Baramasi
Author:
Gyan ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Available
ज्ञान चतुर्वेदी ने परसाई, शरद जोशी, रवीन्द्रनाथ त्यागी और श्रीलाल शुक्ल की व्यंग्य-परम्परा को न केवल आगे बढ़ाया है, वरन् कई अर्थों में उसे और समृद्ध किया है। विषय-वैभिन्नय तथा भाषा और शैलीगत प्रयोगों के लिए वे हिन्दी व्यंग्य में ‘हमेशा ही कुछ नया करने को आतुर’ लेखक के रूप में विख्यात हैं। लकीर पीटने के वे सख़्त खिलाफ हैं–चाहे वह स्वयं उनकी अपनी खींची हुई ही क्यों न हो !<br />‘बारामासी’ बुन्देलखंड के एक छोटे से कस्बे के, एक छोटे से आँगन में पल रहे छोटे-छोटे स्वप्नों की कथा है–वे स्वप्न, जो टूटने के लिए ही देखे जाते हैं और टूटने के बाद तथा बावजूद देखे जाते हैं। स्वप्न देखने की अजीब उत्कंठा तथा उन्हें साकार करने के प्रति धुँधली सोच और फिर-फिर उन्हीं स्वप्नों को देखते जाने का हठ–कथा न केवल इनके आसपास घूमती हुई मानवीय सम्बन्धों, पारम्परिक शादी-ब्याह की रस्मों, सडक़छाप कस्बाई प्यार, भारतीय कस्बों की शिक्षा-पद्धति, बेरोजगारी, माँ-बच्चों के बीच के स्नेहिल पल तथा भारतीय मध्यवर्गीय परिवार के जीवन-व्यापार को उसके सम्पूर्ण कलेवर में उसकी समस्त विडम्बनाओं-विसंगतियों के साथ पकड़ती है, साथ ही बुन्देलखंडी परिवेश के श्वास-श्वास में स्पन्दित होते सहज हास्य-व्यंग्य को भी समेटती चलती है।
ISBN: 9788126708673
Pages: 248
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Raag Pahadi
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: ग पहाड़ी' का देशकाल, कथा-संसार उन्नीसवीं सदी के मध्य से लेकर बीसवीं सदी से पहले का कुमाऊँ है। कहानी शुरू होती है लाल-काले कपड़े पहने ताल के चक्कर काटती छह रहस्यमय महिलाओं की छवि से जो किसी भयंकर दुर्भाग्य का पूर्वाभास कराती हैं। इन प्रेतात्माओं ने यह तय कर रखा है कि वह नैनीताल के पवित्र ताल को फिरंगी अंग्रेज़ों के प्रदूषण से मुक्त कराने की चेतावनी दे रही हैं। इसी नैनीताल में अनाथ तिलोत्तमा उप्रेती नामक बच्ची बड़ी हो रही है। जिसके चाचा को 1857 वाली आज़ादी की लड़ाई में एक बाग़ी के रूप में फाँसी पर लटका दिया गया था। कथानक तिलोत्तमा के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ-साथ देशी-विदेशी पात्रों के इर्द-गिर्द भी घूमता है जिसमें अमेरिकी चित्रकार विलियम डैम्पस्टर भी शामिल है जो भारत की तलाश करने निकला है। तिलोत्तमा गवाह है उस बदलाव की जो कभी दबे पाँव तो कभी अचानक नाटकीय ढंग से अल्मोड़ा समेत दुर्गम क़स्बों, छावनियों और बस्तियों को बदल रहा है, यानी एक तरह से पूरे भारत को प्रभावित कर रहा है। परम्परा और आधुनिकता का टकराव और इससे प्रभावित कभी लाचार तो कभी कर्मठ पात्रों की ज़िन्दगियों का चित्रण बहुत मर्मस्पर्शी ढंग से इस उपन्यास में किया गया है जिसका स्वरूप 'राग पहाड़ी' के स्वरों जैसा है। चित्रकारी के रंग और संगीत के स्वर एक अद्भुत संसार की रचना करते हैं जहाँ मिथक-पौराणिक, ऐतिहासिक-वास्तविक और काल्पनिक तथा फंतासी में अन्तर करना असम्भव हो जाता है। यह कहानी है शाश्वत प्रेम की, मिलन और विछोह की, अदम्य जिजीविषा क
Agnisnan Evam Anya Upanyas
- Author Name:
Rajkamal Chaudhary
- Book Type:

