Kishor Va Kishoriyon Ki BaatenI
About the book
"युवा वर्ग के जीवन का महत्त्वपूर्ण संबल है अच्छा स्वास्थ्य। पोषण एवं यौन स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी को आसान तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है। सही जानकारी के अभाव में युवा कई तरह के यौन संक्रमण एवं उससे होनेवाली जटिल समस्याओं के शिकार होते हैं। ऐसे कई नाजुक एवं जरूरी विषयों को हमने छुआ है। आज हमारे देश की पूरी आबादी का 37 प्रतिशत युवा वर्ग है। वर्ष 2015 तक युवा वर्ग की पूरी सम्मानितसंख्या 51 करोड़ है।इतनीबड़ीयुवाआबादीहमारे देश का गौरव है। इसी युवा वर्ग को एक दिशा देने का प्रभाव है—युवा मित्र। युवा मित्र में स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नोत्तर को बहुआयामी तरीके से प्रस्तुत किया गया है। ऐसे कई सवाल होते हैं, जिन्हें किशोर पूछने में संकोच का अनुभव करते हैं और अभिभावक एवं शिक्षक उत्तर देने में।"
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About the Book
"युवा वर्ग के जीवन का महत्त्वपूर्ण संबल है अच्छा स्वास्थ्य। पोषण एवं यौन स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी को आसान तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है। सही जानकारी के अभाव में युवा कई तरह के यौन संक्रमण एवं उससे होनेवाली जटिल समस्याओं के शिकार होते हैं।
ऐसे कई नाजुक एवं जरूरी विषयों को हमने छुआ है।
आज हमारे देश की पूरी आबादी का 37 प्रतिशत युवा वर्ग है। वर्ष 2015 तक युवा वर्ग की पूरी सम्मानितसंख्या 51 करोड़ है।इतनीबड़ीयुवाआबादीहमारे देश का गौरव है। इसी युवा वर्ग को एक दिशा देने का प्रभाव है—युवा मित्र।
युवा मित्र में स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नोत्तर को बहुआयामी तरीके से प्रस्तुत किया गया है। ऐसे कई सवाल होते हैं, जिन्हें किशोर पूछने में संकोच का अनुभव करते हैं और अभिभावक एवं शिक्षक उत्तर देने में।"
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 250 grams
- ISBN-13
- 9788189573782
- Pages
- 104
- Reading time
- ~3 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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Kishor Va Kishoriyon Ki BaatenI addresses the silence surrounding adolescent sexual health in India, where 37% of the population—over 51 crore young people—lack access to accurate information on sexually transmitted infections, reproductive health, and nutrition. Published by Prabhat Prakashan, this Hindi self-help guide fills the gap left by schools and families, presenting medical facts and prevention strategies in accessible language. The book confronts the reality that misinformation drives young Indians into preventable health crises: untreated STIs, nutritional deficiencies during critical growth years, and confusion about bodily changes. Rather than moralizing, it provides the practical knowledge a teenager needs to make informed decisions about their body. For a generation navigating puberty in a digitally connected yet often medically underserved India, this is a rare resource that speaks directly, honestly, and in their own language.
यह किताब पढ़ते समय किस तरह का अनुभव मिलता है?
यह किताब एक खुले संवाद जैसा अनुभव देती है जहाँ कोई निर्णय नहीं होता। यौन स्वास्थ्य और पोषण के विषयों को सरल हिंदी में समझाया गया है। यह किसी उपदेश की तरह नहीं बल्कि एक मित्र की तरह बात करती है। हर पन्ना उन सवालों का जवाब देता है जो युवा अक्सर पूछने में हिचकिचाते हैं। पढ़ने के बाद आत्मविश्वास और स्पष्टता का एहसास होता है।
यह किताब किसके लिए सबसे उपयुक्त है और पाठक से क्या अपेक्षा रखती है?
यह किताब किशोरों और किशोरियों के लिए है जो यौवन के दौर से गुजर रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक भी इसे पढ़कर युवाओं के साथ बेहतर संवाद कर सकते हैं। पाठक से केवल खुले मन और सीखने की इच्छा चाहिए। चिकित्सा पृष्ठभूमि जरूरी नहीं है। यह उन लोगों के लिए है जो सही जानकारी चाहते हैं, अफवाहें नहीं।
आज के भारतीय पाठकों के लिए इस विषय का सांस्कृतिक महत्त्व क्या है?
भारत में 51 करोड़ युवा हैं फिर भी यौन शिक्षा अभी भी वर्जित मानी जाती है। इस चुप्पी के कारण युवा गलत जानकारी और यौन संक्रमण के शिकार हो रहे हैं। यह किताब उस सांस्कृतिक अंतर को पाटती है जहाँ परिवार और स्कूल असहज महसूस करते हैं। आधुनिक भारत में जहाँ इंटरनेट पर अधूरी जानकारी भरी है, यह विश्वसनीय मार्गदर्शन प्रदान करती है।
इस विषय पर इस लेखक का दृष्टिकोण विशिष्ट किस प्रकार बनाता है?
लेखक ने चिकित्सा तथ्यों को नैतिक उपदेश से अलग रखा है। यह किताब डराती नहीं बल्कि शिक्षित करती है। पोषण और यौन स्वास्थ्य को एक साथ रखना अनोखा है क्योंकि दोनों किशोरावस्था से जुड़े हैं। सरल हिंदी में लिखी यह पुस्तक शहरी और ग्रामीण दोनों युवाओं तक पहुँचने का प्रयास करती है, जो अधिकांश अंग्रेजी संसाधनों में संभव नहीं है।
यह किताब पाठक के मन में लंबे समय तक क्या छोड़ जाती है?
- आत्मसम्मान: अपने शरीर को समझना और उसका सम्मान करना
- सशक्तिकरण: स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने का आत्मविश्वास
- जागरूकता: यौन संक्रमण से बचाव के व्यावहारिक तरीके
- संवाद की क्षमता: इन विषयों पर खुलकर बात करने का साहस
- जिम्मेदारी: अपने और दूसरों के स्वास्थ्य की चिंता
