Nadi Phir Bah Chali

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हिमांशु श्रीवास्तव हिन्दी उपन्यास साहित्य में लगभग वही स्थान रखते हैं जो फणीश्वरनाथ रेणु और प्रेमचन्द का है। ग्रामीण यथार्थ को जानने, उसकी बारीकियाँ समझने वाले और आँचलिक शब्दों से हिन्दी भाषा को समृद्ध करने वाले यथार्थवादी कथाकार। लेकिन उन्हें वह चर्चा हासिल नहीं हो पाई जिसके वे पात्र थे। यही कारण रहा कि उनके वे उपन्यास भी जो हिन्दी के लिए गौरव का विषय हैं लम्बे समय तक अनुपलब्ध रहे। ‘नदी फिर बह चली’ भी उनमें से एक है। ‘नदी फिर बह चली’ के केन्द्र में परबतिया, उसका पति जगलाल और वह पूरा ग्रामीण समाज है जो धीरे-धीरे बदल रहा है। परब‌तिया और जगलाल दम्पति की जीवन-यात्रा के बहाने यह उपन्यास पारिवारिक सम्बन्धों, ग्राम-समाज के रीति-रिवाजों, अन्धविश्वासों, ऊँची जातियों के दबदबे, किसान और मजदूरों के कर्जों में बँधे जीवन आदि का बेहद ठहराव के साथ विस्तृत वर्णन करता है। हिमांशु श्रीवास्तव की असली ताकत उनकी विवरणात्मकता में है। जीवन के एक-एक पहलू, पात्रों की मन:स्थिति, और प‌रिवेश के चित्रण के लिए जैसे उनके पास अकूत शब्द-भंडार है। मुहावरों की, कहावतों की असीम सम्पदा भी। उनका गद्य अत्यन्त परिश्रम के साथ यह प्रयास करता है कि कथा का प्रत्येक दृश्य पाठक की स्मृति का स्थायी हिस्सा हो जाए और समय-विशेष की सामाजिक वास्तविकता का प्रमा‌‌णिक दस्तावेज भी।

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ISBN
9789377379797
Pages
368
Avg Reading Time
12 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

हिमांशु श्रीवास्तव हिन्दी उपन्यास साहित्य में लगभग वही स्थान रखते हैं जो फणीश्वरनाथ रेणु और प्रेमचन्द का है। ग्रामीण यथार्थ को जानने, उसकी बारीकियाँ समझने वाले और आँचलिक शब्दों से हिन्दी भाषा को समृद्ध करने वाले यथार्थवादी कथाकार। लेकिन उन्हें वह चर्चा हासिल नहीं हो पाई जिसके वे पात्र थे। यही कारण रहा कि उनके वे उपन्यास भी जो हिन्दी के लिए गौरव का विषय हैं लम्बे समय तक अनुपलब्ध रहे। ‘नदी फिर बह चली’ भी उनमें से एक है।

‘नदी फिर बह चली’ के केन्द्र में परबतिया, उसका पति जगलाल और वह पूरा ग्रामीण समाज है जो धीरे-धीरे बदल रहा है। परब‌तिया और जगलाल दम्पति की जीवन-यात्रा के बहाने यह उपन्यास पारिवारिक सम्बन्धों, ग्राम-समाज के रीति-रिवाजों, अन्धविश्वासों, ऊँची जातियों के दबदबे, किसान और मजदूरों के कर्जों में बँधे जीवन आदि का बेहद ठहराव के साथ विस्तृत वर्णन करता है।

हिमांशु श्रीवास्तव की असली ताकत उनकी विवरणात्मकता में है। जीवन के एक-एक पहलू, पात्रों की मन:स्थिति, और प‌रिवेश के चित्रण के लिए जैसे उनके पास अकूत शब्द-भंडार है। मुहावरों की, कहावतों की असीम सम्पदा भी। उनका गद्य अत्यन्त परिश्रम के साथ यह प्रयास करता है कि कथा का प्रत्येक दृश्य पाठक की स्मृति का स्थायी हिस्सा हो जाए और समय-विशेष की सामाजिक वास्तविकता का प्रमा‌‌णिक दस्तावेज भी।

Book Details

  • ISBN
    9789377379797
  • Pages
    368
  • Avg Reading Time
    12 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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