About Dr. Navila Satyadass
डॉ. नविला सत्यादास हिन्दी साहित्य की संवेदनशील कवयित्री, अध्यापिका एवं साहित्य-साधिका हैं। 14 सितम्बर 1958 को अमृतसर (पंजाब) में जन्मीं डॉ. सत्यादास ने हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दीर्घकालिक अध्ययन, अध्यापन और सृजन के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके पिता श्री राम शरण दास तथा माता श्रीमती सत्यादेवी हैं। बी.बी.के.डी.ए.वी. डॉ. नविला सत्यादास कॉलेज, अमृतसर से बी.ए. किया तथा एस.सी.डी. गवर्नमेंट कॉलेज, लुधियाना से एम.ए. (हिन्दी), एम.फिल. और पीएच.डी. (हिन्दी) की उपाधियाँ पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ से प्राप्त कीं। उनकी पीएच.डी. का विषय 'व्यक्तित्व विषयक भावात्मक संज्ञाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन' रहा। इसके अतिरिक्त उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद में पी.जी. डिप्लोमा तथा उर्दू में सर्टिफिकेट कोर्स भी किया। अगस्त 1986 में सरकारी कॉलेज, मालेरकोटला से प्राध्यापिका के रूप में अपने अध्यापन जीवन की शुरुआत करने वाली डॉ. सत्यादास ने सरकारी महेन्द्रा कॉलेज, पटियाला में हिन्दी विभाग की अध्यक्ष के रूप में भी दायित्व निभाया। अध्यापन के साथ उनका साहित्यिक सरोकार निरन्तर सक्रिय रहा। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता, शोध-पत्रों का प्रकाशन तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलेख और कविताओं का प्रकाशन उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की व्यापकता को रेखांकित करता है। दूरदर्शन और आकाशवाणी से उनके काव्य-पाठ भी प्रसारित हुए हैं। उनका कविता-संग्रह 'सुलगते एहसास' उनकी रचनात्मक संवेदना का परिचायक है। इसके अतिरिक्त उन्होंने 'राष्ट्रभाषा के परिप्रेक्ष्य में हिन्दी', 'हमारे गाँव में हमारा क्या है!' के विविध पाठ, भाग-2 तथा 'कारवां' जैसी कृतियों का संपादन किया है। 'पंजाब की समकालीन हिन्दी कविता' में भी उन्हें महिला कवि के रूप में स्थान मिला है। साहित्य चेतना मंच, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा उन्हें 'ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान-2023' से सम्मानित किया गया। उनकी साहित्यिक यात्रा संवेदना, सृजन और हिन्दी भाषा के प्रति निरन्तर समर्पण की यात्रा है।