Harivansh Ray Bachchan Rachana Sanchayan
Author:
Harivansh Rai BachchanPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
HindiCategory:
Poetry1 Ratings
Price: ₹ 332
₹
400
Unavailable
An anthology of the writings of modern Hindi writer Harivansh Rai Bachchan, compiled and edited by Ajit Kumar.
ISBN: 9788126047673
Pages: 534
Avg Reading Time: 18 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Pratinidhi Kavitayen : Shamsher Bahadur Singh
- Author Name:
Shamsher Bahadur Singh
- Book Type:

-
Description:
निराला को अपना आदर्श माननेवाले शमशेर बहादुर सिंह हिन्दी में ‘कवियों के कवि' शमशेर सिंह के रूप में विख्यात हैं। इस कृति में उनकी चुनिन्दा कविताओं को संकलित किया गया है।
शमशेर एक ख़ास सोच और तेवरवाले कवि हैं। उनकी कविता शब्दों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे तमाम शब्द हैं—जिन्हें वे बहुत चुनकर, सोच-समझकर अपनी बात के लिए इस्तेमाल करते हैं— काव्यानुभवों की एक व्यापक और जरा जटिल दुनिया भी रचते हैं। अपनी काव्य-वस्तु के चयन और उसके शिल्प-संगठन में वे बेहद सजग हैं। इसके लिए उन्हें विचार से मार्क्सवादी और शिल्प में रूपवादी-जैसे आरोप भी सहने पड़े हैं, जबकि उनकी स्पष्ट राय है कि कला के संघर्ष को सामाजिक संघर्ष से काटकर नहीं देखा जा सकता। वास्तव में उनकी कविता सीधे-सरल तरीक़े से सामाजिक संघर्ष की कविता नहीं है, बल्कि उसे उनकी कविता-भाषा की बहुस्तरीयता को बेधकर ही समझा जा सकता है; और यह संकल्प उनकी कविताओं की तमाम रचनात्मक विशेषताओं को पूरी विविधता के साथ हमारे सामने रखता है।
Meri Zameen Mera Safar
- Author Name:
Vinod Kumar Tripathi 'Bashar'
- Book Type:

- Description: ोद कुमार त्रिपाठी पेशेवर अदीब नहीं हैं, अदब और शायरी उनके भीतर की वह बेचैनी है जो उनके व्यस्त और व्यावसायिक तौर पर सफल जीवन में रोज़ बूँद-बूँद इकट्ठा होती रहती है और फिर जैसे ही वे अपने नज़दीक बैठते हैं तो ग़ज़लों और नज़्मों की शक्ल में फूट पड़ती है। यही वे लम्हे होते हैं जब वे कहते हैं, ‘जलाकर आग दिल में, ख़ुद को इक तूफ़ान मैं कर दूँ।’ लेकिन तूफ़ान होने की यह कामना उनके व्यक्ति तक सीमित नहीं है, इसमें वह पूरा समाज और परिवेश शामिल है जो उनके साथ हमारे भी इर्द-गिर्द हमेशा रहता है और जिसकी अजीबोग़रीब फ़ितरत से हम सब वाकिफ़ हैं। हम भी उसके बीच वही तकलीफ़ महसूस करते हैं जो उन्हें होती है लेकिन बहैसियत एक हस्सास शायर वे उसे कह भी लेते हैं और बहुत ख़ूबसूरती से कहते हैं। इस किताब में शामिल उनकी ग़ज़लें और नज़्में गवाह हैं कि मौजूदा दौर की जेहनी और जिस्मानी दिक़्क़तों को उन्होंने बहुत नज़दीक और ईमानदारी से महसूस किया है। एक मिसरा है, ‘मैंने कल अपने उसूलों को नसीहत बेची’। रूह तक फैली हुई ये दुकानदारी आज हम सब का सच हो चुकी है। ऐसा कुछ अपने पास हमने नहीं रखा जिसे हम बेचने को तैयार न हों, और जिसके ख़रीदार आस-पास मौजूद न हों। लेकिन हम इससे वक़्त की ज़रूरत कहकर किनारा कर लेते हैं। विनोद त्रिपाठी इस विडम्बना को लेकर सचेत हैं। वे देख रहे हैं कि ज़िन्दगी की ये तथाकथित मजबूरियाँ हमें कहाँ लेकर जा रही हैं और ये भी कि अगर हम इन्हें रोक नहीं सकते तो इन पर निगाह तो रखना ही होगा। ‘दिखाकर ख़्वाब मुझको मारने की ज़िद है जो तेरी'—एक ग़ज़ल का ये मिसरा बताता है कि शायर ने अपने सामने मौजूद वक़्त और वक़्ती ताक़तों की साज़िशों को पहचान लिया है। और यहाँ से एक उम्मीद निकलती है कि हो सकता है कल उनका जवाब भी हम जुटा लें और अपने इंसानी सफ़र की बाक़ी उड़ानों को इंसानों की तरह अंजाम दे सकें
Meghdoot
- Author Name:
Kalidas
- Book Type:

-
Description:
भारतीय संस्कृत साहित्य की अमूल्य थाती ‘मेघदूत’ प्रकृति तथा विपरीत परिस्थितियों में फँसे एक मनुष्य के अवचेतन रिश्ते का प्रतीक है। कालिदास ने अपनी यह महान रचना एक मिथकीय घटना के आधार पर बुनी है, जिसमें भगवान कुबेर का सेवक और अनन्त यौवन के वरदान से विभूषित यक्ष अपनी यक्षिणी के मोह के वशीभूत हो अपने स्वामी के लिए रोज़ सुबह ताज़े फूल तोड़ने का अपना कर्तव्य भुला बैठता है। इस पर क्रोधित हो कुबेर यक्ष को एक वर्ष के लिए जंगल में संन्यासी का जीवन बिताने के लिए भेज देता है।
एकान्तवास के दौरान जहाँ यक्ष का ध्यान प्रकृत और उसके तत्त्वों की ओर जाता है, वहीं उसके शरीर और एकाकी हृदय को बदलते मौसमों की मार भी झेलनी पड़ती है। परिणामस्वरूप यक्ष विभ्रम का शिकार हो जाता है। उसे प्रकृति की तमाम वस्तुओं में मानवीय क्रियाओं का आभास होने लगता है और वह उनमें अपनी भावनाओं का मनोछवियों का प्रतिबिम्ब देखने लगता है। आकाश में छाए-भरी बादलों में उसे अपना एक दोस्त दिखाई देता है जो दूर हिमालय में स्थित अलकानगरी में उसके लिए अवसादग्रस्त उसकी प्रेमिका तक उसका सन्देश लेकर जा सकता है। इस कृति में मृत्युंजय ने इतिहास और विरासत की छवियों को जिस अनूठे ढंग से समकालीन सन्दर्भों में पकड़ा है, उसके चलते यह पौराणिक नाट्य एक गीतात्मक प्रस्तुति बन गया है। पौराणिक चरित्रों और प्रतीकों को पाद-टिप्पणियों और प्राचीन ग्रन्थों के हवाले से समझाया गया है, उससे यह पुस्तक और भी पठनीय हो जाती है।
Jeene Ke Liye Zamin
- Author Name:
Atma Ranjan
- Book Type:

- Description: आत्मा रंजन की ये कविताएं जीवन की उन लुकी छिपी संभावनाओं को बचाने की कविताएँ हैं जिनमें उड़ाने हैं, बीज के छतनार वट–वृक्ष में बदलने की संभावनाएं हैं। यह एक ऐसी आग की कविता है जिससे जलने की नहीं पकने की गंध आती है। जो मनुष्य की रोटी और रोशनी से जुड़ी है। आत्मा रंजन की कविता वस्तुतः जीवन की बहुत साधारण चीज़ों और बहुत साधारण और सामान्य लगती क्रियाओं में नये अर्थ तलाश करती है। वह साधारणता में छिपी असाधारणता को ढूंढ लेती है। वह स्पर्श और थपकी में लड़ने के हौसले को देख लेती है, क्योंकि वह थपकी के बीच आटे की लोई के रोटी के आकार में बदलने की क्रिया को लक्ष्य कर सकती है। यही कारण है कि वह जड़ों के जड़ हो गये या मान लिए गये अर्थ से अलग उसमें छिपी ऊर्जा को देख भी सकती है और समझ भी सकती है। यह एक ऐसी कविता है जो बार बार कुचले जाने के ख़िलाफ़ उठ खड़े होने वाली घास को पहचानती है। इस कविता को किसी भी चीज़ के किसी अन्य चीज़ में होने की आकांक्षा नहीं है, वह अपने होने में ही चीज़ों के सुंदर होने को देख सकती है। यह कविता बंद पड़े दरवाज़ो पर साँकल की तरह दस्तक देती है। यह हमारे समय की विडंबनाओं और विद्रूपों के ख़िलाफ़ न केवल प्रतिरोध की बल्कि एक लगातार जूझते व्यक्ति की कविता है। यह कविता सबके जीने के लिए ज़मीन की आकांक्षा की कविता है। इसमें अपनी ज़मीन और अपनी भाषा की गंध है। झूंंब, हूल, कुटुवा, गाडका, बियूल की टहनियां जैसे अनेक स्थानीय संदर्भ हमारी भाषा में कुछ नया जोड़ते हैं। इन कविताओं में हमारे समय के बहुत सारे सवाल, महामारी से उपजे संकट और नफ़रत की राजनीति से बढ़ रही हिंसा, बाज़ारवाद और यूज़ एंड थ्रो की संस्कृति के अनेक चेहरे उजागर होते हैं। ये कविताएं न होने में होने की संभावनाओं को देखने की कविताएं हैं। – राजेश जोशी
Samay Shabd Aur Main
- Author Name:
Krishnkant Nilose
- Book Type:

- Description: Book
Main Astronot Hoon
- Author Name:
Arvind Joshi
- Book Type:

- Description: Poems
Raag Virag
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
...यह उन कविताओं का संग्रह है जिनमें जितना आनन्द का अमृत है, उतना ही वेदना का विष। कवि चाहे अमृत दे, चाहे विष, इनके स्रोत इसी धरती में हों तो उसकी कविता अमर है।
...जैसे ‘उड़ि जहाज को पंछी फिरि जहाज पर आवै’, निराला की कविता आकाश में चक्कर काटने के बाद इसी धरती पर लौट आती है।
...निराला की कल्पना धरती के भीतर पैठकर वनबेला की सुगन्ध के साथ ऊपर उठती है।
