Hindi-patrakarita Ke Pratiman
Author:
Satish Kumar RoyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Media0 Ratings
Price: ₹ 720
₹
900
Available
पुस्तक हिन्दी के चौदह उन सम्पादकों पर केन्द्रित है जिन्होंने हिन्दी-पत्रकारिता को दिशाबोध दिया है, उसकी विरासत को अग्रेषित किया है और सही अर्थों में प्रतिमान के रूप में मान्य हुए हैं। ऐसा नहीं है कि यह सूची इन्हीं तक सीमित है। वस्तुतः यह एक श्रृंखला की पहली कड़ी है। ये चौदह सम्पादक बिहार के विश्वविद्यालयों के एम.ए. के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किए गए हैं इसलिए सर्वप्रथम इन्हीं को केन्द्र में रखकर पुस्तक का पहला खंड प्रस्तुत किया जा रहा है। उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को इसमें अपेक्षित सूचनाएँ मिल पायेंगी, ऐसा विश्वास है।
ISBN: 9789348229885
Pages: 228
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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नई सदी की पत्रकारिता के समक्ष विभिन्न चुनौतियाँ हैं। मिशन पत्रकारिता का स्थान पेशेवर पत्रकारिता ने लिया है। ऐसे में वही समाचार-पत्र, मीडिया हाउस और संवाददाता अपने को स्थापित कर पाएगा, जो प्रशिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक तकनीकों में दक्ष होगा। पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन के कारण प्रशिक्षण की आवश्यकता अनिवार्य हो चुकी है। वर्तमान में युवा पीढ़ी काफ़ी संख्या में पत्रकारिता का प्रशिक्षण ले रही है। यह पुस्तक पत्रकारिता के क्षेत्र में युवा समुदाय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई है।
इस पुस्तक में पत्रकारिता के स्वरूप, संचार प्रक्रिया तथा मॉडल, समाचार एवं उसके तत्त्व, तथा प्रिंट पत्रकारिता में समाचार सम्पादन, मुद्रण एवं पृष्ठ सज्जा, फ़ोटो पत्रकारिता, प्रेस सम्बन्धी क़ानून समेत पत्रकारिता के विविध आयामों को अत्यन्त सहज तरीक़े से समझाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में प्रिंट पत्रकारिता को भली-भाँति समझने के लिए पारिभाषिक शब्दावली भी दी गई है जो कि इसकी उपादेयता बढ़ाती है। यह पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता में स्नातक (बी.जे.एम.सी.), स्नातकोत्तर (एम.जे.एम.सी.) कर रहे विद्यार्थियों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध हो, ऐसा प्रयास किया गया है।
Yahan Mukhoute Bikate Hain
- Author Name:
Prabhat Shunglu
- Book Type:

- Description: Media, Thought Provoking Article
Hindi Patrakarita Samvad Aur Vimarsh
- Author Name:
Kailash Nath Pandey
- Book Type:

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Description:
कैलाश नाथ पाण्डेय की यह पुस्तक हिन्दी-पत्रकारिता के विविध आयामों—विशेषकर उसके इतिहास और विकास को जिस तरह विषय की समग्रता और विस्तार से प्रस्तुत करती है; वैसा कहीं अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। उन्होंने पत्रकारिता से जुड़े हर तथ्य और जानकारी को एक पर्यटनशील अन्वेषक और अध्येता की तरह इस प्रकार संयोजित किया है कि यह पुस्तक एक साथ ही पत्रकारिता का विश्व-कोश, शास्त्र, विज्ञान और इतिहास-ग्रन्थ बन गई है।
अपनी इस पुस्तक में लेखक ने न सिर्फ़ पत्रकारिता से सम्बन्धित तथ्यों-सत्यों, सूचनाओं और ऐतिहासिक स्मृतियों को संकलित किया है, बल्कि अपनी सरल, काव्यात्मक और सम्प्रेषणीय शैली में पत्रकारिता से जुड़े गरिष्ठ, क्लिष्ट और दुरूह ज्ञान को अत्यन्त बोधगम्य, सुपाच्य और सर्वसुलभ किया है। पाँच पर्वों एवं अनेक भागों में विभाजित यह पुस्तक पत्रकारिता के विविध रूप-प्रकारों से आरम्भ होकर उसके अस्तित्व तथा सृजन के सभी स्तरों और चरणों की विस्तृत पड़ताल करती है। हिन्दी पत्रकारिता के वर्तमान और इतिहास से लेकर पत्रकारिता के वैश्विक परिदृश्य तक; मुद्रित पत्रकारिता से लेकर मुद्रण-शिल्प-विज्ञान के तकनीकी पक्षों—अक्षर-संयोजन के शुद्धीकरण (प्रूफ़ रीडिंग), पृष्ठ-सज्जा तक; समाचार-लेखन और रचना-व्यवहार के सभी पहलुओं जैसे—प्रेषण, प्रस्तुति, वितरण और प्रबन्धन तक को लेखक ने पूरी सूक्ष्मता, सजीवता और प्रामाणिकता के साथ समेटा है।
समाचार-पत्र लेखन से सम्बन्धित पत्रकारिता की सभी विधाओं पर प्रकाश डालते हुए प्रेस-आयोग, भारतीय प्रेस-परिषद्, प्रसार भारती जैसे संगठनात्मक एवं संवैधानिक निकायों से लेकर नए-पुराने मीडिया-क़ानूनों तथा संवैधानिक प्रावधानों तक इस पुस्तक का फलक इतना अधिक समाहारी और विस्तृत है कि इसे पत्रकारिता सम्बन्धी ज्ञान का विश्व-कोश ही कहना उचित होगा। यह पुस्तक पत्रकारिता के जिज्ञासु, अध्येता एवं विद्यार्थी सभी के लिए एकल समाधान होने का दावा कर सकती है।
—राम प्रकाश कुशवाह
Anchor Reporter
- Author Name:
Punya Prasoon Vajpayee
- Book Type:

- Description: जब कोई व्यक्ति टेलीविज़न के परदे पर समाचार देख रहा होता है तो उसके ज़ेहन में दो व्यक्ति अहम हो जाते हैं—एंकर और रिपोर्टर। एंकर जो टेलीविज़न के परदे पर पहले-पहल किसी ख़बर की सूचना देता है, उसके बारे में बताता है, तो रिपोर्टर वह होता है जो घटनास्थल से यह बता रहा होता है कि घटनाक्रम किस प्रकार घटित हुआ। वास्तव में किसी महत्त्वपूर्ण ख़बर के दौरान दर्शकों के लिए यह भी महत्त्वपूर्ण नहीं होता है कि वे चैनल कौन-सा देख रहे हैं, वह महत्त्वपूर्ण ख़बर जिस भी चैनल पर आ रही होती है, दर्शकों का रिमोट उसी चैनल पर ठहर जाता है। ऐसे में किसी समाचार चैनल के लिए एंकर और रिपोर्टर बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। क्योंकि दर्शकों को चैनल से जोड़ने का काम वही करते हैं। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि एंकर और रिपोर्टर को हर परिस्थिति को सँभालने में माहिर होना चाहिए। पुण्य प्रसून वाजपेयी ‘आजतक’ के प्रमुख एंकर थे। पेशे के रूप में एंकर-रिपोर्टर का काम क्या होता है, उसकी भूमिका क्या होती है, उसका काम कितना चुनौतीपूर्ण होता है—पुण्य प्रसून जी ने इन्हीं पहलुओं को विभिन्न कोणों से इस पुस्तक में रखा है। यह पुस्तक टी.वी. पत्रकारिता सीखनेवालों के लिए तो उपयोगी है ही, उनके लिए भी बड़े काम की साबित हो सकती है जो इन पेशों की चुनौतियों को जानना-समझना चाहते हैं। यह एक ‘इनसाइडर’ की ‘इनसाइड स्टोरी’ की तरह है।
Vigyapan Aur Jansampark
- Author Name:
Mukti Nath Jha
- Book Type:

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Description:
यह पुस्तक विज्ञापन और जनसम्पर्क संचार की विधा को रेखांकित करती है। इस पुस्तक में विज्ञापन के विविध स्वरूपों की विस्तार से चर्चा की गई है। विज्ञापन को परिभाषित करते हुए इसके विविध प्रकार, माध्यमों एवं लाभ की विस्तृत विवेचना की गई है। जनसम्पर्क की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए जनसम्पर्क की विविध विधाओं पर विस्तार से चर्चा की है। कारपोरेट जनसम्पर्क की आवश्यकता और उपयोगिता की विस्तृत विवेचना इस पुस्तक को और भी उपयोगी बनाती है।
भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के पाठ्यक्रमानुसार लिखित यह पुस्तक जहाँ एक ओर पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी वहीं दूसरी ओर विज्ञापन एवं जनसम्पर्क के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए भी मार्गदर्शक के रूप में लाभप्रद होगी।
Media Aur Bazarvad
- Author Name:
Ramsharan Joshi
- Book Type:

- Description: बाज़ार नाम की संस्था आदिम समाज के लिए भी रही है, और आज के समाज के लिए भी है। इसलिए बाज़ार से बैर करके आप अपना समाज और अपना जीवन चला सकें, इसकी सम्भावना नहीं है। लेकिन जब बाज़ार मनुष्य की नियति तय करे तो इसका मतलब यह है कि अब तक जो मनुष्य का सेवक रहा है, वह मनुष्य का मालिक होना चाहिए। बाज़ार मनुष्य का बहुत अच्छा सेवक है। कोई पाँच हज़ार साल से उसकी सेवा कर रहा है। शायद उससे भी ज़्यादा वर्षों से कर रहा हो। अगर वो मनुष्य की नियति तय करेगा तो उसमें एक मूल खोट आनेवाला है, क्योंकि बाज़ार भाव से चलता है, बाज़ार मूल्य से नहीं चलता और मूल्यों के बिना किसी भी मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। मानव समाज भाव से नहीं चल सकता, मूल्य से ही चल सकता है। मानव समाज को मूल्य से चलना है। अब जो बाज़ार की शक्तियाँ दुनिया में इकट्ठा हुई हैं उनसे आप कैसे निपटेंगे? मुझे कई लोगों ने कहा कि यह तो हिन्दुस्तान है जो जाजम की तरह बिछने के लिए तैयार है, नहीं तो जहाँ-जहाँ बाज़ार गया है, वह उस देश के समाज की शर्तों पर गया है। पर हमने एक कमज़ोर देश की तरह से अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार को स्वीकारा है। इसलिए अब हमारे यहाँ जाजम की तरह बिछ जाने का लगभग कुचक्र चल रहा है!
Electronic Patrakarita
- Author Name:
Dr. Ajay Kumar Singh
- Book Type:

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Description:
सूचना क्रान्ति के इस युग में, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र जैसे रेडियो, एफएम. चैनल, टेलीविज़न, फ़ोटोग्राफ़ी तथा टेलीविज़न प्रोडक्शन के क्षेत्र में, रोज़गार के अवसर निरन्तर बढ़ते जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता के तकनीकी एवं प्रायोगिक पक्ष को समझने के लिए हिन्दी की ऐसी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं, जो भावी पत्रकारों को इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का आधुनिक एवं प्रायोगिक ज्ञान उपलब्ध करा सकें।
यह पुस्तक विशेष रूप से टेलीविज़न, रेडियो, फ़ोटोग्राफ़ी, फ़िल्म एवं इंटरनेट के क्षेत्र में क़दम रखनेवाले युवा पत्रकारों को ध्यान में रखकर लिखी गई है।
इस पुस्तक में इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता के फ़ोटोग्राफ़ी, रेडियो तथा टेलीविज़न चैनलों की कार्यप्रणाली, प्रयोग होनेवाले उपकरण, प्रोडक्शन टीम की भूमिका, स्क्रिप्ट राइटिंग, कैमरे एवं लाइटिंग का प्रयोग तथा वीडियो एडिटिंग को सरल-सहज तरीक़े से समझाया गया है। पुस्तक में इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रयोग होनेवाले शब्दों एवं उपकरणों का शब्दकोश भी दिया गया है जिससे कि टेलीविज़न, फ़ोटोग्राफ़ी तथा रेडियो के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त करनेवाले छात्रों के साथ जनमानस भी इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता की दुनिया को भली-भाँति समझ सकें।
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