Badal Badal Pyas

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Author:

Manish Badal

Language:

Hindi

Category:

Poetry

225

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मात्र दो पंक्तियों में जीवन का सार लिख देना दोहा है । प्रिय मनीष, परमात्मा की कृपा से आप इस कला में सिद्ध हैं, आपके दोहे सरस, सरल, सार्थक और उपयोगी होते हैं। - आशुतोष राना, फ़िल्म अभिनेता ‘बादल-बादल प्यास' के इन दोहों में जीवन अपनी व्यापकता के साथ अनेक रंगों में प्रस्तुत हुआ है। परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय इन्हें आत्मीय बनाता है। - हरेराम समीप, वरिष्ठ साहित्यकार लेखक के इस ग्रंथ के साथ संवेदना की शक्ति तो है ही, उस पर सोने पर सुहागा यह कि उनका छंद पर विशेषाधिकार है। ये इस ग्रंथ की दो सशक्त भुजाएँ हैं। -डॉ विकास दवे, निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश शासन इन दोहों में एक कबीर साँस लेता है, एक रहीम दिल की तरह धड़कता है। उनका रौशन ज़ेहन युगीन परिस्थितियों के चप्पे-चप्पे पर निगाह रखता है। -यश मालवीय, सुप्रसिद्ध गीतकार 'बादल-बादल प्यास' में भिन्न-भिन्न रसों और रंगों के दोहे हैं जो आम पाठकों की जुबान पर चढ़ेंगे, लोग उन्हें गुनगुनाएंगे, उनको कोट करेंगे। - यशपाल शर्मा, फ़िल्म अभिनेता मुझे पूरा विश्वास है कि 'बादल - बादल प्यास' न केवल 'बादल-बादल बूँद' बनकर आप पाठकों के अतृप्त मन की प्यास बुझाने में सफल होगी बल्कि आपके बुक शेल्फ़ की शोभा भी बढ़ाएगी। - राजीव वर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं फ़िल्म अभिनेता जिस उद्देश्य से मनीष यह पुस्तक लेकर आ रहे हैं, वह उद्देश्य अवश्य पूर्ण होगा, पाठकगण इसे सराहेंगे, पाठकों का दोहों के प्रति लगाव बढ़ेगा। - आलोक संजर, पूर्व सांसद एवं विचार प्रवाहक

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ISBN
9789355435453
Pages
148
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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मात्र दो पंक्तियों में जीवन का सार लिख देना दोहा है । प्रिय मनीष, परमात्मा की कृपा से आप इस कला में सिद्ध हैं, आपके दोहे सरस, सरल, सार्थक और उपयोगी होते हैं। - आशुतोष राना, फ़िल्म अभिनेता ‘बादल-बादल प्यास' के इन दोहों में जीवन अपनी व्यापकता के साथ अनेक रंगों में प्रस्तुत हुआ है। परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय इन्हें आत्मीय बनाता है। - हरेराम समीप, वरिष्ठ साहित्यकार लेखक के इस ग्रंथ के साथ संवेदना की शक्ति तो है ही, उस पर सोने पर सुहागा यह कि उनका छंद पर विशेषाधिकार है। ये इस ग्रंथ की दो सशक्त भुजाएँ हैं। -डॉ विकास दवे, निदेशक, साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश शासन इन दोहों में एक कबीर साँस लेता है, एक रहीम दिल की तरह धड़कता है। उनका रौशन ज़ेहन युगीन परिस्थितियों के चप्पे-चप्पे पर निगाह रखता है। -यश मालवीय, सुप्रसिद्ध गीतकार 'बादल-बादल प्यास' में भिन्न-भिन्न रसों और रंगों के दोहे हैं जो आम पाठकों की जुबान पर चढ़ेंगे, लोग उन्हें गुनगुनाएंगे, उनको कोट करेंगे। - यशपाल शर्मा, फ़िल्म अभिनेता मुझे पूरा विश्वास है कि 'बादल - बादल प्यास' न केवल 'बादल-बादल बूँद' बनकर आप पाठकों के अतृप्त मन की प्यास बुझाने में सफल होगी बल्कि आपके बुक शेल्फ़ की शोभा भी बढ़ाएगी। - राजीव वर्मा, वरिष्ठ रंगकर्मी एवं फ़िल्म अभिनेता जिस उद्देश्य से मनीष यह पुस्तक लेकर आ रहे हैं, वह उद्देश्य अवश्य पूर्ण होगा, पाठकगण इसे सराहेंगे, पाठकों का दोहों के प्रति लगाव बढ़ेगा। - आलोक संजर, पूर्व सांसद एवं विचार प्रवाहक

Book Details

  • ISBN
    9789355435453
  • Pages
    148
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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