Ek The Asu

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‘एक थे असु’ हिन्दी व्यंग्य के सिद्ध हस्ताक्षर ज्ञान चतुर्वेदी की विरल स्मृतियों का आख्यान है जिसे अपनी सघन विवरणात्मकता से उन्होंने लगभग औपन्यासिक वितान में ढाल दिया है। कहीं आत्मकथा तो कहीं जीवनी का भान कराता यह पाठ जिस एक तार को शुरू से आख़िर तक साधकर चलता है वह है विलक्षण प्रतिभाओं की आत्मघाती ग्रंथि। ख़ुद को मिटा देने की एक अबूझ ज़िद जो जीनियस क़िस्म की क्रिएटिव शख़्सियतों को कभी-कभी जकड़ लेती है। किताब का आरम्भ ज्ञान चतुर्वेदी की अपनी जीवन-कथा से होता है, जिसमें हम उनके शुरुआती संघर्षों से परिचित होते हैं, और जानते हैं कि किस तरह वे व्यंग्यकार हुए और साथ ही साथ डॉक्टर भी। इसके बाद जो पुस्तक है, दरअसल, असली कथाएँ वहीं हैं। इसमें पहले आता है कॉलेज में उनके एक साल सीनियर अंजनी चौहान का जीवन, जो एक समय में हिन्दी साहित्य के आकाश में धूमकेतु की तरह प्र​कट हुए, अपने व्यंग्य-लेखन से सबको चौंका दिया, लेकिन फिर जैसे ख़ुद के ही ख़िलाफ़ एक जंग में उतर गए। उनके बारे में हम जितना पढ़ते है, उतना ही चकित होते जाते हैं कि ऐसा कोई इनसान कैसे हो सकता है। फिर हमें स्वदेsश दीपक मिलते हैं, जिनकी रचनात्मकता से भी हम वाक़िफ़ हैं, और जीवन की त्रासदी से भी। इससे अगला और अन्तिम अध्याय कथाकार-चित्रकार प्रभु जोशी पर केन्द्रित है। करुणा, गहरी पीड़ा, हास्य और व्यंग्य के आरोह-अवरोह में उतराती एक नितान्त पठनीय कृति!

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ISBN
9789377370626
Pages
344
Avg Reading Time
11 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

‘एक थे असु’ हिन्दी व्यंग्य के सिद्ध हस्ताक्षर ज्ञान चतुर्वेदी की विरल स्मृतियों का आख्यान है जिसे अपनी सघन विवरणात्मकता से उन्होंने लगभग औपन्यासिक वितान में ढाल दिया है। कहीं आत्मकथा तो कहीं जीवनी का भान कराता यह पाठ जिस एक तार को शुरू से आख़िर तक साधकर चलता है वह है विलक्षण प्रतिभाओं की आत्मघाती ग्रंथि। ख़ुद को मिटा देने की एक अबूझ ज़िद जो जीनियस क़िस्म की क्रिएटिव शख़्सियतों को कभी-कभी जकड़ लेती है।
किताब का आरम्भ ज्ञान चतुर्वेदी की अपनी जीवन-कथा से होता है, जिसमें हम उनके शुरुआती संघर्षों से परिचित होते हैं, और जानते हैं कि किस तरह वे व्यंग्यकार हुए और साथ ही साथ डॉक्टर भी। इसके बाद जो पुस्तक है, दरअसल, असली कथाएँ वहीं हैं। इसमें पहले आता है कॉलेज में उनके एक साल सीनियर अंजनी चौहान का जीवन, जो एक समय में हिन्दी साहित्य के आकाश में धूमकेतु की तरह प्र​कट हुए, अपने व्यंग्य-लेखन से सबको चौंका दिया, लेकिन फिर जैसे ख़ुद के ही ख़िलाफ़ एक जंग में उतर गए। उनके बारे में हम जितना पढ़ते है, उतना ही चकित होते जाते हैं कि ऐसा कोई इनसान कैसे हो सकता है।
फिर हमें स्वदेsश दीपक मिलते हैं, जिनकी रचनात्मकता से भी हम वाक़िफ़ हैं, और जीवन की त्रासदी से भी। इससे अगला और अन्तिम अध्याय कथाकार-चित्रकार प्रभु जोशी पर केन्द्रित है।
करुणा, गहरी पीड़ा, हास्य और व्यंग्य के आरोह-अवरोह में उतराती एक नितान्त पठनीय कृति!

Book Details

  • ISBN
    9789377370626
  • Pages
    344
  • Avg Reading Time
    11 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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