...इस धरती के सौन्दर्य से निराला का मन बहुत दृढ़ता से बँधा हुआ है। आकाश में उड़नेवाले रोमांटिक कवियों और धरती के कवि निराला में यही अन्तर है।
...नारी के सौन्दर्य के बिना बसन्त का उल्लास अधूरा है। निराला की शृंगारी रचनाएँ देखकर विरोधी आलोचक कहते थे—ये कैसे छायावादी कवि हैं, जो अपने को ही रहस्यवादी कहते हैं और नारी सौन्दर्य के गीत भी गाते हैं।
...निराला ने गतकर्म सरोज को अर्पित कर दिए, फिर नया कर्म आरम्भ किया, उन्होंने ‘राम की शक्ति-पूजा' लिखी। ‘सरोज-स्मृति’ से निराला का आधा दु:ख सरोज की मृत्यु के कारण है, आधा उनके अपने संघर्षों के कारण।
...वह दु:ख की कथा सरोज के जन्म से पहले शुरू हुई थी और सरोज की मृत्यु के बाद बहुत दिन तक चलती रही। उसी की एक कड़ी है ‘राम की शक्ति-पूजा'।
...यह संग्रह निराला के सुदीर्घ कवि जीवन की सार्थकता का भी प्रमाण है।
—रामविलास शर्मा (इसी संग्रह से)
Waqt Ka Main Lipik
- Author Name:
Yash Malviya
- Book Type:

-
Description:
‘वक़्त का मैं लिपिक’ अपने समय से सीधे मुठभेड़ तो है ही, इसमें कवि की व्यक्तिगत पीड़ा भी अनुस्यूत है। उनके व्यक्तिगत जीवन में जो कुछ घटित हुआ है, उसी का प्रतिबिम्बन इसमें हुआ है और शायद ये गीत न होते तो वे बिखर गए होते, टूट गए होते, हिंस्र पशु हो गए होते, लेकिन इन गीतों ने उन्हें सहारा देकर मनुष्य बने रहने की ताक़त दी है।
यश स्वयं ही मानते हैं कि ये गीत, उनके लिए गीत नहीं उनके जीवन की तारीख़ें हैं। इनमें बाबरी मस्जिद का क़त्ल है तो गुजरात कांड के फफोले और छाले भी इनके बदन पर हैं। इन पर रोज़-रोज़ बलात्कार का शिकार होती सुबहों की पथरा गई चीख़ों का प्रतिरोध भी दर्ज़ है।
...एक रचनाकार अपने जीवन-संघर्ष में किन-किन मोड़ों से गुज़रता है, यह देखना हो तो यश मालवीय के इन गीतों से दो-चार हुआ जा सकता है।
वे अपने गीतों को नवगीत कहलवाना पसन्द करते हैं और मानते हैं कि ढेर सारी विडम्बनाओं के साथ तकनीक के कंट्रास्ट को साधने में नवगीतों की भूमिका ऐतिहासिक रही है। लेकिन उनका ज़ोर इस बात पर सदैव रहता है कि नवगीतों की बुनियादी शर्त उनका गीत होना है।
इस संकलन में शामिल उनके गीत इस शर्त को बख़ूबी पूरा करते हैं।
Ichchaon Ke Jivashm
- Author Name:
Usman Khan
- Book Type:

- Description: उस्मान ख़ान की कविता उखड़े हुए नागरिक के एलिएनेशन की कविता है। आततायी राज्य, अन्याय, सत्तात्मक दम्भ, लूट, निर्बुद्धिकरण और कुबुद्धिकरण, राजनीतिक पतन, सामाजिक विषमता और विभाजन ने उस्मान को आन्दोलित कर रखा है। वे बेज़ार हैं। यह मामूली मोहभंग नहीं है। लेकिन यह ग़ैरमामूली असन्तोष उन्हें न तो निरुपाय बनाता है और न ही असंयत। उनके यहाँ भाषा एक बड़े उपाय में बदल जाती है। लोकतंत्र, सत्ता और समाज के स्लम को वर्णित करने के लिए उस्मान को ‘स्ट्रीट लैंग्वेज’ उपलब्ध होती जाती है जो हिन्दुस्तानी विपन्नता, दारिद्र्य, असहमति और बेदखली की अस्ल अभिव्यंजना है। इस जन भाषा, जो नई हिन्दुस्तानियत की द्रोह-भाषा सरीखी है, को पाने के बाद उस्मान ख़ान समकालीन हिन्दी के मध्यवर्गीय टकसाली भाषिक रूप-बन्ध को आहिस्ता से परे हटा देते हैं और अपने निहंग अनुभवों और देखन को किसी निचाट ज़बान के हवाले कर देते हैं। इसीलिए उस्मान को पढ़ना काफ़ी कुछ ख़ुसरो की याद दिलाता है। तब यह बात भी खुल जाती है कि कविता के अपने कारोबार में वह ला-सानी हैं। कोई उन जैसा नहीं, वह किसी जैसे नहीं। फिर भी मुक्तिबोध की चिन्ताओं और राजकमल की उखड़ी हुई साँसों वाली कविता का यदि कोई काव्याकार देखना हो तो उस्मान ख़ान की बेचैन चहलक़दमियों में वह दिख जाएगा। और अपनी इस बेचैनी में वह मुक्तिबोध की तरह एक बडे भूभाग में नहीं भटकते—उनकी दुविधाएँ और द्वन्द्व बेहद संघनित और आन्तरिक होने के साथ ही प्रतिरोधात्मक और वैचारिक होते जाते है। जीवन के नष्ट होने की वजह यदि जनविरोधी तंत्र है तो इसका विकल्प ढूँढ़ना पड़ेगा जो तुरत-फुरत तो हासिल नहीं हो सकता। कह लीजिए कि उस्मान सामूहिक आत्मन् के निर्माण को किसी सतत् धीरज का परिणाम मानने से विरत नहीं होते। विपत्तियों को देखने-समझने का जो हुनर उन्होंने हासिल किया है और फ़कीरी बेबाक़ी, बाँकपन और तंज़ के साथ कहने की जो शैली उन्होंने पा ली है, हिन्दी कविता के समकाल में वह बड़ी रचनात्मक उपलिब्ध है जो उस्मान की क़द-काठी को नायाब और अप्रतिम बनाती है और अपनी पीढ़ी का सबसे निराला राजनीतिक काव्य-व्यक्तित्व। -देवी प्रसाद मिश्र
