Jo Dooba So Paar

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Author:

Amir Khusrau

Language:

Hindi

Category:

Poetry

349

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इस किताब में हिंदुस्तानी सूफ़ी परंपरा के सबसे रोशन चराग़ अमीर ख़ुसरौ के हिंदुस्तानी कलाम और फ़ारसी कलाम शामिल हैं। फ़ारसी ग़ज़लें, सावन, कहमुकरियाँ और दोहों को शामिल किया गया है| सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं । वे समय-समय पर विभिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं; इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है । उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध है।

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ISBN
9789394494138
Pages
241
Avg Reading Time
8 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

इस किताब में हिंदुस्तानी सूफ़ी परंपरा के सबसे रोशन चराग़ अमीर ख़ुसरौ के हिंदुस्तानी कलाम और फ़ारसी कलाम शामिल हैं। फ़ारसी ग़ज़लें, सावन, कहमुकरियाँ और दोहों को शामिल किया गया है|

सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं । वे समय-समय पर विभिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं; इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है । उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध है।

Book Details

  • ISBN
    9789394494138
  • Pages
    241
  • Avg Reading Time
    8 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Jo Dooba So Paar assembles the polyphonic voice of Amir Khusrau (1253–1325), the Delhi Sultanate's poet-saint whose verse bridged Farsi courtly tradition and vernacular Hindustani devotion. Curated by Suman Mishr—a Bihar-born scholar whose work draws on musicology and Sufi textual study—this edition presents dohas, sawans, kahmukariyan, and Farsi ghazals side by side, restoring Khusrau's dual linguistic genius. The collection does not translate; it lets both registers speak. Khusrau wrote riddles for lovers, monsoon songs for separation, and mystical couplets that dissolve the boundary between devotion and desire. Mishr's editorial choice preserves the original meters and the mnemonic pulse of oral transmission, making this not an anthology for browsing but a script for recitation and meditation.

यह किताब पाठक को किस तरह का पढ़ने का अनुभव देगी?

यह किताब आपको मध्यकालीन भारतीय भक्ति और शृंगार की आवाज़ों के बीच ले जाती है। अमीर ख़ुसरौ की दोहे, पहेलियाँ, सावन गीत और फ़ारसी ग़ज़लें एक साथ पढ़ना आध्यात्मिक और भावनात्मक द्वंद्व को महसूस करना है। यह किताब मौन पाठ के लिए नहीं, बल्कि स्वर में सुनने और दोहराने के लिए है—इसकी लय स्मृति में रहती है।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या अपेक्षा चाहिए?

  • जो पाठक सूफ़ी साहित्य, भक्ति काव्य और मध्यकालीन भारतीय संस्कृति में रुचि रखते हैं
  • जो फ़ारसी और हिंदुस्तानी दोनों काव्य परंपराओं को एक साथ देखना चाहते हैं
  • जो पारंपरिक छंद, लोक गीत और रहस्यवादी भाषा का स्वाद समझते हैं
  • धैर्यपूर्वक पढ़ने और कुछ पंक्तियों को बार-बार सुनने की इच्छा आवश्यक है

इस किताब के विषय का भारतीय पाठकों के लिए आज क्या सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व है?

अमीर ख़ुसरौ ने दिल्ली सल्तनत के दौरान दो भाषाओं और दो विश्वासों को जोड़ा—फ़ारसी दरबारी परंपरा और हिंदुस्तानी लोक भक्ति। आज भी भारत में सांस्कृतिक बहुलता, साझा विरासत और धार्मिक सहिष्णुता के प्रश्न जीवित हैं। ख़ुसरौ का काम याद दिलाता है कि भारतीय आध्यात्मिकता हमेशा सीमाओं को पार करती रही है।

इस विषय पर इस लेखक का नज़रिया क्या विशिष्ट बनाता है?

सुमन मिश्र ने संगीतशास्त्र, सूफ़ीवाद और पाठालोचन के अध्ययन को मिलाकर यह संकलन तैयार किया है। वे अनुवाद नहीं करते—मूल हिंदुस्तानी और फ़ारसी दोनों को साथ रखते हैं। उनका संपादन मौखिक परंपरा की लय और स्मृति-आधारित पाठ को बचाता है, जो आधुनिक संकलनों में अक्सर खो जाता है।

यह किताब पाठक को पढ़ने के बाद भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या देती है?

  • भारतीय आध्यात्मिकता की बहुभाषी और बहुस्तरीय परंपरा की गहरी समझ
  • प्रेम, वियोग और भक्ति को एक साथ देखने की काव्य दृष्टि
  • मध्यकाल के भारत में सांस्कृतिक संश्लेषण और सहिष्णुता का ऐतिहासिक बोध
  • कुछ पंक्तियाँ जो स्मृति में रहती हैं और जीवन भर दोहराई जाती हैं

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