Shrimadbhagwat Puran Ki Stutiyon Ka Anushilan

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श्रीमद्भागवत पुराण के आराध्य भगवान् श्री कृष्ण हैं परन्तु प्रथम से नवें स्कन्ध तक अन्यान्य अवतारों की प्रसंगानुसार स्तुतियाँ की गयी हैं। दसम व एकादश में श्रीकृष्णपरक स्तुतियाँ ही हैं। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को यहाँ एक ही माना गया है। इन्ही की स्तुतियाँ प्रायः मिलती हैं। अपने मानस का प्राकट्य, निश्छल भावों का समर्पण अपनी कार्पण्यता, दीनता-हीनता की भी अभिव्यक्ति इनमें मिलती है। यह कार्य स्तुतियों के माध्यम से भगवत् सन्निधि, समर्पित दैन्य का विभोर करने वाला भाव मिलता है। इन्हें पढ़ने वाला तादात्म्य करते हुए स्वयं को ही प्रार्थना मानकर प्रस्तुत होता है। इनका फल भी उन्ही में प्राप्त होता है। पुराण के प्रेमियों द्वारा इन स्तुतियों का नित्यपाठ भी किया जाता है। इस ग्रंथ का स्तुतिविषयक अध्ययन इहलोक और परलोक दोनों का मार्गनिर्देश करता रहेगा। इन्हें आत्मसात् कर जीवन का चरम प्राप्त करने में सुविधा रहे यह मंगल भावनाओं के साथ अपेक्षा है कि यह ग्रंथ पाठकों को भी जीवन का चरम लक्ष्य प्राप्त कराएगा। आराध्य श्रीकृष्ण भगवान् इन स्तुतियों से प्रसन्न होकर अवश्य ही अनुशीलनकर्ताओं का अभिप्राय प्राप्त कराएंगे।                                                                                                                                                                           - मिथिला प्रसाद त्रिपाठी

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10 hrs
Age
18+ yrs
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श्रीमद्भागवत पुराण के आराध्य भगवान् श्री कृष्ण हैं परन्तु प्रथम से नवें स्कन्ध तक अन्यान्य अवतारों की प्रसंगानुसार स्तुतियाँ की गयी हैं। दसम व एकादश में श्रीकृष्णपरक स्तुतियाँ ही हैं। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को यहाँ एक ही माना गया है। इन्ही की स्तुतियाँ प्रायः मिलती हैं।
अपने मानस का प्राकट्य, निश्छल भावों का समर्पण अपनी कार्पण्यता, दीनता-हीनता की भी अभिव्यक्ति इनमें मिलती है। यह कार्य स्तुतियों के माध्यम से भगवत् सन्निधि, समर्पित दैन्य का विभोर करने वाला भाव मिलता है। इन्हें पढ़ने वाला तादात्म्य करते हुए स्वयं को ही प्रार्थना मानकर प्रस्तुत होता है। इनका फल भी उन्ही में प्राप्त होता है। पुराण के प्रेमियों द्वारा इन स्तुतियों का नित्यपाठ भी किया जाता है।
इस ग्रंथ का स्तुतिविषयक अध्ययन इहलोक और परलोक दोनों का मार्गनिर्देश करता रहेगा। इन्हें आत्मसात् कर जीवन का चरम प्राप्त करने में सुविधा रहे यह मंगल भावनाओं के साथ अपेक्षा है कि यह ग्रंथ पाठकों को भी जीवन का चरम लक्ष्य प्राप्त कराएगा। आराध्य श्रीकृष्ण भगवान् इन स्तुतियों से प्रसन्न होकर अवश्य ही अनुशीलनकर्ताओं का अभिप्राय प्राप्त कराएंगे।
                                                                                                                                                                          - मिथिला प्रसाद त्रिपाठी

Book Details

  • ISBN
    9789377470401
  • Pages
    314
  • Avg Reading Time
    10 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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