Sab Itna Asamapt
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
‘सब इतना असमाप्त’ अपने शीर्षक से ही संग्रह की अन्तर्वस्तु का आभास देता है। इसकी अधिकांश कविताएँ वर्ष 2010 के बाद लिखी गई हैं। यहाँ कुछ अन्य काव्य-प्रयोग भी शामिल हैं जो कविता और उसकी एक बड़ी दुनिया में कवि की निरन्तर आवाजाही के प्रमाण हैं। कुँवर नारायण ने किसी भी क़ीमत पर कविता की भूमिका को सीमित करके नहीं देखा। उन्होंने अपनी एक कविता में प्रतीकात्मक लहजे़ में कहा है कि मैं कभी भी अपनी कविताओं का अन्त नहीं लाना चाहता। उस जीवन्त नाते को बनाए रखना चाहता हूँ जिसे अन्त समाप्त कर देता है। वे हमेशा अनन्तिम कविताएँ लिखना चाहते थे, इसलिए अन्तहीन भी। प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ अपने आप में उनकी इस चिन्ता को मूर्त करती हैं और इस तरह अन्त और आरम्भ की एक व्यापक और परस्पर अभिन्न परिकल्पना हमारे सामने रखती हैं।
संग्रह की कविताएँ बहुत अनोखे ढंग से बेचैन करती हैं और आश्वस्त भी। इनमें एक बड़े कवि के समस्त अनुभवों की काव्यात्मक फलश्रुति है और अक्सर एक भव्य उदासी का गूँजता हुआ स्वर। यहाँ कुछ भूली-बिसरी यादों का कोलाज है और अप्रत्याशित विडम्बनाओं की ओर लुढ़कते हुए समाज की चिन्ता भी। पूरे संग्रह में सागर के दो तटों की तरह जीवन और मृत्यु के विविध अनुभवों-आहटों की कविताएँ एक सायुज्य में हैं।
हिन्दी के शीर्षस्थ कवि कुँवर नारायण ने अपनी कृतियों के माध्यम से एक पूरा अलग 'पैराडाइम’ रचा है। इसी क्रम में प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ एक नए रूप में उनकी उपस्थिति को सम्भव बनाती हैं। इसमें उनकी काव्य-यात्रा भौतिक-अभौतिक, नैतिक-अनैतिक, लौटना-जाना, अन्त और आरम्भ, जिजीविषा और मुमुक्षा की परस्पर यात्रा रही है। पूरे संग्रह में यह संवेदनशीलता क्रमश: बहुआयामी विस्तार पाती गई है और कुँवर नारायण का एक बेहद सघन और अनुभव-समृद्ध काव्य-संसार पाठकों के सामने खुलता चला जाता है।
Kavita Ka Shuklapaksh
- Author Name:
Bachchan Singh
- Book Type:

-
Description:
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा लिखित ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ सिर्फ़ इसलिए हिन्दी का एक गौरव ग्रन्थ नहीं है कि उसने पहली बार साहित्य की समग्र परम्परा का एक वयस्क और उत्तरदायी परिप्रेक्ष्य से निदर्शन कराया, बल्कि इसलिए भी कि उसमें शुक्ल जी की गहरी रसिकता, सावधान और सटीक पहचान और सजग सुरुचि से चुनी हुई कविताओं या कवितांशों का एक विलक्षण संकलन भी है।
इस संकलन से शुक्ल जी का निजी रागबोध और काव्य-दृष्टि प्रगट होती है, साथ ही हिन्दी कविता-संसार की जटिल लम्बी परिवर्तन-कथा भी शुक्ल जी के विश्लेषण और चयन से विन्यस्त होती है। महत्त्वपूर्ण आलोचक डॉ. बच्चन सिंह ने अपने सहकर्मी डॉ. अवधेश प्रधान के साथ शुक्ल जी के चयन के आधार पर हिन्दी की एक ‘गोल्डन ट्रेजरी’ एकत्र की है। इसमें कोई सन्देह नहीं है कि यह हिन्दी काव्य की, छायावाद-पूर्व की सम्पदा से आकलित, एक रत्न-मंजूषा है। इस संकलन की एक और विशेषता की ओर भी ध्यान देना चाहिए—कविताओं में रूप का नैरन्तर्य और परिवर्तन। कुछ लोगों का विचार है कि साहित्य का इतिहास रूपों और उनके परिवर्तन का इतिहास होता है। शुक्ल जी को यह एकांगिता स्वीकार्य नहीं है। शुरू से