- Description: राजकमल चौधरी की लेखनी जीवन के सांगोपांग चित्रण, जीवन जीनेवालों के समाज और प्रकृति से सम्बन्धित सन्दर्भों के साथ-साथ चलती है। नारी समलैंगिकता, यौन-विकृति, फ़िल्म-कल्चर, महानगरों के निम्नवर्गीय समुदाय आदि विषयों को राजकमल ने अपने उपन्यास लेखन का मूल केन्द्र बनाया। हिन्दी में लिखे इनके लगभग सभी उपन्यास इन्हीं विषयों पर आधारित हैं। निम्न मध्यवर्ग से उच्च मध्यवर्ग के बीच के इनके सारे पात्र अपनी आवश्यकताओं की अभिलाषा एवं उनकी पूर्ति हेतु घनघोर समस्याओं, विवशताओं से आक्रान्त दिखते हैं। कतरा-भर सुख-सुविधा के लिए, अपनी अस्मिता बचा लेने के लिए जहाँ व्यक्ति को घोर संघर्ष करना पड़े, वहीं से राजकमल का हर उपन्यास शुरू होता है। इस संकलन में राजकमल चौधरी के पाँच उपन्यास संग्रहीत किए गए हैं—‘अग्निस्नान’, ‘शहर था शहर नहीं था’, ‘देहगाथा’, ‘बीस रानियों के बाइस्कोप’ और ‘एक अनार : एक बीमार’। सभी उपन्यास बीती सदी के पाँचवें दशक से आई शिल्पगत और कथ्यगत नवीनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके उपन्यासों में शिल्प एवं कथ्य प्रयोग अनूठे और एक सीमा तक चौंकानेवाले हैं। राजकमल की रचनाओं पर अक्सर अश्लीलता का आरोप लगता रहा है लेकिन जब स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की चर्चा चिकित्साशास्त्र के पन्नों पर अश्लील नहीं है, व्यक्ति के दैनिक क्रियाकलाप में अश्लील नहीं है, तब वह साहित्य में आकर कैसे अश्लील हो जाएगी? यदि मुट्ठी-भर लोग पूरे देश के आम नागरिक की सुख-सुविधा अपने फ़्लैट में क़ैद कर लेते हैं, अभावग्रस्त और विवश नारियों को थोड़े से अर्थ के बल पर अपने बिस्तर पर खिलौना बनाकर इसे वैध और उचित ठहराते हैं और यह आचरण अश्लील नहीं है तो फिर इसकी चर्चा कैसे अश्लील है? जनजीवन में घटती किसी भी घटना के चित्रण में राजकमल ने अश्लीलता खोजने की इच्छा नहीं की, बल्कि अश्लीलता खोजनेवालों को यहाँ तक हिदायत दे डाली कि साहित्य में अश्लीलता आरोपित करनेवाले पुलिस मनोवृत्ति के लोग उनकी किताब न पढ़ें।
Mahuacharit
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास ‘महुआचरित’ जीवन के अपार अरण्य में भटकती इच्छाओं का आख्यान है। मध्यवर्गीय समाज की सच्चाइयों को लेखक ने विशिष्ट कथा-रस के साथ प्रकट किया है। यह उपन्यास जिस शिल्प में अभिव्यक्त हुआ है, वह कथा-संसार में एक नया प्रस्थान निर्मित करता है। छोटे-बड़े किंचित् असमाप्त अपूर्ण वाक्य संकेतों की ओर उन्मुख विवरण और बहुअर्थी बिम्ब इस रचना को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। महुआ की सहेली है उसके मकान की छत जहाँ वह खुलती, खिलती और खेलती है। यह कल्पना ही अपने आपमें अनूठी और व्यंजक है।
कहना न होगा कि ‘महुआचरित’ को ‘वृत्तान्त का अन्त’ करती कथा-रचना के रूप में रेखांकित किया जा सकता है।
अस्सी साल के स्वतंत्रता सेनानी पिता की पुत्री महुआ की देहासक्ति से विवाह तक की यात्रा और फिर उसमें जागता अस्मिता-बोध—इस कथा को लेखक ने समुचित सामाजिक सन्दर्भों के साथ प्रस्तुत किया है। स्त्री-विमर्श की अनुगूँज के बावजूद यह प्रश्न आकार लेता है, ‘ऐसा क्या है देह में कि उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता/लेकिन मन का सारा रिश्ता-नाता तहस-नहस हो जाता है।’
सघन संवेदना और सर्वथा नवीन संरचना से समृद्ध ‘महुआचरित’ उपन्यास निश्चित रूप से पाठकों की आत्मीयता अर्जित करेगा।
Nishkasan
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
...'दाँये देखना ठीक नहीं। 'गुरू जी ने कहा।'
और अगर दाँये गड्ढा-गुड्ढी हो तो गुरू जी?'
तो ज़्यादा बाँयें झुक जाओ।' गुरू जी बोले।
'और अगर उधर भी हो तो?'
'तो आगे-पीछे हो जाओ।'
'और आगे-पीछे भी हो तो?'
'तो सवाल यह होगा कि तुम उस सुरक्षित, विचारहीन जगह पर पहुँचे ही कैसे?' गुरू जी ने कहा।
'यही तो मेरी भी समझ में नहीं आता गुरू जी!'
...'मान लीजिये आपकी बेटी है तब? मुफ़्ती की बेटी थी तब? तब तो सारा प्रशासन सिर के बल खड़ा हो गया था! अपहरण और आपूर्ति में ज़्यादा फ़र्क नहीं है पंडित जी! दोनों में अनिच्छित शोषण है। दोनों में हिंसा है। जबर्दस्त शारीरिक और मानसिक अपमान है। दोनों में बल-प्रयोग है, सिर्फ़ उसके तरीके में अन्तर है। दोनों में फिरौती है–एक में प्रत्यक्ष, दूसरे में परोक्ष। आप क्या समझते हैं, जो देवी जी वहाँ प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं और इस कुकर्म में लिप्त हैं उनका कोई निहित स्वार्थ नहीं होगा? सिर्फ़ एक घिनौने मज़े के लिए वे ऐसा करती होंगी?...लेकिन नहीं, किसी खटिक की बेटी होने का क्या मतलब? उसे नरक में डालो और हँसो। या उसे आपकी तरह 'अन्य मामलों' के घूरे पर डालकर रफ़ा-दफ़ा कर दो। 'महामहिम खाँसने लगे।'
...कटुए, क्रिश्चियन और कम्यूनिस्ट, तीनों देशद्रोही हैं–अन्तत: यह उनका और उनकी पार्टी का खुला-छिपा राजनैतिक नारा है।
...'यह कम्यूनिस्टों की साजिश है सर! 'कुलपति ने कहा। महामहिम ने पीछे खड़े अपने प्रमुख सचिव को देखा, जैसे कह रहे हों, उस दिन लॉन में टहलते हुए मैंने आपको बेकार ही डाँटा था।
'ये फ़ाइल है सर।' कुलपति ने फ़ाइल प्रमुख सचिव की ओर बढ़ायी। 'नहीं, उसकी अब कोई ज़रूरत नहीं।' महामहिम ने हाथ के इशारे से मना किया।
Anadi Anant
- Author Name:
Madhu Bhaduri
- Book Type:

