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Sunahari Ungaliyan

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मेहनतकश लोगों के सुख-दुख, राग-द्वेष, हँसी-ख़ुशी, जिजीविषा और उनके जीवन के तमाम अनुभवों से भरी कहानियों का संग्रह है—‘सुनहरी उँगलियाँ’। हमारे शानदार अतीत की सुन्दर व भव्य निशानियों से सजी हमारी यह दुनिया हमें प्रेरणा देती है कि जीवन सदैव बहता है, इनसान आता और चला जाता है लेकिन जीवन के इस प्रवाह के बीच मेहनतकशों के हुनर और कारीगरी की रचनात्मक उपलब्धियाँ हमेशा बची रहती है। हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी सँजोते आ रहे हैं। इस संग्रह की कहानियों में कई ऐसे किरदार हैं जिनके हाथों में बेहतरीन हुनर है। ‘आँचल के बीज’ और ‘सुनहरी उँगलियाँ’ शीर्षक कहानियों के साथ-साथ ‘शीराज़ लोहार’, ‘फुलवा’ जैसी कहानियों में ऐसे ही कुछ ज़िन्दादिल किरदार हैं जो हिन्दुस्तान की सामासिक संस्कृति को उजागर करते हैं। इसके अतिरिक्त संग्रह की कई कहानियों में जटिल सामाजिक संरचना पाठकों को किरदारों की ज़िन्दादिली के क़रीब ले जाती है। ऐसी कहानियों में ‘अलाव’, ‘सबूत’, ‘फ़ितरत’, ‘क्रोशिया के फंदे’, ‘ख़ौफ़’, ‘रामपुरी चाकू’ आदि उल्लेखनीय हैं। नासिरा शर्मा की कहानियों में भारतीय मानस की जटिलताओं का संवाद मानवीय रिश्तों की पारिवारिक संरचना के साथ आत्मसात हो जाता है और यहीं से गंगा-जमुनी तहजीब की पकड़ से ‘सदाबहार का फूल’, ‘स्वर्ग व नर्क का फ़ासला’, ‘ईदी’, ‘नये रंग की गन्ध’, ‘हथेली में पोखर’ जैसी कहानियाँ बन पड़ती हैं जो सामाजिक सौहार्द का निर्वाह करती हैं। बीस साल बाद आ रहा नासिरा शर्मा का यह कहानी-संग्रह बीते समय की सामाजिक हलचलों की अक्कासी करता है और इन कहानियों का कथानक-शिल्प एवं कथा-भाषा का प्रवाह उनके पाठकों के लिए एक उपहार है।

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मेहनतकश लोगों के सुख-दुख, राग-द्वेष, हँसी-ख़ुशी, जिजीविषा और उनके जीवन के तमाम अनुभवों से भरी कहानियों का संग्रह है—‘सुनहरी उँगलियाँ’। हमारे शानदार अतीत की सुन्दर व भव्य निशानियों से सजी हमारी यह दुनिया हमें प्रेरणा देती है कि जीवन सदैव बहता है, इनसान आता और चला जाता है लेकिन जीवन के इस प्रवाह के बीच मेहनतकशों के हुनर और कारीगरी की रचनात्मक उपलब्धियाँ हमेशा बची रहती है। हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी सँजोते आ रहे हैं।

इस संग्रह की कहानियों में कई ऐसे किरदार हैं जिनके हाथों में बेहतरीन हुनर है। ‘आँचल के बीज’ और ‘सुनहरी उँगलियाँ’ शीर्षक कहानियों के साथ-साथ ‘शीराज़ लोहार’, ‘फुलवा’ जैसी कहानियों में ऐसे ही कुछ ज़िन्दादिल किरदार हैं जो हिन्दुस्तान की सामासिक संस्कृति को उजागर करते हैं। इसके अतिरिक्त संग्रह की कई कहानियों में जटिल सामाजिक संरचना पाठकों को किरदारों की ज़िन्दादिली के क़रीब ले जाती है। ऐसी कहानियों में ‘अलाव’, ‘सबूत’, ‘फ़ितरत’, ‘क्रोशिया के फंदे’, ‘ख़ौफ़’, ‘रामपुरी चाकू’ आदि उल्लेखनीय हैं। नासिरा शर्मा की कहानियों में भारतीय मानस की जटिलताओं का संवाद मानवीय रिश्तों की पारिवारिक संरचना के साथ आत्मसात हो जाता है और यहीं से गंगा-जमुनी तहजीब की पकड़ से ‘सदाबहार का फूल’, ‘स्वर्ग व नर्क का फ़ासला’, ‘ईदी’, ‘नये रंग की गन्ध’, ‘हथेली में पोखर’ जैसी कहानियाँ बन पड़ती हैं जो सामाजिक सौहार्द का निर्वाह करती हैं।

बीस साल बाद आ रहा नासिरा शर्मा का यह कहानी-संग्रह बीते समय की सामाजिक हलचलों की अक्कासी करता है और इन कहानियों का कथानक-शिल्प एवं कथा-भाषा का प्रवाह उनके पाठकों के लिए एक उपहार है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
50000 grams
ISBN-13
9788119133505
Pages
144
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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