ही रूपों के नैरन्तर्य, परिष्कार और परिवर्तन के प्रति वे सतर्क हैं। इन परिवर्तनों को वे कभी शब्द-शक्तियों के आधार पर, कभी क्रियारूपों और लय के आधार पर पहचानते हैं। इसमें केवल ‘श्रेष्ठ’ और ‘प्रिय’ का मनचाहा संकलन नहीं है, बल्कि ‘विविध’ और ‘प्रतिनिधि’ का सावधान चयन है जिसमें उत्कृष्ट काव्य-खंडों के साथ कुछ कमज़ोर काव्य-प्रयोग भी है जिनका ऐतिहासिक मूल्य है—काव्य-वस्तु और काव्य-भाषा के विकास की दृष्टि से। इसमें सफल काव्य-सृष्टि की ‘सिद्धावस्था’ के साथ असफल काव्य-प्रयत्नों की ‘साधनावस्था’ भी मौजूद है।
इस इतिहास-यात्रा में जगमगाते शिखरों के साथ कुछ गुमनाम घाटियाँ भी शामिल हैं। आप केवल ‘इतिहास’ में उद्धृत काव्य-रचनाओं को एक क्रम में देख जाएँ तो हिन्दी काव्यधारा का एक व्यापक और प्रतिनिधिमूलक गतिशील प्रवाह-चित्र सामने आ जाता है। यह संचयन ऐसी ही विविधवर्णी चित्रमाला है।
Bhasmankur
- Author Name:
Nagarjun
- Rating:
- Book Type:

- Description: भगवान शिव के क्रोध का लक्ष्य होकर काम भस्म हो जाता है। सम्पूर्ण देव-जगत और ब्रह्मा ने उसे भेजा था ताकि वह तपस्या-रत शिव को पार्वती के सौंदर्य की ओर प्रवृत्त कर सके और दोनों के मिलन से उत्पन्न संतान देवगण का नेतृत्व कर उपद्रवी तारकासुर को समाप्त कर सके। वसंत काम के साथ इसी कार्य की सिद्धि के लिए कैलास गया था।यह एक लम्बी कथा है जिसका केवल एक अंश— कैलास पर वसंत के अकस्मात आविर्भाव से लेकर काम के भस्म होने और तद्नंतर रति के विलाप की प्रतिक्रिया में मनुष्य मात्र को आश्वस्त करने वाली आकाशवाणी तक—यही ‘भस्मांकुर’ की विषयवस्तु है। इतनी-सी कथा को इस काव्य के केंद्र में रखकर नागार्जुन ने अपनी लोकदृष्टि,गहन सामाजिक सम्पृक्ति और उदात्त आशाबोध के साथ बड़े और व्यापक अर्थों में पाठक तक पहुँचाया है। काम के पुनरुद्भव,उसके भस्म से अंकुरित होने को उन्होंने मानव-जीवन के सातत्य से जोड़ा है। यह काम ही है जो सृष्टि का,जिजीविषा का और कामना का मूल है। बरवै छंद में एक हजार पंक्तियों में अनुस्यूत यह रचना नागार्जुन की उत्कृष्ट कृतियों में गिनी जाती है।
Uttar Kabeer Aur Anya Kavitayen
- Author Name:
Kedarnath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ’ केदारनाथ सिंह का पाँचवाँ काव्य-संकलन है, जिसमें पिछले छह-साढ़े छह वर्षों के बीच लिखी गई कविताएँ संगृहीत हैं। यह दौर बाहर और भीतर, दोनों ही धरातलों पर क्षिप्र परिवर्तनों का दौर रहा है। इस संग्रह की कविताओं में उसकी कुछ अनुगूँजें सुनी जा सकती हैं। पर एक ख़ास बात यह है कि यहाँ बहुत-सी कविताएँ एक ऐसे स्मृतिलोक से छनकर बाहर आई हैं, जहाँ समय के कई सम-विषम धरातल एक साथ सक्रिय हैं। इस संग्रह तक आते-आते कवि की भाषा में एक नई पारदर्शिता आई है। इस भाषालोक में कुछ भी वर्जित या अग्राह्य नहीं है—पर यहाँ ऐसे शब्दों पर भरोसा बढ़ा है, जो मानव-व्यवहार में लम्बे समय तक बरते गए हैं।
इस संग्रह की कविताओं में अपने स्थान के साथ कवि का रिश्ता थोड़ा बदला है, जिसका एक संकेत ‘गाँव आने पर’ जैसी कविता में देखा जा सकता है। रचना में यह नया धरातल एक तरह के आन्तरिक विस्थापन की सूचना देता है। विस्थापन की यह पीड़ा अनेक दूसरी कविताओं में भी देखी जा सकती है—यहाँ तक कि ‘कुदाल’ में भी। कोई चाहे तो कह सकता है कि यह कवि के काव्य-विकास में एक नए प्रस्थान की आहट है—हालाँकि ये कविताएँ अपने स्वभाव के अनुसार इस तरह का कोई दावा नहीं करतीं। इस संकलन की बहुत-सी कविताओं में एक अन्तर्निहित प्रश्नात्मकता है। वे अक्सर कुछ पूछती हैं—बाहर से कम और अपने-आपसे ज़्यादा। ‘उत्तर कबीर’ शीर्षक अपेक्षाकृत लम्बी कविता इस प्रश्नात्मक बेचैनी का एक बेलौस उदाहरण है। फिर इस पूछने की धार के आगे मुक्ति भी विडम्बनापूर्ण लगने लगती है और स्वयं कवि-कर्म भी—जो सड़ रहा है और ज़ाहिर कि बहुत कुछ है जो सड़ रहा है क्या मैं उसे बचा सकता हूँ कविता लिखकर?