-
Description:
'कालचक्र' और 'ज्वार' के बाद मधु भादुड़ी का यह तीसरा उपन्यास है। भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत और प्राय: विदेश में ही रहनेवाला कोई साहित्यकार तेजी से बदल रहे भारतीय यथार्थ पर क्या इतनी पैनी नजर रख सकता है कि एक औपन्यासिक रचना के साथ पूरा न्याय कर सके ? मधु भादुड़ी ने अपने रचना कर्म से साबित किया है कि वे ऐसा कर सकती हैं। बगैर किसी दार्शनिक अतिरेक के, रोजमर्रे की ब्यौरेवार जिंदगी से गुजरते हुए वे मानवीय नियति के प्रश्नों से टकराती हैं और इसी क्रम में नियति निर्धारित करनेवाले कारकों पर रोशनी भी डालती हैं।
'अनादि अनंत' कलेवर की दृष्टि से एक छोटा उपन्यास है लेकिन इसमें एक भारतीय स्त्री के उत्पीड़ित से उत्पीड़क बनने और अपने इस परिवर्तन के जरिए अपनी विडंबना ही उजागर करने की एक बड़ी कथा कही गई है। जो साहित्यिक रूढ़ियाँ भारतीय स्त्री की सामाजिक हैसियत को लेकर सुदूर अतीत से बनी चली आ रही हैं और जो नई रूढ़ियाँ इस विषय में हाल के दौर में बनी हैं, दोनों पर ही यह उपन्यास कड़ा आघात पहुँचानेवाला साबित होगा, ऐसा हमारा विश्वास है ।
साथ की तीनों कहानियाँ, 'मुनिया', 'टेस्टर्ज टी' और 'अस्पताल' मधु भादुड़ी की किस्सागोई की बानगी हैं। वैसी ही सघन घटनात्मकता और क्लाइमेक्स की स्थितियाँ इनमें मौजूद हैं, जैसी आपको शास्त्रीय कहानियों से अपेक्षित होती हैं। एक लेखिका के बतौर मधु भादुड़ी की यह तीसरी प्रस्तुति आपको रोमांचित करेगी और हिंदी लेखक के विश्वव्यापी होते दायरे के प्रति आश्वस्त भी।
Ahasas-E-Ishtiyara
- Author Name:
Tanuj Kumar
- Book Type:

- Description: इस काव्य-संकलन के माध्यम से रचनाकार तनुज कुमार ने जीवन के भिन्न-भिन्न आयामों को शायरी, गजलों एवं कविताओं द्वारा अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। रचनाकार ने अहसासों एवं हालातों को कलम के जरिए मूर्त रूप दिया है, ताकि इसे पढक़र आम जनमानस अपने अंदर छिपी हुई भावनाओं को स्वत: अनुभव कर सके। रचनाकार ने भाषाई सीमाओं को लाँघते हुए हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी एवं अंग्रेजी के शब्दों का न्यायोचित उपयोग करते हुए अपनी रचनाओं को प्रभावशाली एवं दिल को छूने वाली बनाया है। इस कविता-संग्रह के माध्यम से रचनाकार ने अपने निजी अनुभवों को सर्वमान्य बनाने का प्रयास किया है। पुस्तक ‘अहसास-ए-इश्तियारा’—जैसा नाम से विदित है—में रचनाकार ने इनसानी अहसासों को रूपक के माध्यम से रेखांकित किया है, जिसमें जीवन के कटु अनुभवों, सामाजिक व्यवस्थाओं एवं प्रेमानुकूल भावनाओं का यथासंभव चित्रण किया है। इस पुस्तक की कई रचनाएँ एक तरफ जहाँ हमें भाव-विभोर करती हैं, वहीं दूसरी तरफ आत्मचिंतन को भी विवश कर देती हैं। सुधी पाठकगण जब लेखक की रचनाओं का पठन करेंगे तो निश्चित तौर पर कोई अपने बिछड़े प्रेम को याद करेगा तो कोई अपने साथ हुए अन्याय को याद करेगा तो किसी के अंदर नई ऊर्जा का प्रादुर्भाव होगा।
Kissa Pritam Pandey Ka
- Author Name:
Dhirendra Verma
- Book Type:

-
Description:
‘क़िस्सा प्रीतम पांडे का’ धीरेन्द्र वर्मा का एक बहुचर्चित उपन्यास है। विगत सदी में प्रकाशित यह व्यंग्यात्मक कृति अपने समय, समाज की विसंगतियों एवं आधुनिक जीवन में घुस आई स्वार्थपरता का यथार्थ चित्रण करती है। राजनैतिक, सामाजिक, पारिवारिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में व्याप्त अवसरवादिता, अन्धप्रतियोगिता और ऊँचा दिखने की होड़ पर लेखक ने करारी चोट की है।
इस उपन्यास का कथानायक प्रीतम पांडे मानवीय मूल्यों—अर्थात् निष्ठा, परिश्रम, ईमानदारी आदि—के स्थान पर छल, कपट, हरामख़ोरी, धूर्तता जैसे नए जीवन-मूल्यों के बल पर न केवल सफल है, अपितु एकमात्र विजेता भी है। आधुनिकता के नाम पर सारहीन कला की मुक्तकंठ से प्रशंसा पुरस्कारवादी संस्कृति का भंडाफोड़ करती है। यही कारण है कि प्रीतम पांडे आँख मीचकर बनाई गई पेंटिंग्स को मॉडर्न आर्ट के नाम से प्रदर्शित करके सर्वाधिक सम्मानित आर्टिस्ट का ख़िताब भी हासिल कर लेता है। वस्तुत: तीखी व्यंग्यात्मक शैली और सरल-संक्षिप्त संवादों द्वारा धीरेन्द्र वर्मा की यह कृति सफलता के आधुनिक सूत्रों की बखिया उधेड़ने में कहीं कोई चूक नहीं करती है।
अपने प्रवाह में बहा ले जानेवाली भाषा इस उपन्यास की बहुत सारी विशेषताओं में से एक है जिसका एक अलग ही आकर्षण है। निस्सन्देह, अपनी ज़मीन पर जीवन्तता में एक विलक्षण कृति है ‘क़िस्सा प्रीतम पांडे का’।
Untisvin Dhara Ka Aropi
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

- Description: बंगला की विख्यात लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का यह उपन्यास अन्तर्विरोधी कर्तव्यों के आपसी द्वन्द्व और समाज के निचले तबक़े की दारुण जीवन-स्थितियों की कथा है। उन्तीसवीं धारा का अभिप्राय क़ानून के उस प्रावधान से है जो किसी अपराधी को अपनी सुरक्षा में ले जा रहे पुलिसकर्मी पर तब लागू होता है, जब अपराधी उससे बचकर भाग जाता है। इस उपन्यास का नायक अपने अपराधी को भाग जाने की स्वयं छूट देता है, और अपने आपको क़ानून का शिकार बना लेता है। यह अपराधी वही व्यक्ति था जिसने उसे सदियों से दलित-पीड़ित भूमि से उठाकर अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया, आदमी की पहचान दी, लेकिन वह ख़ुद अपने उसी रास्ते पर चलता रहा जिसे आख़िरकार क़ानून और सत्ता के निशाने पर आना था। समाज की तलछट में पलती आग और उद्वेलन का विश्लेषण करती महाश्वेता जी की एक और सशक्त रचना।
Kunto
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description: भीष्म साहनी का यह उपन्यास ऐसे कालखंड की कहानी कहता है जब लगने लगा था कि हम इतिहास के किसी निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं, जब करवटें लेती ज़िन्दगी एक दिशा विशेष की ओर बढ़ती जान पड़ने लगी थी। आपसी रिश्ते, सामाजिक सरोकार, घटना-प्रवाह के उतार-चढ़ाव उपन्यास के विस्तृत फ़लक पर उसी कालखंड के जीवन का चित्र प्रस्तुत करते हैं। केन्द्र में जयदेव-कुंतो-सुषमा-गिरीश के आपसी सन्बन्ध हैं—अपनी उत्कट भावनाओं और आशाओं-अपेक्षाओं को लिए हुए। लेकिन कुंतो-जयदेव और सुषमा-गिरीश के अन्तर सम्बन्धों के आस-पास जीवन के अनेक अन्य प्रसंग और पात्र उभरकर आते हैं। इनमें हैं प्रोफ़ेस्साब जो एक सन्तुलित जीवन को आदर्श मानते हैं और इसी ‘सुनहरी मध्यम मार्ग’ के अनुरूप जीवन को ढालने की सीख देते हैं; हीरालाल है जो मनादी करके अपनी जीविका कमाता है, पर उत्कट भावनाओं से उद्वेलित होकर मात्र मनादी करने पर ही संतुष्ट नहीं रह पाता; हीरालाल की विधवा माँ और युवा घरवाली हैं; सात वर्ष के बाद विदेश से लौटा धनराज और उसकी पत्नी हैं; सहदेव है। ऐसे अनेक पात्र उपन्यास के फ़लक पर अपनी भूमिका निभाते हुए, अपने भाग्य की कहानी कहते हुए प्रकट और लुप्त होते हैं। और रिश्तों और घटनाओं का यह ताना-बाना उन देशव्यापी लहरों और आन्दोलनों की पृष्ठभूमि के सामने होता है, जब लगता था कि हमारा देश इतिहास के किसी मोड़ पर खड़ा है।
Ek Gandharv Ka Duswapna
- Author Name:
Haricharan Prakash
- Book Type:

-
Description:
अक्सर देखा गया है कि संगीत, कला और साहित्य से जुड़े लोग अपनी एक निजी और आन्तरिक दुनिया में रमे रहते हैं। वे बाहरी दुनिया की बड़ी-से-बड़ी घटनाओं को भी निरपेक्ष भाव से लेते हैं। उनके भीतरी संसार में बाहर के घटनाचक्र का, यथार्थ का प्रवेश कुछ विचित्र क़िस्म के ऊहापोह और उथल-पुथल पैदा करता है।
उपन्यास का नायक भवनाथ ऐसा ही एक संगीतज्ञ है—बजाने-गाने में मस्त। चारों ओर की चीख़-पुकार में उसे खोए हुए सुरों का ख़याल आता है। वह दिव्यास्त्रों की तरह दिव्यरागों की कल्पना करता है। गन्धर्व कौन-सा सुर जगाते होंगे, कौन-सा राग मूर्त करते होंगे, हमसे कहीं ऊपर उनका सुर होगा—ऐसा सोचता रहता है। संगीत की खोई हुई दुनिया के झिलमिले सपने आते और चले जाते।
गन्धर्व के बहाने हरी चरन प्रकाश द्वारा रचा गया एक बेहद मार्मिक और रोचक उपन्यास है—‘एक गन्धर्व का दुःस्वप्न’।
स्वतंत्रता-प्राप्ति से लेकर आज तक के सामाजिक-राजनीतिक घटनाचक्रों को इस उपन्यास में बड़ी बेबाकी से रेखांकित किया गया है। चाहे वह महात्मा गांधी की हत्या हो या फिर बाबरी मस्जिद के विध्वंस से उपजे दंगे-फ़साद, वह मंडल-कमंडल की राजनीति हो या फिर जाति-धर्म की—देश की सम्प्रभुता को ख़तरे में डालनेवाले तत्त्वों को बड़ी संजीदगी से बेनक़ाब किया गया है इस उपन्यास में।
Tajmahal Ke Ansu
- Author Name:
Sunil Vikram Singh
- Book Type:

-
Description:
ताजमहल के आँसू प्रेम का मार्मिक आख्यान है। उपन्यास की कथा दो स्तरों पर चलती है। एक स्तर पर है पूर्णेन्दु शेखर और मधुरिमा चटर्जी की प्रेम कहानी और दूसरा स्तर है पूर्णेन्दु शेखर, शेखर द्वारा रचित उपन्यास ‘ताजमहल’ के किरदारों का संसार। उपन्यास की कहानी दोनों स्तरों पर समानान्तर चलती है और पाठकों को कभी मुगल काल में ले जाती है तो कभी वर्तमान समय से साक्षात्कार कराती है। अतीत और वर्तमान के विस्तृत कैनवास पर रचित इस उपन्यास में पाठकों को बाँधे रखने की अद्भुत क्षमता है। इस लिहाज से यह उपन्यास पठनीयता को सुरक्षित रखते हुए शिल्पगत प्रयोग का अनूठा उदाहरण है।
अतीत से वर्तमान और इतिहास से कल्पना के बीच आवाजाही करता यह उपन्यास गहरे सामाजिक सरोकार और जनप्रतिबद्धता का भी परिचायक है। ताजमहल का डिजाइन बनाने वाले उस्ताद ईसा और शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा की प्रेम कहानी को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि इसमें एक कलाकार का अन्तर्द्वन्द्व और उसकी पीड़ा भी अभिव्यक्त हो जाती है। प्रेम-कथा के आवरण में सामाजिक यथार्थ को उजागर करने वाला यह उपन्यास निश्चय ही पाठकों को पसन्द आयेगा।
—डॉ. दिनेश कुमार
Trishul
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

-
Description:
‘त्रिशूल’ वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति का ऐसा उपन्यास है जो उनकी कहानियों की लीक से हटकर एक नए दृष्टिबोध और तेवर के साथ सामने आता है। साम्प्रदायिकता और जातिवाद हमारे समाज में अरसे से जड़ जमाए बैठे हैं पर इनकी आँच पर राजनीति की रोटी सेंकने की होड़ के चलते इनके ज़हर और आक्रामकता में इधर चिन्ताजनक वृद्धि हुई है। फलस्वरूप, आज समाज में भयानक असुरक्षा, अविश्वास और वैर-भाव पनप रहा है। धर्म, जाति और सम्प्रदाय के ठेकेदार आदमी और आदमी के बीच की खाई को निरन्तर चौड़ी करते जा रहे हैं।
‘त्रिशूल’ न केवल मन्दिर-मंडल की बल्कि आज के समाज में व्याप्त उथल-पुथल और टूटन की कहानी है। देशव्यापी उथल-पुथल को कथ्य बनाकर लेखक जातिवाद के विरूप और साम्प्रदायिकता की साज़िश को बेबाकी और निर्ममता से बेनक़ाब करता है। ओछे हिन्दूवाद को ललकारता है।
त्रिशूल को प्रशंसा के फूल ही नहीं, विरोध के पत्थर भी कम नहीं मिले। इसे जातियुद्ध भड़काने और आग लगानेवाली रचना कहा गया। इस पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए पैम्फ़लेटों और सभाओं द्वारा लम्बा निन्दा अभियान चलाया गया।
यह उपन्यास इस तथ्य को भी स्पष्टता से इंगित करता है कि प्रतिगामी शक्तियों का मुँहतोड़ जवाब शोषण और उत्पीड़न झेल रहे दबे-कुचले ग़रीबजन ही दे सकते हैं, दे रहे हैं।
उपन्यास के पात्र, चाहे वह पाले हो, महमूद हो, शास्त्री जी हों, चौकीदार या मिसिराइन हों, यहाँ तक कि गाय, बछड़ा या कुत्ता झबुआ हो, पाठक के दिल में गहराई तक उतर जाते हैं।
भारतीय समाज के अन्तर्विरोधों को उजागर करता एक स्मरणीय-संग्रहणीय उपन्यास।
Kajar Ki Kothari
- Author Name:
Devakinandan Khatri
- Book Type:

-
Description:
‘काजर की कोठरी ‘चन्द्रकान्ता’ और ‘चन्द्रकान्ता सन्तति’—जैसी कालजयी उपन्यासमाला के महान लेखक बाबू देवकीनन्दन खत्री का एक और महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। दूसरे शब्दों में, एक बड़े ज़मींदार लालसिंह की अकूत दौलत को हड़पने की साज़िश और साथ ही उसे निष्फल करने के प्रयासों की अत्यन्त दिलचस्प दास्तान।
लालसिंह ने अपनी तमाम दौलत को एक सशर्त वसीयतनामे के द्वारा अपनी इकलौती बेटी सरला के नाम कर दिया है। यही कारण है कि शादी के ऐन वक़्त लालसिंह के दुष्ट भतीजे सरला को ही उड़ा ले जाते हैं और उसे क़ैद कर लेते हैं। साथ ही वे सरला के मंगेतर हरनन्दन बाबू के चरित्र-हनन की भी कोशिश में लग जाते हैं, और इनकी उन तमाम साज़िशों में शरीक है बांदी नामक एक अद्भुत वेश्या। लेकिन उसका मुक़ाबला करती है एक और ‘वेश्या’ सुलतानी। वास्तव में यह समूचा घटनाक्रम अनेक विचित्रताओं से भरा होकर भी अत्यन्त वास्तविक है, जिसके पीछे लेखक की एक सुसंगत तार्किक दृष्टि है।
इस रचना के माध्यम से जहाँ लेखक ने धनपतियों के बीच वेश्याओं की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाया है, वहीं पूँजी के बुनियादी चरित्र—उसकी मानवता-विरोधी भूमिका—को भी उजागर किया है।
Bhartiya Upanyas Kathasaar : Vol. 1 -2
- Author Name:
Prabhakar Machve
- Book Type:

-
Description:
भारतीय वाङ्मय और साहित्य विविध भाषाओं में रचित, लिखित है। संस्कृत को छोड़ अन्य सभी भारतीय भाषाओं में उपन्यास विधा नई है। प्रारम्भ से अब तक प्रत्येक भाषा में सैकड़ों उपन्यास प्रकाशित हुए हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तर-काल से भारतीय समाज-कल्याण की साक्षिणी सामाजिक घटनाओं, चरित्र और समस्याओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत करनेवाले इन औपन्यासिक कथानकों पर एक बार नज़र डालते ही पता चलता है कि ऊपर से विभाजित लगनेवाली भारतीय समाज-व्यवस्था के मर्म में भावात्मक बोध और 'इह पर' की अवधारणा एक ही—अविभाजित—है। इसी भावात्मक एकता को अधोरेखित करते हुए भारतीय भाषा परिषद् का यह दूसरा प्रकाशन है ‘भारतीय उपन्यास : कथासार’।
विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित सैकड़ों उपन्यासों में से कैसे और कितने श्रेष्ठ उपन्यासों का चुनाव किया जाए? परिषद् ने इसके निमित्त यूनेस्को के लिए अनुवाद को सुझाए गए श्रेष्ठ भारतीय उपन्यासों की तालिका, साहित्य अकादेमी तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार-प्राप्त श्रेष्ठ उपन्यास तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद के लिए चुने गए श्रेष्ठ उपन्यासों की सूचियाँ एकत्र कर प्रत्येक भाषा के कई विद्वान् आलोचक, श्रेष्ठ उपन्यासकार इत्यादि विशेषज्ञों से पत्र-व्यवहार किया और विचार-विनिमय के बाद इस कार्य के लिए सूची प्रस्तुत की। दो खंडों में प्रकाशित इस बृहद् कथानक पुनर्लेखन कार्य की पूरी पांडुलिपि दो वर्षों में संग्रह किए जाने से ही यह स्पष्ट है कि कितनी गतिशीलता के साथ इस कार्य को पूरा किया गया है।
हिन्दी ही नहीं भारतीय भाषाओं में यह पहला प्रयास है, अंग्रेज़ी में भी ऐसा कार्य नहीं हुआ है। प्रथम प्रयास होने के नाते इसमें त्रुटि-विच्युति का अनुविष्ट होना सहज ही है। परन्तु ऐसे प्रयास को यदि प्रोत्साहन मिला तो प्रत्येक भाषा के श्रेष्ठ उपन्यासों के कथासार अलग-अलग पुस्तकाकार प्रस्तुत किए जा सकते हैं, जिसकी आवश्यकता भी है। परवर्ती होने के कारण वे निश्चय ही इससे उन्नत और विकसित होंगे।
इन कथासारों को पढ़कर पाठकों के मन में मूल उपन्यास पढ़ने की उत्सुकता होगी; फलत: और अधिक अनुवाद हिन्दी में उपलब्ध होंगे, साहित्य का तुलनात्मक मूल्यांकन और अध्ययन की स्वस्थ प्रवृत्ति बढ़ेगी और भारत की सांस्कृतिक एकात्मकता की ओर हम सब अधिक उन्मुख होंगे।
Kala Pahar
- Author Name:
Bhagwandas Morwal
- Book Type:

