Karunashankar Upadhyay

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करुणाशंकर उपाध्याय डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय का जन्म 15 अप्रैल, 1968 को घोरका तालुकदारी, शिवगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। ‘पाश्चात्य काव्य चिन्तन के विविध आन्दोलन’ विषय पर उन्होंने पोस्ट डॉक्टरल किया है। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘सर्जना की परख’, ‘आधुनिक हिन्दी कविता में काव्य चिन्तन’, ‘मध्यकालीन काव्य : चिन्तन और संवेदना’, ‘पाश्चात्य काव्य-चिन्तन’, ‘विविधा’, ‘आधुनिक कविता का पुनर्पाठ’, ‘हिन्दी कथा साहित्य का पुनर्पाठ’, ‘हिन्दी का विश्व सन्दर्भ’, ‘आवाँ विमर्श’, ‘हिन्दी साहित्य : मूल्यांकन और मूल्यांकन’, ‘ब्लैकहोल विमर्श’, ‘सृजन के अनछुए सन्दर्भ’, ‘साहित्य और संस्कृति के सरोकार’, ‘पाश्चात्य काव्य चिन्तन : आभिजात्यवाद से उत्तर आधुनिकतावाद तक’, ‘अप्रतिम भारत’, ‘चित्रा मुद्गल संचयन’, ‘गोरखबानी’, ‘मध्यकालीन कविता का पुनर्पाठ’। उन्होंने ‘मानव मूल्यपरक शब्दावली का विश्वकोश’, ‘तुलनात्मक साहित्य का विश्वकोश’ का सहलेखन और कई पुस्तकों का सम्पादन किया है। उन्हें महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का ‘बाबूराव विष्णु पराडकर पुरस्कार’, ‘हिन्दी सेवी सम्मान’, ‘पं. दीनदयाल उपाध्याय आदर्श शिक्षक सम्मान’, ‘विश्व हिन्दी सेवा सम्मान’, ‘व्यंग्य यात्रा सम्मान’, ‘मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति सम्मान’, ‘विद्यापति कवि कोकिल सम्मान’, ‘साहित्य भूषण सम्मान’, महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी का ‘पद्मश्री अनन्त गोपाल शेवड़े सम्मान’, ‘पुस्तक भारती संस्थान’, कनाडा का ‘प्रो. नीलू गुप्ता सम्मान’ आदि कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। सम्प्रति : प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, मुम्बई विश्वविद्यालय। ई-मेल : dr.krupadhyay@gmail.com

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