About Prabhash Joshi
प्रभाष जोशी
प्रभाष जोशी का जन्म 15 जुलाई, 1937 को मध्य प्रदेश में सिहोर जिले के आष्टा गाँव में हुआ। शिक्षा इन्दौर के महाराजा शिवाजी राव मिडिल स्कूल और हाईस्कूल में हुई। होल्कर कॉलेज, गुजराती कॉलेज और क्रिश्चियन कॉलेज में गणित और विज्ञान की पढ़ाई। देवास के सुनवानी महाकाल में ग्राम सेवा और अध्यापन किया। पत्रकारिता को समाज परिवर्तन का माध्यम मानकर 1960 में ‘नई दुनिया’ में काम शुरू किया। राजेन्द्र माथुर, शरद जोशी और राहुल बारपुते के साथ काम किया। यहीं विनोबा की पहली नगर यात्रा की रिपोर्टिंग की। 1966 में शरद जोशी के साथ भोपाल से ‘मध्य प्रदेश’ (दैनिक) निकाला। 1968 में दिल्ली आकर राष्ट्रीय गांधी समिति में प्रकाशन की जिम्मेदारी ली। 1972 में चम्बल और बुन्देलखंड के डाकुओं के समर्पण के लिए जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया। अहिंसा के इस प्रयोग पर अनुपम मिश्र और श्रवण कुमार गर्ग के साथ पुस्तक लिखी—‘चम्बल की बन्दूकें : गांधी के चरणों में’। 1974 में ‘प्रजानीति’ (साप्ताहिक) और ‘आसपास’ निकालीं जो इमरजेंसी में बन्द हो गईं। जनवरी, 1978 से अप्रैल, 1981 तक चंडीगढ़ में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ का सम्पादन किया। फिर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ (दिल्ली संस्करण) के दो साल तक सम्पादक रहे। 1983 में उनके सम्पादन में ‘जनसत्ता’ का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘मसि कागद’, ‘हिन्दू होने का धर्म’, ‘आगे अन्धी गली है’, ‘धन्न नरबदा मइया हो’, ‘जब तोप मुकाबिल हो’, ‘जीने के बहाने’, ‘खेल सिर्फ खेल नहीं है’, ‘लुटियन के टीले का भूगोल’, ‘21वीं सदी : पहला दशक’, ‘प्रभाष-पर्व’, ‘कहने को बहुत कुछ था’, ‘ओटन लगे कपास’, और ‘घंटी तो बजनी है’।
5 नवम्बर, 2009 को दिल्ली में उनका निधन हुआ।