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Bhagwan Singh

Bhagwan Singh Author

general-non-fiction · hindi

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About Bhagwan Singh

भगवान सिंह जन्म : 1 जुलाई, 1931 में गोरखपुर जनपद के गगहा गाँव में। साहित्य की विविध विधाओं में लेखन। उनका शोधपरक लेखन इतिहास और भाषा के क्षेत्र में रहा है। प्रकाशित कृतियाँ : ‘काले उजले टीले’ (1964); ‘महाभिषग’ (1973); ‘अपने-अपने राम’ (1992); ‘परम गति’ (1999); ‘उन्माद’ (2000); ‘शुभ्रा’ (2000); ‘अपने समानान्तर’ (1970); ‘इन्द्र धनुष के रंग’ (1996)। शोधपरक रचनाएँ : ‘स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन’ (अंशत: प्रकाशित, ‘नागरी प्रचारिणी पत्रिका’, 1973); ‘आर्य-द्रविड़ भाषाओं की मूलभूत एकता’ (1973); ‘हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य’—दो खंडों में (1987); ‘दि वेदिक हड़प्पन्स’ (1995); ‘भारत तब से अब तक’ (1996); ‘भारतीय सभ्यता की निर्मिति’ (2004); ‘भारतीय परम्‍परा की खोज’ (2011); ‘प्राचीन भारत के इतिहासकार’ (2011); ‘कोसम्‍बी : मिथक और यथार्थ’ (2011); ‘आर्य-द्रविड़ भाषाओं का अन्‍त:सन्‍बन्ध’ (2013); ‘इतिहास का वर्तमान’ (2016)। सम्प्रति : 'ऋग्वेद की परम्परा’ पर धारावाहिक लेखन, 'नया ज्ञानोदय’ में।
Kosambi : Kalpana Se Yatharth Tak
Best known for Kosambi : Kalpana Se Yatharth Tak

Rajkamal Prakashan Samuh · hindi · general-non-fiction

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