्तकों के विषय में भी संक्षिप्त विवरण दिए गए हैं। इसमें आदि से अंत तक भारतीय योगदान को दृष्टि से ओझल नहीं होने दिया गया है। यह ‘सचित्र सामाजिक विज्ञान विश्वकोश’ कोशों की शैली और विषय-वस्तु से कुछ हटकर लगे तो कोई आश्चर्य की बात न होगी। हम उन अनेक पुस्तकों एवं संदर्भ ग्रंथों के लेखकों और संपादकों के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहेंगे जिनसे प्रेरणा प्राप्त करके सामग्री का चयन, संकलन एवं लेखन पूरा किया गया है। आशा है, यह ‘सचित्र सामाजिक विज्ञान विश्वकोश’ इक्कीसवीं सदी के आबालवृद्ध-वनिताओं को ज्ञानवर्धक लगेगा। यदि इसमें यत्र-तत्र त्रुटियाँ मिलें तो पाठक जन उन्हें सुधारने की सदाशयता बरतेंगे। "
Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti
- Author Name:
Swaminathan Annamalai +1
- Book Type:

- Description: शेअर बाजारात नवोदित आणि अनुभवी असलेल्यांसाठीही हे पुस्तक आहे. भारतीय शेअर बाजाराबद्दल फारशा माहीत नसलेल्या गोष्टी लेखकाने अत्यंत सोप्या, तरीही रोचक पद्धतीने सांगितलेल्या आहेत.’ - फिरोज व्ही. आर. वैश्विक सेवाप्रमुख, उपाध्यक्ष ‘एस.ए.पी.’ आणि इंडिया इन्क्ल्यूजन फाउंडेशनचे संस्थापक हे पुस्तक तुम्ही का वाचायला हवे? हे पुस्तक वाचून झाल्यानंतर तुम्हाला खालील गोष्टींबद्दल समजेल : 1. शेअर बाजार जितका वेळ चालू असतो तितका वेळ संगणकासमोर बसला नाहीत, तरीही पैसे कमावता येतात. 2. भरपूर नफा मिळवून देणारे शेअर्स पटकन ओळखून आपला फायदा करून घेता येतो. 3. शेअर बाजारात ज्या शेअर्सचे व्यवहार आता होत नाहीत अशा अ-सूचीबद्ध शेअर्सची हाताळणी. 4. भीडभाड न बाळगता ऑप्शन्स विकून टाकणे आणि नफ्याची टक्केवारी वाढवणे. 5. आयपीओबद्दल आणि आयपीओकरिता पैसे कसे उभे करावेत याबद्दल माहिती. 6. कागदी शेअर्सचे रूपांतरण इलेक्ट्रॉनिक शेअर्समध्ये (डिमटेरिअलायझेशन) कसे करावे. 7. बीईईएस (इशएड) म्हणजे काय, तो गुंतवणुकीचा जोखीममुक्त पर्याय आहे का? 8. स्टॉक स्क्रीनर्सशी ओळख. 9. शेअर बाजाराला कोणत्या प्रकारच्या घोटाळ्यांमुळे फटका बसू शकतो. 10. हिंदू अविभक्त कुटुंबाची (कणऋ) स्थापना करून आयकर वाचवता येऊ शकतो. Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti - Swaminathan Annamalai गुंतवणूकदाराला माहित असायलाच हव्या अश्या शेअरबाजारच्या युक्तीच्या गोष्टी - स्वामिनाथन अन्नामलाई
Encyclopaedia Of Humanities (Psychology)
- Author Name:
Nagendra
- Book Type:

- Description: Encyclopaedia Of Humanities (Psychology)- Comparative study of Indian and Western intentions.
Manohar Shyam Joshi
- Author Name:
Prabhat Ranjan
- Book Type:

- Description: मनोहर श्याम जोशी ने अनेक फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद-लेखन का काम किया। यहाँ उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसका एक कारण शायद यह भी है कि सिनेमा में पूरी तरह निर्देशक ही माध्यम होता है और उसमें लेखक की कहानी को निर्देशक अपने किसी खास कोण से सिनेमा में ढालता है और इस क्रम में लेखक का संदेश कई बार कहीं पीछे छूट जाता है। ‘हे राम’, ‘भ्रष्टाचार’, ‘पापा कहते हैं’ उनकी लिखी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनकी चर्चा की जा सकती है। मनोहर श्याम जोशी का व्यक्तित्व बहुआयामी कहा जा सकता है। उनके इस बहुआयामी व्यक्तित्व का केंद्रीय आयाम लेखन था। उनको एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया जाएगा, जो अनेक माध्यमों में लेखन की कसौटी पर खरे उतरे। यही कारण है कि हिंदी पत्रकारों-लेखकों में उनका व्यक्तित्व सबसे अलग दिखाई देता है। वे एक ऐसे पत्रकार थे, जिनका पत्रकारिता और साहित्य से समान नाता रहा। हमें विश्वास है कि विश्वविद्यालय द्वारा मूर्धन्य पत्रकार-संपादकों की इस मोनोग्राफ श्रृंखला से पत्रकार जगत् और पत्रकारिता के विद्यार्थी लाभान्वित होंगे और विरासत की इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रवृत्त होंगे।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book