Kuchh Bhi Vaisa Nahin
- Author Name:
Uma Shankar Choudhary
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कविता में अपनी अलग पहचान बना चुके उमा शंकर चौधरी का यह कविता-संग्रह हाल के वर्षों में सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर हुए उन तमाम बदलावों का साक्ष्य है जिन्होंने आम आदमी की मुश्किल जिन्दगी को और मुश्किल बना दिया है। संग्रह की कविताएँ समाज की गति और दिशा का बेबाक आकलन ही नहीं करती हैं, उनके निहितार्थों को भी उद्घाटित करती हैं।
कम ही कवि ऐसे हैं जिनके यहाँ राजनीतिक कविताएँ इतनी शिद्दत से अनवरत आती रही हैं जितनी उमा शंकर के यहाँ। उनका राजनीतिक पक्ष स्पष्ट है, इसलिए उनकी कविताएँ भी अपना पक्ष तय करती हुई आम आदमी के हक में जाकर खड़ी हो जाती हैं। समसामयिक राजनीति जिस नए सत्य को गढ़ने और समाज को उसे अपनाने के लिए बाध्य करने को प्रयासरत है, उसकी वास्तविकता को ये कविताएँ सूक्ष्मता से रेखांकित करती हैं। कविता को अपने समय से किस तरह सम्पृक्त होना चाहिए और किस तरह उसे अपने समय का एक अन्तर्पाठ तैयार करना चाहिए ये कविताएँ इसका उदाहरण हैं।
इन कविताओं में अपने समय के प्रति कवि का क्षोभ और क्रोध तो है लेकिन उनसे कहीं ज्यादा दुख है। यहाँ स्त्री का दुख है तो घरों में बन्द होने को मजबूर बच्चों का दुख भी। यहाँ हमारे भीतर की मरती जा रही संवेदनशीलता का दुख है तो सड़कों पर उतर चुकी भीड़ के उन्मादी हो जाने का दुख भी। यहाँ सत्ता की बढ़ती निरंकुशता के कारण दुख है तो उसके खिलाफ उठ रहे प्रतिरोध की आवाज को दबाए जाने का दुख भी। ऐसा प्रतीत होता है कि अपने समय की भयावहता को दर्ज करते कवि में दुख एक स्थायीभाव की तरह स्थापित हो गया है। कहना न होगा कि इस दुखबोध में ही मनुष्यता का भविष्य निहित है।
दरअसल ये कविताएँ अपने समय-समाज का एक ऐसा दस्तावेज हैं जो मनुष्यता की पक्षधरता में हमेशा प्रासंगिक बनी रहेंगी।
Hari Patang Par Hara Patanga
- Author Name:
Varun Grover +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Age group 9-12 years कथा शुरू ऐसे होती है ……….एक है घोड़ा दो सवार हैं ….तीन लोक के चार द्वार हैं। यह अपनी हरियाली के लिये अपना बादल आप बनाने के सफर का किस्सा है। भटक भटक के किस्से किस्से जमा किए बादल के हिस्से वरुण ग्रोवर ने इस लम्बी कविता में ऐसी भाषा, बिम्ब और लय अपनाये हैं कि पुराने समय की खोजी यात्राएँ साकार होने लगती हैं। और वह यात्रा भी जो यात्रियों में अपने समय को समझने के लिए चलती है। इसमें एलन शॉ के चित्रों का वैविध्य बेमिसाल है। चित्रों में माया सभ्यता से लेकर अब तक के आम इंसान हैं। सब अपने-अपने तरीकों से अपने बादलों की खोज में दिखाई देते हैं। जैसे यह इंसानी सभ्यता की अनवरत खोज है। इस तरह किताब में दो कविताएँ हैं। दूसरी कहें कि पहलीॽ कि पहले के भी पहले की कविता, एलन शॉ की है।
Neem Ka Shahad
- Author Name:
Rajvardhan Azad
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कविता के क्षेत्र में राजवर्धन आज़ाद का प्रवेश एक सुखद संयोग है। एक कुशल नेत्र चिकित्सक यहाँ समर्थ कवि के रूप में प्रकट हुआ है। कवि कर्म का सम्बन्ध हृदय से भी है। जो व्यक्ति मनुष्य की आँखों की रोशनी लौटाता है, वह हृदय से कितना संवेदनशील होगा इसका प्रमाण यह कविता-संग्रह है।
‘नीम का शहद’ कवि डॉ. राजवर्धन आज़ाद के अनुसार एक नवीन प्रयोगधर्मिता का उदाहरण है। अपनी भावनाओं को सूत्रों में अभिव्यक्त करना या यूँ कहें कि कम शब्दों में अधिक भावों को व्यक्त करना है—‘ज़िन्दगी है उल्फ़त/जिनकी है क़िस्मत/जिनके हैं ख़ादिम/उनकी है जन्नत।’
