Sanhar Se Samvad Tak : Kurukshetra Aur Andhayug Mein Yuddh Virodhi Chetna
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Dr. Nitamoni BardoloiPublisher:
Rasti PrakashanLanguage:
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“संहार से संवाद तक : कुरुक्षेत्र और अंधायुग में युद्ध-विरोधी चेतना” आधुनिक हिंदी साहित्य की उस संवेदनशील धारा का विश्लेषण है, जो युद्ध, हिंसा और मानवीय संकटों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘अंधायुग’ के माध्यम से युद्ध की विभीषिका, नैतिक पतन और मानवता के संकट को उजागर करती है। लेखिका ने इन कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए दिखाया है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक दृष्टि का माध्यम भी है। यह अध्ययन शांति, सहअस्तित्व और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है।
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“संहार से संवाद तक : कुरुक्षेत्र और अंधायुग में युद्ध-विरोधी चेतना” आधुनिक हिंदी साहित्य की उस संवेदनशील धारा का विश्लेषण है, जो युद्ध, हिंसा और मानवीय संकटों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘अंधायुग’ के माध्यम से युद्ध की विभीषिका, नैतिक पतन और मानवता के संकट को उजागर करती है। लेखिका ने इन कृतियों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए दिखाया है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक दृष्टि का माध्यम भी है। यह अध्ययन शांति, सहअस्तित्व और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है।
Book Details
-
ISBN9788199972544
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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