Janam Jua Mat harhu
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Author:
HaridasPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
MaithiliCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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Autobiography हरिदास जीक आत्मकथा मे जाहि तरहक जीवन संघर्षक मार्मिक वर्णन भेल अछि तकरा लगातार पढ़ब मुश्किलअछि। कोसीक विभीषिका मे माय, पिता, भाइ, परिवार खतम भेलाक बादो अपन इच्छाशक्ति आ संकल्प सँ एक टा व्यक्ति आपदा सँ कोना बाहर निकलैत अछि तकर प्रमाण ई आत्मकथा थिक। हरिदास जिजीविषाक प्रतिमूर्ति बनि क' हमरा सोझाँ अबैत छथि। एक टा बीतराग व्यक्ति करोड़ोक संपत्ति केँ अनुराग भावना सँ त्याग क' अही लेल विवाह करैत छथि किएक त' हिनका परिवार मे पचासोक संख्या रहनि जे चारि-पाँच वर्षक भीतर मात्र किछुए व्यक्ति बचि जाइत अछि... मृत मायक छाती पर दूध पिबैत छओ मासक बच्ची... पुतोहु केँ जे ससुर आगि देलनि सेहो ओही राति मरि गेलाह आ भोरे हुनको ओही अछिया पर जरा देल गेलनि... मैथिली मे एक सँ एक नामवर व्यक्ति द्वारा आत्मकथा लिखल गेल अछि मुदा एहि आत्मकथा मे ओ ताकत छै जे एहि लेखक केँ नामवर बना देत। ओहने नामवर बना देत जेहन नामवर व्यक्तिक लिखल आत्मकथा होइत अछि। हरिदास गृहस्थ रहितो हृदय सँ संन्यासी रहथि तेँ अपना सताबैवला गार्जियनक बारे मे एको शब्द अमर्यादित नहि लिखैत छथि। ई आत्मकथा एक टा सामान्य लेखक केँ महान बनाबयवला महत्त्वपूर्ण कृति थिक। —डॉ भीमनाथ झा मिथिला मे सबाल्टर्न इतिहास लिखबाक परंपरा नहि रहल अछि मुदा हरिदास जीक आत्मकथा अही इतिहास सँ शुरू होइत अछि... एहि आत्मकथा मे जतेक कम शब्द मे पैघ बात कहल गेल अछि तकर टीका सैकड़ो शब्द मे कैल जा सकैत छै। हरिदास अपन जीवन-संघर्षक क्रम मे एक टा विरक्तक जीवन छोड़ि गृहस्थक जीवन चुनैत छथि। असल मे ई आत्मकथा विरक्ति पर अनुरक्तिक कथा थिक। ई आत्मकथा मैथिली मे बहुत समय धरि मन राखल जायत। —अशोक
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Autobiography हरिदास जीक आत्मकथा मे जाहि तरहक जीवन संघर्षक मार्मिक वर्णन भेल अछि तकरा लगातार पढ़ब मुश्किलअछि। कोसीक विभीषिका मे माय, पिता, भाइ, परिवार खतम भेलाक बादो अपन इच्छाशक्ति आ संकल्प सँ एक टा व्यक्ति आपदा सँ कोना बाहर निकलैत अछि तकर प्रमाण ई आत्मकथा थिक। हरिदास जिजीविषाक प्रतिमूर्ति बनि क' हमरा सोझाँ अबैत छथि। एक टा बीतराग व्यक्ति करोड़ोक संपत्ति केँ अनुराग भावना सँ त्याग क' अही लेल विवाह करैत छथि किएक त' हिनका परिवार मे पचासोक संख्या रहनि जे चारि-पाँच वर्षक भीतर मात्र किछुए व्यक्ति बचि जाइत अछि... मृत मायक छाती पर दूध पिबैत छओ मासक बच्ची... पुतोहु केँ जे ससुर आगि देलनि सेहो ओही राति मरि गेलाह आ भोरे हुनको ओही अछिया पर जरा देल गेलनि... मैथिली मे एक सँ एक नामवर व्यक्ति द्वारा आत्मकथा लिखल गेल अछि मुदा एहि आत्मकथा मे ओ ताकत छै जे एहि लेखक केँ नामवर बना देत। ओहने नामवर बना देत जेहन नामवर व्यक्तिक लिखल आत्मकथा होइत अछि। हरिदास गृहस्थ रहितो हृदय सँ संन्यासी रहथि तेँ अपना सताबैवला गार्जियनक बारे मे एको शब्द अमर्यादित नहि लिखैत छथि। ई आत्मकथा एक टा सामान्य लेखक केँ महान बनाबयवला महत्त्वपूर्ण कृति थिक। —डॉ भीमनाथ झा मिथिला मे सबाल्टर्न इतिहास लिखबाक परंपरा नहि रहल अछि मुदा हरिदास जीक आत्मकथा अही इतिहास सँ शुरू होइत अछि... एहि आत्मकथा मे जतेक कम शब्द मे पैघ बात कहल गेल अछि तकर टीका सैकड़ो शब्द मे कैल जा सकैत छै। हरिदास अपन जीवन-संघर्षक क्रम मे एक टा विरक्तक जीवन छोड़ि गृहस्थक जीवन चुनैत छथि। असल मे ई आत्मकथा विरक्ति पर अनुरक्तिक कथा थिक। ई आत्मकथा मैथिली मे बहुत समय धरि मन राखल जायत। —अशोक
Book Details
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ISBN9789391925314
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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