मुक्त छंद के कवि डॉ. आज़ाद की भावनाएँ सूक्ष्म हैं। कविता के केन्द्र में मनुष्य का जीवन है। विभिन्न भाव-भंगिमाओं से परिपूर्ण डॉ. आज़ाद की कविताएँ पृथ्वी से जन्नत तक की उड़ान भरती हैं। व्यक्ति, परिवार, समाज, राज्य, देश-विदेश की गतिविधियाँ कविता के मुख्य सरोकारों में शामिल हैं। प्रकृति, प्रवृत्ति, परछाईं, पीढ़ियाँ, परिवार, परमेश्वर के साथ स्व से शिखर तक डॉ. आज़ाद की कविताओं में उपस्थित हैं। देश एवं देश की परिस्थितियों को लेकर डॉ. आज़ाद चिन्तित रहते हैं। उनकी चिन्ता यह भी है कि जिनके कंधों पर देश को विकसित करने की जिम्मेवारी है, वे स्वयं बीमार हैं। अर्थात अयोग्य हैं। ‘बीमार है मुल्क’ कविता में वे लिखते हैं—‘बीमार है मुल्क/बीमार हैं कुर्सियाँ/बीमार हकीम से/हम दवा पूछ रहे हैं।’
उनकी कविता दुनिया में हो रहे पल-पल बदलाव की ख़बर रखती है। साथ ही संस्कृति के अवमूल्यन के प्रति सचेत भी करती है। एक कवि संवेदनशील संस्कृतिकर्मी भी होता है, इसलिए संस्कृति के अवमूल्यन से उनका चिन्तित होना स्वाभाविक है। संस्कृति के विभिन्न केन्द्रों का विपरीत व्यवहार डॉ. आज़ाद जैसे संवेदनशील एवं कर्मशील कवि को सोचने पर विवश कर देता है। उन्हीं के अनुसार—‘रक्षक बने भक्षक/मित्र बने तक्षक/संस्कृति हुई तार-तार/तस्कर बने परीक्षक।’
डॉ. राजवर्धन आज़ाद हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेज़ी में भी कविता लिखते हैं। इनकी संवेदनशीलता तमाम विधाओं में मानवीयता के अत्यंत क़रीब है। ‘नीम का शहद’ कवि हृदय व्यक्तियों के लिए ‘नीम’ और ‘शहद’ के गुणों से परिपूर्ण फलदायी सिद्ध होगा।
—डॉ. कल्याण कुमार झा
Dhoomketu Dhoomil Aur Sathottari Kavita
- Author Name:
Meenakshi Joshi
- Book Type:

-
Description:
कविता जीवन की अभिव्यक्ति है, परन्तु उसकी सार्थकता जीवन से जुड़े रहने पर ही निर्भर है। यदि उसमें जीवन की सौन्दर्यमूलक और संवेदनशील अभिव्यक्ति नहीं है, मात्र काल्पनिकता है तो उसकी सार्थकता सन्दिग्ध हो जाती है। काव्य के माध्यम से सहृदय साहित्यकार अपनी अनुभूतियों को कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त करते रहे हैं और पाठकों ने भी ऐसी अभिव्यक्तियों को सहर्ष स्वीकार किया है। साहित्य की विविध विधाओं में काव्य ही एक ऐसी विधा है, जो आदिकाल से लेकर आज तक सहज और स्वाभाविक रूप में निरन्तर प्रवहमान है। कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक अभिव्यक्ति की क्षमता काव्य में होती है। इसीलिए महाकवि कालरिज ने कहा था—कविता श्रेष्ठतम शब्दों का श्रेष्ठतम क्रम में संयोजन है। दोहा, छन्द इसका सशक्त प्रमाण हैं। समय के साथ-साथ काव्य के भाव-बोध, वस्तु और शिल्प में भी परिवर्तन हुए हैं। आधुनिक हिन्दी काव्य में यह परिवर्तन छायावाद से ही परिलक्षित होने लगा था। छायावादी कवियों ने अनुभूतियों की गहराई के साथ ही अभिव्यक्ति को भी प्रांजलता प्रदान की। तदनन्तर प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता का दौर आया। स्वाधीनता के बाद हिन्दी कविता विभिन्न आन्दोलनों के दौर से गुज़रती रही। इन सब आन्दोलनों में साठोत्तरी काव्य के नाम से अभिहित कविता अपने बेबाक चित्रण के कारण आधुनिक हिन्दी काव्य में अपनी एक अलग पहचान बनाने में पूर्णतः सफल हुई है।