- Description: उपन्यास का काम समकालीन यथार्थ के प्रतिनिधित्व के माध्यम से अतीत को पुनर्जीवित और भविष्य के मिज़ाज को रेखांकित करना है। भगवान मोरवाल के ‘काला पहाड़’ में ये विशिष्टताएँ हैं। ‘काला पहाड़’ के पात्रों की कर्मभूमि ‘मेवात क्षेत्र’ है। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश की सीमाओं में विस्तृत यह वह क्षेत्र है, जिसने मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर से टक्कर ली थी और जिसने भारत की ‘मिलीजुली तहज़ीब’ को आज तक सुरक्षित रखा है। ‘काला पहाड़’ एक उपन्यास का शीर्षक नहीं है, वरन् मेवात की भौगोलिक-सांस्कृतिक अस्मिता और समूचे देश में व्याप्त बहुआयामी विसंगतिपूर्ण प्रक्रिया का प्रतीक है। इसके पात्र—सलेमी, मनीराम, रोबड़ा, हरसाय, सुलेमान, छोटेलाल, बाबू ख़ाँ, सुभान ख़ाँ, रुमाली, अंगूरी, रोमदेई, तरकीला, मेमन, चौधरी करीम हुसैन व चौधरी मुर्शीद अहमद आदि ठेठ देहाती हिन्दुस्तान की कहानी कहते हैं। मेवात के ये अकिंचन पात्र अपने में वे सभी अनुभव, त्रासदी, ख़ुशियाँ समेटे हुए हैं, जो किसी दूरदराज़ अनजाने हिन्दुस्तानी की भी जीवन-पूँजी हो सकते हैं। लेखक जहाँ ऐतिहासिक पात्र व मेवात-नायक ‘हसन ख़ाँ मेवाती’ की ओर आकृष्ट है, वहीं वह अयोध्या-त्रासदी की परछाइयों को भी समेटता है, इस त्रासदी में झुलसनेवाली बहुलतावादी संस्कृति को रचनात्मक अभिव्यक्ति देता है। उपन्यास की विशेषता यह है कि इसने समाज के हाशिए के लोगों को अपने कथा-फ़लक पर उन्मुक्त भूमिका निभाने की छूट दी है। मोरवाल की पृष्ठभूमि दलित ज़रूर है लेकिन किरदारों के ‘ट्रीटमेंट’ में वह दलित ग्रन्थि से अछूते हैं।
Hindutva : Ek Jeevan Shaili
- Author Name:
Ed. Kalraj Mishra
- Book Type:

- Description: आज भारत के राजनीतिक परिवेश में चारों ओर संकट दिखाई दे रहा है। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। धर्म-जाति के नाम पर वोट पाने हेतु राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि दी जा रही है। छद्म धर्म-निरपेक्षता के नाम पर संप्रदायवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज के इस कलुषित वातावरण में हिंदुत्व की अप्रतिम जीवन-शैली को अपनाकर ही समाज में एक जन-जागरण पैदा किया जा सकता है, जिससे अपने संकीर्ण मतभेदों से ऊपर उठकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण हो सके। जीवनपर्यंत राष्ट्रवाद की राजनीति के आदर्शों पर चलनेवाले वरिष्ठ राजनेता पं. कलराज मिश्र ने हिंदुत्व की परंपराओं, वेद, पुराणों और स्मृतियों के माध्यम से सभी समस्याओं का हल खोजने का प्रयास किया है। इस पुस्तक में सम्मिलित अनेक आध्यात्मिक गुरुओं, राजनेताओं, लेखकों के मर्मस्पर्शी लेख बालविवाह, जातिप्रथा, टूटते परिवार, भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति दुराचार जैसी बुराइयों को दूर करने में अवश्य सफल होंगे। हिंदुत्व की व्यापक अवधारणा, उसकी अप्रतिम जीवन-शैली, उसकी संस्कृति का दिग्दर्शन कराती एक श्रेष्ठ कृति।
Trikal Sandhya
- Author Name:
Paramjeet S. Judge
- Book Type:

-
Description:
‘त्रिकाल संध्या’ की कथा के केन्द्र में चक दौलतराम नाम के एक गाँव का सिर्फ़ एक दिन है। कथानक गाँव के उन वृद्धों के बारे में है जो अपनी उम्र के चलते अब गाँव की उत्पादन-प्रणाली के लिए अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका दिन गाँव के बाहर मौजूद एक नीम के पेड़ के नीचे बीतता है। उनके जीवन में ऐसा कुछ भी घटित नहीं होता जिसे महत्त्वपूर्ण कहा जा सके, फिर भी उनके जीवन में एक गति निहित है जो गाँव की जीवनधारा और वहाँ के सामाजिक रिश्तों के लिए बहुत अहम है।
उपन्यास के मुख्य पात्र इंदर को अफ़ीम की लत है जिसका उसे कोई पश्चात्ताप नहीं है, लेकिन गाँव की गतिविधियों से वह बेहद जुड़ाव महसूस करता है।
नीम का पेड़ जहाँ बूढ़ों की ठहरी हुई ज़िन्दगी के प्रतीक के तौर पर उपन्यास में आता है, वहीं गाँव के पास से गुज़रने वाली ट्रेन उन्हें गुज़रते वक़्त का भी आभास कराती है। जीवन की सन्ध्या में पहुँचे इन लोगों की स्थिति ज़िन्दगी और मौत के बीच का एक पड़ाव है जो लज्जा और ग्लानि के क्षणों में सुन्दर सिंह द्वारा की गई आत्महत्या के रूपक में अभिव्यक्त भी होती है।
Umraojan Adaa
- Author Name:
Mirza Haadi 'Ruswa'
- Book Type:

-
Description:
उमराव जान ‘अदा’ उर्दू के आरम्भिक उपन्यासों में अहम स्थान रखता है। वस्तुतः यह आत्मकथात्मक उपन्यास है जिसे मिर्ज़ा हादी ‘रुस्वा’ ने क़लमबन्द किया है। शायर होने के नाते लेखक तवायफ़-शायर उमराव जान ‘अदा’ को काफ़ी क़रीब से जनता था। उमराव ने अपने संस्मरण स्वयं मिर्ज़ा को सुनाए थे।
फ़ैज़ाबाद की बच्ची ‘अमीरन’ के लखनऊ में तवायफ़ उमराव जान से शायरा ‘अदा’ बनने तक के सफ़र को समेटती हुई यह कथा उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध की विडम्बनाओं, विसंगतियों तथा अंग्रेज़ी दौर की तबाहियों का भी ख़ाक़ा खींचती है। अपने रूप-सौन्दर्य, मधुर कंठ, नृत्य-कला, नफ़ासत तथा अदबी तौर-तरीक़ों के कारण उमराव जान अमीरों-रईसों में ससम्मान लोकप्रिय रही। बचपन में ही बेघर हो जाने की वजह से ताउम्र वह मोहब्बत की तलाश में भटकती रही। उसने वे सारी त्रासदियाँ भोगीं जो एक संवेदनशील व्यक्ति के दरपेश होती हैं।
उपन्यास में भाषा का इस्तेमाल पत्र और परिस्थिति के अनुकूल है जो मार्मिक है और प्रभावशाली भी। उर्दू के अवधी लहजे की मिठास इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है। अनुवादक गिरीश माथुर ने मूल भाषा की सजीवता बरकरार रखी है।
Himachal Pradesh Ki Lokkathayen
- Author Name:
Dr. Ashu Phull
- Book Type:

- Description: This book has no description
Nar Naari
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास कृष्ण बलदेव वैद के सबसे चर्चित और बहस तलब रचनाओं में से एक है। उन्होंने हिन्दी की मुख्यधारा से अकसर दूर ही रहते हुए भाषा को ऐसी कृतियाँ दी हैं जो शिल्प के हमारे साथ सोचने के तरीक़ों को भी विचलित करती रही हैं।
‘नर नारी’ उपन्यास स्त्री की समूची सामाजिक, पारिवारिक और दैहिक इयत्ता को केन्द्र में रखता है, और उनसे जुड़े प्रश्नों पर एक संकुल भावभूमि के परिप्रेक्ष्य में विचार करता है। पितृसत्तात्मक सामाजिक तंत्र में सम्पत्ति के उत्तराधिकार, विवाह-संस्था की वैधता, यौन- शुचिता और इससे जुड़े कई विधि-निषेधों पर अत्यन्त ज़ोर दिया जाता है। पति-पत्नी, बहन-भाई, माँ-बेटे आदि सभी सम्बन्ध अन्तत: इन्हीं सब के सन्दर्भ में परिभाषित होते दिखते हैं।
इनके बीच ही मौजूद है स्त्री-पुरुष का आदिम रिश्ता जो एक दूसरी की उपस्थिति को एक प्राकृतिक और समान भूमि पर परिभाषित करता है। बाँझ माँजी, रसीला, सीमा और मीनू आदि इस उपन्यास के ऐसे स्त्री पात्र हैं जिनका जीवन और दृष्टिकोण इन तमाम प्रश्नों पर अलग-अलग ढंग से प्रकाश डालता है।
संवादों के बीच से ही दृश्यों को साकार करते हुए उपन्यास को पढ़ना जैसे अपने ही मन की भीतरी तहों की यात्रा करने जैसा है। लेखक कहीं पर न पात्रों का बाहरी विवरण देता है, न परिस्थितियों का, फिर भी सब जैसे पाठक की आँखों के सामने साकार होता चलता है। एक पठनीय और विचारणीय उपन्यास।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book