Bachchon Ki Nazmein
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ये किताब उर्दू में बच्चों के लिए लिखे गए नज़्मों और गीतों का एक ख़ज़ाना है। इस किताब में कुछ पुराने और कुछ मौजूदा शायरों और शायरात की नज़्मों का इंतख़ाब किया गया है। इसमें कुछ गुनगुनाती, गुदगुदाती, अटखेलियाँ करतीं नज़्में हैं तो कुछ बच्चों को सदा और शगुफ़्ता ज़बान में बहुत कुछ सिखाती नज़्में शामिल हैं, जिन्हें बच्चे नस्ल दर नस्ल गाते और गुनगुनाते रहे हैं।
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ये किताब उर्दू में बच्चों के लिए लिखे गए नज़्मों और गीतों का एक ख़ज़ाना है। इस किताब में कुछ पुराने और कुछ मौजूदा शायरों और शायरात की नज़्मों का इंतख़ाब किया गया है। इसमें कुछ गुनगुनाती, गुदगुदाती, अटखेलियाँ करतीं नज़्में हैं तो कुछ बच्चों को सदा और शगुफ़्ता ज़बान में बहुत कुछ सिखाती नज़्में शामिल हैं, जिन्हें बच्चे नस्ल दर नस्ल गाते और गुनगुनाते रहे हैं।
Book Details
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ISBN9789391080655
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Pages196
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age7-11 yrs
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Country of OriginIndia
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ऊपर से शान्त, संयमित और कोमल दिखनेवाली, लगभग आधी सदी से पकती हुई मंगलेश की कविता हमेशा सख्तजान रही है—किसी भी चीज़ के लिए तैयार। इतिहास ने जो ज़ख़्म दिए हैं उन्हें दर्ज करने, मानवीय यातना को सोखने और प्रतिरोध में ही उम्मीद का कारनामा लिखने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध। यह हाहाकार की ज़बान में नहीं लिखी गई है; वाष्पिभूत और जल्दी ही बदरंग हो जानेवाली भावुकता से बचती है। इसकी मार्मिकता स्फटिक जैसी कठोरता लिए हुए है। इस मामले में मंगलेश ‘क्लासिसिस्ट’ मिज़ाज के कवि हैं—सबसे ज़्यादा तैयार, मँजी हुई और तहदार ज़बान लिखनेवाले।
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और इससे ज़्यादा आश्वस्ति क्या हो सकती है कि इन कविताओं में वह साजे-हस्ती बे-सदा नहीं हुआ है जो ‘पहाड़ पर लालटेन’ से लेकर उनके पिछले संग्रह ‘आवाज़ भी एक जगह है’ में सुनाई देता रहा था। ‘नए युग में शत्रु’ में उसकी सदा पूरी आबो-ताब से मौजूद है।
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Bachchon Ki Nazmein is a carefully curated anthology of Urdu nazms written expressly for children, gathering voices from both the classical canon and contemporary poets. What sets this collection apart is its dual commitment: it selects verses that tickle and enchant — atakheliyaan, playful word games, humming melodies — while also choosing poems that gently instruct, nurturing language and moral sensibility in sadaa aur shagufta zabaan, fresh and blooming idiom. These are not didactic lessons disguised as verse; they are poems children have carried across generations, recited in schoolyards and at home, their rhythms embedded in collective memory. The anthology balances nostalgia with vitality, honoring poets who shaped Urdu bachon ki adab while welcoming new voices. For families seeking to root children in the melodic richness of Urdu, or educators building a bridge between heritage and play, this book offers a living, singing archive.
यह किताब पढ़ने का अनुभव कैसा रहेगा?
यह किताब एक संगीतमय, गुदगुदाने वाला अनुभव देती है जो बचपन की याद और भाषा की मिठास से भरा है। नज़्मों की लय और सादा ज़बान बच्चों को गुनगुनाने पर मजबूर करती है। यह किताब ऐसी नहीं जिसे एक बार पढ़कर रख दिया जाए — यह बार-बार याद आती है, घर में सुनाई जाती है, और पीढ़ियों में बसती रहती है। हर नज़्म एक छोटा, ताज़ा तोहफ़ा है जो बच्चे के मन को छूती है।
यह किताब किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?
- उन माता-पिता के लिए जो अपने बच्चों को उर्दू की मधुर परंपरा से जोड़ना चाहते हैं।
- शिक्षकों के लिए जो कक्षा में भाषा को खेल और गीत के ज़रिए सिखाना चाहते हैं।
- उन बच्चों के लिए जो लय, तुक और कहानी में रुचि रखते हैं — चाहे वे उर्दू पढ़ना सीख रहे हों या सुनकर समझ रहे हों।
इस किताब का भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक महत्व क्या है?
यह किताब उर्दू की उस ज़िंदा परंपरा को सहेजती है जो घरों, स्कूलों और मुशायरों में पीढ़ियों से चली आ रही है। आज जब भाषाएं तेज़ी से बदल रही हैं, यह संग्रह बच्चों को उर्दू की शगुफ़्ता और सादा ज़बान से परिचित कराता है, जो उनकी सांस्कृतिक जड़ों को मज़बूत बनाती है। यह सिर्फ़ किताब नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुल है।
इस संग्रह का चयन और संपादन क्या ख़ास बनाता है?
संपादन ने पुराने और नए शायरों को संतुलन से चुना है — न सिर्फ़ नाम, बल्कि वे नज़्में जो बच्चों की भाषा और भावना से जुड़ती हैं। हर नज़्म को सदा, शगुफ़्ता और बच्चों की समझ के मुताबिक़ चुना गया है। यह किताब उपदेशात्मक नहीं है — यह खेल, गीत और सीख का सुंदर मिश्रण है, जो नस्ल दर नस्ल गाई जाती रहेगी।
यह किताब पाठक के मन में क्या छोड़ जाती है?
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