साठोत्तरी कविता में धूमिल की रचनाधर्मिता एक अहम् भूमिका रखती है। इनकी कविताओं में कथ्य का ही ठोस धरातल नहीं है, अपितु शिल्प की भी एक नई भंगिमा है। कथ्य, भाषा एवं संरचना की दृष्टि से उन्होंने परम्परागत प्रतिमानों को तोड़कर नए प्रतिमानों की रचना की। उनकी कविताएँ संसद से लेकर सड़क तक बिखरी हैं। भ्रष्ट राजनीति और सामाजिक दिशाहीनता को उन्होंने व्यंग्य और वक्तव्य के माध्यम से अत्यन्त सपाट लहज़े में व्यक्त किया है।
Aahaten Aas Paas
- Author Name:
Pankaj Singh
- Book Type:

-
Description:
पंकज सिंह हैं। उनके एप्रोच से मतभेद हो सकता है : एक हद तक। लेकिन उनकी एक उत्कट आकांक्षा, कुछ यथार्थ को व्यक्त करने की, और उस यथार्थ से गुथने की—इससे इनकार नहीं किया जा सकता। यह कुछ ऐसी है जैसी कि मुक्तिबोध ने की थी अपने ज़माने में बहुत मेहनत से। उस यथार्थ को व्यक्त करने की। यथार्थ को व्यक्त करना कलाकार का बहुत ही पहला और बहुत ही बुनियादी धर्म है, और उस धर्म में वह कामयाब ही हो, यह ज़रूरी नहीं है। लेकिन ऐसी कोशिश और उस कोशिश में किसी हद तक भी कामयाब होना मेरे लिए बड़ी आदरणीय चीज़ होती है। तो उसमें विभिन्न रूप से विभिन्न दृष्टियों से जो कवि संलग्न है और उसमें अगर काव्य के स्तर पर काव्याभिव्यक्ति के स्तर पर कुछ किया है उन्होंने तो उसका आदर होना चाहिए और मैं उनका आदर करता हूँ...
—शमशेर बहादुर सिंह
(‘पूर्वग्रह’, जनवरी-अप्रैल, 1976)
Kya Koi Pankti Doobegi Khoon Mein
- Author Name:
Naresh Saxena
- Book Type:

-
Description:
चम्बल के नज़दीक स्थित शहर ग्वालियर में जनमे और बचपन तथा कैशोर्य में उसके आसपास के जंगलों में पले-बढ़े नरेश सक्सेना की कविता में इस इलाक़े के अवाम की स्वाभाविक विशेषताएँ—सरलता, सचाई, प्यार, बग़ावत और करुणा—छलछलाती हैं।
लगभग सात दशक पहले रचना-यात्रा शुरू करने के कुछ ही समय बाद नरेश सक्सेना ने कुछ अनूठे गीत भी लिखे और ग़ौरतलब है कि उनकी कोमलता, प्रवाह और मर्मस्पर्शिता को ज़रा बदले हुए विन्यास में अपनी कविताओं में भी अक्षुण्ण रखा। सुदीर्घ रचनात्मक जीवन के लिहाज़ से उन्होंने कम लिखा, मगर जो भी लिखा, वह अपने प्रभाव में अनुपम और अप्रत्याशित है। उसकी गहनता असंदिग्ध है, इसीलिए व्यापकता भी।
बाँसुरी वादन में नरेश जी की प्रवीणता के चलते उनकी सर्वश्रेष्ठ कविताओं में भी कुछ वैसी ही कशिश, मार्मिकता और सम्मोहन है। जो संगीत का सच है, वही उनकी कविता का। इस मानी में नरेश सक्सेना के सम्पूर्ण अवदान के उत्कृष्टतम को सामने लाने वाली ये शताधिक चयनित कविताएँ मनुष्य, मनुष्येतर जीव-सृष्टि और प्रकृति से वाबस्ता उनके प्यार, पीड़ा और युयुत्सा की अविस्मरणीय रचनात्मक साक्ष्य हैं।
Mere Rashk-E-Qamar
- Author Name:
Fanah Buland Shehri Shoaib Shahid
- Book Type:

- Description: फ़ना बुलन्दशहरी का मूल नाम हनीफ़ मोहम्मद था। आपका बुनियादी ताल्लुक़ उत्तर प्रदेश सूबे के बुलन्दशहर से था। आपकी पैदाइश का वक़्त मुस्तनद तौर बता पाना मुमकिन है, न ही बुलन्दशहर में आपकी पैदाइश की जगह और शिजरा। इसकी वाहिद वजह यही है कि फ़ना साहब एक सूफ़ी शायर थे। और सूफ़ी शायर अपना कलाम सिर्फ़ अपने महबूब के लिए लिखते हैं और ख़ुद को दुनिया से छुपा कर गुमनाम कर लेना उनका तरीक़ा रहा है। आपकी पैदाइश के कुछ बरस बाद ही आप हिजरत करके पाकिस्तान चले गए। शायरी का शौक़ बचपन से था। उस दौर के मशहूर शायर क़मर जलालवी के शागिर्द हो गए। आपका सूफ़ियाना ताल्लुक़ मोहम्मद शरीफ़ मियाँ क़ादरी नक़्शबंदी पीलीभीत से था और आपका आख़िरी वक़्त गुजराँवाला और लाहौर की ख़ानक़ाहों में गुज़रा। यहीं 1 नवम्बर 1986 को आपका इन्तिक़ाल हो गया।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
5 out of 5
Book