Swami Vivekanand

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स्वामी विवेकानन्द स्वामी विवेकानन्द आधुनिक भारत के अग्रणी आध्यात्मिक-धार्मिक नेता और समाज-सुधारक थे। उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उन्होंने कलकत्ता मेट्रोपॉलिटन स्कूल और प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता से शिक्षा ग्रहण की। 1880 में वे केशवचन्द्र सेन और देवेन्द्रनाथ ठाकुर की अगुआई वाले साधारण ब्रह्म समाज से जुड़े लेकिन 1881 में रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात के बाद उनके शिष्य बन गए। 1886 में रामकृष्ण के देहान्त के बाद उन्होंने संन्यास ग्रहण कर पूरे भारत का भ्रमण किया और भारतीय जनगण की यथार्थ स्थिति को अपनी आँखों देखा। 1893 में 11 सितम्बर को उन्होंने शिकागो, अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म-संसद को सम्बोधित किया, इस सम्बोधन ने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। 1896 में उन्होंने न्यूयॉर्क में वेदान्त सोसाइटी का गठन किया। लगभग ढाई वर्ष के अपने अमेरिका-प्रवास के दौरान उन्होंने कई पाश्चात्य देशों में जाकर व्याख्यान दिए। भारत लौटने के बाद 1897 में 1 मई को उन्होंने अपने गुरुभाइयों के साथ मिलकर रामकृष्ण की शिक्षाओं के प्रचार और मानव-सेवा के उद्देश्य से रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘राजयोग’, ‘कर्मयोग’, ‘ज्ञानयोग’, ‘भक्तियोग’, ‘धर्मतत्त्व’, ‘शिक्षा’, ‘संस्कृति और समाजवाद’, ‘मेरे गुरु’, ‘भारतीय नारी’, ‘भगवान बुद्ध तथा उनका सन्देश’ आदि। 4 जुलाई, 1902 को बेलूर मठ, बेलूर में उनका निधन हो गया।

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