Sukhmay Bhattacharya

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सुखमय भट्टाचार्य जन्म : 6 जनवरी , 1909 को श्रीहट्टा ज़िले के कलिजुरी गाँव में। मिडिल इंग्लिश परीक्षा के बाद टोल में व्याकरण पढ़ा। इसके बाद श्रीहट्ट , मयमन सिंह और कोलकाता के प्रख्यात अध्यापकों के पास साहित्य , पुराण , न्याय , तर्क , तंत्र , मीमांसा , सांख्य , वेदान्तशास्त्र आदि का अध्ययन किया। इसी दौरान शास्त्री , तीर्थ आदि की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं। प्राइवेट से प्रवेशिका परीक्षा भी पास की। स्वत: अंग्रेज़ी का अभ्यास किया। अध्ययन के दौरान ही लेखन का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ मासिक पत्र-पत्रिकाओं में लेख लिखे। उत्तर बंगाल के एक राजघराने में कुछ महीनों तक अध्यापन भी किया। जब 26 साल की उम्र थी , तभी रवीन्द्रनाथ ने बुला लिया। 04 अगस्त , 1937 को विश्वभारती के विद्याभवन में शोधकर्ता अध्यापक के रूप में नियुक्त हुए। फरवरी , 1974 में सेवानिवृत्त हुए। उनके अध्यापन के विषय थे संस्कृत साहित्य , अलंकार और दर्शनशास्त्र। रवीन्द्रनाथ के आशीर्वाद और आदेश पर पुस्तक लेखन में प्रवृत्त हुए। विभिन्न विषयों पर 13 पुस्तकें और 200 से अधिक लेखों की रचना की। प्रमुख कृतियाँ : ‘महाभारतेर समाज’ , ‘न्याय दर्शन’ , ‘रामायणेर चरितावली’। 1975 में ‘रवीन्द्रनाथ इन संस्कृत’ पुस्तक के लिए ‘ रवीन्द्र पुरस्कार ’ प्रदान किया गया। 27 जनवरी , 1999 को शान्तिनिकेतन में निधन।

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